ज्ञापन सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री जी भारत सरकार, नई दिल्ली महोदय, आज आप पुनः उत्तराखंड आए हैं, मैं भारत के सर्व समाज की ओर से तथा उत्तराखंड के सर्व समाज की ओर से आपका हार्दिक स्वागत करता हूं I मान्यवर, आज मेरे उत्तराखंड की बहुत सारी समस्याएं हैं, जिनका संज्ञान न तो आपके चहेते मुख्यमंत्री जी ले रहे हैं तथा न आप ही ले रहे हैं I मैंने कई बार आपको पत्र लिखकर अवगत कराया है I आज पुनः आपको मैं उत्तराखंड की समस्याओं से अवगत करा रहा हूं तथा तत्काल समाधान की मांग करता हूं I 1 = आज उत्तराखंड में लगभग 25 लाख किसान है I सबसे ज्यादा उधम सिंह नगर, हरिद्वार तथा देहरादून के ग्रामीण क्षेत्रों में हैं I इन क्षेत्रों की मुख्य फसल जिससे किसानों की जीविका चलती है, उसमें मुख्य धान ,गेहूं तथा गन्ने की फसल है I अन्य फसलों में मक्का, सोयाबीन , दाले, उड़द, चना, मटर, मसूर, तिलहन, सरसों आदि है I पहाड़ के किसानों की यदि बात करें तो उनकी मटर की फसल साग सब्जियां ओलावृष्टि तथा बे मौसमी बारिश के कारण तबाह हो गई है I सरकार मुआवजा नहीं दे रही है I मैदान के किसानों की बात करें तो वर्तमान समय में गेहूं की कटाई का कार्य चल रहा है जिसे किसान अपने घर की जरूरत के बाद जितना बचता है उसे बेचकर अपनी गुजर बसर करने का कार्य करता है I इस समय ओलावृष्टि एवं बेमौसमी बारिश के कारण किसानो की अधिकतर गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है जिसका सरकार न तो मुआवजा देने का काम कर रही है न ही उनका बीमा कंपनी बीमा से भरपाई करने का काम कर रही है I जब कि प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के अतर्गत एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी एवं अन्य बीमा कंपनियों को किसान की फसल बर्बाद होने पर मुआवजा देना चाहिए, जो नहीं दिया जा रहा है I 2 = वर्तमान में उत्तराखंड सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति कुंतल दिया जा है, जब की अन्य राज्यों की यदि बात करे तो मध्य प्रदेश में गेहूं का समर्थन मूल्य 2625 रूपये ,राजस्थान में 2735 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से किसानों को सरकार दे रही है I मेरे द्वारा कुछ दिन पहले भी यह मांग उठाई गई थी की उत्तराखंड में गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि उत्तराखंड का गेहूं भी बहुत अच्छा माना जाता है लेकिन उत्तराखंड सरकार ने मेरी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया मैं पुनः मांग करता हूं कि उत्तराखंड सरकार गेहूं के समर्थन मूल्य पर अपनी ओर से कुछ अतिरिक्त बोनस देकर कम से कम ₹3000 प्रति कुंतल पर किसान का गेहूं खरीदने का काम करें तब यहां के किसानों को कुछ राहत मिल पाएगी I 3=उत्तराखंड के मैदानी इलाकों (जैसे ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, और देहरादून के मैदानी भाग) में जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा, वन्यजीवों (हाथियों, सूअरों) द्वारा फसलों की बर्बादी, और तेजी से घटती कृषि भूमि हैं। साथ ही कृषि इनपुट (बीज, खाद) की उच्च लागत और उपज का उचित मूल्य न मिलना भी बड़ी चुनौतियां हैं। • वन्यजीवों का आतंक : मैदानी इलाकों में जंगली जानवर, विशेषकर हाथियों का झुंड और नीलगाय, रात भर में खड़ी फसल (गन्ना, गेहूं, धान) को पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं। इसका सरकार को स्थाई समाधान निकालना चाहिए I 4 = भारी बारिश, ओलावृष्टि और सूखा फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। अप्रैल 2026 में ही तेज हवाओं और बारिश के कारण गेहूं की तैयार फसल जमीन पर गिर गई है, इसका मुआवजा किसानों को तत्काल मिलना चाहिए I 5 =कृषि भूमि में कमी : शहरीकरण, औद्योगीकरण और आवासीय परियोजनाओं के कारण उपजाऊ कृषि भूमि लगातार कम हो रही है, जिससे खेती योग्य रकबा सिकुड़ रहा है। इसका कोई माप दंड होना चाहिए I 6 =उपज का सही मूल्य न मिलना बिचौलियों की सक्रियता और स्थानीय मंडियों में विपणन (मार्केटिंग) सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को अपनी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है, इस समस्या पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए I 7 = मैंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री जी को तथा आपको भी कई बार पत्र लिखा यदि संख्या बताई जाए तो कम से कम पत्र लिखे 100,जिसमें से काम न हुए 2 भी I 8 =उत्तराखंड में जैविक कृषि को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, क्योंकि देश-विदेश में उत्तराखंड के जैविक उत्पाद की भारी मांग है जिसको हम पूरा नहीं कर पा रहे हैं यदि उत्तराखंड में जैविक उत्पाद को बढ़ावा दिया जाता है सरकार उनको प्रोत्साहन देती है तो निश्चित तौर पर उत्तराखंड के किसानों की दशा और दिशा में बदलाव आएगा I किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है I जब मैं वर्ष 2004 में उत्तराखंड सरकार में दर्जा राज्य मंत्री बना तो मुझे जैविक कृषि को ही बढ़ावा दिए जाने का कार्य दिया गया जिसके अंतर्गत मैने गांव-गांव में निशुल्क ट्रेनर भेज कर जैविक कृषि को बढ़ावा देने का कार्य किया तथा जैविक उत्पादों का सर्टिफिकेशन किए जाने के कार्य को भी सरलीकरण करने का कार्य किया साथ ही बीज प्रमाणीकरण संस्था को मजबूत बनाकर उसके द्वारा किसानों के जैविक उत्पाद को प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य किया जो आज बड़ी कठिनाई के साथ हो रहा है, इसमें किसानों को बड़ी दिक्कत आ रही है सरकार को तत्काल इस दिशा में कदम उठाने चाहिए I 9= मैंने पूर्व में भी कई बार लिखा था कि आज भी उत्तराखंड के किसानों का चीनी मिलों पर लगभग 130 करोड रुपए के करीब बकाया है जो तत्काल उनको दिया जाना चाहिए I इसके अलावा मुख्य रूप से किसानों को आ रही स्थाई प्रमाण पत्र आदि बनवाने की समस्या का निदान किया जाना चाहिए बिजली के बड़े हुए बिलों की समस्या का तत्काल निदान कराया जाना चाहिए I 10= आज हमारे उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में उत्तराखंड की सरकार ने लगभग 90 दायित्व धारी बना दिए हैं उसमें भी सर्व समाज की भारी अनदेखी की गई है कहीं कई ऐसे समाज हैं जिनका ना सरकार में कोई स्थान दिया गया है न ही संगठन में कोई स्थान दिया गया है आज उत्तराखंड सरकार का दायित्वधारियों पर प्रतिमाह लगभग 2.50 करोड़ रूपया दायित्व धारियों पर खर्च हो रहा है यह इस छोटे से राज्य में बिल्कुल भी उचित नहीं है I मेरी आपसे मांग है क्योंकि यह आपकी सलाह पर बनाए गए हैं तो यह धन आप केंद्र सरकार की ओर से प्रतिमाह उत्तराखंड सरकार को दें I भवदीय रामकुमार वालिया, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री उत्तराखंड राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय सर्व समाज महासंघ इंडियन किसान यूनियन,एनजीओ एसोसिएशन ऑफ इंडिया कार्यालय देहरादून /नई दिल्ली I
ज्ञापन सेवा में, माननीय प्रधानमंत्री जी भारत सरकार, नई दिल्ली महोदय, आज आप पुनः उत्तराखंड आए हैं, मैं भारत के सर्व समाज की ओर से तथा उत्तराखंड के सर्व समाज की ओर से आपका हार्दिक स्वागत करता हूं I मान्यवर, आज मेरे उत्तराखंड की बहुत सारी समस्याएं हैं, जिनका संज्ञान न तो आपके चहेते मुख्यमंत्री जी ले रहे हैं तथा न आप ही ले रहे हैं I मैंने कई बार आपको पत्र लिखकर अवगत कराया है I आज पुनः आपको मैं उत्तराखंड की समस्याओं से अवगत करा रहा हूं तथा तत्काल समाधान की मांग करता हूं I 1 = आज उत्तराखंड में लगभग 25 लाख किसान है I सबसे ज्यादा उधम सिंह नगर, हरिद्वार तथा देहरादून के ग्रामीण क्षेत्रों में हैं I इन क्षेत्रों की मुख्य फसल जिससे किसानों की जीविका चलती है, उसमें मुख्य धान ,गेहूं तथा गन्ने की फसल है I अन्य फसलों में मक्का, सोयाबीन , दाले, उड़द, चना, मटर, मसूर, तिलहन, सरसों आदि है I पहाड़ के किसानों की यदि बात करें तो उनकी मटर की फसल साग सब्जियां ओलावृष्टि तथा बे मौसमी बारिश के कारण तबाह हो गई है I सरकार मुआवजा नहीं दे रही है I मैदान के किसानों की बात करें तो वर्तमान समय में गेहूं की कटाई का कार्य चल रहा है जिसे किसान अपने घर की जरूरत के बाद जितना बचता है उसे बेचकर अपनी गुजर बसर करने का कार्य करता है I इस समय ओलावृष्टि एवं बेमौसमी बारिश के कारण किसानो की अधिकतर गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है जिसका सरकार न तो मुआवजा देने का काम कर रही है न ही उनका बीमा कंपनी बीमा से भरपाई करने का काम कर रही है I जब कि प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के अतर्गत एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी एवं अन्य बीमा कंपनियों को किसान की फसल बर्बाद होने पर मुआवजा देना चाहिए, जो नहीं दिया जा रहा है I 2 = वर्तमान में उत्तराखंड सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति कुंतल दिया जा है, जब की अन्य राज्यों की यदि बात करे तो मध्य प्रदेश में गेहूं का समर्थन मूल्य 2625 रूपये ,राजस्थान में 2735 रुपए प्रति कुंतल के हिसाब से किसानों को सरकार दे रही है I मेरे द्वारा कुछ दिन पहले भी यह मांग उठाई गई थी की उत्तराखंड में गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि उत्तराखंड का गेहूं भी बहुत अच्छा माना जाता है लेकिन उत्तराखंड सरकार ने मेरी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया मैं पुनः मांग करता हूं कि उत्तराखंड सरकार गेहूं के समर्थन मूल्य पर अपनी ओर से कुछ अतिरिक्त बोनस देकर कम से कम ₹3000 प्रति कुंतल पर किसान का गेहूं खरीदने का काम करें तब यहां के किसानों को कुछ राहत मिल पाएगी I 3=उत्तराखंड के मैदानी इलाकों (जैसे ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, और देहरादून के मैदानी भाग) में जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा, वन्यजीवों (हाथियों, सूअरों) द्वारा फसलों की बर्बादी, और तेजी से घटती कृषि भूमि हैं। साथ ही कृषि इनपुट (बीज, खाद) की उच्च लागत और उपज का उचित मूल्य न मिलना भी बड़ी चुनौतियां हैं। • वन्यजीवों का आतंक : मैदानी इलाकों में जंगली जानवर, विशेषकर हाथियों का झुंड और नीलगाय, रात भर में खड़ी फसल (गन्ना, गेहूं, धान) को पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं। इसका सरकार को स्थाई समाधान निकालना चाहिए I 4 = भारी बारिश, ओलावृष्टि और सूखा फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। अप्रैल 2026 में ही तेज हवाओं और बारिश के कारण गेहूं की तैयार फसल जमीन पर गिर गई है, इसका मुआवजा किसानों को तत्काल मिलना चाहिए I 5 =कृषि भूमि में कमी : शहरीकरण, औद्योगीकरण और आवासीय परियोजनाओं के कारण उपजाऊ कृषि भूमि लगातार कम हो रही है, जिससे खेती योग्य रकबा सिकुड़ रहा है। इसका कोई माप दंड होना चाहिए I 6 =उपज का सही मूल्य न मिलना बिचौलियों की सक्रियता और स्थानीय मंडियों में विपणन (मार्केटिंग) सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को अपनी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है, इस समस्या पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए I 7 = मैंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री जी को तथा आपको भी कई बार पत्र लिखा यदि संख्या बताई जाए तो कम से कम पत्र लिखे 100,जिसमें से काम न हुए 2 भी I 8 =उत्तराखंड में जैविक कृषि को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, क्योंकि देश-विदेश में उत्तराखंड के जैविक उत्पाद की भारी मांग है जिसको हम पूरा नहीं कर पा रहे हैं यदि उत्तराखंड में जैविक उत्पाद को बढ़ावा दिया जाता है सरकार उनको प्रोत्साहन देती है तो निश्चित तौर पर उत्तराखंड के किसानों की दशा और दिशा में बदलाव आएगा I किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है I जब मैं वर्ष 2004 में उत्तराखंड सरकार में दर्जा राज्य मंत्री बना तो मुझे जैविक कृषि को ही बढ़ावा दिए जाने का कार्य दिया गया जिसके अंतर्गत मैने गांव-गांव में निशुल्क ट्रेनर भेज कर जैविक कृषि को बढ़ावा देने का कार्य किया तथा जैविक उत्पादों का सर्टिफिकेशन किए जाने के कार्य को भी सरलीकरण करने का कार्य किया साथ ही बीज प्रमाणीकरण संस्था को मजबूत बनाकर उसके द्वारा किसानों के जैविक उत्पाद को प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य किया जो आज बड़ी कठिनाई के साथ हो रहा है, इसमें किसानों को बड़ी दिक्कत आ रही है सरकार को तत्काल इस दिशा में कदम उठाने चाहिए I 9= मैंने पूर्व में भी कई बार लिखा था कि आज भी उत्तराखंड के किसानों का चीनी मिलों पर लगभग 130 करोड रुपए के करीब बकाया है जो तत्काल उनको दिया जाना चाहिए I इसके अलावा मुख्य रूप से किसानों को आ रही स्थाई प्रमाण पत्र आदि बनवाने की समस्या का निदान किया जाना चाहिए बिजली के बड़े हुए बिलों की समस्या का तत्काल निदान कराया जाना चाहिए I 10= आज हमारे उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में उत्तराखंड की सरकार ने लगभग 90 दायित्व धारी बना दिए हैं उसमें भी सर्व समाज की भारी अनदेखी की गई है कहीं कई ऐसे समाज हैं जिनका ना सरकार में कोई स्थान दिया गया है न ही संगठन में कोई स्थान दिया गया है आज उत्तराखंड सरकार का दायित्वधारियों पर प्रतिमाह लगभग 2.50 करोड़ रूपया दायित्व धारियों पर खर्च हो रहा है यह इस छोटे से राज्य में बिल्कुल भी उचित नहीं है I मेरी आपसे मांग है क्योंकि यह आपकी सलाह पर बनाए गए हैं तो यह धन आप केंद्र सरकार की ओर से प्रतिमाह उत्तराखंड सरकार को दें I भवदीय रामकुमार वालिया, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री उत्तराखंड राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय सर्व समाज महासंघ इंडियन किसान यूनियन,एनजीओ एसोसिएशन ऑफ इंडिया कार्यालय देहरादून /नई दिल्ली I
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