सागर जिले के विनायका थाना पुलिस ने शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता ने 4 जुलाई 2026 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे धमकी दी। इस शिकायत पर विनायका पुलिस ने अपराध क्रमांक 75/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 351(3) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(w)(i) व 3(2)(v) के अंतर्गत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गठित विशेष पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 10 जुलाई 2026 को आरोपी को पाटन बस प्रतीक्षालय से गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपी को सागर के विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय जेल, सागर भेज दिया गया है। इस कार्रवाई में एसडीओपी बंडा श्री प्रदीप वाल्मीकि, थाना प्रभारी विनायका उपनिरीक्षक भूपेंद्र विश्वकर्मा, प्रधान आरक्षक लोकमन राही, प्रधान आरक्षक जयपाल सिंह घोष, प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार, आरक्षक सोमेश मिश्रा, आरक्षक पुष्पेंद्र सेन और महिला आरक्षक रोशनी पांडे की सराहनीय भूमिका रही। सागर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाले किसी भी अपराध या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाने या डायल-112 पर दें।
सागर जिले के विनायका थाना पुलिस ने शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता ने 4 जुलाई 2026 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे धमकी दी। इस शिकायत पर विनायका पुलिस ने अपराध क्रमांक 75/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 351(3) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(w)(i) व 3(2)(v) के अंतर्गत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गठित विशेष पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 10 जुलाई 2026 को आरोपी को पाटन बस प्रतीक्षालय से गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपी को सागर के विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय जेल, सागर भेज दिया गया है। इस कार्रवाई में एसडीओपी बंडा श्री प्रदीप वाल्मीकि, थाना प्रभारी विनायका उपनिरीक्षक भूपेंद्र विश्वकर्मा, प्रधान आरक्षक लोकमन राही, प्रधान आरक्षक जयपाल सिंह घोष, प्रधान आरक्षक सौरभ रैकवार, आरक्षक सोमेश मिश्रा, आरक्षक पुष्पेंद्र सेन और महिला आरक्षक रोशनी पांडे की सराहनीय भूमिका रही। सागर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ होने वाले किसी भी अपराध या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाने या डायल-112 पर दें।
- सागर जिले के बीना स्थित मिशन कंपाउंड की दान भूमि को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। इस मामले में ईसाई समाज ने तहसीलदार डॉ. अम्बर पंथी और एसडीओपी अंजय सनकत को एक ज्ञापन सौंपा है। ईसाई समाज का आरोप है कि अंकिता किंग और उनके साथ आए कुछ लोगों ने मिशन कंपाउंड की दान भूमि पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया। ज्ञापन में कहा गया है कि बाहरी लोगों को बुलाकर भूमि पर तार फेंसिंग कराई गई, जिससे विवाद की स्थिति बनी। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। ईसाई समाज ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं दूसरी ओर, अंकिता किंग ने ईसाई समाज के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि शैलेंद्र एडविन के पास संबंधित प्लॉट संस्था द्वारा आवंटित किए जाने का कोई वैध दस्तावेज नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मिशन कंपाउंड में बनाई गई दुकान अवैध रूप से निर्मित है और उसके पास की खाली भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है। फिलहाल, तहसीलदार और पुलिस प्रशासन द्वारा शिकायत की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही भूमि पर वैध अधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।1
- सागर जिले के बीना में मिशन कंपाउंड की दान भूमि को लेकर विवाद काफी गहरा गया है। इस मामले में ईसाई समाज ने तहसीलदार डॉ अम्बर पंथी और एसडीओपी अंजय सनकत को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अंकिता किंग और उनके साथ आए कुछ लोगों ने दान भूमि पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की। इसके अलावा, बाहरी लोगों को बुलाकर भूमि पर तार फेंसिंग कराई गई, जिससे वहां विवाद की स्थिति बन गई। ईसाई समाज के अनुसार, सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को काबू में किया। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और भविष्य में किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। दूसरी तरफ, दूसरे पक्ष की अंकिता किंग ने ईसाई समाज के इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि शैलेन्द्र एडविन के पास संस्था द्वारा संबंधित प्लॉट आवंटित किए जाने का कोई भी वैध दस्तावेज मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मिशन कंपाउंड में बनी दुकान अवैध है और उसके पास खाली पड़ी जमीन पर भी अवैध कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भी प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर असल सच्चाई सामने लाई जाए। दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों और दावों के बाद अब यह पूरा मामला प्रशासन के पास पहुंच चुका है। तहसीलदार और पुलिस प्रशासन द्वारा सौंपी गई शिकायतों की जांच शुरू कर दी गई है। इस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जमीन पर असल में किसका वैध हक है और आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र के लोगों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।4
- नरोत्तम मिश्रा भोपाल पहुंच गए हैं। भोपाल पहुंचने के बाद उन्होंने दतिया फोन किया और वहां मौजूद अपने कार्यकर्ताओं को फोन पर समझाते हुए बातचीत की।1
- मध्य प्रदेश के सागर जिले की खुरई तहसील के खिमलासा ग्राम में 11 गौ सेवकों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद गौ सेवकों में भारी आक्रोश है। विदिशा जिले की गंजबासौदा तहसील में भी गौ सेवक इसके समर्थन में सड़कों पर उतर आए हैं। पहले ही 14 गौ सेवकों को आजीवन कारावास की सजा होने से दुखी गौ सेवकों का कहना है कि इस भूमि पर सिर्फ उन पर ही अत्याचार क्यों हो रहा है? बिना किसी सरकारी वेतन या सुविधा के दिन-रात गौ सेवा और रक्षा करने वालों पर मुकदमा दर्ज करना कैसा न्याय है? गौ सेवकों का आक्रोश इस बात पर है कि सागर जिले के एसडीएम, तहसीलदार, कलेक्टर और सभी जनप्रतिनिधियों को 3 वर्षों में 164 ज्ञापन सौंपने के बावजूद न तो चरनोई की भूमि मुक्त कराई गई और न ही गायों के लिए कोई व्यवस्था की गई। हताश होकर जब गौ सेवक सड़कों पर रोने-चिल्लाने बैठे, तो उनके खिलाफ सड़क जाम करने का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। गौ सेवकों ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्वालियर के डबरा में जब नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर सैकड़ों लोगों ने सड़कें जाम की थीं, तब उन पर मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया? इस अन्याय के खिलाफ राष्ट्रीय हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश सोनी ने चेतावनी दी है कि या तो गोचर भूमि मुक्त कर गौ माता की व्यवस्था की जाए, अन्यथा यह आंदोलन पूरे मध्य प्रदेश में बड़ा रूप लेगा। गौ रक्षक सेना और सनातन रक्षक सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विशालदास वैष्णव ने मांग की है कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए, अतिक्रमण मुक्त कर गोचर भूमि गायों को सौंपी जाए और गौ रक्षकों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं। इस संबंध में विशाल वैष्णव, मुकेश सोनी, देवेंद्र रघुवंशी, संजू यादव, गजराज राय, राकेश दुबे, और चंद्रेश सहित कई गौ सेवकों ने केंद्रीय कृषि एवं विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी का स्वागत कर उन्हें गोचर भूमि और गौ रक्षकों की समस्याओं से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा है।2
- उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के पाली में भारतीय जनता पार्टी नशा मुक्ति भारत के लिए संकल्पित हो रही है। देश को नशा मुक्त बनाने की दिशा में भाजपा पूरी तरह से संकल्पबद्ध नजर आ रही है।1
- विदिशा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित पीतल मिल चौराहा के पास एक बंद पड़ी दुकान में सटोरिए ने बाकायदा सट्टे की दुकान खोल रखी है। यहाँ खुलेआम सट्टा चल रहा है और इसके लिए बाकायदा कर्मचारी रखे गए हैं जो शिफ्ट-बाय-शिफ्ट में काम करते हैं। इस खुलेआम चल रहे सट्टे के कारोबार की खबर सिविल लाइन पुलिस को भी है, लेकिन जब भी पुलिस दबिश देने जाती है, उसके पहले ही सट्टा खेलने और खिलाने वाले गायब हो जाते हैं। सट्टा खिलाने वाला मास्टरमाइंड अब तक पुलिस की पकड़ से दूर है।2
- मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से सामने आए एक कथित वायरल वीडियो ने पूरे प्रदेश में कानून, न्याय और मानवाधिकारों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस वीडियो में कुछ युवकों को कथित रूप से करंट देकर प्रताड़ित किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, यह वीडियो कितना पुराना है, इसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं और उन पर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है, यह अभी जांच का विषय है। इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले का संज्ञान लेते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह भारत है, तालिबान नहीं; यहां संविधान और कानून का शासन चलता है, भीड़ या निजी फैसलों का नहीं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी व्यक्ति या संगठन को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी को अपराधी घोषित कर खुद ही सजा तय कर दे। भारत का संविधान हर नागरिक को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार देता है और किसी भी दोषी को सजा सुनाने का अधिकार केवल न्यायालय के पास है। यदि किसी व्यक्ति पर चोरी, लूट या धोखाधड़ी का संदेह है, तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई के पर्याप्त प्रावधान देता है। लेकिन किसी को सार्वजनिक रूप से यातना देना, मारपीट करना या उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करना स्वयं में एक गंभीर अपराध है। रायसेन के इस मामले की जांच पूरी होने के बाद, यदि किसी व्यक्ति या समूह द्वारा कानून को हाथ में लेकर कथित यातना देने की बात सच साबित होती है, तो उनके खिलाफ भी वैसी ही कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लोकतंत्र में न्याय का रास्ता अदालत से होकर जाता है, किसी भीड़ या निजी फैसले से नहीं।1