गाजियाबाद के राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी की पेयजल व्यवस्था पर स्वास्थ्य विभाग की जांच ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय द्वारा कराई गई जल परीक्षण जांच में सोसायटी से लिए गए पानी के चारों नमूने असंतोषजनक पाए गए हैं। पानी में कोलीफॉर्म जीवाणुओं की मौजूदगी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे पीने के लिए पूरी तरह से असुरक्षित घोषित कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 17 जून 2026 को सोसायटी के भूमिगत जल टैंक (यूजी टैंक), एसपी-2 ओवरहेड टैंक, सी-1 ओवरहेड टैंक और मुख्य ओवरहेड टैंक से पेयजल के नमूने एकत्र किए थे। प्रयोगशाला की जांच में एच₂एस जल परीक्षण किट के माध्यम से सभी नमूनों का परिणाम पॉजिटिव आया, जो पानी में कोलीफॉर्म जीवाणुओं की उपस्थिति को दर्शाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ कार्यालय ने 22 जून 2026 को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को नोटिस जारी कर तीन कार्य दिवस के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। स्वास्थ्य विभाग ने आरडब्ल्यूए को टंकियों की नियमित सफाई, क्लोरीनेशन और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि दूषित पानी के कारण कोई बीमारी फैलने पर प्रबंधन ही जिम्मेदार होगा। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सोसायटी के सैकड़ों परिवारों में चिंता और डर का माहौल है। निवासियों का कहना है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल और पीने का पानी असुरक्षित पाया जाना उनके स्वास्थ्य से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की है कि पानी की गुणवत्ता में तत्काल सुधार किया जाए, टंकियों की वैज्ञानिक तरीके से सफाई व क्लोरीनेशन कराया जाए और जल परीक्षण की रिपोर्ट को नियमित रूप से सार्वजनिक किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य संकट से बचा जा सके।
गाजियाबाद के राकेश मार्ग स्थित गुलमोहर एन्क्लेव सोसायटी की पेयजल व्यवस्था पर स्वास्थ्य विभाग की जांच ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय द्वारा कराई गई जल परीक्षण जांच में सोसायटी से लिए गए पानी के चारों नमूने असंतोषजनक पाए गए हैं। पानी में कोलीफॉर्म जीवाणुओं की मौजूदगी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे पीने के लिए पूरी तरह से असुरक्षित घोषित कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 17 जून 2026 को सोसायटी के भूमिगत जल टैंक (यूजी टैंक), एसपी-2 ओवरहेड टैंक, सी-1 ओवरहेड टैंक और मुख्य ओवरहेड टैंक
से पेयजल के नमूने एकत्र किए थे। प्रयोगशाला की जांच में एच₂एस जल परीक्षण किट के माध्यम से सभी नमूनों का परिणाम पॉजिटिव आया, जो पानी में कोलीफॉर्म जीवाणुओं की उपस्थिति को दर्शाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ कार्यालय ने 22 जून 2026 को रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को नोटिस जारी कर तीन कार्य दिवस के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। स्वास्थ्य विभाग ने आरडब्ल्यूए को टंकियों की नियमित सफाई, क्लोरीनेशन और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि दूषित पानी के कारण
कोई बीमारी फैलने पर प्रबंधन ही जिम्मेदार होगा। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सोसायटी के सैकड़ों परिवारों में चिंता और डर का माहौल है। निवासियों का कहना है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल और पीने का पानी असुरक्षित पाया जाना उनके स्वास्थ्य से जुड़ा बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की है कि पानी की गुणवत्ता में तत्काल सुधार किया जाए, टंकियों की वैज्ञानिक तरीके से सफाई व क्लोरीनेशन कराया जाए और जल परीक्षण की रिपोर्ट को नियमित रूप से सार्वजनिक किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य संकट से बचा जा सके।
- गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित एक निर्माणाधीन मॉल में सात वर्षीय बच्ची की लाश मिली है। इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।1
- गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में कुछ वाहन चालकों ने शिकायत की है कि पेट्रोल में 15–20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण (E20) वाले ईंधन के उपयोग से उन्हें अपनी बाइक और कार के रखरखाव में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन वाहन चालकों का दावा है कि इस ईंधन के कारण वाहन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो रही है और उन्हें बार-बार फ्यूल टैंक व फ्यूल सिस्टम की सफाई करवानी पड़ रही है। गौरतलब है कि भारत सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत ऑयल कंपनियां चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल में एथेनॉल मिला रही हैं। इस नीति का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण में कमी लाना है। इसी कड़ी में वर्तमान में कई स्थानों पर E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस विषय पर विशेषज्ञों का कहना है कि एथेनॉल मिलाने से सभी बाइक और कार खराब हो रही हैं, यह कहना सही नहीं है क्योंकि कई नए वाहन E20 के पूर्णतः अनुरूप बनाए गए हैं। समस्या मुख्य रूप से पुराने या E20-अनुकूल न होने वाले वाहनों में अधिक देखी जा सकती है। यदि वाहन E20 ईंधन के अनुरूप डिज़ाइन नहीं किया गया है, तो पुराने मॉडलों में इंजन, फ्यूल लाइन, रबर के पुर्जों और माइलेज पर प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने वाहन चालकों को निर्माता के निर्देशों का पालन करने और समय-समय पर सर्विसिंग कराने की सलाह दी है। इसके अलावा, यदि किसी वाहन चालक को पेट्रोल पंप के ईंधन की गुणवत्ता पर संदेह होता है, तो वह संबंधित ऑयल कंपनी के शिकायत पोर्टल या उपभोक्ता हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।4
- उत्तर प्रदेश के हापुड़ से एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है, जहाँ एक नामी कंपनी की पानी की बोतल में पानी के स्थान पर तेजाब भरा हुआ पाया गया। इस बोतल को पीने के बाद एक शिक्षिका अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही हैं। इस घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया है और पुलिस फिलहाल मामले की गहनता से जांच कर रही है। घटना तब हुई जब रिया नाम की शिक्षिका ज्वेलरी खरीदने बाजार गई थीं। प्यास लगने पर एक कारोबारी ने अपने नौकर को पास की एक कन्फैक्शनरी से 'बिसलेरी' की बोतल लाने के लिए कहा। नौकर डीप फ्रीजर से ठंडी बोतल लेकर आया, जिसे शिक्षिका ने पानी समझकर पी लिया। तेजाब के पेट में जाते ही उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इस घटना के बाद लोगों से अपील की जा रही है कि कोई भी पैकेज्ड ड्रिंक पीने से पहले उसकी सील और गंध को एक बार ध्यान से जरूर परख लें।1
- गाजियाबाद में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या को लेकर कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी, वीर चक्र ने जन-जागरूकता फैलाने के लिए दो मिनट से अधिक का एक वीडियो जारी किया है। एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वाहनों, निर्माण कार्यों और पराली जलने के कारण वायु गुणवत्ता अक्सर 'खराब' या 'अति-खराब' श्रेणी में दर्ज की जाती है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस जागरूकता वीडियो में वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसानों के साथ-साथ नागरिकों के लिए कुछ सरल उपाय भी बताए गए हैं। इनमें अधिक पेड़ लगाना, पटाखे और कचरा न जलाना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना और मास्क पहनना शामिल है। कर्नल तेजेंद्र पाल त्यागी ने स्पष्ट किया है कि गाजियाबाद को स्वच्छ और स्वस्थ बनाना प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व है। उन्होंने विश्वास जताया है कि छोटे-छोटे प्रयासों से ही भावी पीढ़ी को शुद्ध हवा दी जा सकती है। उन्होंने नागरिकों से इस वीडियो को देखने और इसे अन्य लोगों तक साझा करने की अपील की है।1
- गाजियाबाद के जिला एमएमजी चिकित्सालय में शनिवार को मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों का आक्रोश फूट पड़ा। अस्पताल परिसर में पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सभी चिकित्साधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए। इस हड़ताल के चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं काफी प्रभावित रहीं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। चिकित्सकों और कर्मचारियों का आरोप है कि अस्पताल में लगातार मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट और हमले की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन पुलिस समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है। उनका गुस्सा इस बात पर था कि 8 जुलाई को एक सिस्टर के साथ हुई मारपीट की घटना में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। इसके अलावा, पूर्व में इमरजेंसी विभाग के एक कर्मचारी पर चाकू से हमला कर जान से मारने का प्रयास किया गया था, लेकिन उस मामले में भी तत्काल कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी थी। इसी के विरोध में मेडिकल स्टाफ ने कामकाज बंद कर दोषियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा मजबूत करने की मांग उठाई। हड़ताल की सूचना मिलने पर एसीपी उपासना पाण्डेय, थाना कोतवाली प्रभारी और अन्य पुलिस अधिकारी चिकित्सालय पहुंचे। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, पुलिस अधिकारियों और मेडिकल स्टाफ के बीच हुई वार्ता में पुलिस ने आश्वासन दिया कि 8 जुलाई के मामले में दर्ज एफआईआर संख्या 0190 पर तत्काल कार्रवाई कर आरोपी को दो घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही, इमरजेंसी स्टाफ पर चाकू से हमले के मामले में भी तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई का भरोसा दिया गया। एसीपी उपासना पाण्डेय ने निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी स्टाफ के साथ अभद्रता या मारपीट होने पर पुलिस बिना देरी के मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी। इस आश्वासन और त्वरित कार्रवाई के भरोसे के बाद चिकित्सकों और कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी और स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सामान्य हो गईं।1
- गाजियाबाद के नंदग्राम तिराहे पर उस समय अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब डीपीएसजी (DPSG) स्कूल की एक बस में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग इतनी तेजी से फैली कि उसने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, इस घटना में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि जिस समय यह आग लगी, उस वक्त बस के भीतर कोई भी स्कूली बच्चा मौजूद नहीं था। बच्चों की अनुपस्थिति के कारण एक बेहद गंभीर और बड़ा हादसा होने से टल गया। इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया डायरेक्ट राष्ट्रीय हिंदी समाचार पत्र के गाजियाबाद ब्यूरो चीफ हरीश कुमार द्वारा खास रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है।2