जालौन जिले के कुठोंद में पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था पर सवालिया निशान झमाझम बारिश ने खोली प्रशासनिक दावों की पोल, तालाब में तब्दील हुआ कस्बा कुठौंद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय और मुख्य बाजार में घुसा पानी, मरीज, दुकानदार व स्कूली बच्चे घंटों रहे परेशान; गंदगी से पटे नाले बने जलभराव की बड़ी वजह कुठौंद (जालौन)। बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश ने जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई और तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर कस्बा कुठौंद की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की हकीकत भी सबके सामने ला दी। महज कुछ घंटों की तेज बारिश ने पूरे कस्बे को पानी-पानी कर दिया। सड़कें तालाब में बदल गईं, मुख्य बाजार जलमग्न हो गया और सरकारी कार्यालयों से लेकर अस्पतालों तक में पानी भर गया। लोगों को घंटों तक जलभराव के बीच आवागमन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सबसे चिंताजनक स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुठौंद में देखने को मिली, जहां अस्पताल परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया। इलाज कराने आए मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और उनके परिजनों को गंदे पानी के बीच होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ा। अस्पताल परिसर में पानी भरने से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती दिखाई दीं और मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वहीं पशु चिकित्सालय कुठौंद भी जलभराव की चपेट में आ गया। अस्पताल परिसर ही नहीं, बल्कि भवन के अंदर तक पानी भर गया। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रवि कुमार तिवारी ने बताया कि बारिश का पानी अस्पताल के कमरों में घुस गया, जिससे कार्यालय में रखी महत्वपूर्ण फाइलें और सरकारी अभिलेख भी भीग गए। उन्होंने कहा कि जलभराव के कारण अस्पताल का कार्य भी प्रभावित हुआ। कस्बे की मुख्य बाजार वाली गली में घुटनों तक पानी भर जाने से दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हुआ। खरीदारी करने आए लोगों को पानी के बीच होकर गुजरना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी, जबकि कई स्थानों पर लोग गिरने से बाल-बाल बचे। बारिश के समय विद्यालयों की छुट्टी होने पर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे जलभराव के बीच घर लौटते दिखाई दिए। बच्चों ने कहा कि हर वर्ष बारिश के समय यही हालात बन जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें गंदे पानी से होकर स्कूल आने-जाने की मजबूरी न झेलनी पड़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे किनारे बना नाला लंबे समय से गंदगी, कचरे और सिल्ट से पूरी तरह पटा हुआ है। नियमित सफाई न होने के कारण बारिश का पानी निकासी नहीं पा सका और देखते ही देखते पूरा कस्बा जलमग्न हो गया। नागरिकों का आरोप है कि यदि समय रहते नालों की सफाई कराई जाती तो आज यह विकराल स्थिति पैदा नहीं होती। बारिश के बाद पूरे कस्बे में जलभराव की तस्वीरें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहीं। लोगों का कहना है कि हर वर्ष लाखों रुपये सफाई और जल निकासी व्यवस्था के नाम पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है। नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि हाईवे किनारे नालों की तत्काल सफाई कराकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में आम जनता, मरीजों, व्यापारियों और स्कूली बच्चों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
जालौन जिले के कुठोंद में पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था पर सवालिया निशान झमाझम बारिश ने खोली प्रशासनिक दावों की पोल, तालाब में तब्दील हुआ कस्बा कुठौंद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय और मुख्य बाजार में घुसा पानी, मरीज, दुकानदार व स्कूली बच्चे घंटों रहे परेशान; गंदगी से पटे नाले बने जलभराव की बड़ी वजह कुठौंद (जालौन)। बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश ने जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई और तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर कस्बा कुठौंद की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की हकीकत भी सबके सामने ला दी। महज कुछ घंटों की तेज बारिश ने पूरे कस्बे को पानी-पानी कर दिया। सड़कें तालाब में बदल गईं, मुख्य बाजार जलमग्न हो गया और सरकारी कार्यालयों से लेकर अस्पतालों तक में पानी भर गया। लोगों को घंटों तक जलभराव के बीच आवागमन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सबसे चिंताजनक स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुठौंद में देखने को मिली, जहां अस्पताल परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया। इलाज कराने आए मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और उनके परिजनों को गंदे पानी के बीच होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ा। अस्पताल परिसर में पानी भरने से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती दिखाई दीं और मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वहीं पशु चिकित्सालय कुठौंद भी जलभराव की चपेट में आ गया। अस्पताल परिसर ही नहीं, बल्कि भवन के अंदर तक पानी भर गया। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रवि कुमार तिवारी ने बताया कि बारिश का पानी अस्पताल के कमरों में घुस गया, जिससे कार्यालय में रखी महत्वपूर्ण फाइलें और सरकारी अभिलेख भी भीग गए। उन्होंने कहा कि जलभराव के कारण अस्पताल का कार्य भी प्रभावित हुआ। कस्बे की मुख्य बाजार वाली गली में घुटनों तक पानी भर जाने से दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हुआ। खरीदारी करने आए लोगों को पानी के बीच होकर गुजरना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी, जबकि कई स्थानों पर लोग गिरने से बाल-बाल बचे। बारिश के समय विद्यालयों की छुट्टी होने पर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे जलभराव के बीच घर लौटते दिखाई दिए। बच्चों ने कहा कि हर वर्ष बारिश के समय यही हालात बन जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें गंदे पानी से होकर स्कूल आने-जाने की मजबूरी न झेलनी पड़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे किनारे बना नाला लंबे समय से गंदगी, कचरे और सिल्ट से पूरी तरह पटा हुआ है। नियमित सफाई न होने के कारण बारिश का पानी निकासी नहीं पा सका और देखते ही देखते पूरा कस्बा जलमग्न हो गया। नागरिकों का आरोप है कि यदि समय रहते नालों की सफाई कराई जाती तो आज यह विकराल स्थिति पैदा नहीं होती। बारिश के बाद पूरे कस्बे में जलभराव की तस्वीरें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहीं। लोगों का कहना है कि हर वर्ष लाखों रुपये सफाई और जल निकासी व्यवस्था के नाम पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है। नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि हाईवे किनारे नालों की तत्काल सफाई कराकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में आम जनता, मरीजों, व्यापारियों और स्कूली बच्चों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
- जालौन)। जनपद उरई के मोहल्ला बघौरा बाईपास क्षेत्र में किसी बात को लेकर युवकों के बीच कहासुनी हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में जमकर गाली-गलौज और मारपीट शुरू हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने में जुट गई। पुलिस मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर रही है।1
- रेलवे महाप्रबंधक ने किया कोंच स्टेशन का निरीक्षण, बेहतर व्यवस्थाओं पर टीम को 20 हजार का पुरस्कार कोंच (जालौन)। उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज के महाप्रबंधक नरेन्द्र पाल सिंह ने बुधवार को झांसी मंडल के डीआरएम अनिरुद्ध सिंह के साथ कोंच रेलवे स्टेशन का व्यापक निरीक्षण किया। विशेष निरीक्षण यान से पहुंचे महाप्रबंधक ने स्टेशन परिसर, यात्री सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, माल गोदाम तथा कोंच-एट रेलवे ट्रैक का बारीकी से जायजा लिया। स्टेशन पर सफाई और सुरक्षा व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलने पर उन्होंने कोंच स्टेशन की पूरी टीम को प्रोत्साहन स्वरूप 20 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कोंच रेलवे लाइन पर एब्सोल्यूट ब्लॉक सिस्टम लागू कर दिया गया है, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुरक्षित होगा। इसके अलावा, निर्माणाधीन गुड शेड का काम बारिश का मौसम समाप्त होते ही तेज किया जाएगा, जिसके आगामी तीन माह में पूरा होने की उम्मीद है। महाप्रबंधक ने स्थानीय लोगों द्वारा उठाई गई मोक्ष धाम रेलवे गेट की समस्या पर चर्चा करते हुए समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रेन के आगमन के समय सुरक्षा की दृष्टि से गेट बंद रखना अनिवार्य है। इस निरीक्षण को क्षेत्र में यात्री सुविधाओं और विकास कार्यों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।1
- आज अंकलेश्वर में बारिश चालू हो गई है बारिश देर रात तक चलेगी कृपया करके अपने-अपने घर में रहे और सुरक्षित रहे क्योंकि बारिश में भीगने के कारण सर्दी जुकाम हो सकता है और बीमार पड़ सकते हो आज बहुत तेज बारिश हो रही है1
- 🎤jalaun : भाकियू की मासिक बैठक में किसानों की समस्याओं पर मंथन, SDM को सौंपा ज्ञापन🖥️ जालौन में किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन तहसील जालौन की मासिक बैठक मंगलवार को गल्ला मंडी सभागार में आयोजित हुई। बैठक में किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के उपरांत भाकियू पदाधिकारी एवं किसान तहसील पहुंचे और एसडीएम राकेश सोनी को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। तहसील अध्यक्ष देव सिंह पटेल के नेतृत्व में किसानों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित नलकूपों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। किसानों ने कम से कम 20 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की। साथ ही ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में घूम रहे अन्ना पशुओं को गोशालाओं में संरक्षित कराने की मांग उठाई। किसानों ने बताया कि गल्ला मंडी स्थित पीसीएफ की खाद की दुकान बंद होने से किसान खाद के लिए परेशान हैं। उन्होंने दुकान को पुनः चालू कराने की मांग की। मृतक किसानों के आश्रितों के नाम खतौनी न होने के कारण खाद न मिल पाने की समस्या का उचित समाधान कराने की भी मांग की गई। इसके अलावा भदवां, वीरपुरा एवं जीपुरा माइनरों की टेल तक खुदाई न होने से किसानों को सिंचाई में परेशानी हो रही है। किसानों ने माइनरों की टेल तक खुदाई कराने की मांग की। वहीं नगर के मौजा मनकापुर जालौन अंदर हद स्थित नाले का कुछ हिस्सा पक्का होने के बाद अधूरा पड़े निर्माण को पूरा कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई। इस दौरान रामनरेश याज्ञिक, भगवानदास, रामराजा पटेल, शाहरूख, संतोष पटेल, लक्ष्मीनारायण, विनोद निरंजन सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने संबंधित समस्याओं का शीघ्र समाधान कराए जाने की मांग की। रिपोर्ट-जनपद जालौन से soni news के लिए अमित कुमार।2
- जालौन में रिमझिम बारिश के बीच निकले चेहल्लुम के ताजिया जालौन। रिमझिम बारिश भी मुहम्मद के दीवानों के जज़्बे को नहीं रोक सकी। जालौन नगर में चेहल्लुम के अवसर पर परंपरागत ताजिया जुलूस पूरी अकीदत और अनुशासन के साथ निकाला गया। हल्की बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूस में शामिल हुए और या हुसैन की सदाओं के बीच मातम कर इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। नगर के विभिन्न मोहल्लों से ताजिए निर्धारित समय पर निकले और पारंपरिक मार्गों से होते हुए अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंचे। पूरे रास्ते लोगों ने ताजियों का स्वागत किया। बारिश के दौरान भी अकीदतमंदों का उत्साह देखते ही बन रहा था। युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने पूरे जोश और श्रद्धा के साथ जुलूस में भाग लिया। जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार भ्रमण कर स्थिति पर नजर बनाए रहे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। यातायात व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए। रिमझिम बारिश के बीच निकला चेहल्लुम का यह ताजिया जुलूस आपसी भाईचारे, धार्मिक आस्था और अनुशासन का संदेश देता नजर आया। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अकीदतमंदों की श्रद्धा और समर्पण में कोई कमी नहीं दिखी, जिसने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।1
- स्थान -जालौन रिपोर्टर -भीम राजावत Mo. 9628800458 स्लग -जालौन में सड़क किनारे कूड़े का अंबार, राहगीर और छात्र-छात्राएं परेशान बारिश के बाद सड़न और भीषण बदबू से निकलना मुश्किल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल एंकर -जालौन। नगर पालिका जालौन की लापरवाही के चलते सड़क किनारे पड़े कूड़े से राहगीरों और छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जालौन नगर से करीब एक किलोमीटर दूर एमआरएफ सेंटर के पास सड़क किनारे कूड़े का ढेर लगा हुआ है। बारिश के बाद कूड़े में सड़न शुरू होने से आसपास के क्षेत्र में भीषण बदबू फैल रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 5 हजार से 10 हजार लोग आवागमन करते हैं। सड़क किनारे कूड़ा पड़े होने के कारण राहगीरों, बाइक सवारों और स्कूली छात्र-छात्राओं को बदबू के बीच से गुजरना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि बदबू के चलते कई लोग बीमार भी हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि एमआरएफ सेंटर के पास स्थित आरएस स्कूल और एक अन्य स्कूल के छात्र-छात्राओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं जालौन से करीब एक किलोमीटर दूर पीटीएल क्षेत्र में भी करीब 50 ट्रॉली कूड़ा जमा होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, समस्या को लेकर नगर पालिका में कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि आरआई अनुज कुमार और ईओ सुशील कुमार की ओर से सड़क पर पड़े कूड़े के ऊपर मिट्टी डलवाई गई, लेकिन बारिश के बाद मिट्टी के नीचे दबा कूड़ा सड़ने लगा, जिससे बदबू और बढ़ गई। अब सवाल यह है कि सड़क किनारे कूड़े का स्थायी निस्तारण कब होगा और राहगीरों व स्कूली बच्चों को इस भीषण बदबू से कब राहत मिलेगी? स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से जल्द सफाई कराकर कूड़े का उचित निस्तारण कराने की मांग की है। बाइट -RS स्कूल की प्रधानाध्यापका बाईट छात्र बाइट -छात्राये बाइट स्थान -जालौन रिपोर्टर -भीम राजावत Mo. 9628800458 स्लग -जालौन में सड़क किनारे कूड़े का अंबार, राहगीर और छात्र-छात्राएं परेशान बारिश के बाद सड़न और भीषण बदबू से निकलना मुश्किल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल एंकर -जालौन। नगर पालिका जालौन की लापरवाही के चलते सड़क किनारे पड़े कूड़े से राहगीरों और छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जालौन नगर से करीब एक किलोमीटर दूर एमआरएफ सेंटर के पास सड़क किनारे कूड़े का ढेर लगा हुआ है। बारिश के बाद कूड़े में सड़न शुरू होने से आसपास के क्षेत्र में भीषण बदबू फैल रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 5 हजार से 10 हजार लोग आवागमन करते हैं। सड़क किनारे कूड़ा पड़े होने के कारण राहगीरों, बाइक सवारों और स्कूली छात्र-छात्राओं को बदबू के बीच से गुजरना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि बदबू के चलते कई लोग बीमार भी हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि एमआरएफ सेंटर के पास स्थित आरएस स्कूल और एक अन्य स्कूल के छात्र-छात्राओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं जालौन से करीब एक किलोमीटर दूर पीटीएल क्षेत्र में भी करीब 50 ट्रॉली कूड़ा जमा होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, समस्या को लेकर नगर पालिका में कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि आरआई अनुज कुमार और ईओ सुशील कुमार की ओर से सड़क पर पड़े कूड़े के ऊपर मिट्टी डलवाई गई, लेकिन बारिश के बाद मिट्टी के नीचे दबा कूड़ा सड़ने लगा, जिससे बदबू और बढ़ गई। अब सवाल यह है कि सड़क किनारे कूड़े का स्थायी निस्तारण कब होगा और राहगीरों व स्कूली बच्चों को इस भीषण बदबू से कब राहत मिलेगी? स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से जल्द सफाई कराकर कूड़े का उचित निस्तारण कराने की मांग की है। बाइट -RS स्कूल की प्रधानाध्यापका बाईट छात्र बाइट -छात्राये बाइट3
- जालौन भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्रा पहुंचे जालौन, भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रथम आगमन पर युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का किया जोरदार स्वागत भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्रा पहुंचे जालौन, भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रथम आगमन पर युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का किया जोरदार स्वागत, कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष को गदा भेंटकर बुलडोजर से पहनाई माला, बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार कालपी में किया गया रोहित मिश्रा का भव्य स्वागत, 2027 के चुनाव से पहले युवाओं को एकजुट करने के लिए पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष, जालौन के कालपी नगर में प्रदेश अध्यक्ष का किया गया स्वागत।6
- जालौन : 2 घंटे की बारिश में डूबा कुठौंद! PHC, बाजार, स्कूल सब पानी में, प्रशासन के दावे फैल!!. झमाझम बारिश ने खोली प्रशासनिक दावों की पोल, तालाब में तब्दील हुआ कस्बा कुठौंद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय और मुख्य बाजार में घुसा पानी, मरीज, दुकानदार व स्कूली बच्चे घंटों रहे परेशान; गंदगी से पटे नाले बने जलभराव की बड़ी वजह कुठौंद (जालौन)। बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश ने जहां लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई और तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर कस्बा कुठौंद की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की हकीकत भी सबके सामने ला दी। महज कुछ घंटों की तेज बारिश ने पूरे कस्बे को पानी-पानी कर दिया। सड़कें तालाब में बदल गईं, मुख्य बाजार जलमग्न हो गया और सरकारी कार्यालयों से लेकर अस्पतालों तक में पानी भर गया। लोगों को घंटों तक जलभराव के बीच आवागमन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सबसे चिंताजनक स्थिति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुठौंद में देखने को मिली, जहां अस्पताल परिसर पूरी तरह जलमग्न हो गया। इलाज कराने आए मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और उनके परिजनों को गंदे पानी के बीच होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ा। अस्पताल परिसर में पानी भरने से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती दिखाई दीं और मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वहीं पशु चिकित्सालय कुठौंद भी जलभराव की चपेट में आ गया। अस्पताल परिसर ही नहीं, बल्कि भवन के अंदर तक पानी भर गया। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रवि कुमार तिवारी ने बताया कि बारिश का पानी अस्पताल के कमरों में घुस गया, जिससे कार्यालय में रखी महत्वपूर्ण फाइलें और सरकारी अभिलेख भी भीग गए। उन्होंने कहा कि जलभराव के कारण अस्पताल का कार्य भी प्रभावित हुआ। कस्बे की मुख्य बाजार वाली गली में घुटनों तक पानी भर जाने से दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हुआ। खरीदारी करने आए लोगों को पानी के बीच होकर गुजरना पड़ा। दोपहिया वाहन चालकों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी, जबकि कई स्थानों पर लोग गिरने से बाल-बाल बचे। बारिश के समय विद्यालयों की छुट्टी होने पर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे जलभराव के बीच घर लौटते दिखाई दिए। बच्चों ने कहा कि हर वर्ष बारिश के समय यही हालात बन जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें गंदे पानी से होकर स्कूल आने-जाने की मजबूरी न झेलनी पड़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे किनारे बना नाला लंबे समय से गंदगी, कचरे और सिल्ट से पूरी तरह पटा हुआ है। नियमित सफाई न होने के कारण बारिश का पानी निकासी नहीं पा सका और देखते ही देखते पूरा कस्बा जलमग्न हो गया। नागरिकों का आरोप है कि यदि समय रहते नालों की सफाई कराई जाती तो आज यह विकराल स्थिति पैदा नहीं होती। बारिश के बाद पूरे कस्बे में जलभराव की तस्वीरें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहीं। लोगों का कहना है कि हर वर्ष लाखों रुपये सफाई और जल निकासी व्यवस्था के नाम पर खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है। नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि हाईवे किनारे नालों की तत्काल सफाई कराकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में आम जनता, मरीजों, व्यापारियों और स्कूली बच्चों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।1