मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत से निलंबित संविदा उपयंत्री सतीश समेले ने पहली बार मीडिया के सामने आकर राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। समेले ने दावा किया कि जनपद स्तर से लेकर भोपाल तक एक सुनियोजित कमीशन का सिस्टम सक्रिय है और उन्हें भी अधिकारियों के लिए जबरन वसूली करने को मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के भुगतान और उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने जैसी प्रक्रियाओं के लिए सरपंच, सचिव, जीआरएस, उपयंत्री और सहायक यंत्री के स्तर पर कमीशन पहले से तय होते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने जिला, संभाग और भोपाल से आने वाले निरीक्षण अधिकारियों तक 'सूटकेस' भेजने का भी दावा किया है। समेले ने खुद पर हुई निलंबन की कार्रवाई को पूरे सिस्टम को बचाने की एक सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि विभाग छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर असल भ्रष्टाचार को छिपा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास इन दावों को पुष्ट करने के लिए ऑडियो, वीडियो और अन्य ठोस दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वे हाईकोर्ट में पेश करेंगे। गौरतलब है कि सतीश समेले मझगवां जनपद पंचायत की हिरौंदी ग्राम पंचायत में आरईएस विभाग में तैनात थे। उनके खिलाफ सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चलने जैसी कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों के आधार पर जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें पहले कार्यालय से अटैच किया गया और बाद में निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।
मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत से निलंबित संविदा उपयंत्री सतीश समेले ने पहली बार मीडिया के सामने आकर राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। समेले ने दावा किया कि जनपद स्तर से लेकर भोपाल तक एक सुनियोजित कमीशन का सिस्टम सक्रिय है और उन्हें भी अधिकारियों के लिए जबरन वसूली करने को मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के भुगतान और उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने जैसी प्रक्रियाओं के लिए सरपंच, सचिव, जीआरएस, उपयंत्री और सहायक यंत्री के स्तर पर कमीशन पहले से तय होते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने जिला, संभाग और भोपाल से आने वाले निरीक्षण अधिकारियों तक 'सूटकेस' भेजने का भी दावा किया है। समेले ने खुद पर हुई निलंबन की कार्रवाई को पूरे सिस्टम को बचाने की एक सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि विभाग छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर असल भ्रष्टाचार को छिपा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास इन दावों को पुष्ट करने के लिए ऑडियो, वीडियो और अन्य ठोस दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वे हाईकोर्ट में पेश करेंगे। गौरतलब है कि सतीश समेले मझगवां जनपद पंचायत की हिरौंदी ग्राम पंचायत में आरईएस विभाग में तैनात थे। उनके खिलाफ सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चलने जैसी कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों के आधार पर जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें पहले कार्यालय से अटैच किया गया और बाद में निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।
- मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत से निलंबित संविदा उपयंत्री सतीश समेले ने पहली बार मीडिया के सामने आकर राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। समेले ने दावा किया कि जनपद स्तर से लेकर भोपाल तक एक सुनियोजित कमीशन का सिस्टम सक्रिय है और उन्हें भी अधिकारियों के लिए जबरन वसूली करने को मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के भुगतान और उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने जैसी प्रक्रियाओं के लिए सरपंच, सचिव, जीआरएस, उपयंत्री और सहायक यंत्री के स्तर पर कमीशन पहले से तय होते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने जिला, संभाग और भोपाल से आने वाले निरीक्षण अधिकारियों तक 'सूटकेस' भेजने का भी दावा किया है। समेले ने खुद पर हुई निलंबन की कार्रवाई को पूरे सिस्टम को बचाने की एक सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि विभाग छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर असल भ्रष्टाचार को छिपा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास इन दावों को पुष्ट करने के लिए ऑडियो, वीडियो और अन्य ठोस दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वे हाईकोर्ट में पेश करेंगे। गौरतलब है कि सतीश समेले मझगवां जनपद पंचायत की हिरौंदी ग्राम पंचायत में आरईएस विभाग में तैनात थे। उनके खिलाफ सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चलने जैसी कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों के आधार पर जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें पहले कार्यालय से अटैच किया गया और बाद में निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।1
- छतरपुर जिले की छिरावल पंचायत के जामनान पुरवा की सड़क जर्जर स्थिति में है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस बदहाल मार्ग की मरम्मत और उचित समाधान की मांग की है।1
- मध्यप्रदेश में सरकारी सिस्टम के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उपयंत्री द्वारा सरकार की विकास योजनाओं में कमीशनखोरी के खेल को उजागर किया गया है। वायरल वीडियो के जरिए सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं, जिसमें विकास कार्यों के नाम पर चल रहे व्यापक भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया गया है। यह मामला राज्य में प्रशासनिक भ्रष्टाचार की हकीकत को सबके सामने लाने का दावा करता है।1
- मेरठ कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर धरना दे रहे दलित समाज के लोगों पर पुलिस ने बर्बर कार्रवाई की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मौके पर पहुँचे एसपी अविनाश पांडे ने आंदोलनकारियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया, जिसे उन्होंने पूरी तरह से असंवैधानिक बताया है। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों को पीटा गया और उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वैन में डाल दिया गया। आरोप है कि वैन के भीतर भी आंदोलनकारियों पर अत्याचार का सिलसिला नहीं थमा और रवि गौतम को विशेष रूप से वैन के अंदर ले जाकर पीटा गया। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों में भारी आक्रोश है।1