ग्राम भिलाई में ‘गांव चलो, घर चलो’ अभियान, विधायक इंद्रकुमार साहू हुए शामिल अभनपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे ‘गांव चलो, घर चलो’ अभियान के तहत ग्राम भिलाई में विशेष जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर अभनपुर विधायक श्री इंद्र कुमार साहू स्वयं उपस्थित रहे और गांव के घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की। कार्यक्रम के दौरान विधायक साहू ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं और उनके निराकरण का आश्वासन दिया। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। इस दौरान उन्होंने हितग्राहियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की भी जानकारी ली। विधायक ने कहा कि ‘गांव चलो, घर चलो’ अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता से सीधा संपर्क स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं को समझना और शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी आग्रह किया कि वे लगातार जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के समाधान में सहयोग करें। इस अवसर पर भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पुराने कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया और गांव के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
ग्राम भिलाई में ‘गांव चलो, घर चलो’ अभियान, विधायक इंद्रकुमार साहू हुए शामिल अभनपुर। भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे ‘गांव चलो, घर चलो’ अभियान के तहत ग्राम भिलाई में विशेष जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर अभनपुर विधायक श्री इंद्र कुमार साहू स्वयं उपस्थित रहे और गांव के घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की। कार्यक्रम के दौरान विधायक साहू ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं और उनके निराकरण का आश्वासन दिया। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। इस दौरान उन्होंने हितग्राहियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की भी जानकारी ली। विधायक ने कहा कि ‘गांव चलो, घर चलो’ अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता से सीधा संपर्क स्थापित कर उनकी आवश्यकताओं को समझना और शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी आग्रह किया कि वे लगातार जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के समाधान में सहयोग करें। इस अवसर पर भाजपा के स्थानीय पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पुराने कार्यकर्ताओं का सम्मान भी किया गया और गांव के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
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- प्रेस विज्ञप्ति दिनांक-12/04/2026 दिन रविवार *गोविंदपथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ की ओर से गौ माता को 2021 किलो खरबूजा रायपुर के विभिन्न स्थानों पर गौ भोज कराया गया।*, जय गौ माता जय गोपाल गौ माता की सेवा के लिए सदा तत्पर गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के माध्यम से रायपुर शहर के विभिन्न स्थानों पर घूम रहे गौ माता को इस गर्मी के मौसम पर खरबूजा भोग लगाया गया गौ माता के शरीर पर 33 कोटी देवी देवता विराजमान होते हैं इसीलिए गौ माता को भोग प्रसाद अर्पण करने से सभी देवता तृप्त होते हैं इसीलिए हमारा एक प्रयास कि गौ माता को प्रतिदिन भोज करने का है जिस पर विभिन्न गौ पुत्रों गौ सेवको के माध्यम से यह कार्य हो सका गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान ने सभी गौ भक्तों को निवेदन करते हुए कहा कि 27 अप्रैल को आप सभी अपने तहसील गांव ब्लॉक नगर में जाकर के ज्ञापन सो के ताकि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिखाई जा सके कानून तौर पर क्योंकि वह राष्ट्र माता तो हमारा है ही और रहेगा गौ माता राष्ट्र माता नंदी बाबा राष्ट्रपिता के जयकारा के साथ कार्यक्रम किया गया एवं गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान के विभिन्न पदाधिकारी लोग मौजूद रहे। मुख्य उद्देश्य एवं मांग- प्रदेश के नेता राजनेताओं को सद्बुद्धि प्रदान करें ईश्वर से प्रार्थना किया गया प्रदेश के मुखिया जी ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी बागेश्वर धाम को आश्वासन दिया था कि प्रदेश में गौ माता को राज्य माता की दर्ज दिलाएंगे उसे याद करते हुए प्रदेश के मुखिया को निवेदन किया गया कि आप शीघ्र अति शीघ्र गौ माता को राज्य माता घोषित करें। प्रदेश की जनता इंतजार कर रही है। गौ माता को राष्ट्र माता राज्य माता घोषित किया जाए गोविंद पथ गौ सेवा संस्थान परिवार श्रीमती अनीता तिवारी सहसंयोजी का पंडित गणेश मिश्रा सदस्य सुरेश बृजवानी सदस्य पंडित संदीप पांडे सदस्य श्रीमती रंजना मिश्रा श्रीरमेश दीवान श्रीअभिषेक दीवान श्रीगौरव मिश्रा आशुतोष गुप्ता श्रीमती रिंकी गुप्ता श्रीराज तिवारी श्रीजितेंद्र मिश्रा श्रीसंदीप शर्मा पत्रकार श्रीसचिन शर्मा कोषाध्यक्ष पंडित श्रीहिमांशु मिश्रा/कृष्ण शास्त्री संस्थापक/प्रदेश4
- अन्याय के विरोध में बड़ी संख्या में जुटने की अपील संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735 तिल्दा-नेवरा (बलौदाबाजार)। छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंगठन द्वारा ड्राइवरों के साथ हो रहे कथित अन्याय एवं शोषण के विरोध में आगामी 13 अप्रैल 2026 को तिल्दा-नेवरा में धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी संगठन के पदाधिकारियों द्वारा दी गई। संगठन का कहना है कि लंबे समय से ड्राइवरों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है तथा प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस कारण ड्राइवरों में भारी आक्रोश व्याप्त है। 🗣️ प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप संगठन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि संबंधित मामलों में केवल आश्वासन दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते ड्राइवर समुदाय में असंतोष बढ़ता जा रहा है। 👥 बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंगठन ने सभी ड्राइवर साथियों से अपील की है कि वे 13 अप्रैल को दोपहर 1 बजे तिल्दा-नेवरा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर एकजुटता दिखाएं और अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करें। 👤 प्रमुख पदाधिकारी प्रीतम सेन – प्रदेश अध्यक्ष हेमनाथ देवांगन – प्रदेश कोषाध्यक्ष संतोष देवांगन – प्रदेश प्रभारी छत्रधर यादव – प्रदेश उपाध्यक्ष ✊ “ड्राइवर देश का आंतरिक सिपाही है” संगठन ने कहा कि ड्राइवर समाज देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उनके सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा के लिए यह आंदोलन आवश्यक है।1
- आज 11 अप्रैल को तिल्दा नेवरा में भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा, तिल्दा शहर मंडल अध्यक्ष के नेतृत्व में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर महात्मा ज्योतिबा फुले के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री आदरणीय श्री चंद्रकुमार पाटिल एवं मंडल उपाध्यक्ष मनोज बंजारे द्वारा महात्मा फुले के जीवन और उनके समाज सुधार के कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि महात्मा ज्योतिबा फुले एक महान समाज सुधारक थे, जिनका जन्म 11 अप्रैल 1827 को हुआ था। उन्होंने समाज में समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष लुक राम बघेल, महामंत्री अमितोष धीरज, कामेश्वर भारद्वाज, उपाध्यक्ष मधु कोशले सहित मोर्चा के सदस्य उपस्थित रहे।5
- बालोद में सड़क vs नाली का खेल! नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी समेत पार्षद NH विभाग के खिलाफ धरने पर, व्यापारी परेशान नमस्कार छत्तीसगढ़ के बालोद शहर के व्यस्त नेशनल हाईवे-930 पर एक बार फिर प्रशासनिक जिम्मेदारी का पिंग-पोंग खेल शुरू हो गया है। सड़क किनारे बनी नालियों में गंदगी जाम होने से पानी सड़क पर बहने लगा है, जिससे दुकानदारों और बस स्टैंड क्षेत्र में आने-जाने वालों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी और पार्षदों ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए नेशनल हाईवे विभाग के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। अध्यक्ष महोदया ने स्पष्ट कहा कि ड्रेनेज सिस्टम फेल होना NH विभाग की जिम्मेदारी है, जबकि व्यापारियों का आरोप है कि उन्होंने नगर पालिका प्रशासन को कई बार शिकायत की, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। स्थिति यह है कि गंदा पानी दुकानों तक पहुंच रहा है, बस स्टैंड परिसर में जाम लग रहा है और आम जनता रोजाना इस असुविधा से जूझ रही है। दोनों विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं, जिससे समस्या का समाधान टलता जा रहा है। द छत्तीसगढ़ हमेशा जनता की आवाज बनकर खड़ा है। बालोद की इस समस्या पर अब संबंधित अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, ताकि सड़क सुचारू रहे और नागरिकों को राहत मिल सके। प्रशासनिक टकराव की बजाय जनसमस्याओं का त्वरित समाधान ही सच्ची सेवा है। अधिक जानकारी और अपडेट्स के लिए बने रहिए द छत्तीसगढ़ के साथ।1
- बस्तर में आज भी वस्तु विनिमय क्यों — मजबूरी या परंपरा? बस्तर के सुदूर गांवों में आज भी बिना पैसे के सामान खरीदा-बेचा जाता है। इसे वस्तु विनिमय/Barter System कहते हैं — इमली के बदले नमक, चावल के बदले साबुन, महुआ के बदले कपड़ा। ये 10 हज़ार साल पुरानी प्रथा है, पर सवाल ये है: आधुनिक युग में भी बस्तरिया लोग ऐसा करने को मजबूर क्यों हैं? 1. मजबूरी के 5 बड़े कारण •कारण..... कैसे मजबूर करता है,भौगोलिक अलगाव** कई गांव आज भी मुख्य सड़क से 20-30 किमी अंदर हैं। बारिश में 6 महीने संपर्क टूट जाता है। बैंक, ATM, बाजार पहुंच से बाहर **गरीबी और नकद की कमी** दैनिक मजदूरी 200-300 रु। फसल बेचने पर ही साल में 2-3 बार नकद आता है। रोज की जरूरत के लिए पैसे होते ही नही **बैंकिंग सुविधा नहीं** बस्तर के 70% से ज्यादा गांवों में बैंक ब्रांच नहीं। डिजिटल पेमेंट तो दूर, लोगों के पास खाता भी नहीं। UPI किसपर चलाएं **माओवादी समस्या** दशकों से अशांति के कारण विकास रुका। व्यापारी डर से अंदरूनी इलाकों में नहीं जाते। साप्ताहिक हाट ही एकमात्र बाजार है **शिक्षा और जागरूकता** "पैसा संभालना", "बचत", "ब्याज" जैसे कांसेप्ट पहुंचे ही नहीं। पुरखों से जो देखा वही चल रहा है 2. लेकिन ये सिर्फ मजबूरी नहीं, समझदारी भी है..... 1. *मुद्रास्फीति से बचे*: नोट का मूल्य घटता है, पर 1 किलो चावल हमेशा 1 किलो चावल रहेगा। बस्तरिया अर्थव्यवस्था नोट पर निर्भर नहीं। 2. *कर्ज से मुक्ति*: पैसे न होने पर शहर में लोग उधार लेते हैं। बस्तर में सामान-से-सामान बदलने से कोई कर्जदार नहीं बनता। 3. *जंगल आधारित जीवन*: तेंदूपत्ता, महुआ, इमली, लाख — ये जंगल से मुफ्त मिलते हैं। इन्हें बेचकर नमक-तेल ले आना सबसे आसान मॉडल है। 4. *सामुदायिक रिश्ते*: हाट सिर्फ बाजार नहीं, सामाजिक मेलजोल है। वस्तु विनिमय से आपसी विश्वास बना रहता है। *3. आधुनिक युग की टक्कर: क्या बदल रहा है, क्या नहीं बदलना चाहिए* *बदलाव जरूरी है*: - सड़क, स्कूल, अस्पताल पहुंचने चाहिए - MSP पर वनोपज खरीदी हो ताकि शोषण न हो - बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट हर पंचायत में हो *बदलाव जरूरी नहीं है*: वस्तु विनिमय को "पिछड़ापन" कहकर खत्म करना गलत होगा। ये *सतत/सस्टेनेबल इकोनॉमी* का सबसे पुराना मॉडल है। दुनिया आज "Cashless Society" की बात कर रही है, बस्तर तो 10 हज़ार साल से "Cashless" है। निष्कर्ष: बस्तरिया लोग मजबूर भी हैं क्योंकि सरकार की पहुंच नहीं है। पर साथ में उन्होंने अपनी ऐसी व्यवस्था बना ली है जो नोट-छापे बिना भी चलती है। असली जरूरत है — विकास आए, पर उनकी व्यवस्था टूटे नहीं। सड़क के साथ सम्मान भी आए। जय जोहार1
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- नवापारा राजिम। पेट की आग बुझाने की मजबूरी ने एक मासूम बच्ची को कचरे के ढेर में अपना रोजगार तलाशने पर विवश कर दिया है। नगर पालिका परिषद गोबरा नवापारा द्वारा नालियों से निकाले गए कचरे में प्लास्टिक बोतल, पॉलिथीन, झिल्ली और अन्य अपशिष्ट सामग्री बिखरी पड़ी थी। इसी गंदगी और दुर्गंध के बीच वह बच्ची अपने छोटे-छोटे हाथों से प्लास्टिक बॉटल और कबाड़ इकट्ठा करती नजर आई। यह दृश्य न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला है, बल्कि समाज और प्रशासन के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। जहां एक ओर बच्चों के हाथों में किताबें और उज्ज्वल भविष्य होना चाहिए, वहीं दूसरी ओर यह बच्ची अपनी आजीविका के लिए कचरे में मेहनत करने को मजबूर है। ऐसी स्थिति बाल श्रम और गरीबी की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। जरूरत है कि प्रशासन और समाज मिलकर ऐसे बच्चों के लिए शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर जीवन की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें इस तरह की परिस्थितियों का सामना न करना पड़े और उनका बचपन सुरक्षित रह सके।1
- छत्तीसगढ़ी भाषा — पहचान, खासियत और आगे क्या होना चाहिए 🇮🇳 1. अभी तक छत्तीसगढ़ी की पहचान और खासियत क्या है? भाषाई पहचान: 1. लिपि: देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। पहले "ओड़िया लिपि" का भी असर था, पर अब हिंदी जैसी देवनागरी ही मान्य है। 2. परिवार: पूर्वी हिंदी की बोली मानी जाती है। अवधी और बघेली की करीबी बहन है। 3. बोलने वाले: 2026 में अनुमानित 2 करोड़+ लोग। छत्तीसगढ़ की 55%+ आबादी की मातृभाषा। 4. राजकीय दर्जा: 2007 में छत्तीसगढ़ राजभाषा अधिनियम के तहत हिंदी के साथ द्वितीय राजभाषा का दर्जा मिला। सरकारी कामकाज में उपयोग की अनुमति है। सांस्कृतिक खासियत: 1. सरलता और मिठास: "कैसे हस", "का करत हस", "बढ़िया हवय" जैसे वाक्य। "हस", "हवय", "ग" का प्रयोग इसे अलग बनाता है। 2. साहित्य: लोकराम यादव, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, डॉ. विनय कुमार पाठक जैसे साहित्यकार। "मोर संग चलव", "छत्तीसगढ़ी गीत" लोक में बहुत लोकप्रिय। 3. उपबोलियां: लरिया, खल्टाही, सदरी, बिलासपुरी — इलाके के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा बदलाव। 4. लोक कला से जुड़ाव: पंडवानी, भरथरी, राउत नाचा, सुआ गीत सब छत्तीसगढ़ी में ही हैं। भाषा = संस्कृति। संवैधानिक स्थिति: अभी तक 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार के स्तर पर आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं मिला। 2. जनगणना 2026 में "छत्तीसगढ़ी" लिखवाना क्यों जरूरी है? जनगणना में भाषा का कॉलम सबसे बड़ा सबूत होता है। सरकार उसी आधार पर तय करती है कि: 1. 8वीं अनुसूची में शामिल करना है या नहीं— 1 करोड़ से ज्यादा बोलने वाले होने पर दावा मजबूत होता है। 2. स्कूल में पढ़ाई, नौकरी में आरक्षण, अनुवाद आदि सुविधाएं मिलेंगी या नहीं। 3. भविष्य का बजट — भाषा विकास बोर्ड, अकादमी, साहित्य पुरस्कार के लिए। अगर लोग "हिंदी" लिखवा देंगे तो छत्तीसगढ़ी बोलने वालों की संख्या कम दिखेगी और मान्यता का केस कमजोर होगा। 3. अभी क्या कमी है और क्या होना चाहिए? अभी स्थिति** क्या होना चाहिए** 8वीं अनुसूची में नहीं है संसद में बिल पास करके 8वीं अनुसूची में शामिल हो। भोजपुरी, राजस्थानी के साथ इसकी भी मांग है स्कूलों में पढ़ाई नहीं प्राथमिक स्तर पर छत्तीसगढ़ी मीडियम/विषय के रूप में विकल्प मिले। NCERT जैसी किताबें बनें मानक व्याकरण/शब्दकोश कम छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा मानक व्याकरण, शब्दकोश, कीबोर्ड तैयार हो सरकारी कामकाज में कम उपयोग कलेक्टर कार्यालय, पंचायत के नोटिस, फॉर्म छत्तीसगढ़ी में भी छपें युवाओं में हीनभावना "गंवई भाषा" का टैग हटे। IAS-IPS अफसर छत्तीसगढ़ी में भाषण दें तो गर्व बढ़ेगा आप क्या कर सकते हैं: 1. जनगणना में: मातृभाषा वाले कॉलम में "छत्तीसगढ़ी/Chhattisgarhi" ही लिखवाएं। "हिंदी" बिल्कुल न लिखें। 2. परिवार में: बच्चों से घर में छत्तीसगढ़ी बोलें। भाषा तभी बचेगी। 3. मांग करें: अपने विधायक-सांसद से 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए आवाज़ उठाएं। एक लाइन में: छत्तीसगढ़ी सिर्फ बोली नहीं, छत्तीसगढ़ की पहचान, अस्मिता और संस्कृति की रीढ़ है। जनगणना इसे "भाषा" का दर्जा दिलाने का सबसे बड़ा मौका है। जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ 🙏1