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ये महाशय खुले आम एक सीटिंग मुख्यमंत्री को कैसे धमका रहे हैं। इस वीडियो को गौर से देखिए दोस्तों ये हमारे देश के विपक्ष के नेता हैं जरा इनकी भाषा पे गौर कीजिए और कमेंट सेक्शन में दो शब्द इनके बारे में जरूर बोलिए ये महाशय खुले आम एक सीटिंग मुख्यमंत्री को कैसे धमका रहे हैं।
डॉ. उमेश कुमार
ये महाशय खुले आम एक सीटिंग मुख्यमंत्री को कैसे धमका रहे हैं। इस वीडियो को गौर से देखिए दोस्तों ये हमारे देश के विपक्ष के नेता हैं जरा इनकी भाषा पे गौर कीजिए और कमेंट सेक्शन में दो शब्द इनके बारे में जरूर बोलिए ये महाशय खुले आम एक सीटिंग मुख्यमंत्री को कैसे धमका रहे हैं।
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- इस वीडियो को गौर से देखिए दोस्तों ये हमारे देश के विपक्ष के नेता हैं जरा इनकी भाषा पे गौर कीजिए और कमेंट सेक्शन में दो शब्द इनके बारे में जरूर बोलिए ये महाशय खुले आम एक सीटिंग मुख्यमंत्री को कैसे धमका रहे हैं।1
- राजनगर : बुरुडीह में भक्ति भाव एवं आस्था के साथ मां मंगला उषा पूजा हुआ समापन। राजनगर प्रखंड के अंतर्गत ग्राम बुरूडीह में अशोक मुखी एवं विष्टु मुखी के घर में प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी भक्ति भाव एवं आस्था के साथ मां मंगला उषा पूजा अर्चना धूमधाम से की गई। कार्यक्रम के तहत भक्त श्रद्धालु गाजे बाजे के साथ कलश लेकर तालाब गए वहां से पुजारी पूजा अर्चना कर पवित्र जल लेकर कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा के आगमन के दौरान जगह-जगह माता की पारंपरिक शंख ध्वनि व हुडहुड़ी के साथ स्वागत करते हुए ,जगह-जगह पूजा की गई। इस दौरान रास्ते में जमीन पर बच्चे लेट जाते हैं उन्हें लांघकर जाने से उन बच्चों पर मां मंगला देवी की विशेष कृपा बनी रहती है। सभी महिलाएं कलश लेकर झूमते हुए पूजा स्थल पर पहुंचे , वहां पुजारी मंत्र उच्चारण कर सभी कलशों को पूजा स्थल पर स्थापित किए। सभी श्रद्धालु पूजा अर्चना किये। पूजा के दौरान नए फल , फूल, केन्दु ,चाहर ,साल फुल, आम एवं विभिन्न प्रकार की फल ,फूल मां मंगला को चढ़ाए। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर केला नारियल, कबूतर ,मुर्गा ,हंस एवं बकरा की बली भी अर्पित किए। महिलाओं ने मां मंगला देवी से अपने परिवार व गांव के सुख समृद्धि एवं रोग निवारण के लिए मन्नत मांगे। पूजा संपन्न होने के बाद सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद , चना, गुड़ का वितरण किया गया। पूजा को सफल आयोजन के लिए अशोक मुखी अरुण मुखी , सामू मुखी, राजकुमार मुखी ,अरुण मुखी ,विशाल मुखी ,दुर्गा मुखी ,राजू मुखी , दीपक मुखी ,विष्णु मुखी , रामो मुखी ,श्याम मुखी, बाबू मुखी, कुंजों मुखी का अहम योगदान रहा।1
- सरायकेला - सोमवार को राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव 2026 के तहत राजकीय छऊ नृत्य कलाकेंद्र प्रेक्षागृह में ग्रामीण छऊ नृत्य प्रतियोगिता का दूसरे दिन मानभूम शैली के ग्रामीण छऊ नृत्य के तीन दलों ने भाग लिया जिसमें से प्रथम स्थान के रूप में झारखण्ड विकास परिषद उदाटांड ,द्वितीय स्थान के रूप में भगवान बिरसा मुंडा छऊ नृत्य कला केंद्र गुढ़ा तथा तृतीय स्थान के रूप में शिव शक्ति छऊ नृत्य कला केंद्र गुढ़ा ने कब्जा जमाया । मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी निर्देशक यश्मिता सिंह को राजकीय छऊ नृत्य कलाकेंद्र के कलाकारों ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया,निर्णायक मंडली के निर्णय को प्रखंड विकास पदाधिकारी यश्मिता सिंह ने प्रतियोगी दलों के बीच प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वाले दलों की नामों की घोषणा की,निर्णायक के रूप में गुरु ब्रजेन्द्र कुमार पटनायक, गुरु मनोरंजन साहू उपस्थित थे, मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने सभी कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि सभी दल ने जबरदस्त प्रदर्शन किया,सभी ने संसाधन के अभाव के बाबजूद अपना कला संस्कृति के संरक्षण में बेहतर योगदान दे रहे है जो इस मिट्टी के लिए गर्व की बात है उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में स्थान पाने वाले दलों को मुख्य मंच में अतिथियों द्वारा पुरस्कार देने के साथ साथ प्रदर्शन करने का भी मौका दिया जायेगा।निर्णायक मंडली के सदस्यो को प्रखंड विकास पदाधिकारी ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। मौके पर गुरु बिजय कुमार साहू,भोला महंती,कोडीनेटर सुदीप कबी,संतोष कर,गजेंद्र महंती,रुपेश साहू, कामेश्वर भोल,अबिनाश कबी,सुमित महापात्र,नीरज पटनायक,पंकज साहू,कुना सामल, गोपाल पटनायक, सिद्धू दारोगा,बाउरी बंधु महतो, अद्यापदों साहू, राकेश कबी,असित पटनायक,मुन्ना महाराणा,कार्यालय कर्मी राजेश महापात्र, कृष्णा सोय,नबीन कुमार सहित कई कलाकार और कार्यालय कर्मी उपस्थित थे।2
- रघुनाथपुर पुर मे ग्रामीणों के द्वारा सड़क जाम के दौरान करीब 20किलोमीटर तक वाहनों की लगी रही लंबी कतार1
- शुरू ऐप न्यूज़ चैनल मैं आपका स्वागत है मैं रवि गुप्ता प्रेस रिपोर्टर आप देख सकते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान विधायक श्री चंपाई सोरेन जी के प्रतिनिधि सनंद कुमार आचार्य द्वारा सरायकेला सदर अस्पताल का अचेक निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान काफी खामियां पाई गई। उसे दौरान मरीजों से उन्होंने बातचीत की एवं उनकी समस्या को सुना और आश्वासन दिया गया।कि उसे जल्द ही दूर किया जाएगा। सदर अस्पताल के मैनेजर को बुलवाकर डांट - फटकार लगाया गया एवं काफी दिशा निर्देश दिए गए। नर्स एवं वार्ड बॉय से भी खामयाओं की जानकारी ली गई एवं डायलिसिस के पेशेंट से भी उसकी जानकारी ली गई।4
- सिल्ली: प्रखंड के लोवादाग गांव के समीप सिल्ली टीकर पथ के लोवादाग पहाड़ माझ के समीप मंगलवार को वज्रपात से आम पेड़ पर बैठे कुल सात लंगुरों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार लगभग 3 बजे के आस पास हल्की बारिश के बज्रपात से आम पेड़ पर पेड़ बैठे 7 लंगुर उसके चपेट आ गए एवं मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना पाकर प्रभारी वन पाल जयप्रकाश साहू घटनास्थल पर पहुंचे जहां उन्होंने जरुरी प्रक्रिया पुरी कर सातों लंगुरों को गड्ढे में दफनाकर अंतिम संस्कार कर दिया। आसपास के ग्रामीणों ने इतनी संख्या में लंगुरों की मृत्यु होने से गहरा दुख व्यक्त किया। वहीं ग्रामीण इस घटना को अशुभ मानते हुए पुजा पाठ भी किये।1
- JLKM रामगढ़ विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी पानेसर महतो ने मजदूरों के लिए आवाज उठाए1
- सरायकेला- कला और संस्कृति की पावन नगरी सरायकेला में विश्व प्रसिद्ध राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव का हर्षोल्लास शुरू हो चुका है। उत्सव के दूसरे दिन, आज 6 अप्रैल 2026 (सोमवार) को महोत्सव की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक रस्म "शुभ घट" (कलश यात्रा) पूरी विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुई। आज की मुख्य रस्म खरकई नदी स्थित मंजना घाट पर आयोजित की गई। परंपरा के अनुसार, आज से 12 विभिन्न जातियों के 13 लोग (जिन्हें भोक्ता कहा जाता है) जनेऊ धारण कर 'कामना घट' तक शिव गोत्र में बंध जाएंगे। यह रस्म आत्म-संयम और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। 'शुभ घट' यात्रा को चैत्र पर्व का दूसरा और अत्यंत पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। यह अनुष्ठान मुख्य रूप से भगवान अर्धनारीश्वर को समर्पित है। पवित्र जल से भरा कलश (घट) मंजना घाट से बाजे गाजे के साथ नृत्य करते हुए सरायकेला के गुदड़ी स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया जाता है। श्रद्धालुओं से जानकारी के अनुसार इस कलश की स्थापना के साथ ही विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य के लिए आवश्यक आध्यात्मिक ऊर्जा का आवाहन होता है। "शुभ घट की स्थापना के बिना छऊ नृत्य की ऊर्जा अधूरी मानी जाती है। यह हमारी सदियों पुरानी संस्कृति की आत्मा है।" शुभारंभ बीते कल, 5 अप्रैल को 'अखाड़ा शाल' में पारंपरिक भैरव पूजा के साथ हुआ। इस पूजा के साथ ही पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल बन गया है। वर्तमान में सरायकेला की गलियों में छऊ कलाकारों और भक्तों का भारी उत्साह देखा जा रहा है।2