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ई-केवाईसी (e-KYC) सुविधा के माध्यम से श्रमिकों को उनके सभी अधिकार पूरी तरह से मिल सकेंगे, जिससे विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी बनेगा। NMMS ऐप का उपयोग करके किया जाने वाला डिजिटल सत्यापन इस पारदर्शिता को बढ़ाने में सहायक होगा। इस नई व्यवस्था से फर्जी जॉब कार्ड पर अंकुश लगेगा, साथ ही श्रमिकों के लिए मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया भी पहले से अधिक तेज और भरोसेमंद हो जाएगी।
HARUN KHAN
ई-केवाईसी (e-KYC) सुविधा के माध्यम से श्रमिकों को उनके सभी अधिकार पूरी तरह से मिल सकेंगे, जिससे विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी बनेगा। NMMS ऐप का उपयोग करके किया जाने वाला डिजिटल सत्यापन इस पारदर्शिता को बढ़ाने में सहायक होगा। इस नई व्यवस्था से फर्जी जॉब कार्ड पर अंकुश लगेगा, साथ ही श्रमिकों के लिए मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया भी पहले से अधिक तेज और भरोसेमंद हो जाएगी।
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- पीलीभीत में एक युवक की दुकान के अंदर घुसकर पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। पीड़ित युवक ने अपने सगे चचेरे भाइयों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने की बात कही गई है। इसके साथ ही, युवक ने दुकान हड़पने की साजिश का भी आरोप लगाया है। यह मामला नगर कोतवाली क्षेत्र के खकरा का बताया जा रहा है, और पीड़ित ने न्याय के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी) से गुहार लगाई है।1
- पीलीभीत नगर कोतवाली क्षेत्र के खकरा में एक युवक ने अपने सगे तहेरे भाइयों पर मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का आरोप है कि उसके भाइयों ने दुकान हड़पने की साजिश रची है और इसी मंशा से उसकी पिटाई की। यह घटना दुकान में घुसकर हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस पूरे मामले में पीड़ित युवक ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) से शिकायत की है।1
- आज, 30 मई को, देश हिंदी पत्रकारिता दिवस मना रहा है, जो भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन है जिसने देश को उसकी अपनी ज़ुबान में बोलने का अवसर दिया। इस अवसर पर, upnewstv24 के सरफ़राज़ अहमद ख़ान ने भारत के पहले हिंदी अख़बार 'उदन्त मार्तण्ड' को याद किया, जिसे पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने 30 मई 1826 को कोलकाता से शुरू किया था। इसी अख़बार ने देश में हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी थी, और आज इस ऐतिहासिक यात्रा पर विचार किया जा रहा है कि 1826 के उस दौर और आज के डिजिटल युग की पत्रकारिता में कितना बड़ा फ़र्क आ चुका है। 'उदन्त मार्तण्ड' के दौर में पत्रकारिता को एक 'मिशन' माना जाता था, जिसका मुख्य उद्देश्य पैसा कमाना या टीआरपी बटोरना नहीं था। यह अख़बार विज्ञान, आधुनिक जानकारियों और सबसे बढ़कर सामाजिक मुद्दों को उठाने का माध्यम था। हालांकि, ब्रिटिश हुकूमत के दौर में इसे कोई सरकारी सहायता नहीं मिली, और अत्यधिक डाक दरों के कारण इसे देश के दूसरे हिस्सों तक पहुँचाना मुश्किल हो गया। इन बढ़ते ख़र्चों के चलते, 'उदन्त मार्तण्ड' महज़ डेढ़ साल के अंदर, दिसंबर 1827 में बंद हो गया, जिसके कुल 79 अंक ही प्रकाशित हो पाए थे। पंडित शुक्ल जी ने बाद में 'समदन्त मार्तण्ड' नाम से एक और पत्र निकाला, पर वह भी ज़्यादा समय तक नहीं चल सका, फिर भी उनकी जलाई हुई मशाल बुझी नहीं। आज की पत्रकारिता और 'उदन्त मार्तण्ड' के दौर की पत्रकारिता की तुलना में कई बड़े बदलाव स्पष्ट नज़र आते हैं। पहला बड़ा अंतर मक़सद का है, जहाँ तब पत्रकारिता देश को जगाने का एक माध्यम थी, वहीं आज यह एक बहुत बड़ा कॉर्पोरेट बिज़नेस बन चुकी है। दूसरा अंतर साधनों का है; पहले अख़बार छापने और पहुँचाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी, जबकि आज तकनीक और सोशल मीडिया के चलते एक क्लिक पर ख़बर लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुँच जाती है। यूट्यूब, ट्विटर और डिजिटल मीडिया ने हर हाथ में माइक थमा दिया है। सबसे बड़ा अंतर सरोकार का है। 'उदन्त मार्तण्ड' के दौर में जनता के असल मुद्दे, विज्ञान और सामाजिक सुधार प्राथमिकता थे। इसके विपरीत, आज मुख्यधारा की मीडिया पर अक्सर टीआरपी की होड़, सनसनीखेज ख़बरों और असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के आरोप लगते हैं। यह एक बड़ा सवाल है कि जहाँ पत्रकारिता के साधन बहुत आधुनिक हो गए हैं, क्या उसके मूल्य भी उतने ही मजबूत हैं। हिंदी पत्रकारिता दिवस के इस अवसर पर, 'उदन्त मार्तण्ड' और पंडित जुगल किशोर शुक्ल जी के उस जज़्बे को याद करने की ज़रूरत है, क्योंकि डिजिटल माध्यमों के आने से शक्ति तो बढ़ी है, लेकिन ज़िम्मेदारी भी बढ़ी है। upnewstv24 का लक्ष्य हमेशा निष्पक्ष, सच्ची और जनता से जुड़ी ख़बरें पहुँचाना है, और दर्शकों से पूछा गया है कि क्या आज की पत्रकारिता अपने पुराने मूल्यों को बचाए रख पाई है।1
- समाजवादी पार्टी (सपा) ने महंगाई के खिलाफ अपना अनोखा विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का विरोध करना था। विरोध जताने के लिए सपा के कार्यकर्ताओं ने रस्सी से एक कार को खींचकर अपना प्रदर्शन किया।1
- भारतीय हिन्दूराष्ट्र संविधान को लागू कर दिया गया है। इस घोषणा के साथ 'जयहिंद' का उद्घोष किया गया।1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मीडिया के बिना लोकतंत्र की कल्पना ही नहीं की जा सकती, क्योंकि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। मुख्यमंत्री योगी ने इस बात पर जोर दिया कि जनता तक सरकार की नीतियों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने और सत्ता को जवाबदेह बनाने में मीडिया की भूमिका सबसे अहम है।1
- शनिवार दोपहर को समाजवादी पार्टी (सपा) कार्यकर्ताओं ने प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत पीलीभीत में सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक अनोखा प्रदर्शन किया। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने कार को रस्सी से खींचकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता केजीएन कॉलोनी स्थित पार्टी कार्यालय पर इकट्ठे हुए, जहाँ से यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुँचा। रास्ते भर कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और बैनर थामे सरकार विरोधी नारे लगाते रहे, और कार को रस्सी से खींचने का यह दृश्य राहगीरों के लिए भी कौतूहल का विषय बना रहा। कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने कहा कि देश और प्रदेश की जनता महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से बुरी तरह त्रस्त है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम आम आदमी के बजट से बाहर हो चुके हैं, जिसके कारण उन्हें कार को रस्सी से खींचकर यह दिखाना पड़ रहा है कि गाड़ियाँ अब केवल शोपीस बनकर रह गई हैं। यह प्रदर्शन पीलीभीत में समाजवादी पार्टी द्वारा बढ़ती महंगाई और उत्तर प्रदेश में गहराए बिजली संकट के खिलाफ सरकार के विरुद्ध खोला गया मोर्चा था।1
- पीलीभीत जिले के थाना बिलसंडा क्षेत्र में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बमरौली तिराहा पर हुई एक पुलिस मुठभेड़ के बाद, थाना बिलसंडा पुलिस ने पप्पू गुप्ता की हत्या के मामले में वांछित एक अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, पप्पू गुप्ता की हत्या तब हुई थी जब वह पंकज कटियार के साथ हुई एक घटना में बीच-बचाव करने आए थे। इस पूरी कार्यवाही के संबंध में पुलिस अधीक्षक, पीलीभीत ने बयान जारी किया है।1