चिकित्सकों की हड़ताल से चरमराई सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था, आपातकालीन सेवा जारी प्रणव कुमार हरपुरी, संपादक, H2H News, पटना (बिहार) : बिहार में चिकित्सकों की हड़ताल का व्यापक असर शनिवार को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दिखाई दिया। राज्य के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर ओपीडी समेत नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे मरीजों को चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कई मरीजों को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा, जबकि जरूरतमंद मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने से मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ गईं। खासकर ग्रामीण इलाकों से लंबी दूरी तय कर सरकारी अस्पताल पहुंचे मरीजों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण रही। जांच, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को हड़ताल के कारण सेवाएं प्रभावित होने की जानकारी मिली। इसके बाद कई परिवारों ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज कराया। निजी अस्पतालों में इलाज कराने के कारण मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। दवा, जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की बढ़ी लागत को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। मरीजों के परिजनों का कहना था कि सरकारी अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ता है, जिनके लिए निजी अस्पतालों का खर्च वहन करना आसान नहीं है। हालांकि, गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन सेवाएं जारी रहने से कुछ राहत बनी रही। लेकिन नियमित चिकित्सा सेवाओं के प्रभावित होने से अस्पतालों की सामान्य व्यवस्था पर इसका असर साफ नजर आया। इधर, हड़ताल के कारण उत्पन्न स्थिति को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में आक्रोश है। लोगों ने सरकार से चिकित्सकों की मांगों पर शीघ्र पहल कर गतिरोध समाप्त कराने और सरकारी अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल बहाल कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवा लंबे समय तक प्रभावित रहने से आम मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है।
चिकित्सकों की हड़ताल से चरमराई सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था, आपातकालीन सेवा जारी प्रणव कुमार हरपुरी, संपादक, H2H News, पटना (बिहार) : बिहार में चिकित्सकों की हड़ताल का व्यापक असर शनिवार को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दिखाई दिया। राज्य के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर ओपीडी समेत नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे मरीजों को चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कई मरीजों को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा, जबकि जरूरतमंद मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने से मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ गईं। खासकर ग्रामीण इलाकों से लंबी दूरी तय कर सरकारी अस्पताल पहुंचे मरीजों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण रही। जांच, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को हड़ताल के कारण सेवाएं प्रभावित होने की जानकारी मिली। इसके बाद कई परिवारों ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज कराया। निजी अस्पतालों में इलाज कराने के कारण मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। दवा, जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की बढ़ी लागत को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। मरीजों के परिजनों का कहना था कि सरकारी अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ता है, जिनके लिए निजी अस्पतालों का खर्च वहन करना आसान नहीं है। हालांकि, गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन सेवाएं जारी रहने से कुछ राहत बनी रही। लेकिन नियमित चिकित्सा सेवाओं के प्रभावित होने से अस्पतालों की सामान्य व्यवस्था पर इसका असर साफ नजर आया। इधर, हड़ताल के कारण उत्पन्न स्थिति को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में आक्रोश है। लोगों ने सरकार से चिकित्सकों की मांगों पर शीघ्र पहल कर गतिरोध समाप्त कराने और सरकारी अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल बहाल कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवा लंबे समय तक प्रभावित रहने से आम मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है।
- महुआ मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग में कंचन चौक पर सड़क के गड्ढों में जलजमाव, हादसों से लोगों में आक्रोश प्रणव कुमार हरपुरी, संपादक, H2H News, पटना (बिहार) : वैशाली जिले के चेहराकलां प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत महुआ-मुजफ्फरपुर मुख्य मार्ग पर कंचन चौक (कटहरा) के समीप सड़क की बदहाली राहगीरों के लिए मुसीबत बनी हुई है। सड़क पर बने गहरे गड्ढों में जलजमाव होने से आवागमन प्रभावित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन दोपहिया वाहन चालक और अन्य राहगीर इन गड्ढों में फंसकर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कंचन चौक के समीप मुख्य सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब है। बारिश के बाद गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क और गड्ढों के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में तेज गति से आने वाले वाहनों के साथ-साथ बाइक और ऑटो चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। राजद जिला उपाध्यक्ष देव प्रसाद यादव, पूर्व कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष जयंत सहनी, नगीना दास, उपेन्द्र कुमार राय, शोभा देवी सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क की बदहाली को लेकर पूर्व में H2H News द्वारा शूरू ऐप पर प्रमुखता से समाचार प्रसारित किया गया था। इसके बाद पथ निर्माण विभाग की ओर से सड़क मरम्मत का कार्य कराया गया, लेकिन लोगों का आरोप है कि मरम्मत के नाम पर महज खानापूर्ति की गई। कुछ ही समय बाद सड़क की स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक सह मंत्री संजय सिंह, वैशाली जिलाधिकारी वर्षा सिंह तथा पथ निर्माण विभाग के वरीय अधिकारियों से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर कंचन चौक के समीप सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।4
- प्रधानमंत्री पीएम मोदी, बिहार में बहन बेटियों के आबरू के साथ खेला जा रहा है कुछ बोलिए मोदी जी मन के बात में तो बोलते हैं अप बिहार के विकास के बारे में भी कुछ बोलिए प्रधानमंत्री पीएम मोदी, बिहार में बहन बेटियों के आबरू के साथ खेला जा रहा है कुछ बोलिए मोदी जी मन के बात में तो बोलते हैं अप बिहार के विकास के बारे में भी कुछ बोलिए1
- मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक लापता, परिजनों ने तलाश की गुहार मुजफ्फरपुर जिले के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के बालूघाट ब्रह्मस्थान से मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक के लापता होने का मामला सामने आया है। मामले को लेकर युवक की मां मोना देवी ने सिकंदरपुर थाना में आवेदन देकर बेटे की तलाश कराने की गुहार लगाई है। आवेदन के अनुसार, नंदकिशोर सहनी का पुत्र करण कुमार मानसिक रूप से अस्वस्थ है। वह 12 सितंबर 2026 को घर से निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। इसके बाद परिजनों ने रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों के मुताबिक, घर से निकलते समय करण ने उजला टी-शर्ट, काला पैंट और लाल रंग की चप्पल पहन रखी थी। काफी समय बीतने के बाद भी युवक के नहीं मिलने से परिवार के लोग चिंतित हैं। मां ने पुलिस से उचित कार्रवाई करते हुए युवक की तलाश कराने की मांग की है। परिजनों ने करण के संबंध में जानकारी मिलने पर मोबाइल नंबर 9263590550 पर सूचना देने की अपील की है। बाईट-परिजन2
- lalit kashyap tufan channel subscriber do lalit kashyap benipur channel subscriber do1
- औराई विधायक कहते हैं—मीडिया विपक्ष के लिए काम करता है! #BiharNews #Aurai #Muzaffarpur #BridgeNews #GroundReport #Journalism #Media #PublicIssue1
- शहीद आदित्य कुमार का अस्थि कलश पहुंचा पैतृक गांव रजौली, नम आंखों से दी अंतिम विदाई।#ShaheedAdityaKumar #Rajauli #ArunachalPradesh #IndianArmy #VeerJawan #Martyr #Tribute #BiharNews #Vaishali #RepublicVaishali शहीद आदित्य कुमार का अस्थि कलश पहुंचा पैतृक गांव रजौली, नम आंखों से दी अंतिम विदाई।#ShaheedAdityaKumar #Rajauli #ArunachalPradesh #IndianArmy #VeerJawan #Martyr #Tribute #BiharNews #Vaishali #RepublicVaishali1
- मुजफ्फरपुर के इस विद्यालय में देखिए यहां के शिक्षिका जो प्रधान शिक्षिका है 15 वर्षों से कुंडली मारकर इस विद्यालय में बैठी हुई है इनके लिए ट्रांसफर पोस्टिंग का व्यवस्था नहीं है शिक्षा विभाग के पास मुजफ्फरपुर के इस विद्यालय में देखिए यहां के शिक्षिका जो प्रधान शिक्षिका है 15 वर्षों से कुंडली मारकर इस विद्यालय में बैठी हुई है इनके लिए ट्रांसफर पोस्टिंग का व्यवस्था नहीं है शिक्षा विभाग के पास1
- चिकित्सकों की हड़ताल से चरमराई सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था, आपातकालीन सेवा जारी प्रणव कुमार हरपुरी, संपादक, H2H News, पटना (बिहार) : बिहार में चिकित्सकों की हड़ताल का व्यापक असर शनिवार को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर दिखाई दिया। राज्य के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर ओपीडी समेत नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे मरीजों को चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कई मरीजों को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा, जबकि जरूरतमंद मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा। सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने से मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ गईं। खासकर ग्रामीण इलाकों से लंबी दूरी तय कर सरकारी अस्पताल पहुंचे मरीजों के लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण रही। जांच, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को हड़ताल के कारण सेवाएं प्रभावित होने की जानकारी मिली। इसके बाद कई परिवारों ने निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज कराया। निजी अस्पतालों में इलाज कराने के कारण मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा। दवा, जांच, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की बढ़ी लागत को लेकर लोगों में नाराजगी देखी गई। मरीजों के परिजनों का कहना था कि सरकारी अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ता है, जिनके लिए निजी अस्पतालों का खर्च वहन करना आसान नहीं है। हालांकि, गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन सेवाएं जारी रहने से कुछ राहत बनी रही। लेकिन नियमित चिकित्सा सेवाओं के प्रभावित होने से अस्पतालों की सामान्य व्यवस्था पर इसका असर साफ नजर आया। इधर, हड़ताल के कारण उत्पन्न स्थिति को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में आक्रोश है। लोगों ने सरकार से चिकित्सकों की मांगों पर शीघ्र पहल कर गतिरोध समाप्त कराने और सरकारी अस्पतालों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल बहाल कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवा लंबे समय तक प्रभावित रहने से आम मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है।1