आम आदमी पार्टी (आप) के एक प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्षा उमा गौड़ सिसोदिया के नेतृत्व में किए गए इस दौरे के दौरान वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी और शौचालयों का गहन निरीक्षण किया गया। आप नेताओं का आरोप है कि अस्पताल में बिस्तरों की भारी कमी के कारण मरीजों को फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, स्ट्रेचर और ट्रॉली की अनुपलब्धता के चलते गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पार्टी ने दवाओं की किल्लत का मुद्दा भी उठाया, यह कहते हुए कि मरीजों को महंगी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इन गंभीर समस्याओं को लेकर आप ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है।
आम आदमी पार्टी (आप) के एक प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्षा उमा गौड़ सिसोदिया के नेतृत्व में किए गए इस दौरे के दौरान वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी और शौचालयों का गहन निरीक्षण किया गया। आप नेताओं का आरोप है कि अस्पताल में बिस्तरों की भारी कमी के कारण मरीजों को फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, स्ट्रेचर और ट्रॉली की अनुपलब्धता के चलते गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पार्टी ने दवाओं की किल्लत का मुद्दा भी उठाया, यह कहते हुए कि मरीजों को महंगी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इन गंभीर समस्याओं को लेकर आप ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है।
- आम आदमी पार्टी (आप) के एक प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्षा उमा गौड़ सिसोदिया के नेतृत्व में किए गए इस दौरे के दौरान वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी और शौचालयों का गहन निरीक्षण किया गया। आप नेताओं का आरोप है कि अस्पताल में बिस्तरों की भारी कमी के कारण मरीजों को फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, स्ट्रेचर और ट्रॉली की अनुपलब्धता के चलते गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पार्टी ने दवाओं की किल्लत का मुद्दा भी उठाया, यह कहते हुए कि मरीजों को महंगी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इन गंभीर समस्याओं को लेकर आप ने प्रदेश सरकार को घेरते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है।1
- उत्तर प्रदेश के सभी निवासियों के लिए बिजली से संबंधित समझ बढ़ाने हेतु एक वीडियो उपलब्ध है।1
- मुंबई में नीट री-एग्जाम के दौरान कड़े नियमों के चलते दो छात्राओं को परीक्षा देने से वंचित होना पड़ा, जिससे परीक्षा केंद्र के बाहर तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। यह घटना परेल स्थित महर्षि दयानंद कॉलेज में हुई, जहाँ छात्राओं को गेट बंद होने के निर्धारित समय 1:30 बजे के बाद केवल 2 मिनट की देरी से पहुंचने के कारण केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया। परीक्षा केंद्रों पर समय-सीमा (गेट क्लोजिंग टाइम) का अत्यंत सख्ती से पालन किया जाता है, जिसके कारण छात्रों को थोड़ी सी भी देरी, चाहे वह 1 या 2 मिनट की ही क्यों न हो, होने पर सेंटर के भीतर जाने की अनुमति नहीं मिलती है।1
- देहरादून में आयोजित समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुल 146 जन शिकायतों को सुना। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को इन शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी डॉ. चौहान ने अधिकारियों को शिकायत-बहुल क्षेत्रों की जीआईएस मैपिंग कराने और ऐसे हॉटस्पॉट क्षेत्रों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का भी आदेश दिया। उन्होंने महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों में वन स्टॉप सेंटर को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया, साथ ही अतिक्रमण, अवैध कब्जे, बिजली, पेयजल और भूमि विवादों से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि शिकायतों को लंबित रखना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधी कार्रवाई की जाएगी।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) की 23वीं किस्त जारी की है। इस किस्त के तहत, देश भर के 9 करोड़ 44 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹18,880 करोड़ से ज्यादा की राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन बराबर किस्तों में उनके खातों में पहुंचती है। सरकार का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े खर्चों में सहायता प्रदान करना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है। सरकार के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें आर्थिक सहायता, फसल बीमा, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि तकनीक को बढ़ावा देना और बाजार तक बेहतर पहुंच शामिल है। केंद्र सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि इन योजनाओं का पैसा बिचौलियों के बजाय सीधे किसानों तक पहुंच रहा है, जिससे DBT व्यवस्था के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ी है और लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में सहायता राशि मिल रही है। इस किस्त को किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे उन्हें खेती के शुरुआती खर्चों में मदद मिलेगी और बीज, खाद तथा कृषि उपकरणों की खरीद में राहत मिलेगी। यह छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहारा प्रदान करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में भी बड़ी संख्या में किसान PM किसान योजना का लाभ उठा रहे हैं, जहां वे इस सहायता राशि का उपयोग गेहूं, धान, सरसों और अन्य फसलों की खेती संबंधी जरूरतों को पूरा करने में करते हैं। किसानों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे योजना का लाभ निर्बाध रूप से प्राप्त करने के लिए अपने बैंक खाते, आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी रखें। सरकार PM किसान सम्मान निधि योजना को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है, और अब भविष्य में किसानों के लिए सरकार के अन्य बड़े फैसलों पर नज़र रहेगी।1
- उत्तराखंड के देहरादून स्थित विकास नगर में धर्मा वाला टोल प्लाजा शिमला बायपास पर एक स्थानीय नागरिक को बेरहमी से पीटा गया। यह घटना 21.06.26 की रात की बताई जा रही है, जहाँ हरियाणा से आए कुछ लड़के-लड़कियाँ शराब के नशे में धुत होकर थोड़ी सी कहासुनी को लेकर इस मारपीट में शामिल थे और स्थानीय नागरिक को पीटते हुए नजर आए। इस मामले में पुलिस को सूचना मिली या नहीं, इस पर सवाल उठाया जा रहा है, क्योंकि अगर सूचना मिली भी है, तो अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। चेतावनी दी गई है कि यदि उत्तराखंड प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं करता है, तो इनके हौसले और बुलंद हो जाएँगे। माँग की गई है कि इनको जेल भेजा जाए ताकि आने वाले समय में कोई उत्तराखंड में ऐसी बदमाशी न कर सके।1