बागपत के टटीरी मे घर मे घुसा सांप, दो भाइयो ने सूझ बूझ से सुरक्षित पकड़ा BAGHPAT DESK :- बागपत के टटीरी कस्बे में एक घर के अंदर एक लंबा और मोटा सांप घुसने से हड़कंप मच गया। यह घटना मनीष सिंघल के पुत्र रितिक सिंघल के घर में हुई, जहां सांप को देखकर परिवार में दहशत फैल गई। तत्काल मदद के लिए फोन किया गया। सूचना मिलने पर दो भाई मौके पर पहुंचे। उन्होंने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया। भाइयों ने बताया कि सांप काफी बड़ा और फुर्तीला था, जिससे उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, उन्होंने सावधानी बरतते हुए बिना किसी नुकसान के उसे काबू में कर लिया। रेस्क्यू अभियान के दौरान आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए और सभी की निगाहें इस कार्रवाई पर टिकी रहीं। भाइयों ने पूरी सतर्कता के साथ सांप को पकड़ा और बाद में उसे एक सुरक्षित स्थान पर ले जाकर खेतों में छोड़ दिया, ताकि किसी को कोई नुकसान न हो। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली और रेस्क्यू करने वाले भाइयों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सांप को नहीं पकड़ा जाता, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि ऐसे मामलों में त्वरित सहायता के लिए वन विभाग की टीम उपलब्ध कराई जाए। इससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं से सुरक्षित तरीके से निपटा जा सकेगा।
बागपत के टटीरी मे घर मे घुसा सांप, दो भाइयो ने सूझ बूझ से सुरक्षित पकड़ा BAGHPAT DESK :- बागपत के टटीरी कस्बे में एक घर के अंदर एक लंबा और मोटा सांप घुसने से हड़कंप मच गया। यह घटना मनीष सिंघल के पुत्र रितिक सिंघल के घर में हुई, जहां सांप को देखकर परिवार में दहशत फैल गई। तत्काल मदद के लिए फोन किया गया। सूचना मिलने पर दो भाई मौके पर पहुंचे। उन्होंने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया। भाइयों ने बताया कि सांप काफी बड़ा और फुर्तीला था, जिससे उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, उन्होंने सावधानी बरतते हुए बिना किसी नुकसान के उसे काबू में कर लिया। रेस्क्यू अभियान के दौरान आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए और सभी की निगाहें इस कार्रवाई पर टिकी रहीं। भाइयों ने पूरी सतर्कता के साथ सांप को पकड़ा और बाद में उसे एक सुरक्षित स्थान पर ले जाकर खेतों में छोड़ दिया, ताकि किसी को कोई नुकसान न हो। इस घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली और रेस्क्यू करने वाले भाइयों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सांप को नहीं पकड़ा जाता, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि ऐसे मामलों में त्वरित सहायता के लिए वन विभाग की टीम उपलब्ध कराई जाए। इससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं से सुरक्षित तरीके से निपटा जा सकेगा।
- 357Baraut, Baghpat👏1 day ago
- Post by Nanesvrrykanatmore1
- Post by न्यूज़ आइकॉन 241
- Post by Brajvir Singh1
- *कफन ओढ़कर DM ऑफिस पहुंचा वह “मुर्दा” जिसे 14 साल से राजस्व अभिलेखों में मार दिया गया* इशहाक अली बस्ती जिले के बानपुर–कुदरहा इलाके के रहने वाले स्वीपर थे, जो स्वास्थ्य विभाग के सरकारी अस्पताल में काम करते रहे और 31 दिसंबर 2019 को नियमानुसार रिटायर हुए और पेंशन भी प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन राजस्व विभाग की फाइलों में 2 दिसंबर 2012 से ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, यानी उनके रिटायर होने से लगभग 7 साल पहले ही “कागजों में उनकी मौत” दर्ज कर दी गई। इशहाक अली की लगभग 0.77 हेक्टेयर पैतृक कृषि भूमि (गाटा संख्या 892) को राजस्व अधिकारियों ने उन्हें “मृत” मानकर एक स्थानीय महिला शाहिदुन्निशा के नाम दर्ज कर दिया, जिससे जमीन उनसे छिन गई। आरोप है कि तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक/निरीक्षक ललित कुमार मिश्रा ने बिना मृत्यु प्रमाण‑पत्र के भी फर्जी दर्जा बनाकर यह जमीन‑हेराफेरी की, जिसपर जिला प्रशासन ने अब जांच का आदेश दिया है। इशहाक अली पिछले करीब 14 सालों से खुद को “जिंदा” साबित करने और अपनी जमीन वापस लेने के लिए विभिन्न अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन राजस्व‑स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड आपस में अलग‑अलग होने के कारण कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी गुस्से और निराशा के बीच वे अपने शरीर पर कफन ओढ़कर बस्ती DM ऑफिस पहुंचे, जिलाधिकारी के चैंबर के सामने लेट गए और “साहब, मैं मुर्दा नहीं, जिंदा हूं, मुझे कागजों में जिंदा कर दीजिए” जैसी अपील कर अफसरों की आँखें खोलने की कोशिश की। डीएम ने मामले की संज्ञान लेते हुए जांच की कार्रवाई शुरू कर दी है और जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों के खिलाफ जांच‑प्रक्रिया चलाई जा रही है। इशहाक अली का मुख्य दावा है कि न केवल उन्हें फाइलों से “जिंदा” घोषित किया जाए, बल्कि उनकी मौलिक जमीन को वापस उनके नाम सही दर्जा बनाकर दिया जाए ताकि इस तरह की भ्रष्ट राजस्व‑राजकर व्यवस्था की सीमाएं और साफ हो सकें।1
- अंबेडकर नगर के बसखारी क्षेत्र के मसणा बाजार में बड़ा हादसा टला, लखनऊ से जहांगीरगंज जा रही देवगढ़ बस अनियंत्रित होकर खाई में गिरी, 10–12 यात्री घायल, स्थानीय लोगों और पुलिस ने चलाया राहत-बचाव अभियान, सभी घायलों का इलाज जारी, जनहानि नहीं हुई।1
- Post by BHARAT TODAY NEWS1
- *पत्रकारिता की आड़ में पुलिस चौकी में हंगामा, वीडियो वायरल* *कौशाम्बी संदेश संवाददाता* *कौशाम्बी जनपद* सराय अकिल थाना क्षेत्र की एक पुलिस चौकी में पत्रकारिता की आड़ में गुंडागर्दी करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति पुलिस कर्मियों से बहस और अभद्रता करता दिखाई दे रहा है जानकारी के मुताबिक, उक्त व्यक्ति पुलिस टेबल पर रखे एक शिकायती पत्र की गोपनीयता भंग करने की कोशिश कर रहा था। इसी बात को लेकर चौकी में विवाद बढ़ गया। मौके पर मौजूद SHO सराय अकिल ने सख्ती दिखाते हुए हंगामा कर रहे व्यक्ति को फटकार लगाई और स्थिति को नियंत्रित किया वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। कुछ लोग इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि चौकी में अनुशासन बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है फिलहाल पूरे मामले की जांच की बात कही जा रही है और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।1
- *4 करोड़ के विवाद में फंसी हाजी याकूब की भतीजी, फोन पर तीन तलाक और घर से निकाला गया”* “मुजफ्फरनगर–मेरठ के एक हाई‑प्रोफाइल घरेलू विवाद ने अब पूरे यूपी में सनसनी मचा दी है। यह केस ना सिर्फ़ पैसे का झगड़ा है, बल्कि एक औरत के घर, उसकी दो बेटियों और फोन पर तीन तलाक की दर्द भरी कहानी है।” यह कहानी है मेरठ के चर्चित मुस्लिम नेता और पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी की भतीजी जेबा परवीन की, जिनकी शादी मुजफ्फरनगर के बड़े चमड़ा कारोबारी हाजी फराज से हुई थी। यह शादी धूम‑धाम से हुई थी, लेकिन आज वही शादी एक बड़े तनाव का केंद्र बन गई है। “जेबा के भाइयों का आरोप है कि फराज ने व्यापार शुरू करने के नाम पर उनसे करीब 4 करोड़ रुपये उधार लिए थे। समय बीतने पर जब भाइयों ने पैसा वापस मांगा, तो झगड़ा शुरू हो गया। आरोप है कि जेबा पर मानसिक उत्पीड़न और दबाव डाला गया, और आखिरकार उन्हें घर से निकाल दिया गया। “जेबा का दावा है कि उन्हें बीमारी/मां की तबीयत का बहाना बनाकर मेरठ भेज दिया गया, और जब वे वापस आईं तो घर का दरवाज़ा बंद मिला, अंदर जाने नहीं दिया गया। उनकी लगभग 80 तोले सोने की ज्वैलरी छीन ली गई, और उनकी दोनों बेटियों को घर के अंदर रख लिया गया, जिससे जेबा अपनी बच्चियों से भी अलग हो गई। “जेबा का सबसे बड़ा आरोप यह है कि जब उन्होंने पैसे वापसी और बेटियों से मिलने की बात की, तो फराज ने फोन पर तीन बार ‘तलाक’ बोलकर रिश्ता खत्म कर दिया। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में फोन या वॉट्सएप पर तीन तलाक देना अब आपराधिक अपराध माना जाता है। इस तरह के केस में पुलिस महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर सकती है, और यह धोखाधड़ी और घरेलू हिंसा के कानून के तहत भी देखा जा सकता है। जेबा फराज के मुजफ्फरनगर वाले घर के बाहर धरने पर बैठी हैं, घर में प्रवेश दिलाने और अपनी बेटियों से मिलने की मांग कर रही हैं। लेकिन एक और दर्दनाक हिस्सा यह है कि पैसे के विवाद के चलते मायके वाले उन्हें अपने घर में रखने से इनकार कर रहे हैं, जिससे जेबा ना सिर्फ़ ससुराल से अलग है, बल्कि मायके से भी अलग है। “यह केस सिर्फ़ एक तरफ़ा विवाद नहीं, बल्कि औरतों पर आर्थिक दबाव, सोने‑ज्वैलरी की कीमत, और फोन पर तीन तलाक की सोशल बहस को भी उजागर कर रहा है। अगर आप भी ऐसे किसी विवाद में फंसी हों, तो याद रखें – पुलिस, महिला आयोग और अदालत जैसे कानूनी तंत्र हमेशा आपके साथ हैं, और आपकी आवाज़ बेबसी नहीं, बल्कि अधिकार है।”1
- Jay maut Ho Gai bande ki bhoot ban gaya2