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सरहुल पर्व पर उपायुक्त पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश प्रकृति से प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक पर्व सरहुल के अवसर पर उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह पुलिस लाइन, हजारीबाग में आयोजित सरहुल कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस पदाधिकारियों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान धारण कर स्थानीय कलाकारों के साथ पारंपरिक धुनों पर नृत्य कर उत्सव मनाया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सरहुल पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि वे प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सजग रहें तथा सरहुल जैसे पर्वों के माध्यम से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पारंपरिक उत्साह एवं उल्लास के साथ सरहुल पर्व मनाया तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

1 hr ago
user_Kashif Adib
Kashif Adib
Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
1 hr ago

सरहुल पर्व पर उपायुक्त पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए, प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश प्रकृति से प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक पर्व सरहुल के अवसर पर उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह पुलिस लाइन, हजारीबाग में आयोजित सरहुल कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस पदाधिकारियों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान धारण कर स्थानीय कलाकारों के साथ पारंपरिक धुनों पर नृत्य कर उत्सव मनाया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सरहुल पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि वे प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सजग रहें तथा सरहुल जैसे पर्वों के माध्यम से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पारंपरिक उत्साह एवं उल्लास के साथ सरहुल पर्व मनाया तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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  • रांची में सरहुल पर्व के अवसर पर निकले भव्य जुलूस में इस बार परंपरा के साथ आधुनिकता का भी जबरदस्त संगम देखने को मिला। शहर की सड़कों पर जहां एक ओर आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य करते नजर आए, वहीं दूसरी ओर डीजे की तेज धुनों पर युवाओं का उत्साह चरम पर दिखा।
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    रांची में सरहुल पर्व के अवसर पर निकले भव्य जुलूस में इस बार परंपरा के साथ आधुनिकता का भी जबरदस्त संगम देखने को मिला। शहर की सड़कों पर जहां एक ओर आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य करते नजर आए, वहीं दूसरी ओर डीजे की तेज धुनों पर युवाओं का उत्साह चरम पर दिखा।
    user_खबर आप तक
    खबर आप तक
    Local News Reporter Hazaribag, Hazaribagh•
    1 hr ago
  • प्रकृति से प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक पर्व सरहुल के अवसर पर उपायुक्त श्री शशि प्रकाश सिंह पुलिस लाइन, हजारीबाग में आयोजित सरहुल कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस पदाधिकारियों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान धारण कर स्थानीय कलाकारों के साथ पारंपरिक धुनों पर नृत्य कर उत्सव मनाया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सरहुल पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि वे प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सजग रहें तथा सरहुल जैसे पर्वों के माध्यम से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पारंपरिक उत्साह एवं उल्लास के साथ सरहुल पर्व मनाया तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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    प्रकृति से प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक पर्व सरहुल के अवसर पर उपायुक्त श्री शशि प्रकाश सिंह पुलिस लाइन, हजारीबाग में आयोजित सरहुल कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस पदाधिकारियों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान धारण कर स्थानीय कलाकारों के साथ पारंपरिक धुनों पर नृत्य कर उत्सव मनाया। 
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सरहुल पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि वे प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सजग रहें तथा सरहुल जैसे पर्वों के माध्यम से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पारंपरिक उत्साह एवं उल्लास के साथ सरहुल पर्व मनाया तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
    user_पत्रकार कुमार कृष्णानंद
    पत्रकार कुमार कृष्णानंद
    हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    1 hr ago
  • प्रकृति से प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक पर्व सरहुल के अवसर पर उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह पुलिस लाइन, हजारीबाग में आयोजित सरहुल कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस पदाधिकारियों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान धारण कर स्थानीय कलाकारों के साथ पारंपरिक धुनों पर नृत्य कर उत्सव मनाया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सरहुल पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि वे प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सजग रहें तथा सरहुल जैसे पर्वों के माध्यम से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पारंपरिक उत्साह एवं उल्लास के साथ सरहुल पर्व मनाया तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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    प्रकृति से प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक पर्व सरहुल के अवसर पर उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह पुलिस लाइन, हजारीबाग में आयोजित सरहुल कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस पदाधिकारियों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान धारण कर स्थानीय कलाकारों के साथ पारंपरिक धुनों पर नृत्य कर उत्सव मनाया। 
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सरहुल पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि वे प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति सजग रहें तथा सरहुल जैसे पर्वों के माध्यम से हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने पारंपरिक उत्साह एवं उल्लास के साथ सरहुल पर्व मनाया तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
    user_Kashif Adib
    Kashif Adib
    Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    1 hr ago
  • हजारीबाग में ‘टाटा DEF यूरिया’ के नाम पर बड़ा खेल! पुलिस छापे में नकली फैक्ट्री का भंडाफोड़, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा 🔥 हजारीबाग जिले में पुलिस ने एक सनसनीखेज कार्रवाई करते हुए नकली ‘टाटा DEF (डीज़ल एग्जॉस्ट फ्लूइड) यूरिया’ के अवैध कारोबार का पर्दाफाश कर दिया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस रेड में एक ऐसे ठिकाने का खुलासा हुआ, जहां बिना किसी नाम-पते के बड़े पैमाने पर नकली उत्पाद तैयार कर बाजार में खपाए जा रहे थे।
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    हजारीबाग में ‘टाटा DEF यूरिया’ के नाम पर बड़ा खेल! पुलिस छापे में नकली फैक्ट्री का भंडाफोड़, करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा 🔥
हजारीबाग  जिले में  पुलिस ने एक सनसनीखेज कार्रवाई करते हुए नकली ‘टाटा DEF (डीज़ल एग्जॉस्ट फ्लूइड) यूरिया’ के अवैध कारोबार का पर्दाफाश कर दिया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस रेड में एक ऐसे ठिकाने का खुलासा हुआ, जहां बिना किसी नाम-पते के बड़े पैमाने पर नकली उत्पाद तैयार कर बाजार में खपाए जा रहे थे।
    user_Abhay Kumar Singh
    Abhay Kumar Singh
    पत्रकार हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    10 hrs ago
  • *नवरात्र के दूसरे दिन सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग, जानें शुभ रंग, माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग, पूजा विधि और कथा* *धनबाद :* नवरात्रि के दूसरे दिन यानी कि चैत्र शुक्‍ल द्वितीया तिथि को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है. साथ ही साल 2026 की चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ फल देगा. साथ ही इस साल 20 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. इस शुभ योग में किए गए काम सफल होते हैं. पूजा का ज्‍यादा फल मिलता है. 20 मार्च 2026, शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए 3 शुभ मुहूर्त हैं. ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:57 बजे से सुबह 05:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक अमृत काल - दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक *नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग* इस साल चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को सर्वार्थसिद्धि योग का अतिशुभ संयोग बन रहा है. धर्म और ज्‍योतिष में सर्वार्थसिद्धि योग को बेहत शुभ माना गया है. सर्वार्थसिद्धि योग 20 मार्च 2026 की सुबह 04:04 बजे से प्रारंभ होकर 21 मार्च 2026 के तड़के 02:27 तब रहेगा. *ब्रह्मचारिणी देवी पूजा भोग* ब्रह्मचारिणी देवी की विधि-विधान से पूजा करें. देवी का पंचामृत स्नान कराएं, फिर पीले और सफेद फूल अर्पित करें. माला पहनाएं. अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर, अर्पित करें. साथ ही माता ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग लगाएं. ब्रह्मचारिणी देवी को शक्‍कर बेहद प्रिय है इसलिए उनकी पूजा सात्विक चीजों फल और चीनी का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद चीनी ब्राह्मण को दान में दे दें. *ब्रह्मचारिणी देवी की कथा* मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं ब्रह्मचारिणी देवी. यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है. मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है. इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है. वहीं ब्रह्मचारिणी शब्‍द से अर्थ है कि तप की चारिणी यानी कठोर तप करने वाली. देवी दुर्गा का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है. इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार पूर्वजन्म में देवी मां के इस रूप ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया. एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया. पीरियड्स के किस दिन कर सकते हैं नवरात्र की पूजा, 9 दिन के दौरान आ जाए मासिकधर्म तो व्रत करें या नहीं? दूर कर लें हर कंफ्यूजन कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए. कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया. कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया. देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की. यह तुम्हीं से ही संभव थी. तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ. जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं. तब देवी ने तपस्‍या खत्‍म की. मान्‍यता है कि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सारे कार्य सिद्ध हो जाते हैं.(डिस्क्लेमर - प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. न्यूज़ फास्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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    *नवरात्र के दूसरे दिन सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग, जानें शुभ रंग, माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग, पूजा विधि और कथा*
*धनबाद :* नवरात्रि के दूसरे दिन यानी कि चैत्र शुक्‍ल द्वितीया तिथि को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है. साथ ही साल 2026 की चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ फल देगा.
साथ ही इस साल 20 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. इस शुभ योग में किए गए काम सफल होते हैं. पूजा का ज्‍यादा फल मिलता है.
20 मार्च 2026, शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए 3 शुभ मुहूर्त हैं.
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:57 बजे से सुबह 05:45 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक
अमृत काल - दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक
*नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग*
इस साल चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को सर्वार्थसिद्धि योग का अतिशुभ संयोग बन रहा है. धर्म और ज्‍योतिष में सर्वार्थसिद्धि योग को बेहत शुभ माना गया है. सर्वार्थसिद्धि योग 20 मार्च 2026 की सुबह 04:04 बजे से प्रारंभ होकर 21 मार्च 2026 के तड़के 02:27 तब रहेगा.
*ब्रह्मचारिणी देवी पूजा भोग*
ब्रह्मचारिणी देवी की विधि-विधान से पूजा करें. देवी का पंचामृत स्नान कराएं, फिर पीले और सफेद फूल अर्पित करें. माला पहनाएं. अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर, अर्पित करें.
साथ ही माता ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग लगाएं. ब्रह्मचारिणी देवी को शक्‍कर बेहद प्रिय है इसलिए उनकी पूजा सात्विक चीजों फल और चीनी का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद चीनी ब्राह्मण को दान में दे दें.
*ब्रह्मचारिणी देवी की कथा*
मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं ब्रह्मचारिणी देवी. यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है. मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है. इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है. वहीं ब्रह्मचारिणी शब्‍द से अर्थ है कि तप की चारिणी यानी कठोर तप करने वाली. देवी दुर्गा का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है. इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं.
पौराणिक कथाओं के अनुसार पूर्वजन्म में देवी मां के इस रूप ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया. एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया.
पीरियड्स के किस दिन कर सकते हैं नवरात्र की पूजा, 9 दिन के दौरान आ जाए मासिकधर्म तो व्रत करें या नहीं? दूर कर लें हर कंफ्यूजन
कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए. कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया.
कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया. देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की. यह तुम्हीं से ही संभव थी. तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ. जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं. तब देवी ने तपस्‍या खत्‍म की. मान्‍यता है कि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सारे कार्य सिद्ध हो जाते हैं.(डिस्क्लेमर - प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. न्यूज़ फास्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
    user_Public News JH
    Public News JH
    Local News Reporter Chisti Nagar, Hazaribagh•
    20 hrs ago
  • बैद्यनाथ धाम में भक्तों को धकेलने का वीडियो, निशिकांत दुबे ने CM सोरेन को लपेटा !
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    बैद्यनाथ धाम में भक्तों को धकेलने का वीडियो, निशिकांत दुबे ने CM सोरेन को लपेटा !
    user_News Xpose ( Jishan Raj)
    News Xpose ( Jishan Raj)
    Press Azad Mahalla, Hazaribagh•
    20 hrs ago
  • -- मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़, अमन-चैन और खुशहाली के लिए मांगी गई दुआएं -- अलविदा जुमा आत्ममंथन, इंसानियत और एकता का है पैगाम: चीफ काजी मुफ्ती अब्दुल जलील  --- रमजान हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ सिखाता है: चीफ काजी एदार-ए-शरिया हजारीबाग  --- हजारीबाग। पवित्र रमजान महीने के आखिरी शुक्रवार ‘अलविदा जुमा’ के अवसर पर हजारीबाग शहर में धार्मिक आस्था और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस वर्ष अलविदा जुमा के साथ ही रमजान का अंतिम दिन होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया। शहर की प्रमुख मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने पूरे श्रद्धा भाव से नमाज अदा कर अल्लाह से अमन, शांति और तरक्की की दुआ मांगी। शहर के विभिन्न इलाकों की मस्जिदों में विशेष नमाज का आयोजन किया गया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ‘जुमात-उल-विदा’ की मुबारकबाद दी। इस अवसर पर मुस्लिम धर्मावलंबियों में खास उत्साह देखने को मिला और पूरे दिन इबादत का सिलसिला जारी रहा। धार्मिक विद्वानों ने अपने संदेश में कहा कि रमजान आत्मशुद्धि, संयम और इंसानियत का महीना है, जो हमें जरूरतमंदों की मदद करने और भाईचारे को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से समाज में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। गौरतलब है कि इस बार वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है जब अलविदा जुमा और रमजान का आखिरी दिन एक ही दिन पड़ा। वहीं, मुल्क भर में ईद-उल-फितर का त्योहार 21 मार्च को मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां भी हजारीबाग शहर में जोरों पर हैं। बाजारों में खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है और लोग अपने-अपने घरों में ईद की तैयारियों में जुटे हैं। अलविदा जुमा के मौके पर शहरवासियों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए देश और समाज की तरक्की एवं खुशहाली की दुआएं मांगी। हजारीबाग शहर की जामा मस्जिद में एदार-ए-शरिया हजारीबाग के चीफ काजी सह जामा मस्जिद के खतीब व इमाम मुफ्ती अब्दुल जलील सादी ने अलविदा जुम्मा की नमाज पढ़ाई। इस मौके पर उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि अलविदा जुमा हमें आत्ममंथन का अवसर देता है, यह दिन केवल इबादत का नहीं, बल्कि अपने अंदर झांकने और अपनी कमियों को सुधारने का भी है। उन्होंने कहा कि रमजान हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ सिखाता है। जरूरतमंदों की मदद करना, गरीबों के साथ खड़ा होना और समाज में भाईचारा कायम रखना ही इस महीने का असली मकसद है। उन्होंने लोगों से अपील की कि रमजान के बाद भी इन नेकियों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं और समाज में अमन व मोहब्बत का पैगाम फैलाएं। इस तरह अलविदा जुमा ने हजारीबाग में न केवल इबादत की रौनक बिखेरी, बल्कि एकता, भाईचारे और इंसानियत का मजबूत संदेश भी दिया। रमजान के अंतिम दिन और जुम्मा तुल विदा के मुबारक मौके पर जुम्मा तुल विदा की नमाज अदा करने वाले 06 साल के नन्हे रोजेदार मोहम्मद कोनैन रजा ने दिल को छू लेने वाली बेहद रूहानी अंदाज में कहा कि हम लोगों पर अल्लाह का एहसान और करम है कि आज हम लोग रमजान महीने की अलविदा जुम्मा की नमाज अदा कर रहे हैं और इंशाल्लाह ईद की नमाज भी हम लोग अदा करेंगे और सभी से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद पेश करेंगे। जुम्मा-तुल-विदा के इस मुबारक मौके पर शहर की जामा मस्जिद सहित मस्जिद सुल्तान-उल-हिंद (पगमिल), मस्जिद इब्न-ए-रशीद (लोहसिंघना), हाशमिया कॉलोनी की मस्जिद ए हाशमी, नूरी मस्जिद लोहसिंघना, मस्जिद -ए- आयशा पगमिल (नसीम कॉलोनी), मस्जिद आला हज़रत हाशमिया कालोनी पगमिल, मस्जिद -ए- अरक़म अंसार नगर पगमिल, अजमेरी मस्जिद चिश्तिया मोहल्ला, अल मतीन मस्जिद कल्लू चौक, मदीना मस्जिद ग्वालटोली चौक, गौसिया मस्जिद मिल्लत कालोनी, गौसिया मस्जिद लाखे, मस्जिद -ए- गौसिया गुलशन -ए- बगदाद मंडई कलां, छोटी मस्जिद मंडई कलां, जामा मस्जिद मंडई कलां, मस्जिद -ए- हेरा कोलघट्टी, मस्जिद -ए- अक्सा फिरदौस कॉलोनी कोलघट्टी, नूरा मस्जिद, सरदार चौक मस्जिद, बड़ी बाज़ार ईदगाह मस्जिद, एक नंबर टाउन मस्जिद बड़ी बाजार, मस्जिद -ए- ताज-उश-शरीया खिरगांव, खिरगांव जामा मस्जिद, खानकाह मस्जिद हबीबी नगर खिरगांव, नवाबगंज मस्जिद इंद्रपुरी, औलिया मस्जिद तकिया शरीफ नवाबगंज, कचहरी मस्जिद डिस्ट्रिक्ट बोर्ड चौक, मस्जिद -ए- उमर रोमी, मटवारी मस्जिद, पेलावल जामा मस्जिद पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- इब्राहीमी पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- मोहसिन आज़ाद नगर पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- अंबिया गदोखर रोड पेलावल शरीफ, मदनी मस्जिद मदरसा हुसैनिया पेलावल शरीफ, आशिक -ए- रसूल मस्जिद रहमत नगर पेलावल शरीफ, मोती मस्जिद अमृत नगर, रजा मस्जिद सिल्वार, जामा मस्जिद बहेरी, ओरिया मस्जिद ओरिया, जामा मस्जिद कुद, इमाम -ए- आज़म मस्जिद मसरातु, मस्जिद -ए- रजा जामा मस्जिद पसई, नूरी जामा मस्जिद हरहद, नूरी जामा मस्जिद गदोखर, मस्जिद गौसिया हुसैनी मोहल्ला गदोखर, मस्जिद -ए- बेलाली बलियंद सहित शहर और आसपास की सभी मस्जिदों में नमाज अदा की गई।
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मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़, अमन-चैन और खुशहाली के लिए मांगी गई दुआएं
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अलविदा जुमा आत्ममंथन, इंसानियत और एकता का है पैगाम: चीफ काजी मुफ्ती अब्दुल जलील 
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रमजान हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ सिखाता है: चीफ काजी एदार-ए-शरिया हजारीबाग 
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हजारीबाग। पवित्र रमजान महीने के आखिरी शुक्रवार ‘अलविदा जुमा’ के अवसर पर हजारीबाग शहर में धार्मिक आस्था और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस वर्ष अलविदा जुमा के साथ ही रमजान का अंतिम दिन होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया। शहर की प्रमुख मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने पूरे श्रद्धा भाव से नमाज अदा कर अल्लाह से अमन, शांति और तरक्की की दुआ मांगी। शहर के विभिन्न इलाकों की मस्जिदों में विशेष नमाज का आयोजन किया गया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ‘जुमात-उल-विदा’ की मुबारकबाद दी। इस अवसर पर मुस्लिम धर्मावलंबियों में खास उत्साह देखने को मिला और पूरे दिन इबादत का सिलसिला जारी रहा। धार्मिक विद्वानों ने अपने संदेश में कहा कि रमजान आत्मशुद्धि, संयम और इंसानियत का महीना है, जो हमें जरूरतमंदों की मदद करने और भाईचारे को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से समाज में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। गौरतलब है कि इस बार वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है जब अलविदा जुमा और रमजान का आखिरी दिन एक ही दिन पड़ा। वहीं, मुल्क भर में ईद-उल-फितर का त्योहार 21 मार्च को मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां भी हजारीबाग शहर में जोरों पर हैं। बाजारों में खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है और लोग अपने-अपने घरों में ईद की तैयारियों में जुटे हैं। अलविदा जुमा के मौके पर शहरवासियों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए देश और समाज की तरक्की एवं खुशहाली की दुआएं मांगी। हजारीबाग शहर की जामा मस्जिद में एदार-ए-शरिया हजारीबाग के चीफ काजी सह जामा मस्जिद के खतीब व इमाम मुफ्ती अब्दुल जलील सादी ने अलविदा जुम्मा की नमाज पढ़ाई। इस मौके पर उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि अलविदा जुमा हमें आत्ममंथन का अवसर देता है, यह दिन केवल इबादत का नहीं, बल्कि अपने अंदर झांकने और अपनी कमियों को सुधारने का भी है। उन्होंने कहा कि रमजान हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ सिखाता है। जरूरतमंदों की मदद करना, गरीबों के साथ खड़ा होना और समाज में भाईचारा कायम रखना ही इस महीने का असली मकसद है। उन्होंने लोगों से अपील की कि रमजान के बाद भी इन नेकियों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं और समाज में अमन व मोहब्बत का पैगाम फैलाएं। इस तरह अलविदा जुमा ने हजारीबाग में न केवल इबादत की रौनक बिखेरी, बल्कि एकता, भाईचारे और इंसानियत का मजबूत संदेश भी दिया।
रमजान के अंतिम दिन और जुम्मा तुल विदा के मुबारक मौके पर जुम्मा तुल विदा की नमाज अदा करने वाले 06 साल के नन्हे रोजेदार मोहम्मद कोनैन रजा ने दिल को छू लेने वाली बेहद रूहानी अंदाज में कहा कि हम लोगों पर अल्लाह का एहसान और करम है कि आज हम लोग रमजान महीने की अलविदा जुम्मा की नमाज अदा कर रहे हैं और इंशाल्लाह ईद की नमाज भी हम लोग अदा करेंगे और सभी से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद पेश करेंगे।
जुम्मा-तुल-विदा के इस मुबारक मौके पर शहर की जामा मस्जिद सहित मस्जिद सुल्तान-उल-हिंद (पगमिल), मस्जिद इब्न-ए-रशीद (लोहसिंघना), हाशमिया कॉलोनी की मस्जिद ए हाशमी, नूरी मस्जिद लोहसिंघना, मस्जिद -ए- आयशा पगमिल (नसीम कॉलोनी), मस्जिद आला हज़रत हाशमिया कालोनी पगमिल, मस्जिद -ए- अरक़म अंसार नगर पगमिल, अजमेरी मस्जिद चिश्तिया मोहल्ला, अल मतीन मस्जिद कल्लू चौक, मदीना मस्जिद ग्वालटोली चौक, गौसिया मस्जिद मिल्लत कालोनी, गौसिया मस्जिद लाखे, मस्जिद -ए- गौसिया गुलशन -ए- बगदाद मंडई कलां, छोटी मस्जिद मंडई कलां, जामा मस्जिद मंडई कलां, मस्जिद -ए- हेरा कोलघट्टी, मस्जिद -ए- अक्सा फिरदौस कॉलोनी कोलघट्टी, नूरा मस्जिद, सरदार चौक मस्जिद, बड़ी बाज़ार ईदगाह मस्जिद, एक नंबर टाउन मस्जिद बड़ी बाजार, मस्जिद -ए- ताज-उश-शरीया खिरगांव, खिरगांव जामा मस्जिद, खानकाह मस्जिद हबीबी नगर खिरगांव, नवाबगंज मस्जिद इंद्रपुरी, औलिया मस्जिद तकिया शरीफ नवाबगंज, कचहरी मस्जिद डिस्ट्रिक्ट बोर्ड चौक, मस्जिद -ए- उमर रोमी, मटवारी मस्जिद, पेलावल जामा मस्जिद पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- इब्राहीमी पेलावल शरीफ,
मस्जिद -ए- मोहसिन आज़ाद नगर पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- अंबिया गदोखर रोड पेलावल शरीफ, मदनी मस्जिद मदरसा हुसैनिया पेलावल शरीफ, आशिक -ए- रसूल मस्जिद रहमत नगर पेलावल शरीफ, मोती मस्जिद अमृत नगर, रजा मस्जिद सिल्वार, जामा मस्जिद बहेरी, ओरिया मस्जिद ओरिया, जामा मस्जिद कुद, इमाम -ए- आज़म मस्जिद मसरातु, मस्जिद -ए- रजा जामा मस्जिद पसई, नूरी जामा मस्जिद हरहद, नूरी जामा मस्जिद गदोखर, मस्जिद गौसिया हुसैनी मोहल्ला गदोखर, मस्जिद -ए- बेलाली बलियंद सहित शहर और आसपास की सभी मस्जिदों में नमाज अदा की गई।
    user_Ejaj Alam
    Ejaj Alam
    Press हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    20 hrs ago
  • Post by Kashif Adib
    1
    Post by Kashif Adib
    user_Kashif Adib
    Kashif Adib
    Local News Reporter हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    2 hrs ago
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