बाड़ी नगर पालिका में नाले की सफाई के एक टेंडर को लेकर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके कारण यह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि जिस कार्य को 15 लाख रुपये में पूरा किया जा सकता था, उसके लिए लगभग 70 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इसके साथ ही, टेंडर में जानबूझकर ऐसी शर्त जोड़ी गई है — 'पिछले पाँच साल में दो साल का नाले सफाई का अनुभव' — जो प्रतिस्पर्धा को सीमित करती है और बाड़ी नगर पालिका से जुड़े ठेकेदारों में केवल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास ही यह अनुभव है। गौरतलब है कि सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पिछले साल यही कार्य बी.एस.आर. रेट से 55 प्रतिशत कम दर पर पूरा किया था, जिसे तकनीकी अधिकारियों ने संतोषजनक मानते हुए फर्म का भुगतान भी किया था। मौजूदा टेंडर की शर्तों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि इस बार दरें कम नहीं होने वाली हैं। यदि पिछली वाली फर्म को ही यह टेंडर मिलता है, तो यह देखना होगा कि वह पिछले साल की तुलना में कितनी कम दरों पर इसे प्राप्त करती है; पिछली दर और इस वर्ष की दर का अंतर, ऑडिट की भाषा में, वित्तीय अनियमितता कहलाएगा। इस मामले में नगरपालिका से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों को इसके दूरगामी परिणामों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। फिलहाल उन्हें शायद यह बात समझ में न आए, लेकिन जैसे-जैसे निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जानबूझकर की गई गलती का अंजाम स्पष्ट होता चला जाएगा।
बाड़ी नगर पालिका में नाले की सफाई के एक टेंडर को लेकर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसके कारण यह इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि जिस कार्य को 15 लाख रुपये में पूरा किया जा सकता था, उसके लिए लगभग 70 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इसके साथ ही, टेंडर में जानबूझकर ऐसी शर्त जोड़ी गई है — 'पिछले पाँच साल में दो साल का नाले सफाई का अनुभव' — जो प्रतिस्पर्धा को सीमित करती है और बाड़ी नगर पालिका से जुड़े ठेकेदारों में केवल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी के पास ही यह अनुभव है। गौरतलब है कि सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पिछले साल यही कार्य बी.एस.आर. रेट से 55 प्रतिशत कम दर पर पूरा किया था, जिसे तकनीकी अधिकारियों ने संतोषजनक मानते हुए फर्म का भुगतान भी किया था। मौजूदा टेंडर की शर्तों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि इस बार दरें कम नहीं होने वाली हैं। यदि पिछली वाली फर्म को ही यह टेंडर मिलता है, तो यह देखना होगा कि वह पिछले साल की तुलना में कितनी कम दरों पर इसे प्राप्त करती है; पिछली दर और इस वर्ष की दर का अंतर, ऑडिट की भाषा में, वित्तीय अनियमितता कहलाएगा। इस मामले में नगरपालिका से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों को इसके दूरगामी परिणामों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। फिलहाल उन्हें शायद यह बात समझ में न आए, लेकिन जैसे-जैसे निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जानबूझकर की गई गलती का अंजाम स्पष्ट होता चला जाएगा।
- बाड़ी शहर में डिस्कॉम ने बिजली चोरों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया, जिसके तहत शहर के मुख्य बाजार और गलियों में कार्रवाई की गई। इस दौरान चोरी की बिजली का उपयोग करते हुए 11 उपभोक्ताओं को पकड़ा गया। टीम ने पकड़े गए उपभोक्ताओं पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया और वीसीआर (विजिलेंस चेकिंग रिपोर्ट) भरी। कार्रवाई में दूसरों से अधिक बिजली केबल और अन्य बिजली उपकरण भी जब्त किए गए, जिनका उपयोग चोरी की बिजली से किया जा रहा था। यह अभियान एईएन आरडी मीना और उनकी टीम द्वारा चलाया गया।3
- हिंडौन के खेडली गाँव में गंभीर नदी को निर्जीव अवस्था से बाहर निकालने और उसे बचाने के लिए 360 गाँवों के लोग एक साथ आए हैं। इन लोगों ने पाँचना बांध खुलवाने और गंभीर नदी को बचाने के लिए एक जन-जन का अभियान शुरू किया है। मंगलवार दोपहर 3:00 बजे, मौजूद लोगों ने बताया कि पाँचना बांध के बंद होने से गंभीर नदी मृत अवस्था में पहुँच गई है, जिसके कारण 360 गाँवों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। इस दौरान, लोगों ने एकजुट होकर पाँचना बांध से पानी खोलने की मांग उठाई। इस बैठक में हरकेश अध्यापक, रेखसिंह, उप सरपंच रामेश्वर, खिलाड़ी पटेल, रामहरी डायरेक्टर, निहाल सिंह, करतार सिंह, कैप्टन दयाराम, रामनरेश गुर्जर, रामाधार, अनूप सिंह, हरवीर पटेल, हवलदार लक्ष्मण, सूबेदार सहाब सिंह और सूबेदार शिवदयाल सहित समस्त खेड़ली गुर्जर के लोग उपस्थित रहे।1
- जन समस्याओं को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और किसान सभा ने मध्य प्रदेश के कैलारस तहसील कार्यालय पर विशाल प्रदर्शन किया। इस राज्यव्यापी आंदोलन और अभियान के तहत किसान भवन से रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान हुई आमसभा में वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों की हालत लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील देश के किसानों और कृषि को पूरी तरह तबाह कर देगी, जिससे डेयरी उद्योग खत्म हो जाएगा और करोड़ों पशुपालक किसान इससे बाहर हो जाएंगे। जसविंदर सिंह ने यह भी कहा कि खेती की बढ़ती लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) न मिलने से किसान घाटे में हैं, भूमिहीनता बढ़ रही है और जमीन का केंद्रीकरण हो रहा है, जो कृषि क्षेत्र और देश के लिए विनाशकारी होगा, जिसका पुरजोर विरोध करना आवश्यक है। किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने बताया कि शक्कर कारखाना चालू कराने, जल निकासी की व्यवस्था करने, आवारा पशुओं का प्रबंधन करने और नाले-नालियों के निर्माण जैसी मांगों के लिए लगातार संघर्ष जारी है, और यह आगे भी जारी रहेगा। वामपंथी नेता गयाराम सिंह धाकड़ ने भी जन समस्याओं के लिए निरंतर संघर्ष की बात कही और चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन का नेतृत्व सर्वश्री राजेश गुप्ता, भोंरु लाल, सियाराम सिंह, जगन्नाथ सिंह, बनवारी लाल, डॉ. रामकुमार, ब्रजवीर सिंह सिकरवार, कन्हैयालाल और निरंजन शाक्य सहित अन्य नेताओं ने किया। यह अभियान 10 जून तक लगातार जारी रहेगा, जिसके बाद 11 जून को सुबह 7:00 बजे पुरानी सब्जी मंडी पर एक विशाल आमसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और माकपा नेता बादल सरोज मुख्य वक्ता होंगे। यह अभियान जिले भर में जारी है और आगे भी चलता रहेगा।1
- मध्य प्रदेश के जौरा स्थित सिविल अस्पताल में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों और नियमितीकरण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल का सीधा असर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, जिससे इलाज और जांच के लिए आ रहे मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी प्रदेश संगठन के आह्वान पर जौरा के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने यह सामूहिक हड़ताल प्रारंभ की है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण सहित उनकी अन्य मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन शासन स्तर पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। संविदा स्वास्थ्य कर्मी गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा संविदा कर्मियों के हित में निर्देश दिए जाने के बावजूद नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, और न ही अन्य लंबित मांगों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई हुई है। हड़ताल के कारण अस्पताल की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों ने स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन और हड़ताल जारी रहेगी। इस बीच, अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।1
- मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित बल्लू टी स्टॉल सफर के दौरान अचानक रुक जाने वाली गाड़ियों, पंचर होने या किसी अन्य परेशानी में फंसे राहगीरों और यात्रियों की मदद के लिए सबसे पहले आगे आता है। उनका मुख्य प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मुश्किल घड़ी में यात्रियों को अकेला महसूस न हो। बल्लू टी स्टॉल की पहचान एक कप गर्म चाय के साथ सहयोग, अपनापन और इंसानियत का हाथ बढ़ाना है। वे मानते हैं कि सड़क यात्रा के दौरान छोटी-बड़ी परेशानियाँ कभी भी आ सकती हैं, ऐसे में समय पर मिली मदद और हौसला सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सड़क यात्रा के दौरान सहायता और सहयोग को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। बल्लू टी स्टॉल सभी यात्रियों को सुरक्षित यात्रा की शुभकामनाएँ देता है और मदद करने को सबसे बड़ी मानवता बताता है।1
- हिंडौन सिटी में बयाना रोड चुंगी नाका के पास शराब का ठेका हटाने की मांग को लेकर मंगलवार सुबह 9:30 बजे से जाटव समाज की महिलाएं धरने पर बैठ गई हैं। महिलाओं का कहना है कि प्रशासन द्वारा उनकी मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें शराब की दुकान के सामने प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने एक दिन पहले सोमवार को हिंडौन के एसडीएम और करौली के जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर यह ठेका हटाने की मांग की थी। उस समय भी प्रशासन को शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। महिलाओं का कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठी हैं, लेकिन यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो उन्हें मजबूरन आंदोलन को उग्र करना पड़ेगा। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में जाटव समाज की महिलाएं मौजूद रहीं और इस दौरान आबकारी निरीक्षक त्रिलोक चंद अग्रवाल सहित कोतवाली और नई मंडी थाने का पुलिस जाप्ता भी तैनात रहा।2
- धौलपुर जिले के बाड़ी शहर में लगातार बिगड़ती व्यवस्था को लेकर लंबे समय से पुरुष ज्ञापन देते रहे हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें नजरअंदाज करने में माहिर रहा। इसी उदासीनता के बीच, अब शहर की महिलाएं प्रशासन को इस समस्या पर जगाने के लिए आगे आई हैं और उन्होंने ज्ञापन सौंपा है। देखना यह होगा कि यह ज्ञापन भी पिछले ज्ञापनों की तरह ही डस्टबिन में जाएगा, या फिर प्रशासन कम से कम इस बार इन गंभीर समस्याओं पर ध्यान देगा और उनकी सुध लेगा।1
- पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान के निर्देश पर बाड़ी थाना पुलिस ने सर्राफा व्यापारी से ₹20 लाख की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोपी अमित गुर्जर को मात्र 48 घंटे में गिरफ्तार कर लिया है। यह सनसनीखेज मामला 29 मई को सामने आया था जब बाड़ी के सर्राफा व्यापारी को धमकी मिली थी। आरोपी अमित गुर्जर ने बड़ी चालाकी से दूसरे के मोबाइल का इस्तेमाल कर खुद को अंडरवर्ल्ड डॉन बताकर व्यापारी को रंगदारी और जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि यह विवाद लगभग तीन माह पहले शादी के गहने बनवाने के लिए दिए गए एडवांस पैसों की वापसी को लेकर था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी विकास सांगवान ने थाना स्तर पर तीन अलग-अलग टीमें गठित की थीं। इन टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों और मानवीय इनपुट के आधार पर रंगदारी की धमकी देने वाले मुल्जिम अमित को चिन्हित कर गिरफ्तार किया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से प्रकरण में इस्तेमाल किया गया मोबाइल भी बरामद कर लिया है। यह कार्रवाई एडिशनल एसपी श्रवण कुमार झोरड़ और डीएसपी महेंद्र मीणा के सुपरविजन में बाड़ी कोतवाली थानाप्रभारी देवेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में की गई, जिसमें कांस्टेबल राजेन्द्र की अहम भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में अग्रिम अनुसंधान जारी है, और जघन्य मामलों में अपराधियों की धरपकड़ अभियान जारी रहेगा।2
- राजस्थान के करौली जिले में स्थित प्रसिद्ध पांचना बांध पर गुर्जर समाज के लोगों का धरना लगातार 17वें दिन भी जारी है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी इस मांग पर अडिग हैं कि पांचना बांध से नहरों और नदी में पानी नहीं खोला जाए। मंगलवार शाम 6:00 बजे कैप्टन हरिकेश गुर्जर ने स्पष्ट किया कि पांचना बांध का पानी पहले 39 गांवों को मिलना चाहिए, अन्यथा किसी भी कीमत पर पानी नहीं खुलने दिया जाएगा। धरना स्थल पर आगामी 4 जून को 'ठड्डा गीत' कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा, जिसकी जानकारी हिम्मत सिंह खेडला ने दी। इस कार्यक्रम में खेडाला खटाना, नंगला तुला, निसूरा, गाजीपुर और खानाका गांवों की 'ठड्डा पार्टियां' अपने गीतों की प्रस्तुति देंगी। प्रदर्शनकारी किसानों ने एक बार फिर दोहराया है कि जब तक 39 गांवों को पानी नहीं मिलता, वे पांचना बांध से पानी नहीं खुलने देंगे।1