खून से लथपथ हिरण पहुंचा गांव, किसान ने दिखाई इंसानियत.... वन परिक्षेत्र खन्नौधी के ग्राम बदरा में एक अनोखी घटना सामने आई। जंगल से भटककर आया एक हिरण कुत्तों के झुंड के हमले से घायल हो गया। अपनी जान बचाने के लिए हिरण गांव की ओर भागा और एक किसान के खेत में रखी पाइप के अंदर जाकर छिप गया। बताया जा रहा है कि कुत्ते लगातार उसका पीछा कर रहे थे, जिससे वह बुरी तरह घबरा गया था। खेत के मालिक किसान अमित सिंह चंदेल ने जब यह दृश्य देखा तो बिना देर किए वन विभाग को सूचना दी। उन्होंने तुरंत वन विभाग के डिप्टी रेंजर बहादुर सिंह को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही डिप्टी रेंजर बहादुर सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घायल हिरण का सुरक्षित रेस्क्यू किया। प्राथमिक देखरेख के बाद उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया। साथ ही मौके पर मौजूद चौकीदारों को हिरण पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए। पूरे दिन उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई। ग्रामीणों ने किसान अमित सिंह चंदेल की सतर्कता और वन विभाग की तत्परता की सराहना की। समय पर की गई सूचना और कार्रवाई से एक बेजुबान वन्य जीव की जान बच
खून से लथपथ हिरण पहुंचा गांव, किसान ने दिखाई इंसानियत.... वन परिक्षेत्र खन्नौधी के ग्राम बदरा में एक अनोखी घटना सामने आई। जंगल से भटककर आया एक हिरण कुत्तों के झुंड के हमले से घायल हो गया। अपनी जान बचाने के लिए हिरण गांव की ओर भागा और एक किसान के खेत में रखी पाइप के अंदर जाकर छिप गया। बताया जा रहा है कि कुत्ते लगातार उसका पीछा
कर रहे थे, जिससे वह बुरी तरह घबरा गया था। खेत के मालिक किसान अमित सिंह चंदेल ने जब यह दृश्य देखा तो बिना देर किए वन विभाग को सूचना दी। उन्होंने तुरंत वन विभाग के डिप्टी रेंजर बहादुर सिंह को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही डिप्टी रेंजर बहादुर सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घायल हिरण का सुरक्षित रेस्क्यू किया।
प्राथमिक देखरेख के बाद उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया। साथ ही मौके पर मौजूद चौकीदारों को हिरण पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए। पूरे दिन उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई। ग्रामीणों ने किसान अमित सिंह चंदेल की सतर्कता और वन विभाग की तत्परता की सराहना की। समय पर की गई सूचना और कार्रवाई से एक बेजुबान वन्य जीव की जान बच
- वन परिक्षेत्र खन्नौधी के ग्राम बदरा में एक अनोखी घटना सामने आई। जंगल से भटककर आया एक हिरण कुत्तों के झुंड के हमले से घायल हो गया। अपनी जान बचाने के लिए हिरण गांव की ओर भागा और एक किसान के खेत में रखी पाइप के अंदर जाकर छिप गया। बताया जा रहा है कि कुत्ते लगातार उसका पीछा कर रहे थे, जिससे वह बुरी तरह घबरा गया था। खेत के मालिक किसान अमित सिंह चंदेल ने जब यह दृश्य देखा तो बिना देर किए वन विभाग को सूचना दी। उन्होंने तुरंत वन विभाग के डिप्टी रेंजर बहादुर सिंह को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही डिप्टी रेंजर बहादुर सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घायल हिरण का सुरक्षित रेस्क्यू किया। प्राथमिक देखरेख के बाद उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया। साथ ही मौके पर मौजूद चौकीदारों को हिरण पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए। पूरे दिन उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई। ग्रामीणों ने किसान अमित सिंह चंदेल की सतर्कता और वन विभाग की तत्परता की सराहना की। समय पर की गई सूचना और कार्रवाई से एक बेजुबान वन्य जीव की जान बच3
- राहुल सिंह राणा, 9407812522, 6260146722 शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। होली जैसे सांस्कृतिक पर्व के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों द्वारा कथित रूप से अश्लील और आपत्तिजनक गानों पर डांस किए जाने के वीडियो सामने आए हैं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान “लवडिया लंदन से लाएंगे”, “मुहवा डाल के चदरिया” और “लहरिया लूटा ए राजा” जैसे गानों पर छात्रों ने खुलेआम नृत्य किया। शिक्षा के केंद्र माने जाने वाले संस्थान में इस तरह के माहौल को लेकर अभिभावकों और आम नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन इस तरह के वीडियो सामने आने से संस्थान की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे होली का उत्साह बता रहे हैं, तो कई इसे अनुशासनहीनता मान रहे हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय नहीं करने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सांस्कृतिक आयोजनों की अनुमति देते समय उनकी गरिमा और मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाना जरूरी है, ताकि शैक्षणिक वातावरण प्रभावित न हो। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन कोई कदम उठाता है, तो आगे स्थिति स्पष्ट हो1
- Post by जुनैद खान jk न्यूज1
- Post by Shuru User1
- सतना। में होली के त्योहार के मद्देनजर शहर में नो एंट्री का एक घंटे समय बढ़ाया गया। ११ बजे के बाद नो एंट्री शुरू होगी। शहर के ट्रांसपोर्ट नगर प्वाइंट में ASI लाखन पंडा सहित ट्रैफिक स्टाफ मौके पर मौजूद।1
- मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला रिपोर्टर: मनोज श्रीवास्तव मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं। होली पर्व से पहले जनकपुर क्षेत्र में बैगा समाज द्वारा निभाई जाने वाली निकारि प्रथा के जरिए गांव की सुरक्षा और खुशहाली की कामना की जाती है। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस परंपरा से गांव आपदा और महामारी से सुरक्षित रहता है। भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पूर्व निकारि प्रथा पूरे विधि-विधान से निभाई जाती है। यह परंपरा बैगा समाज की आस्था से जुड़ी है, जिसे गांव की सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश गांव में नहीं होता। जनकपुर निवासी पुजारी गरीबा मौर्य बताते हैं कि जब से गांव बसा है, तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है। होली से पहले और डांग न गढ़ने के पूर्व यह विशेष अनुष्ठान किया जाता है। गांव के प्रत्येक चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, जिसमें पूरे गांव की सहभागिता रहती है। निकारि प्रथा हमारे गांव की बहुत पुरानी परंपरा है। इसे करने से गांव में बीमारी नहीं फैलती और सब लोग सुरक्षित रहते हैं। हम सब मिलकर इसमें सहयोग करते हैं। निकारि प्रथा के तहत बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है और बाद में उसे गांव की सीमा के बाहर, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है। मान्यता है कि इससे सारी विपत्तियां गांव से बाहर चली जाती हैं। इस दौरान ग्रामीण बैगा को अखत, झाड़ू और अन्य पूजन सामग्री प्रदान करते हैं। यह परंपरा गांव को आपदा और बीमारियों से बचाने के लिए की जाती है। यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है।” ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है। जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी लोक आस्थाएं समाज को एक सूत्र में बांधे हुए हैं। आस्था, परंपरा और सामूहिक विश्वास—निकारि प्रथा आज भी जनकपुर गांव की पहचान बनी हुई है।1
- कटनी में महिला सुरक्षा की बड़ी पहल: “पुलिस दीदी” बनी बेटियों की ढाल, गांव-गांव पहुंचेगी सुरक्षा की पाठशाला 📍 कटनी। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला पुलिस ने एक सराहनीय और दूरगामी पहल की शुरुआत की है। गुरुवार को पुलिस कंट्रोल रूम से “पुलिस दीदी” कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा ने किया। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष डेहरिया तथा महिला थाना प्रभारी वर्षा सोनकर भी मौजूद रहीं। हरी झंडी के साथ निकला जागरूकता रथ एसपी ने विशेष जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह वाहन जिले के स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और कानून संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराएगा। “पुलिस दीदी” क्या सिखाएगी? इस कार्यक्रम के माध्यम से बेटियों को मिलेगा— आत्मरक्षा के व्यावहारिक प्रशिक्षण साइबर अपराधों से बचाव के उपाय महिला अपराधों की रिपोर्टिंग की सरल प्रक्रिया 24×7 हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी आपातकालीन सहायता प्रणाली का उपयोग डर नहीं, भरोसा पैदा करना है उद्देश्य पुलिस अधिकारियों ने बताया कि “पुलिस दीदी” का मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास और पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाना है। ताकि किसी भी प्रकार की समस्या या अपराध की स्थिति में वे तुरंत और बेझिझक सहायता ले सकें। जिला पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि इस पहल को सफल बनाने में सहयोग करें और जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। कटनी में शुरू हुआ यह अभियान महिला सुरक्षा को लेकर एक मजबूत संदेश दे रहा है—अब बेटियां अकेली नहीं, उनके साथ है “पुलिस दीदी”।3
- कटनी जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक ही मोटरसाइकिल पर 9 लोग सवार दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि चालक सहित कई बच्चे और महिलाएं एक साथ बाइक पर बैठे हैं, जिससे गंभीर सड़क हादसे की आशंका बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह वीडियो कटनी जिले का बताया जा रहा है। बिना हेलमेट और ओवरलोडिंग के साथ चल रही बाइक ट्रैफिक नियमों की खुली धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। इतनी बड़ी संख्या में सवारी बैठाना न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सभी की जान को खतरे में डालने जैसा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे में बदल सकती है। एक छोटी सी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, खासकर जब वाहन पर बच्चे सवार हों। फिलहाल वीडियो के आधार पर पुलिस कार्रवाई की मांग उठ रही है। यदि यह मामला कटनी का है, तो स्थानीय पुलिस को जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।1