जालौन के डकोर कोतवाली क्षेत्र के कुसमिलिया गांव में 25 मई की शाम एक भीषण अग्निकांड हुआ, जहाँ घूरे के ढेर से उठी एक चिंगारी ने तेज हवाओं और भीषण गर्मी के कारण विकराल रूप ले लिया। इस आग की चपेट में करीब 25 घर आ गए, जिससे कई परिवारों के कच्चे मकान, छप्पर, कपड़े, राशन और पूरी गृहस्थी जलकर राख हो गई। आग लगते ही गांव में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई, जहाँ ग्रामीण अपने सामान बचाने में जुटे रहे, लेकिन अधिकांश लोग कुछ भी नहीं बचा सके। सूचना पर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया गया; वहीं धुएं से बेहोश हुई एक महिला को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को तत्काल राहत व सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय देर शाम स्वयं गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उनके साथ प्रशासन, राजस्व, दमकल और पुलिस विभाग की टीमें भी मौके पर मौजूद थीं, जबकि एसडीएम ज्योति सिंह ने राहत कार्यों की निगरानी करते हुए कोटेदार को तत्काल राशन सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री, भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था की, साथ ही गांव में लंगर भी संचालित कराया गया। राजस्व विभाग की टीम द्वारा नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है, और दैवीय आपदा राहत मद से प्रभावित परिवारों के खातों में तत्काल आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, सभी प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत किए गए हैं, ताकि वे अपना उजड़ा आशियाना फिर से बसा सकें। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि बलराम प्रजापति, रामकिशोर प्रजापति, मंगल सिंह श्रीवास और भूरे सिंह राजपूत को 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, अन्य प्रभावित परिवारों को 4 हजार से 9 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। जिलाधिकारी ने प्रदेश सरकार की प्राथमिकता दोहराते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में हर पीड़ित परिवार को तत्काल राहत और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ने तक हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई और राहत कार्यों से पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिससे उन्हें यह विश्वास हुआ है कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं।
जालौन के डकोर कोतवाली क्षेत्र के कुसमिलिया गांव में 25 मई की शाम एक भीषण अग्निकांड हुआ, जहाँ घूरे के ढेर से उठी एक चिंगारी ने तेज हवाओं और भीषण गर्मी के कारण विकराल रूप ले लिया। इस आग की चपेट में करीब 25 घर आ गए, जिससे कई परिवारों के कच्चे मकान, छप्पर, कपड़े, राशन और पूरी गृहस्थी जलकर राख हो गई। आग लगते ही गांव में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई, जहाँ ग्रामीण अपने सामान बचाने में जुटे रहे, लेकिन अधिकांश लोग कुछ भी नहीं बचा सके। सूचना पर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया गया; वहीं धुएं से बेहोश हुई एक महिला को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को तत्काल राहत व सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय देर शाम स्वयं गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उनके साथ प्रशासन, राजस्व, दमकल और पुलिस विभाग की टीमें भी मौके पर मौजूद थीं, जबकि एसडीएम ज्योति सिंह ने राहत कार्यों की निगरानी करते हुए कोटेदार को तत्काल राशन सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री, भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था की, साथ ही गांव में लंगर भी संचालित कराया गया। राजस्व विभाग की टीम द्वारा नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है, और दैवीय आपदा राहत मद से प्रभावित परिवारों के खातों में तत्काल आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, सभी प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत किए गए हैं, ताकि वे अपना उजड़ा आशियाना फिर से बसा सकें। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि बलराम प्रजापति, रामकिशोर प्रजापति, मंगल सिंह श्रीवास और भूरे सिंह राजपूत को 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, अन्य प्रभावित परिवारों को 4 हजार से 9 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। जिलाधिकारी ने प्रदेश सरकार की प्राथमिकता दोहराते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में हर पीड़ित परिवार को तत्काल राहत और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ने तक हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई और राहत कार्यों से पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिससे उन्हें यह विश्वास हुआ है कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं।
- आगरा शहर इस समय पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है, जिससे परेशान होकर स्थानीय महिलाओं को विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा है। पानी की किल्लत के चलते गुस्साई महिलाओं ने अपने खाली बर्तन लेकर सड़क पर जमकर चक्काजाम किया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। यह प्रदर्शन क्षेत्र में व्याप्त जल संकट और लोगों की बढ़ती परेशानियों को उजागर करता है।1
- लखनऊ विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर समाजवादी छात्र सभा ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के बढ़े दामों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने महंगाई और बढ़ती गैस कीमतों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच करीब 20 मिनट तक नोंकझोंक हुई। इसके बाद पुलिस ने विरोध कर रहे छात्रों को हिरासत में लिया और उन्हें इको गार्डन भेज दिया। समाजवादी छात्र सभा ने आरोप लगाया कि पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती महंगाई से आम जनता पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।1
- उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है, जिसके तहत 'सोलर दीदी' योजना शुरू की गई है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को सौर ऊर्जा क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे तकनीकी रूप से सक्षम होकर रोजगार प्राप्त कर सकेंगी। चयनित महिलाओं को हर महीने ₹14,196 का मानदेय प्रदान किया जाएगा। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को मुफ्त सोलर प्लांट और इंडक्शन चूल्हा भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ हरित ऊर्जा मिशन को गांव-गांव तक पहुंचाना है। इस पहल से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आय बढ़ा पाएंगी, बल्कि समाज में अपनी नई पहचान भी बना सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, जिससे प्रदेश में सौर ऊर्जा के उपयोग को तेजी से बढ़ावा मिलेगा।1
- जालौन के डकोर कोतवाली क्षेत्र के कुसमिलिया गांव में 25 मई की शाम एक भीषण अग्निकांड हुआ, जहाँ घूरे के ढेर से उठी एक चिंगारी ने तेज हवाओं और भीषण गर्मी के कारण विकराल रूप ले लिया। इस आग की चपेट में करीब 25 घर आ गए, जिससे कई परिवारों के कच्चे मकान, छप्पर, कपड़े, राशन और पूरी गृहस्थी जलकर राख हो गई। आग लगते ही गांव में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई, जहाँ ग्रामीण अपने सामान बचाने में जुटे रहे, लेकिन अधिकांश लोग कुछ भी नहीं बचा सके। सूचना पर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया गया; वहीं धुएं से बेहोश हुई एक महिला को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को तत्काल राहत व सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय देर शाम स्वयं गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उनके साथ प्रशासन, राजस्व, दमकल और पुलिस विभाग की टीमें भी मौके पर मौजूद थीं, जबकि एसडीएम ज्योति सिंह ने राहत कार्यों की निगरानी करते हुए कोटेदार को तत्काल राशन सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री, भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था की, साथ ही गांव में लंगर भी संचालित कराया गया। राजस्व विभाग की टीम द्वारा नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है, और दैवीय आपदा राहत मद से प्रभावित परिवारों के खातों में तत्काल आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, सभी प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत किए गए हैं, ताकि वे अपना उजड़ा आशियाना फिर से बसा सकें। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि बलराम प्रजापति, रामकिशोर प्रजापति, मंगल सिंह श्रीवास और भूरे सिंह राजपूत को 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। वहीं, अन्य प्रभावित परिवारों को 4 हजार से 9 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। जिलाधिकारी ने प्रदेश सरकार की प्राथमिकता दोहराते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में हर पीड़ित परिवार को तत्काल राहत और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ने तक हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई और राहत कार्यों से पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिससे उन्हें यह विश्वास हुआ है कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं।1
- उरई से दिल्ली जा रही एक निजी बस में मंगलवार शाम एक महिला सिपाही द्वारा कथित रूप से हंगामा किए जाने के कारण यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। यह घटना अमर ट्रेवल्स की बस में हुई, जो उरई से टूरिस्ट पैकेज लेकर दिल्ली जा रही थी, जब एक सीट को लेकर विवाद खड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस पूरी तरह भरी हुई थी। इसी दौरान एक महिला सिपाही बस में बैठने पर जोर देने लगी, लेकिन बस स्टाफ ने सीट उपलब्ध न होने की बात कही। इस पर महिला सिपाही कथित रूप से नाराज हो गई और अपना पुलिसिया रौब दिखाने लगी। आरोप है कि उसके फोन करने पर जालौन चौराहे पर डायल-112 पुलिस ने बस को रुकवा लिया। बस के काफी देर तक खड़े रहने से यात्री परेशान हो उठे और विरोध जताने लगे। इस दौरान महिला सिपाही और कुछ पुलिसकर्मियों पर यात्रियों से अभद्रता करने के भी आरोप लगे हैं। बताया जाता है कि महिला सिपाही ने जेल चौकी का स्टाफ भी मौके पर बुला लिया, जिससे काफी देर तक अफरा-तफरी और बहस का माहौल बना रहा। इसी बीच, किसी यात्री ने मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह को दी। उनके निर्देश पर कोतवाली प्रभारी आनंद सिंह ने मौके की जानकारी ली और हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया। सूत्रों के अनुसार, कोतवाल ने महिला सिपाही और जेल चौकी प्रभारी को फटकार भी लगाई, जिसके बाद बस को आगे रवाना किया गया। घटना के बाद यात्रियों में पुलिसकर्मियों के व्यवहार को लेकर नाराजगी देखी गई। अब यह सवाल उठ रहा है कि पुलिस वर्दी के कथित दुरुपयोग और अनुशासनहीनता के इस मामले में संबंधित महिला सिपाही के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई होगी या नहीं।1
- जालौन के उरई शहर में आगामी ईद-उल-अज़हा (बकरीद) को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इसी क्रम में, जिलाधिकारी और विनय कुमार सिंह के नेतृत्व में अपर पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी तथा प्रभारी निरीक्षक कोतवाली उरई ने भारी पुलिस बल के साथ शहर के मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस फुट पेट्रोलिंग के दौरान अम्बेडकर चौराहा, शहीद भगत सिंह चौराहा, बजरिया, मच्छर चौराहा और घंटाघर सहित कई संवेदनशील इलाकों का भ्रमण किया गया। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से सीधे संवाद स्थापित करते हुए उनसे शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, साथ ही लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम करने का प्रयास भी किया। प्रशासन ने असामाजिक तत्वों और माहौल बिगाड़ने वाले व्यक्तियों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, और यदि किसी भी व्यक्ति ने कानून व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे बकरीद पर्व को आपसी भाईचारे, सौहार्द और शांतिपूर्ण माहौल में मनाएं, तथा नमाज अदा करने के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। इस दौरान, पुलिस अधीक्षक जालौन द्वारा मीडिया को आवश्यक जानकारी भी दी गई।1
- ट्रेन में एक वेंडर द्वारा समोसे पर पैर रखे जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसने यूजर्स के बीच भारी गुस्सा पैदा कर दिया है। इस वीडियो को लेकर लोगों में आक्रोश साफ देखा जा रहा है। वायरल वीडियो पर बढ़ती प्रतिक्रियाओं के बाद, रेलवे ने इस मामले पर अपनी सफाई पेश की है। रेलवे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी किसी भी ट्रेन में ऐसा कोई भी वेंडर तैनात नहीं था जैसा कि वायरल वीडियो में दिखाया गया है।1
- जालौन में चौरासी गुम्बद के ठीक सामने स्थित वन क्षेत्र में भीषण आग लग गई है, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया है। यह आग वन क्षेत्र में अचानक लगी और तेजी से फैलने लगी, जिससे चिंता बढ़ गई। आग का दायरा बढ़ता देख वहां से गुजर रहे राहगीरों ने तत्काल दमकल विभाग को इसकी सूचना दी। हालांकि, सूचना दिए जाने के बावजूद अभी तक मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां नहीं पहुंची हैं, जिससे आग बुझाने में देरी हो रही है। यह पूरा मामला जालौन के कालपी कोतवाली क्षेत्र में चौरासी गुंबद के सामने के वन क्षेत्र से संबंधित है।3