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सूर्य के चारों ओर दिखने वाली गोलाकार रिंग को कोई अशुभ संकेत या खगोलीय खतरा नहीं समझना चाहिए। यह एक प्राकृतिक घटना है जो तब बनती है जब अधिक ऊंचाई पर मौजूद पतले बादलों, जिन्हें सिरस बादल कहते हैं, में बर्फ के सूक्ष्म क्रिस्टल होते हैं। सूर्य का प्रकाश इन क्रिस्टलों से होकर गुजरता है और लगभग 22 डिग्री के कोण पर मुड़ जाता है, जिससे यह गोलाकार रिंग का निर्माण होता है।
Irsad News
सूर्य के चारों ओर दिखने वाली गोलाकार रिंग को कोई अशुभ संकेत या खगोलीय खतरा नहीं समझना चाहिए। यह एक प्राकृतिक घटना है जो तब बनती है जब अधिक ऊंचाई पर मौजूद पतले बादलों, जिन्हें सिरस बादल कहते हैं, में बर्फ के सूक्ष्म क्रिस्टल होते हैं। सूर्य का प्रकाश इन क्रिस्टलों से होकर गुजरता है और लगभग 22 डिग्री के कोण पर मुड़ जाता है, जिससे यह गोलाकार रिंग का निर्माण होता है।
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- सूर्य के चारों ओर दिखने वाली गोलाकार रिंग को कोई अशुभ संकेत या खगोलीय खतरा नहीं समझना चाहिए। यह एक प्राकृतिक घटना है जो तब बनती है जब अधिक ऊंचाई पर मौजूद पतले बादलों, जिन्हें सिरस बादल कहते हैं, में बर्फ के सूक्ष्म क्रिस्टल होते हैं। सूर्य का प्रकाश इन क्रिस्टलों से होकर गुजरता है और लगभग 22 डिग्री के कोण पर मुड़ जाता है, जिससे यह गोलाकार रिंग का निर्माण होता है।1
- श्योपुर जिले के कराहल क्षेत्र में आगामी 2 जून को आदिवासी भूमि पर कथित कब्जों के विरोध में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। विधायक मुकेश मल्होत्रा ने इस मुद्दे पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासियों की जमीनों पर हो रहे कब्जे चिंता का विषय हैं और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा। विधायक मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर आदिवासियों की भूमि पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के कब्जों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।1
- राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले की खण्डार विधानसभा के अंतर्गत स्थित कुशालीपुरा शहीद स्थल से गुर्जर नेता विजय बैसला ने एक लाइव संबोधन दिया है।1
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- राजस्थान प्रदेश के सवाईमाधोपुर जिले में स्थित खण्डार विधानसभा के कुशालीपुरा शहीद स्थल पर शहीदों की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं।1
- Post by Dinesh saini1