मधेपुरा के आलमनगर में ड्यूटी पर तैनात दो सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों (CHO) के साथ कथित मारपीट और फिर उन्हीं पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस गंभीर घटना के विरोध में जिला CHO संघ ने सिविल सर्जन से मुलाकात कर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा, मामले की निष्पक्ष जांच और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। यह घटना 25 जून की रात को हुई थी, जिसके विरोध में बुधवार को जिला CHO संघ का एक प्रतिनिधिमंडल सिविल सर्जन कार्यालय पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि ड्यूटी कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला किया गया और बाद में उन्हीं पर नामजद प्राथमिकी भी दर्ज कर दी गई। संघ ने इस संबंध में सिविल सर्जन को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा है। संघ का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी चौबीसों घंटे लोगों की सेवा में तत्पर रहते हैं, लेकिन यदि ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। संघ ने मांग की है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बहाल होने तक प्रभावित CHO और अन्य संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों से जिला मुख्यालय या जिले के सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थानों में ही काम लिया जाए। सिविल सर्जन ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने तथा उच्चाधिकारियों को इस मामले से अवगत कराने का आश्वासन दिया है। वहीं, स्वास्थ्यकर्मियों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, निर्दोष कर्मियों को न्याय दिलाने और सभी सरकारी अस्पतालों में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की अपनी मांग दोहराई है। आलमनगर की यह घटना अब सिर्फ दो स्वास्थ्यकर्मियों का मामला न रहकर, सरकारी अस्पतालों में कार्यरत सभी कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन गई है, और सबकी निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
मधेपुरा के आलमनगर में ड्यूटी पर तैनात दो सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों (CHO) के साथ कथित मारपीट और फिर उन्हीं पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस गंभीर घटना के विरोध में जिला CHO संघ ने सिविल सर्जन से मुलाकात कर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा, मामले की निष्पक्ष जांच और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। यह घटना 25 जून की रात को
हुई थी, जिसके विरोध में बुधवार को जिला CHO संघ का एक प्रतिनिधिमंडल सिविल सर्जन कार्यालय पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि ड्यूटी कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला किया गया और बाद में उन्हीं पर नामजद प्राथमिकी भी दर्ज कर दी गई। संघ ने इस संबंध में सिविल सर्जन को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा है। संघ का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी चौबीसों घंटे लोगों की सेवा में तत्पर रहते हैं, लेकिन
यदि ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। संघ ने मांग की है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बहाल होने तक प्रभावित CHO और अन्य संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों से जिला मुख्यालय या जिले के सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थानों में ही काम लिया जाए। सिविल सर्जन ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने तथा उच्चाधिकारियों को इस मामले से अवगत कराने
का आश्वासन दिया है। वहीं, स्वास्थ्यकर्मियों ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, निर्दोष कर्मियों को न्याय दिलाने और सभी सरकारी अस्पतालों में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की अपनी मांग दोहराई है। आलमनगर की यह घटना अब सिर्फ दो स्वास्थ्यकर्मियों का मामला न रहकर, सरकारी अस्पतालों में कार्यरत सभी कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन गई है, और सबकी निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
- बिहार के मधेपुरा में एक निजी अस्पताल में प्रसव के बाद 25 वर्षीय पूजा कुमारी की मौत हो जाने पर गुरुवार रात परिजनों ने जमकर हंगामा किया। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने शव रखकर करीब चार घंटे तक सड़क जाम कर दी। इस दौरान वे दोषी डॉक्टर की गिरफ्तारी, अस्पताल को सील करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग पर अड़े रहे। बाद में पुलिस, प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समझाने के बाद जाम समाप्त हुआ। मृतका पूजा कुमारी, मुरलीगंज थाना क्षेत्र के तिनकोनमा गांव निवासी रविंद्र कुमार की पत्नी थीं। परिजनों के अनुसार, उन्हें 1 जुलाई को प्रसव के लिए शहर के पश्चिमी बायपास रोड स्थित नायडू मेडिकेयर एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि भर्ती के समय डॉक्टर ने मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को स्वस्थ बताकर सामान्य प्रसव का आश्वासन दिया था। हालांकि, अगले दिन प्रसव पीड़ा बढ़ने पर ऑपरेशन की सलाह दी गई, जिस पर परिजनों ने सहमति दे दी। ऑपरेशन के बाद कुछ समय तक मां और नवजात दोनों की स्थिति सामान्य बताई गई, लेकिन इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने सभी परिजनों को बाहर भेज दिया। इसी बीच, पूजा कुमारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई और अस्पताल में उपचार के बाद भी सुधार नहीं होने पर उन्हें सहरसा रेफर कर दिया गया, जहाँ अस्पताल पहुँचते ही उनकी मौत हो गई। वहीं, नवजात शिशु की हालत भी गंभीर बताई जा रही है और उसका इलाज वेंटिलेटर पर चल रहा है। महिला की मौत की सूचना मिलते ही परिजन शव लेकर वापस अस्पताल पहुँचे और मुख्य द्वार के सामने सड़क जाम कर रात करीब आठ बजे से देर रात लगभग 12 बजे तक विरोध प्रदर्शन करते रहे, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर लोगों को शांत कराने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से परिजनों ने जाम हटाया। मृतका के पति रविंद्र कुमार ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी चिकित्सकों और अस्पताल कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा अस्पताल पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।4
- सौर बाजार थाना पुलिस सूखा नशा कारोबारियों और उसका सेवन करने वालों के खिलाफ सक्रियता से अभियान चला रही है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि चन्दौर गांव से बराही गांव जाने वाली मुख्य सड़क पर कुचेहिया नदी के समीप बनी एक झोपड़ी में कई युवक सूखा नशा का सेवन कर रहे हैं। इस जानकारी पर सौर बाजार थाना पुलिस अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस को देखते ही युवकों ने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उनका पीछा कर उन्हें पकड़ लिया। पकड़े गए युवकों से कड़ी पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्होंने कई अन्य युवकों के नाम बताए। इन अन्य युवकों की तलाश में भी पुलिस सक्रिय रूप से जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है और उन्हें आगे की पूछताछ के लिए सौर बाजार थाना ले जाया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में काफी खुशी देखी जा रही है। लोगों का मानना है कि बिहार में शराबबंदी के बाद से कई प्रकार के नशे का प्रचलन बढ़ा है, जिनमें 'स्माइक' सबसे खतरनाक है, जो आज के युवा वर्ग को बर्बादी के कगार पर धकेल रहा है। कई लोगों ने यह भी बताया कि सहरसा विधानसभा के विधायक आईपी गुप्ता ने सूखा नशा के विरुद्ध अभियान चलाने की घोषणा की थी, लेकिन यह घोषणा फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। सौर बाजार थाना पुलिस सूखा नशा कारोबारियों एवं सूखा नशा सेवन करने वाले के विरुद्ध अपना अभियान जारी रखे हुए है।1
- सुपौल जिले का लोहिया नगर चौक देखने में बेहद आकर्षक लग रहा है। यहाँ शाम के समय घूमना बहुत अच्छा अनुभव देता है, जब इसकी सुंदरता और भी मनमोहक प्रतीत होती है।1
- कुमारखंड प्रखंड के सभी हाईस्कूल और प्लस टू हाईस्कूलों में 1 जुलाई से त्रैमासिक परीक्षाएँ शुरू हो गई हैं। इन परीक्षाओं का आयोजन कदाचार मुक्त माहौल में किया जा रहा है। परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, कक्षा नौ और दस के छात्र-छात्राओं को 1 से 3 जुलाई तक दोनों पालियों में विभिन्न विषयों की परीक्षा में शामिल होना है। वहीं, बारहवीं कक्षा के कला, विज्ञान एवं कॉमर्स संकाय के छात्रों की त्रैमासिक परीक्षा 1 जुलाई से 8 जुलाई तक आयोजित की जाएगी। इसी दौरान गुरुवार को बीईओ किशोर भास्कर ने प्रखंड क्षेत्र के अलग-अलग स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने पीएमश्री प्लस टू जवाहर हाईस्कूल रामनगर बेला सहित विभिन्न स्कूलों में चल रही त्रैमासिक परीक्षा, शिक्षकों की उपस्थिति और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान बीईओ ने स्कूल प्रधानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मौके पर स्कूल प्रभारी एचएम नवास कुमार भारती, वरीय शिक्षक राजेश रंजन भारती, गणेश चंद्र झा, निक्कू कुमार, रंजीत कुमार, ललन कुमार निराला, निखिल कुमार, शादाब शमी, अखलाकुर रहमान, रजनीश कुमार, राजमोहन गांधी, माधुरी कुमारी, रश्मि कुमारी, रिंकी कुमारी, रविकुमार रवि, प्राणजीत कुमार, रेखा कुमारी व श्यामानंद ठाकुर सहित सैकड़ों छात्र-छात्राएं मौजूद थे।1
- त्रिवेणीगंज में रोशन कुमार पंडित की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद बिहार में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गई है। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और इस घटना को मात्र जमीन विवाद मानने से इनकार करते हुए, इसे एक सुनियोजित हत्या करार दिया है। सांसद पप्पू यादव ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि इस घटना के दोषियों को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए।1
- नवहट्टा स्थानीय पुलिस प्रशासन इन दिनों फरार वारंटियों और अपराधियों के खिलाफ पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहा है। नवहट्टा थाना प्रभारी राहुल कुमार और अपर थाना अध्यक्ष रोशन कुमार के कुशल नेतृत्व में, थाना क्षेत्र में लगातार बेहतरीन पुलिसिंग और त्वरित गिरफ्तारियां देखने को मिल रही हैं, जिससे इलाके के अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है। इसी कड़ी में, नवहट्टा थाना पुलिस को एक बार फिर बड़ी सफलता हाथ लगी, जहाँ गुप्त सूचना और त्वरित कार्रवाई के आधार पर दो अलग-अलग मामलों के वारंटियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पहला गैर-जमानती वारंट (N.B.W.) का आरोपी गणेश मुखिया (पिता- राम मुखिया) है, जो खड़का (तेलवा) वार्ड नंबर 04 का निवासी है। वहीं दूसरा वारंटी बौआ झा (पिता- मोती झा) है, जो मुरादपुर गांव का रहने वाला है। दोनों काफी समय से पुलिस की नजरों से बच रहे थे, जिन्हें नवहट्टा पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दबोच लिया और कागजी प्रक्रिया पूरी कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना प्रभारी राहुल कुमार और अपर थाना अध्यक्ष रोशन कुमार के नेतृत्व में नवहट्टा थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था काफी सुदृढ़ हुई है। अपराधियों की धरपकड़ और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के मामले में नवहट्टा पुलिस का प्रदर्शन जिले में काफी सराहनीय और अव्वल नजर आ रहा है, जिससे आम जनता ने राहत की सांस ली है और पुलिस प्रशासन की इस कार्यशैली की चारों तरफ प्रशंसा हो रही है।1
- बिहार में कोसी नदी के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय लोग भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस स्थिति के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।1
- सहरसा जिले के सौर बाजार स्थित पुरानी हाई स्कूल परिसर में संचालित डिग्री कॉलेज में शौचालय भवन और छोटी सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। इस निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि न तो मौके पर कोई योजना बोर्ड लगाया गया है और न ही वहां मौजूद संवेदक को इस परियोजना की कुल लागत राशि की कोई जानकारी है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि संवेदक महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का प्रयास कर रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगता है। इस संबंध में चिंता व्यक्त की गई है कि ऐसी खबरें अक्सर अनसुनी रह जाती हैं। अब सबकी निगाहें सहरसा के जिला पदाधिकारी पर टिकी हैं, यह देखने के लिए कि क्या 'शिक्षा के मंदिर' में चल रही इस योजना में भी अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है। यदि ऐसा होता है, तो सरकार की योजनाओं की देखरेख कौन करेगा, खासकर उस परिसर में जहाँ एक नए डिग्री कॉलेज का भी शुभारंभ हो चुका है और पहले से ही सैकड़ों छात्र-छात्राएं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। यदि सरकारी योजनाओं में धांधली होती है, तो छात्रों के भविष्य का क्या होगा, जिनके नाम पर एक बड़ी राशि खर्च की जा रही है।1