मथुरा में उप निबंधन कार्य को निजी कंपनी के माध्यम से संचालित कराने की प्रस्तावित व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखक संघ, अधिवक्ता, ई-स्टाम्प वेंडर और टाइपिस्टों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को आठवें दिन भी जारी रही। प्रदर्शनकारियों ने रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में धरना दिया और इस प्रस्तावित व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की, जिसके कारण रजिस्ट्री कार्यालय का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हुआ। इस हड़ताल से आम जनता परेशान है क्योंकि उनकी रजिस्ट्रियां नहीं हो पा रही हैं। प्रदर्शनकारी निबंधन कार्य को निजी कंपनियों या 'निबंध मित्र' के हाथों में सौंपने के निजीकरण का मुखर विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक प्रदीप माथुर और कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पंडित यातेंद्र मुकदम ने इस अनिश्चितकालीन धरने को अपना समर्थन दिया। उन्होंने सरकार की इस प्रस्तावित व्यवस्था को रोजगार विरोधी बताते हुए इसे 'आजीविका पर संकट' और 'काला नियम' करार दिया, और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।
मथुरा में उप निबंधन कार्य को निजी कंपनी के माध्यम से संचालित कराने की प्रस्तावित व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखक संघ, अधिवक्ता, ई-स्टाम्प वेंडर और टाइपिस्टों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को आठवें दिन भी जारी रही। प्रदर्शनकारियों ने
रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में धरना दिया और इस प्रस्तावित व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की, जिसके कारण रजिस्ट्री कार्यालय का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हुआ। इस हड़ताल से आम जनता परेशान है क्योंकि उनकी रजिस्ट्रियां नहीं हो
पा रही हैं। प्रदर्शनकारी निबंधन कार्य को निजी कंपनियों या 'निबंध मित्र' के हाथों में सौंपने के निजीकरण का मुखर विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक प्रदीप माथुर और कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पंडित यातेंद्र मुकदम ने
इस अनिश्चितकालीन धरने को अपना समर्थन दिया। उन्होंने सरकार की इस प्रस्तावित व्यवस्था को रोजगार विरोधी बताते हुए इसे 'आजीविका पर संकट' और 'काला नियम' करार दिया, और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।
- बहराइच जिले के मटेरा विधानसभा क्षेत्र में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया, जिसमें AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) की बैठक में भारी संख्या में लोग उमड़े। इस जनसभा में बड़ी भीड़ देखने को मिली, जो मटेरा विधानसभा क्षेत्र में AIMIM के कार्यक्रम में लोगों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।1
- मथुरा के रिफाइनरी थाना क्षेत्र में गिरिराजजी की परिक्रमा करके लौट रहे श्रद्धालुओं से भरे एक लोडर वाहन को पीछे से एक ट्रेलर ने रौंद दिया। रविवार रात को हुए इस दर्दनाक हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के रायपुर जिले से आए करीब दो दर्जन श्रद्धालुओं का एक जत्था गिरिराजजी की परिक्रमा पूरी कर अपने घर लौट रहा था। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही रिफाइनरी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, जहाँ चिकित्सकों ने दीवान सिंह और हरिकिशन नामक दो श्रद्धालुओं को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में 13 घायलों का इलाज जारी है। घटना की जानकारी मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्र ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना। सीएमओ डॉक्टर राधावल्लभ और सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने भी मरीजों की स्थिति का जायजा लिया और बताया कि सभी घायलों का उपचार चल रहा है तथा वे खतरे से बाहर हैं।4
- जनपद मथुरा से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ भू-माफियाओं पर उपजाऊ कृषि भूमि पर अवैध रूप से नगर निगम का कूड़ा-कचरा डलवाकर उसे बर्बाद करने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी मथुरा को एक शिकायती पत्र सौंपकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। पीड़ित जितेन्द्र ने जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी कृषि भूमि, जिसका खाता संख्या 00091 और 02 में कुल रकबा 0.8130 हेक्टेयर दर्ज है, पर कुछ लोगों द्वारा गैरकानूनी तरीके से नगर निगम का कूड़ा डलवाया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, उक्त भूमि से संबंधित बंटवारे का एक मामला उपजिलाधिकारी महावन न्यायालय में अभी भी विचाराधीन है। इसके बावजूद, आरोपित पक्ष अपनी दबंगई के बल पर उपजाऊ भूमि को नुकसान पहुँचा रहा है। इस आरोप में कपिल, धर्मवीर, रवि दीक्षित सहित अन्य लोगों को नामित किया गया है। पीड़ित का कहना है कि जब तक भूमि का कोई कानूनी बंटवारा नहीं हुआ है, तब तक नगर निगम के माध्यम से कूड़ा डलवाकर उपजाऊ जमीन को नष्ट किया जा रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण एवं नगर निगम से बिना किसी विधिक अनुमति अथवा स्वीकृति के ही कृषि भूमि पर अनाधिकृत रूप से अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं, जो संबंधित नियमों एवं भूमि उपयोग मानकों का खुला उल्लंघन है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की जाए, कृषि भूमि पर कूड़ा-कचरा डलवाने पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा बिना अनुमति विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित को कब तक न्याय मिल पाता है।2
- उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के विरोध में 'हाय-हाय' के नारे लगाए गए।2
- आगामी 2027 के चुनावों को लेकर ओवैसी ने मटेरा में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस जनसभा के दौरान उन्होंने 2027 के चुनावों के संदर्भ में अपनी ओर से हुंकार भरी।1
- मथुरा जनपद में लगभग दो दशक से चल रहे सनसिटी हाईटेक भूमि घोटाले से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहाँ पीड़ित नेम सिंह, जो अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, ने कुछ विधिक और वास्तविक तथ्यों पर ध्यान आकर्षित कराया है। यह विवादित भूमि खसरा नंबर 422, ग्राम रामताल, सुनरख बाँगर, तहसील सदर, जिला मथुरा में स्थित है, जिस पर प्रार्थी का पुराना, शांतिपूर्ण और वास्तविक कब्ज़ा होने का दावा है। इस संपत्ति के मालिकाना हक, बैनामा निरस्तीकरण और स्थायी निषेधाज्ञा को लेकर न्यायालय द्वितीय अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन, मथुरा में 11 सितंबर 2017 से 'नेम सिंह बनाम सनसिटी' नामक एक दीवानी वाद विचाराधीन है। इस दीवानी मुकदमे के लंबित रहने के दौरान, सिटी मजिस्ट्रेट, मथुरा द्वारा धारा 146 सीआर.पी.सी. के तहत पारित कुर्की के आदेश को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2 जनवरी 2023 को अंतिम आदेश पारित करते हुए पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामला सिविल कोर्ट के अधीन है और इस जमीन को किसी भी व्यक्ति को नहीं बेचा जा सकता है। हालांकि, उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद, सनसिटी द्वारा नेम सिंह की जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया है। इसी कारण नेम सिंह लगातार अदालत और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। अब यह देखना होगा कि इस मामले में अदालत और आला अधिकारी क्या निर्णय लेते हैं, या फिर यूं ही इस पीड़ित को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ेंगी। यह वर्षों से मथुरा में चला आ रहा सनसिटी हाईटेक भूमि विवाद कब थमेगा, यह एक बड़ा प्रश्न है।1
- मथुरा में उप निबंधन कार्य को निजी कंपनी के माध्यम से संचालित कराने की प्रस्तावित व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखक संघ, अधिवक्ता, ई-स्टाम्प वेंडर और टाइपिस्टों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को आठवें दिन भी जारी रही। प्रदर्शनकारियों ने रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में धरना दिया और इस प्रस्तावित व्यवस्था को तुरंत वापस लेने की मांग की, जिसके कारण रजिस्ट्री कार्यालय का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हुआ। इस हड़ताल से आम जनता परेशान है क्योंकि उनकी रजिस्ट्रियां नहीं हो पा रही हैं। प्रदर्शनकारी निबंधन कार्य को निजी कंपनियों या 'निबंध मित्र' के हाथों में सौंपने के निजीकरण का मुखर विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक प्रदीप माथुर और कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पंडित यातेंद्र मुकदम ने इस अनिश्चितकालीन धरने को अपना समर्थन दिया। उन्होंने सरकार की इस प्रस्तावित व्यवस्था को रोजगार विरोधी बताते हुए इसे 'आजीविका पर संकट' और 'काला नियम' करार दिया, और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की।4
- मथुरा में एक सीएनजी पंप के करीब एक बड़ा हादसा उस वक्त टल गया, जब एक चलते हुए टेंपो में अचानक भीषण आग लग गई। इस घटना के दौरान, टेंपो में सवार यात्रियों ने तुरंत कूदकर अपनी जान बचाई।1