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96 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद श्मशान में ही, नोहर (हनुमानगढ़), राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर क्षेत्र में एक 96 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके परिजनों और दोस्तों ने उन्हें एक अनोखी और यादगार श्रद्धांजलि दी है। अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद श्मशान घाट में ही दिवंगत आत्मा की याद में ताश की बाजी खेली गई, जो स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। जानकारी के अनुसार, नोहर के एक गांव के रहने वाले वृद्ध ताश खेलने के शौकिन थे व उनका ताश खेलते समय निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के ' श्मशान घाट में संपन्न हुआ। अंतिम संस्कार के समय परिजन और कुछ घनिष्ठ मित्र वहीं बैठ गए। उन्होंने कहा कि वृद्ध जी को जीवन में ताश खेलने का बहुत शौक था और वे अक्सर दोस्तों के साथ घंटों बाजी लगाते थे। इसलिए उनकी याद में एक अंतिम 'गेम' खेलना उचित होगा। इसके बाद जमीन पर बैठकर ताश की गड्डी निकाली और कुछ देर तक ताश खेली। इस दौरान हंसी-मजाक के साथ पुरानी यादें ताजा की गईं। एक परिजन ने बताया, "उनका स्वभाव बहुत मिलनसार था। वे कहते थे कि जिंदगी एक खेल है, जो अंत तक खेलते रहो। इसलिए हमने सोचा कि उनकी आत्मा को खुश करने के लिए यही सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी।" यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे भावुक और अनोखी श्रद्धांजलि बता रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे जीवन के प्रति उनके सकारात्मक नजरिए का प्रतीक बताया, तो कुछ ने इसे स्थानीय संस्कृति का हिस्सा माना। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं जताई गई, क्योंकि यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण और भावनात्मक तरीके से हुआ। नोहर के इस अनोखे प्रसंग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि श्रद्धांजलि देने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन भावनाएं हमेशा एक जैसी रहती हैं।

1 hr ago
user_आईरा समाचार बीकानेर
आईरा समाचार बीकानेर
Journalist Bikaner, Rajasthan•
1 hr ago

96 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद श्मशान में ही, नोहर (हनुमानगढ़), राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर क्षेत्र में एक 96 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके परिजनों और दोस्तों ने उन्हें एक अनोखी और यादगार श्रद्धांजलि दी है। अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद श्मशान घाट में ही दिवंगत आत्मा की याद में ताश की बाजी खेली गई, जो स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। जानकारी के अनुसार, नोहर के एक गांव के रहने वाले वृद्ध ताश खेलने के शौकिन थे व उनका ताश खेलते समय निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के ' श्मशान घाट में संपन्न हुआ। अंतिम संस्कार के समय परिजन और कुछ घनिष्ठ मित्र वहीं बैठ गए। उन्होंने कहा कि वृद्ध जी को जीवन में ताश खेलने का बहुत शौक था और वे अक्सर दोस्तों के साथ घंटों बाजी लगाते थे। इसलिए उनकी याद में एक अंतिम 'गेम' खेलना उचित होगा। इसके बाद जमीन पर बैठकर ताश की गड्डी निकाली और कुछ देर तक ताश खेली। इस दौरान हंसी-मजाक के साथ पुरानी यादें ताजा की गईं। एक परिजन ने बताया, "उनका स्वभाव बहुत मिलनसार था। वे कहते थे कि जिंदगी एक खेल है, जो अंत तक खेलते रहो। इसलिए हमने सोचा कि उनकी आत्मा को खुश करने के लिए यही सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी।" यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे भावुक और अनोखी श्रद्धांजलि बता रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे जीवन के प्रति उनके सकारात्मक नजरिए का प्रतीक बताया, तो कुछ ने इसे स्थानीय संस्कृति का हिस्सा माना। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं जताई गई, क्योंकि यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण और भावनात्मक तरीके से हुआ। नोहर के इस अनोखे प्रसंग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि श्रद्धांजलि देने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन भावनाएं हमेशा एक जैसी रहती हैं।

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  • बीकानेर में आज 21 फरवरी शनिवार को विशाल कलश यात्रा नगर सेठ लक्ष्मीनाथ जी मंदिर से शुरू होकर शहर के अन्य रास्तों से होकर धनी नाथ मठ तक पहुंची। कल 22 तारीख से छोटी काशी बीकानेर की धरा पर भागवत कथा का आयोजन होने जा रहा है। कथा वाचक परम पूज्य मां ऋतंभरा जी के मुखारविंद से कथा सुनने का सौभाग्य मिलेगा।
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    बीकानेर में आज 21 फरवरी शनिवार को विशाल कलश यात्रा नगर सेठ लक्ष्मीनाथ जी मंदिर से शुरू होकर शहर के अन्य रास्तों से होकर धनी नाथ मठ तक पहुंची। कल 22 तारीख से छोटी काशी बीकानेर की धरा पर भागवत कथा का आयोजन होने जा रहा है। कथा वाचक परम पूज्य मां ऋतंभरा जी के मुखारविंद से कथा सुनने का सौभाग्य मिलेगा।
    user_आईरा समाचार बीकानेर
    आईरा समाचार बीकानेर
    Journalist Bikaner, Rajasthan•
    1 hr ago
  • श्रीडूंगरगढ़ के बीकानेर रोड़ पर खड़े ट्रक से कार टकराई दो घायल
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    श्रीडूंगरगढ़ के बीकानेर रोड़ पर खड़े ट्रक से कार टकराई दो घायल
    user_News 7 NETWORK
    News 7 NETWORK
    पत्रकार श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • Post by Rajasthan Patrika
    1
    Post by Rajasthan Patrika
    user_Rajasthan Patrika
    Rajasthan Patrika
    पत्रकार लूणकरणसर, बीकानेर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • नागौर/जायल,,जायल में अनियंत्रित होकर कार पलटी कार में सवार दो युवक हुए घायल अनवर का इलाज उपजिला चिकित्सालय जायल में गम्भीर रूप से घायल युवक भीखाराम को किया हाई सेंटर रैफर जायल डिडवाना रोड़ कॉलेज के पास की है घटना जायल पुलिस मौके पर पहुंची
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    नागौर/जायल,,जायल में अनियंत्रित होकर कार पलटी कार में सवार दो युवक हुए घायल अनवर का इलाज उपजिला चिकित्सालय जायल में गम्भीर रूप से घायल युवक भीखाराम को किया हाई सेंटर रैफर जायल डिडवाना रोड़ कॉलेज के पास की है घटना जायल पुलिस मौके पर पहुंची
    user_प्रदीप कुमार डागा
    प्रदीप कुमार डागा
    नागौर, नागौर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • Post by Mangal chand Mali
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    Post by Mangal chand Mali
    user_Mangal chand Mali
    Mangal chand Mali
    सरदारशहर, चूरू, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • पढ़ाई-लिखाई का मतलब बी. एस पब्लिक स्कूल वार्ड नंबर 6 प्रेमनगर भामाशाह स्कूल अनूपगढ़ 9672185366
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    पढ़ाई-लिखाई का मतलब बी. एस पब्लिक स्कूल वार्ड नंबर 6 प्रेमनगर भामाशाह स्कूल अनूपगढ़ 9672185366
    user_User2307
    User2307
    Nurse अनूपगढ़, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • Post by Sachin vyas
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    Post by Sachin vyas
    user_Sachin vyas
    Sachin vyas
    Journalist फलोदी, जोधपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • नोहर (हनुमानगढ़), राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर क्षेत्र में एक 96 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके परिजनों और दोस्तों ने उन्हें एक अनोखी और यादगार श्रद्धांजलि दी है। अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद श्मशान घाट में ही दिवंगत आत्मा की याद में ताश की बाजी खेली गई, जो स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। जानकारी के अनुसार, नोहर के एक गांव के रहने वाले वृद्ध ताश खेलने के शौकिन थे व उनका ताश खेलते समय निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के ' श्मशान घाट में संपन्न हुआ। अंतिम संस्कार के समय परिजन और कुछ घनिष्ठ मित्र वहीं बैठ गए। उन्होंने कहा कि वृद्ध जी को जीवन में ताश खेलने का बहुत शौक था और वे अक्सर दोस्तों के साथ घंटों बाजी लगाते थे। इसलिए उनकी याद में एक अंतिम 'गेम' खेलना उचित होगा। इसके बाद जमीन पर बैठकर ताश की गड्डी निकाली और कुछ देर तक ताश खेली। इस दौरान हंसी-मजाक के साथ पुरानी यादें ताजा की गईं। एक परिजन ने बताया, "उनका स्वभाव बहुत मिलनसार था। वे कहते थे कि जिंदगी एक खेल है, जो अंत तक खेलते रहो। इसलिए हमने सोचा कि उनकी आत्मा को खुश करने के लिए यही सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी।" यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे भावुक और अनोखी श्रद्धांजलि बता रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे जीवन के प्रति उनके सकारात्मक नजरिए का प्रतीक बताया, तो कुछ ने इसे स्थानीय संस्कृति का हिस्सा माना। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं जताई गई, क्योंकि यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण और भावनात्मक तरीके से हुआ। नोहर के इस अनोखे प्रसंग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि श्रद्धांजलि देने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन भावनाएं हमेशा एक जैसी रहती हैं।
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    नोहर (हनुमानगढ़),  राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर क्षेत्र में एक 96 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके परिजनों और दोस्तों ने उन्हें एक अनोखी और यादगार श्रद्धांजलि दी है। अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद श्मशान घाट में ही दिवंगत आत्मा की याद में ताश की बाजी खेली गई, जो स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
जानकारी के अनुसार, नोहर के एक गांव के रहने वाले वृद्ध ताश खेलने के शौकिन थे व उनका ताश खेलते समय निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के ' श्मशान घाट में संपन्न हुआ। अंतिम संस्कार के समय परिजन और कुछ घनिष्ठ मित्र वहीं बैठ गए। उन्होंने कहा कि वृद्ध जी को जीवन में ताश खेलने का बहुत शौक था और वे अक्सर दोस्तों के साथ घंटों बाजी लगाते थे। इसलिए उनकी याद में एक अंतिम 'गेम' खेलना उचित होगा।
इसके बाद  जमीन पर बैठकर ताश की गड्डी निकाली और कुछ देर तक ताश खेली। इस दौरान हंसी-मजाक के साथ पुरानी यादें ताजा की गईं। एक परिजन ने बताया, "उनका स्वभाव बहुत मिलनसार था। वे कहते थे कि जिंदगी एक खेल है, जो अंत तक खेलते रहो। इसलिए हमने सोचा कि उनकी आत्मा को खुश करने के लिए यही सबसे अच्छी श्रद्धांजलि होगी।"
यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे भावुक और अनोखी श्रद्धांजलि बता रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे जीवन के प्रति उनके सकारात्मक नजरिए का प्रतीक बताया, तो कुछ ने इसे स्थानीय संस्कृति का हिस्सा माना।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं जताई गई, क्योंकि यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण और भावनात्मक तरीके से हुआ। नोहर के इस अनोखे प्रसंग ने एक बार फिर साबित कर दिया कि श्रद्धांजलि देने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन भावनाएं हमेशा एक जैसी रहती  हैं।
    user_आईरा समाचार बीकानेर
    आईरा समाचार बीकानेर
    Journalist Bikaner, Rajasthan•
    1 hr ago
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