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संपूर्ण राम चरित मानस पाठ दुर्गा मंदिर गुरुद्वारा के पास गायक आशुतोष पांडेय
संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
संपूर्ण राम चरित मानस पाठ दुर्गा मंदिर गुरुद्वारा के पास गायक आशुतोष पांडेय
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- धुरकी थाना प्रभारी जनार्दन राउत ने रामलीला हो रहे प्रोग्राम में सामिल हुए1
- सोनभद्र बीजपुर थाना क्षेत्र के राजमिलान गांव में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसे में 3 वर्षीय मासूम की बाउली में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान आयुष (3 वर्ष) पुत्र बच्चालाल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मासूम खेलते-खेलते घर से करीब 300 मीटर दूर चला गया और वहां स्थित एक बाउली में गिर गया। काफी देर तक जब बच्चा घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान मासूम का शव बाउली में मिला, जिसे देख परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से शव को बाउली से बाहर निकलवाया। पुलिस ने शव को मर्चरी में रखवाकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण लापरवाही और असुरक्षित खुले जल स्रोत को माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई जगहों पर इस तरह की बाउली और कुएं खुले पड़े हैं, जो हादसों को न्योता दे रहे हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।1
- सोनभद्र के ओबरा नगर में शारदा मंदिर डिग्री कॉलेज रोड पर जाम की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। ग्राम पंचायत बैरियर और गिट्टी से लदे ओवरलोड ट्रकों की वजह से सर्विस लेन पर लंबा जाम लग जाता है। खासकर शाम 6 बजे के बाद हालात और बिगड़ जाते हैं, जब सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। राहगीरों, छात्रों और स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या से रोज़ जूझना पड़ रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।1
- Post by Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief1
- महंगाई की मार या बदली आस्था की तस्वीर? सोनभद्र के प्रमुख शक्तिपीठों में इस बार कम दिखी रौनक सोनभद्र (डाला/ओबरा/चोपन): चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर इस वर्ष श्रद्धा और अर्थव्यवस्था के बीच एक अजीब सा संघर्ष देखने को मिल रहा है। जिले के प्रमुख शक्तिपीठों और मंदिरों में नवरात्रि के दूसरे दिन वह पारंपरिक उत्साह और भीड़ नजर नहीं आई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। प्रमुख मंदिरों का हाल: जहाँ कभी लगती थी लंबी कतारें डाला वैष्णो मंदिर: पिछले वर्ष तक यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था, लेकिन इस बार परिसर काफी खाली नजर आ रहा है। ओबरा मां शारदा मंदिर: यहाँ भी भक्तों की कतारें इस साल छोटी हो गई हैं, जिससे उत्सव की चमक कुछ फीकी लग रही है। चोपन काली मंदिर एवं दुर्गा मंदिर: चोपन के प्रसिद्ध काली मंदिर और दुर्गा मंदिर, जहाँ क्षेत्रीय भक्तों का भारी जमावड़ा होता था, वहाँ भी इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। दुकानदारों के माथे पर चिंता की लकीरें मंदिरों के बाहर प्रसाद, चुनरी और पूजन सामग्री बेचने वाले स्थानीय दुकानदारों के लिए यह सीजन काफी निराशाजनक साबित हो रहा है। दुकानदारों का कहना है: "पिछले साल पहले और दूसरे दिन ही हमने शानदार मुनाफा कमाया था, लेकिन इस वर्ष भक्तों की संख्या इतनी कम है कि लागत निकालना भी मुश्किल लग रहा है। ऐसा लगता है जैसे महंगाई ने लोगों की जेब के साथ उनके उत्साह को भी प्रभावित किया है।" क्या महंगाई और कम आय बन रही है बाधा? स्थानीय लोगों और जानकारों की मानें तो बढ़ती महंगाई और लोगों की घटती आय इसका मुख्य कारण है। आवागमन के खर्च और पूजन सामग्री के बढ़ते दामों ने आम आदमी को बजट संभालने पर मजबूर कर दिया है। यही कारण है कि लोग अब मंदिरों तक जाने के बजाय अपने घरों में ही पूजा-अर्चना करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। एक नजर में मुख्य बातें: मंदिरों में सन्नाटा: डाला, ओबरा और चोपन के प्रमुख मंदिरों में भीड़ का अभाव। आर्थिक दबाव: महंगाई के कारण भक्तों ने बनाई मंदिरों से दूरी, घर में ही कर रहे अनुष्ठान। व्यापार पर चोट: स्थानीय विक्रेताओं को पिछले साल की तुलना में भारी घाटा।3
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