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आरटीआई में बड़ा खुलासा: कृषि उपज मंडी मेन्द्राकला में पारदर्शिता पर सवाल, आरटीआई की धाराओं का ज्ञान नहीं है और “जैसा अधिकारी कहेंगे वैसा ही होगा।” आरटीआई में बड़ा खुलासा: कृषि उपज मंडी मेन्द्राकला में पारदर्शिता पर सवाल अंबिकापुर, सरगुजा (छत्तीसगढ़)।l सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित कृषि उपज मंडी समिति मेन्द्रा कला एक बार फिर सुर्खियों में है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। क्या है पूरा मामला? आरटीआई आवेदक सुमित कुमार द्वारा 31 जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 तक के पिछले दो वर्षों की विभिन्न वित्तीय एवं प्रशासनिक जानकारियां मांगी गई थीं। आवेदन में निम्न प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी चाही गई थी: जारी किए गए सभी टेंडरों की प्रतिलिपि चयनित ठेकेदारों का विवरण मंडी का जोनल लेआउट/मैप कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) की प्रतियां जारी बिल एवं भुगतान चेक का विवरण एमबी बुक (मेजरमेंट बुक) की प्रतिलिपि किसानों को दी गई सब्सिडी का विवरण मंडी की संपत्ति एवं उपकरणों की सूची बैठक/निर्णय की प्रतियां आवेदक ने स्पष्ट रूप से अनुरोध किया था कि सूचना पेनड्राइव या ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए। 3615 पृष्ठों की जानकारी, 7230 रुपये शुल्क कार्यालय द्वारा जारी पत्र क्रमांक 533, दिनांक 26 फरवरी 2026 के अनुसार, चिन्हित दस्तावेजों की संख्या 3615 पृष्ठ (ए-4 साइज) बताई गई है। प्रति पृष्ठ 2 रुपये की दर से कुल 7230 रुपये जमा कराने को कहा गया है। यहां मुख्य प्रश्न यह उठता है कि जब सूचना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकती है, तब केवल छायाप्रति के माध्यम से ही देने पर जोर क्यों दिया जा रहा है? वीडियो में सामने आए बयान मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित रूप से संबंधित अधिकारी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्हें आरटीआई की धाराओं का ज्ञान नहीं है और “जैसा अधिकारी कहेंगे वैसा ही होगा।” यदि यह कथन सत्य है, तो यह सूचना के अधिकार अधिनियम के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। पारदर्शिता पर उठते सवाल इस प्रकरण ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं: क्या टेंडर प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी रही? क्या सभी कार्य नियमानुसार पूर्ण हुए? क्या भुगतान कार्य पूर्ण होने के बाद ही किया गया? क्या सूचना देने में अनावश्यक आर्थिक भार डाला जा रहा है? आरटीआई अधिनियम की धारा 4(1)(b) के अनुसार, सार्वजनिक प्राधिकरणों को कई जानकारियां स्वप्रकाशित करनी होती हैं। ऐसे में दो वर्षों के टेंडर और भुगतान संबंधी विवरण पहले से सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध क्यों नहीं हैं — यह भी विचारणीय विषय है। जांच की मांग मामले को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग उठ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हुई हैं, तो जानकारी उपलब्ध कराने में हिचक क्यों? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या निष्पक्ष जांच कराई जाती है। #ChhattisgarhNews #RaipurNews #CGViral #BilaspurNews #Chhattisgarh

3 hrs ago
user_SUMIT KUMAR
SUMIT KUMAR
Newspaper publisher सरगुजा, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
3 hrs ago

आरटीआई में बड़ा खुलासा: कृषि उपज मंडी मेन्द्राकला में पारदर्शिता पर सवाल, आरटीआई की धाराओं का ज्ञान नहीं है और “जैसा अधिकारी कहेंगे वैसा ही होगा।” आरटीआई में बड़ा खुलासा: कृषि उपज मंडी मेन्द्राकला में पारदर्शिता पर सवाल अंबिकापुर, सरगुजा (छत्तीसगढ़)।l सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित कृषि उपज मंडी समिति मेन्द्रा कला एक बार फिर सुर्खियों में है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। क्या है पूरा मामला? आरटीआई आवेदक सुमित कुमार द्वारा 31 जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 तक के पिछले दो वर्षों की विभिन्न वित्तीय एवं प्रशासनिक जानकारियां मांगी गई थीं। आवेदन में निम्न प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी चाही गई थी: जारी किए गए सभी टेंडरों की प्रतिलिपि चयनित ठेकेदारों का विवरण मंडी का जोनल लेआउट/मैप कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) की प्रतियां जारी बिल एवं भुगतान चेक का विवरण एमबी बुक (मेजरमेंट बुक) की प्रतिलिपि किसानों को दी गई सब्सिडी का विवरण मंडी की संपत्ति एवं उपकरणों की सूची बैठक/निर्णय की प्रतियां आवेदक ने स्पष्ट रूप से अनुरोध किया था कि सूचना पेनड्राइव या ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए। 3615 पृष्ठों की जानकारी, 7230 रुपये शुल्क कार्यालय द्वारा जारी पत्र क्रमांक 533, दिनांक 26 फरवरी 2026 के अनुसार, चिन्हित दस्तावेजों की संख्या 3615 पृष्ठ (ए-4 साइज) बताई गई है। प्रति पृष्ठ 2 रुपये की दर से कुल 7230 रुपये जमा कराने को कहा गया है। यहां मुख्य प्रश्न यह उठता है कि जब सूचना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकती है, तब केवल छायाप्रति के माध्यम से ही देने पर जोर क्यों दिया जा रहा है? वीडियो में सामने आए बयान मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित रूप से संबंधित अधिकारी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्हें आरटीआई की धाराओं का ज्ञान नहीं है और “जैसा अधिकारी कहेंगे वैसा ही होगा।” यदि यह कथन सत्य है, तो यह सूचना के अधिकार अधिनियम के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। पारदर्शिता पर उठते सवाल इस प्रकरण ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं: क्या टेंडर प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी रही? क्या सभी कार्य नियमानुसार पूर्ण हुए? क्या भुगतान कार्य पूर्ण होने के बाद ही किया गया? क्या सूचना देने में अनावश्यक आर्थिक भार डाला जा रहा है? आरटीआई अधिनियम की धारा 4(1)(b) के अनुसार, सार्वजनिक प्राधिकरणों को कई जानकारियां स्वप्रकाशित करनी होती हैं। ऐसे में दो वर्षों के टेंडर और भुगतान संबंधी विवरण पहले से सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध क्यों नहीं हैं — यह भी विचारणीय विषय है। जांच की मांग मामले को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग उठ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हुई हैं, तो जानकारी उपलब्ध कराने में हिचक क्यों? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या निष्पक्ष जांच कराई जाती है। #ChhattisgarhNews #RaipurNews #CGViral #BilaspurNews #Chhattisgarh

  • user_Sukdeo Kumar pandram
    Sukdeo Kumar pandram
    Bodla, Kabirdham
    🤝
    11 min ago
More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
  • बिक्री के लिए रखा था 24.840 किलो ग्राम गांजा, पुलिस को सुराग मिलते ही तत्काल गिरफ्तार किया,जानकारी के मुताबिक जशपुर में सिटी कोतवाली थाना के पुलिस टीम ने 28 फरवरी को शहर के बीचों बीच तेलीटोली आइडिया टॉवर के पास से एक किराए के घर में लगभग 24.840 किलो ग्राम गांजा बरामद किया गया बताया जा रहा है,दबिश देकर सुनील भगत उर्फ गोविंदा और रवि विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया।
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    बिक्री के लिए रखा था 24.840 किलो ग्राम गांजा, पुलिस को सुराग मिलते ही तत्काल गिरफ्तार किया,जानकारी के मुताबिक जशपुर में सिटी कोतवाली थाना के पुलिस टीम ने 28 फरवरी को शहर के बीचों बीच तेलीटोली आइडिया टॉवर के पास से एक किराए के घर में लगभग 24.840 किलो ग्राम गांजा बरामद किया गया बताया जा रहा है,दबिश देकर सुनील भगत उर्फ गोविंदा और रवि विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया।
    user_क्राइम कण्ट्रोल न्यूज़ सी.सी.एफ
    क्राइम कण्ट्रोल न्यूज़ सी.सी.एफ
    Media company सन्ना, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • किसानों को मिला होली का तोहफ़ा किसानों के खाते में अंतर की राशि एकमुश्त आहरित- वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील गुप्ता
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    किसानों को मिला होली का तोहफ़ा किसानों के खाते में अंतर की राशि एकमुश्त आहरित- वरिष्ठ भाजपा नेता सुनील गुप्ता
    user_Ibnul khan
    Ibnul khan
    Media house कांसबेल, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    20 hrs ago
  • Post by Dhananajy jangde
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    Post by Dhananajy jangde
    user_Dhananajy jangde
    Dhananajy jangde
    Advertising agency करतला, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला रिपोर्टर: मनोज श्रीवास्तव मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं। होली पर्व से पहले जनकपुर क्षेत्र में बैगा समाज द्वारा निभाई जाने वाली निकारि प्रथा के जरिए गांव की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा से गांव आपदा और महामारी से सुरक्षित रहता है। भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, जिसे गांव की सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश गांव में नहीं होता। जनकपुर निवासी पुजारी गरीबा मौर्य बताते हैं कि जब से गांव बसा है, तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। होली से पहले और डांग न गढ़ने के पूर्व यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। गांव के प्रत्येक चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पूरे गांव की सहभागिता रहती है। निकारि प्रथा हमारे गांव की बहुत पुरानी परंपरा है। इसे करने से गांव में बीमारी नहीं फैलती और सब लोग सुरक्षित रहते हैं। हम सब मिलकर इसमें सहयोग करते हैं। निकारि प्रथा के तहत बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है और बाद में उसे गांव की सीमा के बाहर, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इससे सारी विपत्तियां गांव से बाहर चली जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण बैगा को अखत, झाड़ू और अन्य पूजन सामग्री प्रदान करते हैं। यह परंपरा गांव को आपदा और बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है। यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है।” ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है। जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी लोक आस्थाएं समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं। आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास—निकारि प्रथा आज भी जनकपुर गांव की पहचान बनी हुई है।
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    मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला
रिपोर्टर: मनोज श्रीवास्तव
मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं। होली पर्व से पहले जनकपुर क्षेत्र में बैगा समाज द्वारा निभाई जाने वाली निकारि प्रथा के जरिए गांव की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा से गांव आपदा और महामारी से सुरक्षित रहता है। 
भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, जिसे गांव की सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश गांव में नहीं होता।
जनकपुर निवासी पुजारी गरीबा मौर्य बताते हैं कि जब से गांव बसा है, तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। होली से पहले और डांग न गढ़ने के पूर्व यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। गांव के प्रत्येक चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पूरे गांव की सहभागिता रहती है।
निकारि प्रथा हमारे गांव की बहुत पुरानी परंपरा है। इसे करने से गांव में बीमारी नहीं फैलती और सब लोग सुरक्षित रहते हैं। हम सब मिलकर इसमें सहयोग करते हैं।
निकारि प्रथा के तहत बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है और बाद में उसे गांव की सीमा के बाहर, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इससे सारी विपत्तियां गांव से बाहर चली जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण बैगा को अखत, झाड़ू और अन्य पूजन सामग्री प्रदान करते हैं।
यह परंपरा गांव को आपदा और बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है। यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है।”
ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है। जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी लोक आस्थाएं समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं।
आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास—निकारि प्रथा आज भी जनकपुर गांव की पहचान बनी हुई है।
    user_Manoj shrivastav
    Manoj shrivastav
    चिरमिरी, मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • 6 बजे से लेकर अभी तक, माहौल ऐसे ही निर्मित है, प्रशासन की टीम पहुंची हुई है, समझाइश किया जा रहा है, फिर भी कुछ उपद्रवी लोग के द्वारा शांति भंग करने का का प्रयास किया जा रहा, फिर भी मुस्लिम कमेटी के लोग अपने कब्रिस्तान में मिट्टी दफन करने के तैयारी में है, अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है, आगे देखते है क्या कुछ हो पाता है।*
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    6 बजे से लेकर अभी तक, माहौल ऐसे ही निर्मित है, प्रशासन की टीम पहुंची हुई है, समझाइश किया जा रहा है, फिर भी कुछ उपद्रवी लोग के द्वारा शांति भंग करने का का प्रयास किया जा रहा, फिर भी मुस्लिम कमेटी के लोग अपने कब्रिस्तान में मिट्टी दफन करने के तैयारी में है, अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है, आगे देखते है क्या कुछ हो पाता है।*
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
  • भारतमाला रोड़ पण्डरीपानी को बक्सा नहीं जा रहा है
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    भारतमाला रोड़ पण्डरीपानी को बक्सा नहीं जा रहा है
    user_Dj sund Devnarayan Pandripani
    Dj sund Devnarayan Pandripani
    Farmer Kunkuri, Jashpur•
    11 hrs ago
  • सन्ना खुटाटांगर में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।यह घटना सन्ना बस स्टैंड से डूमर कोना/छिछली रोड स्थित शंभू प्रसाद के घर के पास कि घटना बताया जा रहा है,डूमर कोना की ओर से आ रही तेज रफ्तार पिकअप ने सामने से मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी,बताया जा रहा है बाइक सवार परिवार के साथ सन्ना से अपने ससुराल हर्राडीपा स्थित सूखा पोखर जा रहा था,तभी यह हादसा हुआ,टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और चालक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के समय बाइक में पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चे सवार थे।
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    सन्ना खुटाटांगर में हुए भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।यह घटना सन्ना बस स्टैंड से डूमर कोना/छिछली रोड स्थित शंभू प्रसाद के घर के पास कि घटना बताया जा रहा है,डूमर कोना की ओर से आ रही तेज रफ्तार पिकअप ने सामने से मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी,बताया जा रहा है बाइक सवार परिवार के साथ सन्ना से अपने ससुराल हर्राडीपा स्थित सूखा पोखर जा रहा था,तभी यह हादसा हुआ,टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और चालक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के समय बाइक में पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चे सवार थे।
    user_क्राइम कण्ट्रोल न्यूज़ सी.सी.एफ
    क्राइम कण्ट्रोल न्यूज़ सी.सी.एफ
    Media company सन्ना, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • एमसीबी जिले के भरतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत घटई में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आज सड़कों पर दिखाई दिया। वर्षों से चल रहे गैरकानूनी उत्खनन से परेशान ग्रामीणों ने एकजुट होकर खदान स्थल पर उग्र आंदोलन करने पहुंचे लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया और खदान को बंद करा दिया। मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला के भरतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत घटई नदी में अवैध रेत उत्खनन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण खदान स्थल पर पहुंचे और तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए काम बंद करा दिया। ग्रामीणों ने जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह को मौके पर बुलाया। साथ ही ग्राम पंचायत घटई के सरपंच विजय सिंह और पंच भी घटनास्थल पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान खुलासा हुआ कि बिना वैध अनुमति के नदी में पोकलेन मशीन उतारकर रेत उत्खनन किया जा रहा था। मौके पर किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज मौजूद नहीं थे। अनियमितताएं सामने आने के बाद सरपंच विजय सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रति हाइवा वाहन पर 10 हजार रुपये और पोकलेन मशीन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही सभी वाहनों को ग्राम पंचायत परिसर में खड़ा कराने का आदेश दिया गया। सरपंच ने पोकलेन चालक को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि बिना अनुमति नदी में मशीन डालना पूरी तरह अवैध है और नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की सूचना माइनिंग अधिकारी, एसडीएम और जनकपुर थाना प्रभारी को दी गई। सूचना मिलते ही कुंवारपुर पुलिस चौकी प्रभारी रविनंद सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। जिला पंचायत सदस्य सुखमंती सिंह ने वाहनों को पुलिस के सुपुर्द करने की बात कही और ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की। अवैध रेत उत्खनन से नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है, पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
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    एमसीबी जिले के भरतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत घटई में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आज सड़कों पर दिखाई दिया। वर्षों से चल रहे गैरकानूनी उत्खनन से परेशान ग्रामीणों ने एकजुट होकर खदान स्थल पर उग्र आंदोलन करने पहुंचे  लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया और खदान को बंद करा दिया। 
मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला के भरतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत घटई नदी में अवैध रेत उत्खनन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण खदान स्थल पर पहुंचे और तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए काम बंद करा दिया।
ग्रामीणों ने जिला पंचायत सदस्य एवं कृषि स्थायी समिति की सभापति श्रीमती सुखमंती सिंह को मौके पर बुलाया। साथ ही ग्राम पंचायत घटई के सरपंच विजय सिंह और पंच भी घटनास्थल पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान खुलासा हुआ कि बिना वैध अनुमति के नदी में पोकलेन मशीन उतारकर रेत उत्खनन किया जा रहा था। मौके पर किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज मौजूद नहीं थे।
अनियमितताएं सामने आने के बाद सरपंच विजय सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रति हाइवा वाहन पर 10 हजार रुपये और पोकलेन मशीन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही सभी वाहनों को ग्राम पंचायत परिसर में खड़ा कराने का आदेश दिया गया।
सरपंच ने पोकलेन चालक को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि बिना अनुमति नदी में मशीन डालना पूरी तरह अवैध है और नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामले की सूचना माइनिंग अधिकारी, एसडीएम और जनकपुर थाना प्रभारी को दी गई। सूचना मिलते ही कुंवारपुर पुलिस चौकी प्रभारी रविनंद सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। जिला पंचायत सदस्य सुखमंती सिंह ने वाहनों को पुलिस के सुपुर्द करने की बात कही और ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की।
अवैध रेत उत्खनन से नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है, पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
    user_Manoj shrivastav
    Manoj shrivastav
    चिरमिरी, मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • होली त्योहार को देखते हुए कोतवाली थाना में किया गया आम नागरिकों के साथ बैठक शांतिकुन ढंग से होली त्यौहार को मनाने के लिए दिया गया हिदायत
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    होली त्योहार को देखते हुए कोतवाली थाना में किया गया आम नागरिकों के साथ बैठक शांतिकुन ढंग से होली त्यौहार को मनाने के लिए दिया गया हिदायत
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
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