भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला रिपोर्टर: मनोज श्रीवास्तव मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं। होली पर्व से पहले जनकपुर क्षेत्र में बैगा समाज द्वारा निभाई जाने वाली निकारि प्रथा के जरिए गांव की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा से गांव आपदा और महामारी से सुरक्षित रहता है। भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, जिसे गांव की सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश गांव में नहीं होता। जनकपुर निवासी पुजारी गरीबा मौर्य बताते हैं कि जब से गांव बसा है, तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। होली से पहले और डांग न गढ़ने के पूर्व यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। गांव के प्रत्येक चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पूरे गांव की सहभागिता रहती है। निकारि प्रथा हमारे गांव की बहुत पुरानी परंपरा है। इसे करने से गांव में बीमारी नहीं फैलती और सब लोग सुरक्षित रहते हैं। हम सब मिलकर इसमें सहयोग करते हैं। निकारि प्रथा के तहत बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है और बाद में उसे गांव की सीमा के बाहर, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इससे सारी विपत्तियां गांव से बाहर चली जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण बैगा को अखत, झाड़ू और अन्य पूजन सामग्री प्रदान करते हैं। यह परंपरा गांव को आपदा और बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है। यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है।” ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है। जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी लोक आस्थाएं समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं। आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास—निकारि प्रथा आज भी जनकपुर गांव की पहचान बनी हुई है।
भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला रिपोर्टर: मनोज श्रीवास्तव मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं। होली पर्व से पहले जनकपुर क्षेत्र में बैगा समाज द्वारा निभाई जाने वाली निकारि प्रथा के जरिए गांव की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा से गांव आपदा और महामारी से सुरक्षित रहता है। भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, जिसे गांव की सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश गांव में नहीं होता। जनकपुर निवासी पुजारी गरीबा मौर्य बताते हैं कि जब से गांव बसा है, तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। होली से पहले और डांग न गढ़ने के पूर्व यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। गांव के प्रत्येक चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पूरे गांव की सहभागिता रहती है। निकारि प्रथा हमारे गांव की बहुत पुरानी परंपरा है। इसे करने से गांव में बीमारी नहीं फैलती और सब लोग सुरक्षित रहते हैं। हम सब मिलकर इसमें सहयोग करते हैं। निकारि प्रथा के तहत बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है और बाद में उसे गांव की सीमा के बाहर, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इससे सारी विपत्तियां गांव से बाहर चली जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण बैगा को अखत, झाड़ू और अन्य पूजन सामग्री प्रदान करते हैं। यह परंपरा गांव को आपदा और बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है। यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है।” ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है। जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी लोक आस्थाएं समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं। आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास—निकारि प्रथा आज भी जनकपुर गांव की पहचान बनी हुई है।
- आरटीआई में बड़ा खुलासा: कृषि उपज मंडी मेन्द्राकला में पारदर्शिता पर सवाल अंबिकापुर, सरगुजा (छत्तीसगढ़)।l सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित कृषि उपज मंडी समिति मेन्द्रा कला एक बार फिर सुर्खियों में है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। क्या है पूरा मामला? आरटीआई आवेदक सुमित कुमार द्वारा 31 जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 तक के पिछले दो वर्षों की विभिन्न वित्तीय एवं प्रशासनिक जानकारियां मांगी गई थीं। आवेदन में निम्न प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी चाही गई थी: जारी किए गए सभी टेंडरों की प्रतिलिपि चयनित ठेकेदारों का विवरण मंडी का जोनल लेआउट/मैप कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) की प्रतियां जारी बिल एवं भुगतान चेक का विवरण एमबी बुक (मेजरमेंट बुक) की प्रतिलिपि किसानों को दी गई सब्सिडी का विवरण मंडी की संपत्ति एवं उपकरणों की सूची बैठक/निर्णय की प्रतियां आवेदक ने स्पष्ट रूप से अनुरोध किया था कि सूचना पेनड्राइव या ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए। 3615 पृष्ठों की जानकारी, 7230 रुपये शुल्क कार्यालय द्वारा जारी पत्र क्रमांक 533, दिनांक 26 फरवरी 2026 के अनुसार, चिन्हित दस्तावेजों की संख्या 3615 पृष्ठ (ए-4 साइज) बताई गई है। प्रति पृष्ठ 2 रुपये की दर से कुल 7230 रुपये जमा कराने को कहा गया है। यहां मुख्य प्रश्न यह उठता है कि जब सूचना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकती है, तब केवल छायाप्रति के माध्यम से ही देने पर जोर क्यों दिया जा रहा है? वीडियो में सामने आए बयान मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित रूप से संबंधित अधिकारी यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्हें आरटीआई की धाराओं का ज्ञान नहीं है और “जैसा अधिकारी कहेंगे वैसा ही होगा।” यदि यह कथन सत्य है, तो यह सूचना के अधिकार अधिनियम के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। पारदर्शिता पर उठते सवाल इस प्रकरण ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं: क्या टेंडर प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी रही? क्या सभी कार्य नियमानुसार पूर्ण हुए? क्या भुगतान कार्य पूर्ण होने के बाद ही किया गया? क्या सूचना देने में अनावश्यक आर्थिक भार डाला जा रहा है? आरटीआई अधिनियम की धारा 4(1)(b) के अनुसार, सार्वजनिक प्राधिकरणों को कई जानकारियां स्वप्रकाशित करनी होती हैं। ऐसे में दो वर्षों के टेंडर और भुगतान संबंधी विवरण पहले से सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध क्यों नहीं हैं — यह भी विचारणीय विषय है। जांच की मांग मामले को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग उठ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप हुई हैं, तो जानकारी उपलब्ध कराने में हिचक क्यों? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या निष्पक्ष जांच कराई जाती है। #ChhattisgarhNews #RaipurNews #CGViral #BilaspurNews #Chhattisgarh1
- पत्रकार: लखनपुर से भिटीकला रोड… क्या ये सड़क है या काले जहर का ढेर? सड़क किनारे खुलेआम कोयले का चूरा डंप किया जा रहा है — और जिम्मेदार विभाग मौन है! वीओ (वॉइस ओवर): Lakhanpur के भिटीकला रोड पर इन दिनों सड़क के किनारे भारी मात्रा में कोयले का चूरा डंप किया जा रहा है। धूल उड़ रही है, राहगीरों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है, और आसपास के घरों व खेतों पर काली परत जम रही है। सबसे बड़ा सवाल — 👉 क्या इस डंपिंग की कोई अनुमति है? 👉 क्या पर्यावरण नियमों का पालन किया जा रहा है? 👉 या फिर रात के अंधेरे में अवैध तरीके से कचरा फेंका जा रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज हवा चलने पर पूरा इलाका धुएं और धूल से भर जाता है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर सीधे प्रभावित हो रहे हैं। अगर यह कोयला चूरा किसी खदान या परिवहन से जुड़ा है, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही? प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। बाइट के लिए तीखे सवाल: इस स्थान पर कोयला चूरा डंप करने की अनुमति किसने दी? क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से NOC लिया गया है? सड़क किनारे डंपिंग से दुर्घटना की स्थिति बने तो जिम्मेदार कौन होगा? क्या राजस्व या पंचायत विभाग ने निरीक्षण किया है? क्लोजिंग (आक्रामक अंदाज): लखनपुर-भिटीकला रोड अब काली धूल से ढक चुकी है। विकास के नाम पर जहर फैलाने वालों पर कार्रवाई कब होगी? या फिर प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी घटना घटेगी?2
- Post by जुनैद खान jk न्यूज1
- राहुल सिंह राणा, 9407812522, 6260146722, शहडोल। जिले के अमलाई ओसीएम क्षेत्र में कार्यरत कोयला मजदूर सभा (HMS) ने ठेका मजदूरों के कथित शोषण के विरोध में सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। संघ ने आरकेटीसी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि आरकेटीसी कंपनी द्वारा मनमाने ढंग से आठ ठेका श्रमिकों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। उनका आरोप है कि जब मजदूर अपनी सुरक्षा, कार्य परिस्थितियों और अन्य समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं, तो कंपनी प्रबंधन उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देता है। इससे श्रमिकों में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है। एचएमएस ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले की जानकारी सब एरिया मैनेजर को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। संघ ने कंपनी प्रबंधन पर श्रमिक हितों की अनदेखी करने और श्रम कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। संघ पदाधिकारियों ने पूर्व की एक घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित लापरवाही के चलते डोजर और ऑपरेटर सहित एक कर्मचारी की डूबने से मौत हो गई थी। उनका कहना है कि इसके बावजूद कंपनी ने सुरक्षा व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं किए हैं। कोयला मजदूर सभा ने प्रशासन से मांग की है कि बर्खास्त किए गए श्रमिकों को तत्काल बहाल किया जाए, श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और कंपनी के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उचित कदम नहीं उठाए गए, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा.1
- वन परिक्षेत्र खन्नौधी के ग्राम बदरा में एक अनोखी घटना सामने आई। जंगल से भटककर आया एक हिरण कुत्तों के झुंड के हमले से घायल हो गया। अपनी जान बचाने के लिए हिरण गांव की ओर भागा और एक किसान के खेत में रखी पाइप के अंदर जाकर छिप गया। बताया जा रहा है कि कुत्ते लगातार उसका पीछा कर रहे थे, जिससे वह बुरी तरह घबरा गया था। खेत के मालिक किसान अमित सिंह चंदेल ने जब यह दृश्य देखा तो बिना देर किए वन विभाग को सूचना दी। उन्होंने तुरंत वन विभाग के डिप्टी रेंजर बहादुर सिंह को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही डिप्टी रेंजर बहादुर सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घायल हिरण का सुरक्षित रेस्क्यू किया। प्राथमिक देखरेख के बाद उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया। साथ ही मौके पर मौजूद चौकीदारों को हिरण पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए। पूरे दिन उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई। ग्रामीणों ने किसान अमित सिंह चंदेल की सतर्कता और वन विभाग की तत्परता की सराहना की। समय पर की गई सूचना और कार्रवाई से एक बेजुबान वन्य जीव की जान बच3
- देवसर जियावन में पकड़ा गया बच्चा चोर ग्राम वासियों का आरोप1
- स्लग: पारंपरिक ‘निकारि’ प्रथा स्थान: मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला रिपोर्टर: मनोज श्रीवास्तव मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं। होली पर्व से पहले जनकपुर क्षेत्र में बैगा समाज द्वारा निभाई जाने वाली निकारि प्रथा के जरिए गांव की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा से गांव आपदा और महामारी से सुरक्षित रहता है। भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, जिसे गांव की सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश गांव में नहीं होता। जनकपुर निवासी पुजारी गरीबा मौर्य बताते हैं कि जब से गांव बसा है, तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। होली से पहले और डांग न गढ़ने के पूर्व यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। गांव के प्रत्येक चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पूरे गांव की सहभागिता रहती है। निकारि प्रथा हमारे गांव की बहुत पुरानी परंपरा है। इसे करने से गांव में बीमारी नहीं फैलती और सब लोग सुरक्षित रहते हैं। हम सब मिलकर इसमें सहयोग करते हैं। निकारि प्रथा के तहत बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है और बाद में उसे गांव की सीमा के बाहर, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इससे सारी विपत्तियां गांव से बाहर चली जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण बैगा को अखत, झाड़ू और अन्य पूजन सामग्री प्रदान करते हैं। यह परंपरा गांव को आपदा और बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है। यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है।” ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है। जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी लोक आस्थाएं समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं। आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास—निकारि प्रथा आज भी जनकपुर गांव की पहचान बनी हुई है।4
- कटनी जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक ही मोटरसाइकिल पर 9 लोग सवार दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि चालक सहित कई बच्चे और महिलाएं एक साथ बाइक पर बैठे हैं, जिससे गंभीर सड़क हादसे की आशंका बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह वीडियो कटनी जिले का बताया जा रहा है। बिना हेलमेट और ओवरलोडिंग के साथ चल रही बाइक ट्रैफिक नियमों की खुली धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। इतनी बड़ी संख्या में सवारी बैठाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सभी की जान को खतरे में डालने जैसा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे में बदल सकती है। एक छोटी सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, खासकर जब वाहन पर बच्चे सवार हों। फिलहाल वीडियो के आधार पर पुलिस कार्रवाई की मांग उठ रही है। यदि यह मामला कटनी का है, तो स्थानीय पुलिस को जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।1
- शहडोल। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 18/23 में इन दिनों नालियों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि नालियों का गंदा पानी सड़कों पर खुलेआम बह रहा है, जिससे स्थानीय रहवासियों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गंदे पानी के कारण सड़कों पर फिसलन और दुर्गंध फैल रही है, वहीं मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से बीमारी फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है। लगातार अनदेखी से नाराज नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब हालात यह हैं कि स्थानीय लोग समस्या को उजागर करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। क्षेत्र के कई लोगों ने पुराने आर. टी. ओ. के सामने नालियों के ओवरफ्लो का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करना शुरू कर दिया है, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित हो सके। रहवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से जल्द से जल्द नालियों की सफाई और स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि वायरल हो रहे वीडियो के बाद नगर पालिका प्रशासन कब जागता है और वार्डवासियों को इस गंभीर समस्या से राहत मिलती है।1