बैतूल जिले के भैंसदेही में स्थित श्री त्रिवेणी भारती नागा दादाजी धाम से श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था हाथों में निशान (ध्वजा) लेकर नंगे पैर करीब 180 किलोमीटर की पदयात्रा पर खंडवा के लिए रवाना हुआ है। 'श्री दादाजी नाम संकीर्तन' करते हुए आगे बढ़ रहे इन श्रद्धालुओं का जत्था देसली पहुंच गया है। इस पदयात्रा का पहला विश्राम रंभा में हुआ, जहां दादा भक्त आर्य परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी और विश्राम की व्यवस्था की गई। इस पावन यात्रा में दादाजी सेवा भक्त मंडल के कमल धाकड़, गुलशन, पंकज, सतीश, शिवदीन काका, गब्बर, सतीश लांडे और श्याम आर्य सहित सैकड़ों भक्त शामिल हैं। त्रिवेणी भारती नागा दादाजी समिति के अनुसार, यह परंपरा कई वर्षों से लगातार चली आ रही है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर श्री दादाजी धूनीवाले के दरबार में देश भर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। श्री दादाजी धूनीवाले का यह दरबार पूरे देश में इकलौता ऐसा स्थान है जहां गुरु और शिष्य दोनों की समाधियां एक ही जगह पर स्थित हैं, जिससे इस पर्व का महत्व काफी बढ़ जाता है। श्रद्धालुओं के इस सफर में मार्ग में जगह-जगह अद्भुत सेवा भाव देखने को मिल रहा है। अमीर हो या गरीब, छोटा व्यापारी हो या बड़ा, सभी अपना कारोबार बंद करके निस्वार्थ भाव से पदयात्रियों की सेवा में जुट गए हैं। रास्ते में यात्रियों से बिना कोई पैसा लिए उन्हें सम्मानपूर्वक जलपान कराने से लेकर मालपुआ तक खिलाया जा रहा है। इस सेवा कार्य में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और बच्चे भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। नर्मदा के उपासक अवधूत संत बड़े दादाजी स्वामी केशवानंद महाराज के कदम 30 नवंबर 1930 को खंडवा की पावन भूमि पर पड़े थे। इसके ठीक चार दिन बाद उन्होंने अपनी देह त्याग कर निर्वाण प्राप्त कर लिया था। इसके बाद उनके प्रिय शिष्य छोटे दादाजी स्वामी हरिहरानंद जी को आश्रम का उत्तराधिकारी बनाया गया, जिन्होंने लंबे समय तक यहां की व्यवस्थाओं को संभाला। 12 वर्षों के बाद 4 फरवरी 1942 को छोटे दादाजी का भी निर्वाण हो गया और उनकी समाधि भी बड़े दादाजी के समीप ही बनाई गई। वर्तमान में इन दोनों ही चमत्कारिक संतों के भक्त पूरे देश में फैले हुए हैं जो हर साल गुरु पूर्णिमा के मौके पर यहां निशान चढ़ाने की परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ निर्वहन करते हैं।
बैतूल जिले के भैंसदेही में स्थित श्री त्रिवेणी भारती नागा दादाजी धाम से श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था हाथों में निशान (ध्वजा) लेकर नंगे पैर करीब 180 किलोमीटर की पदयात्रा पर खंडवा के लिए रवाना हुआ है। 'श्री दादाजी नाम संकीर्तन' करते हुए आगे बढ़ रहे इन श्रद्धालुओं का जत्था देसली पहुंच गया है। इस पदयात्रा का पहला विश्राम रंभा में हुआ, जहां दादा भक्त आर्य परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी और विश्राम की व्यवस्था की गई। इस पावन यात्रा में दादाजी सेवा भक्त मंडल के कमल धाकड़, गुलशन, पंकज, सतीश, शिवदीन काका, गब्बर, सतीश लांडे और श्याम आर्य सहित सैकड़ों भक्त शामिल हैं। त्रिवेणी भारती नागा दादाजी समिति के अनुसार, यह परंपरा कई वर्षों से लगातार चली आ रही है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर
पर श्री दादाजी धूनीवाले के दरबार में देश भर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। श्री दादाजी धूनीवाले का यह दरबार पूरे देश में इकलौता ऐसा स्थान है जहां गुरु और शिष्य दोनों की समाधियां एक ही जगह पर स्थित हैं, जिससे इस पर्व का महत्व काफी बढ़ जाता है। श्रद्धालुओं के इस सफर में मार्ग में जगह-जगह अद्भुत सेवा भाव देखने को मिल रहा है। अमीर हो या गरीब, छोटा व्यापारी हो या बड़ा, सभी अपना कारोबार बंद करके निस्वार्थ भाव से पदयात्रियों की सेवा में जुट गए हैं। रास्ते में यात्रियों से बिना कोई पैसा लिए उन्हें सम्मानपूर्वक जलपान कराने से लेकर मालपुआ तक खिलाया जा रहा है। इस सेवा कार्य में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और बच्चे भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे
हैं। नर्मदा के उपासक अवधूत संत बड़े दादाजी स्वामी केशवानंद महाराज के कदम 30 नवंबर 1930 को खंडवा की पावन भूमि पर पड़े थे। इसके ठीक चार दिन बाद उन्होंने अपनी देह त्याग कर निर्वाण प्राप्त कर लिया था। इसके बाद उनके प्रिय शिष्य छोटे दादाजी स्वामी हरिहरानंद जी को आश्रम का उत्तराधिकारी बनाया गया, जिन्होंने लंबे समय तक यहां की व्यवस्थाओं को संभाला। 12 वर्षों के बाद 4 फरवरी 1942 को छोटे दादाजी का भी निर्वाण हो गया और उनकी समाधि भी बड़े दादाजी के समीप ही बनाई गई। वर्तमान में इन दोनों ही चमत्कारिक संतों के भक्त पूरे देश में फैले हुए हैं जो हर साल गुरु पूर्णिमा के मौके पर यहां निशान चढ़ाने की परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ निर्वहन करते हैं।
- Rohit Nakhateभैंसदेही, बैतूल, मध्य प्रदेशजय श्री दादाजी महाराज 🙏🙏🙏🙏9 hrs ago
- बैतूल जिले के भैंसदेही में स्थित श्री त्रिवेणी भारती नागा दादाजी धाम से श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था हाथों में निशान (ध्वजा) लेकर नंगे पैर करीब 180 किलोमीटर की पदयात्रा पर खंडवा के लिए रवाना हुआ है। 'श्री दादाजी नाम संकीर्तन' करते हुए आगे बढ़ रहे इन श्रद्धालुओं का जत्था देसली पहुंच गया है। इस पदयात्रा का पहला विश्राम रंभा में हुआ, जहां दादा भक्त आर्य परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी और विश्राम की व्यवस्था की गई। इस पावन यात्रा में दादाजी सेवा भक्त मंडल के कमल धाकड़, गुलशन, पंकज, सतीश, शिवदीन काका, गब्बर, सतीश लांडे और श्याम आर्य सहित सैकड़ों भक्त शामिल हैं। त्रिवेणी भारती नागा दादाजी समिति के अनुसार, यह परंपरा कई वर्षों से लगातार चली आ रही है। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अवसर पर श्री दादाजी धूनीवाले के दरबार में देश भर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। श्री दादाजी धूनीवाले का यह दरबार पूरे देश में इकलौता ऐसा स्थान है जहां गुरु और शिष्य दोनों की समाधियां एक ही जगह पर स्थित हैं, जिससे इस पर्व का महत्व काफी बढ़ जाता है। श्रद्धालुओं के इस सफर में मार्ग में जगह-जगह अद्भुत सेवा भाव देखने को मिल रहा है। अमीर हो या गरीब, छोटा व्यापारी हो या बड़ा, सभी अपना कारोबार बंद करके निस्वार्थ भाव से पदयात्रियों की सेवा में जुट गए हैं। रास्ते में यात्रियों से बिना कोई पैसा लिए उन्हें सम्मानपूर्वक जलपान कराने से लेकर मालपुआ तक खिलाया जा रहा है। इस सेवा कार्य में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और बच्चे भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। नर्मदा के उपासक अवधूत संत बड़े दादाजी स्वामी केशवानंद महाराज के कदम 30 नवंबर 1930 को खंडवा की पावन भूमि पर पड़े थे। इसके ठीक चार दिन बाद उन्होंने अपनी देह त्याग कर निर्वाण प्राप्त कर लिया था। इसके बाद उनके प्रिय शिष्य छोटे दादाजी स्वामी हरिहरानंद जी को आश्रम का उत्तराधिकारी बनाया गया, जिन्होंने लंबे समय तक यहां की व्यवस्थाओं को संभाला। 12 वर्षों के बाद 4 फरवरी 1942 को छोटे दादाजी का भी निर्वाण हो गया और उनकी समाधि भी बड़े दादाजी के समीप ही बनाई गई। वर्तमान में इन दोनों ही चमत्कारिक संतों के भक्त पूरे देश में फैले हुए हैं जो हर साल गुरु पूर्णिमा के मौके पर यहां निशान चढ़ाने की परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ निर्वहन करते हैं।3
- उड़ीसा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा की तर्ज पर अब बैतूल में भी पहली बार भगवान श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथयात्रा का आयोजन होने जा रहा है। इस्कॉन द्वारा आगामी 25 जुलाई 2026, शनिवार को आयोजित की जाने वाली इस ऐतिहासिक रथयात्रा में भगवान श्री जगन्नाथ जी, उनके बड़े भाई बलभद्र जी और बहन सुभद्रा जी रथ पर सवार होकर भक्तों को आशीर्वाद देने निकलेंगे। यह रथयात्रा दोपहर 3 बजे पेट्रोल पंप के पास स्थित माता मंदिर, बैतूल गंज से प्रस्थान कर शाम 6 बजे रामकृष्ण बगिया, बैतूल गंज पहुंचेगी। रामकृष्ण बगिया में रथयात्रा पहुंचने के बाद इस्कॉन ब्यूरो के वाइस चेयरमैन एवं उत्तर भारत जोनल सचिव, इस्कॉन के संस्थापक जगतगुरू श्रील प्रभुपाद के कृपापात्र शिष्य व इस्कॉन इन्दौर के प्रमुख श्रीपाद महामन जी महाराज के साथ ही इस्कॉन बैतूल के संचालक श्रीपाद कृष्णार्चन प्रभुजी एवं अन्य सभी संतों द्वारा प्रवचन व महा आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसके पश्चात सायं 7 बजे इसका समापन होगा। इसी सिलसिले में रविवार को कोठीबाजार में नगर संकीर्तन का आयोजन कर धर्मप्रेमी नागरिकों को इस रथयात्रा में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया। सभी श्रद्धालुओं से इस भव्य रथ-यात्रा में शामिल होने, रथ खींचने और प्रसादी ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित करने का विशेष अनुरोध किया गया है।1
- बैतूल के भैंसदेही से दादा भक्तों का एक जत्था खंडवा में निशान चढ़ाने के लिए पैदल निकल चुका है। इस यात्रा के दौरान रास्ते में जगह-जगह पूजन के साथ इन दादा भक्तों की सेवा-सुश्रूषा की जा रही है। इसी कड़ी में, मार्ग में आने वाले एक गाँव में रात्रि विश्राम के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा दादाजी की महाआरती उतारी गई और उनका पूजन किया गया।1
- बैतूल के शाहपुर में एक पति अपनी ही पत्नी का हत्यारा बन गया। इस वारदात के बाद शाहपुर पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर आरोपी पति भरत धुर्वे को गिरफ्तार कर लिया है।2
- नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के द्वारा एक बैठक का आयोजन किया जा रहा है।1
- मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत रविवार को वरिष्ठ श्रद्धालुओं का जत्था हरिद्वार एवं ऋषिकेश की पावन यात्रा के लिए रवाना हुआ। बैतूल रेलवे स्टेशन पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने इन बुजुर्ग श्रद्धालुओं का पुष्पमालाओं से आत्मीय स्वागत, सम्मान और अभिनंदन किया तथा उनकी सुखद, सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं। इस यात्रा में आमला क्षेत्र के भी लगभग 65 श्रद्धालुओं का चयन हुआ है, जो इस योजना के तहत देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन करेंगे। इस गरिमामयी अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित यह जनकल्याणकारी योजना वरिष्ठ नागरिकों की आस्था, सम्मान और सेवा के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसके माध्यम से बुजुर्ग श्रद्धालुओं को निःशुल्क तीर्थ यात्रा का अवसर प्रदान कर उन्हें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भोजन, आवास, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इस विदाई समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री डी.डी. उइके, जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे, ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष प्रशांत गावंडे, डीएम, एडीएम वंदना जाट, एसडीएम अभिजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।4
- Post by दैनिक अग्निवर्षा अखबार मीडिया1