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पत्नी ने अपने पति पर लगाम लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन हर बार वह असफल हुई

2 hrs ago
user_Dharm Raj
Dharm Raj
Farmer Amethi, Uttar Pradesh•
2 hrs ago

पत्नी ने अपने पति पर लगाम लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन हर बार वह असफल हुई

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  • पत्नी ने अपने पति पर लगाम लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन हर बार वह असफल हुई
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    पत्नी ने अपने पति पर लगाम लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन हर बार वह असफल हुई
    user_Dharm Raj
    Dharm Raj
    Farmer Amethi, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • अमेठी के शुकुल बाजार थाना क्षेत्र के नान्दी पम्प कैनाल भैरमपुर जंगल मे अज्ञात कारणों से आग लग गई है आसपास के गांव के ग्रामीण डरे हुए हैं उन्हें भारी नुक्शान की आशंका है उधर मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया है
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    अमेठी के शुकुल बाजार थाना क्षेत्र के नान्दी पम्प कैनाल भैरमपुर जंगल मे अज्ञात कारणों से आग लग गई है आसपास के गांव के ग्रामीण डरे हुए हैं उन्हें भारी नुक्शान की आशंका है उधर मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया है
    user_Madusoodan
    Madusoodan
    अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अमेठी। संग्रामपुर क्षेत्र के ग्रामसभा सहजीपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस कथा व्यास पूज्य स्वामी ओमानंद जी महाराज ने विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का महत्व बताया। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान श्रीमती गीता तिवारी एवं बालकृष्ण तिवारी हैं। कथा के दौरान स्वामी ओमानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जब किसी यात्रा की शुरुआत करता है तो कई बार उसे शुभ और अशुभ संकेत मिलते हैं। इन संकेतों के पीछे भी जीवन के गहरे आध्यात्मिक संदेश छिपे होते हैं। उन्होंने बताया कि यह संसार भी एक यात्रा की तरह है, जिसमें मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक अनेक अनुभवों और परिस्थितियों से गुजरता है। महाराज जी ने शुकदेव जी महाराज का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उनकी दृष्टि में समस्त संसार भगवान का ही स्वरूप था। उनके मन में स्त्री और पुरुष का कोई भेद नहीं था, वे हर प्राणी में परमात्मा का ही दर्शन करते थे। यही सच्चे ज्ञान और वैराग्य की अवस्था मानी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने व्यास जी और नारद जी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब व्यास जी के मन में अशांति उत्पन्न हुई तो नारद जी ने उन्हें भगवान की भक्ति और कथा का महत्व समझाया। भगवान की कथा ही वह माध्यम है, जिससे मनुष्य के मन, बुद्धि और चित्त को शांति प्राप्त होती है। स्वामी ओमानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में दो प्रकार की बीमारियां होती हैं—एक शारीरिक और दूसरी मानसिक। शारीरिक रोग का उपचार डॉक्टर कर सकते हैं, लेकिन मानसिक शांति और संतोष केवल भक्ति, सत्संग और भगवान की कथा से ही प्राप्त होता है। जब मन, बुद्धि और चित्त एक हो जाते हैं, तभी मनुष्य को सच्चा सुख और शांति मिलती है। कथा के दौरान महाराज जी ने नारद जी के जीवन की एक मार्मिक घटना का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि एक बार संध्या के समय नारद जी की माता गाय का दूध निकालने के लिए गई थीं, तभी एक सर्प ने उन्हें डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद नारद जी का मन संसार से पूरी तरह विरक्त हो गया और वे भगवान की भक्ति में लीन हो गए। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान का स्मरण किया और कथा का रसपान किया। इस अवसर पर श्यामकृष्ण, राधेकृष्ण, त्रियुगी तिवारी, कल्लू पांडेय, शैलेंद्र तिवारी, सुधांशु, कुलदीप, संदीप, अभिनव, शुभम, सचिन शुक्ला, आदित्य मिश्र, सौरभ, अनूप, अनिल तिवारी, उत्कर्ष, शिवांशु, दीपांशु, अजय यादव, शंकर यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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    अमेठी। संग्रामपुर क्षेत्र के ग्रामसभा सहजीपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस कथा व्यास पूज्य स्वामी ओमानंद जी महाराज ने विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का महत्व बताया। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस धार्मिक आयोजन के मुख्य यजमान श्रीमती गीता तिवारी एवं बालकृष्ण तिवारी हैं।
कथा के दौरान स्वामी ओमानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जब किसी यात्रा की शुरुआत करता है तो कई बार उसे शुभ और अशुभ संकेत मिलते हैं। इन संकेतों के पीछे भी जीवन के गहरे आध्यात्मिक संदेश छिपे होते हैं। उन्होंने बताया कि यह संसार भी एक यात्रा की तरह है, जिसमें मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक अनेक अनुभवों और परिस्थितियों से गुजरता है।
महाराज जी ने शुकदेव जी महाराज का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उनकी दृष्टि में समस्त संसार भगवान का ही स्वरूप था। उनके मन में स्त्री और पुरुष का कोई भेद नहीं था, वे हर प्राणी में परमात्मा का ही दर्शन करते थे। यही सच्चे ज्ञान और वैराग्य की अवस्था मानी जाती है।
इसके साथ ही उन्होंने व्यास जी और नारद जी का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब व्यास जी के मन में अशांति उत्पन्न हुई तो नारद जी ने उन्हें भगवान की भक्ति और कथा का महत्व समझाया। भगवान की कथा ही वह माध्यम है, जिससे मनुष्य के मन, बुद्धि और चित्त को शांति प्राप्त होती है।
स्वामी ओमानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में दो प्रकार की बीमारियां होती हैं—एक शारीरिक और दूसरी मानसिक। शारीरिक रोग का उपचार डॉक्टर कर सकते हैं, लेकिन मानसिक शांति और संतोष केवल भक्ति, सत्संग और भगवान की कथा से ही प्राप्त होता है। जब मन, बुद्धि और चित्त एक हो जाते हैं, तभी मनुष्य को सच्चा सुख और शांति मिलती है।
कथा के दौरान महाराज जी ने नारद जी के जीवन की एक मार्मिक घटना का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि एक बार संध्या के समय नारद जी की माता गाय का दूध निकालने के लिए गई थीं, तभी एक सर्प ने उन्हें डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद नारद जी का मन संसार से पूरी तरह विरक्त हो गया और वे भगवान की भक्ति में लीन हो गए।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान का स्मरण किया और कथा का रसपान किया।
इस अवसर पर श्यामकृष्ण, राधेकृष्ण, त्रियुगी तिवारी, कल्लू पांडेय, शैलेंद्र तिवारी, सुधांशु, कुलदीप, संदीप, अभिनव, शुभम, सचिन शुक्ला, आदित्य मिश्र, सौरभ, अनूप, अनिल तिवारी, उत्कर्ष, शिवांशु, दीपांशु, अजय यादव, शंकर यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
    user_Aditya Mishra
    Aditya Mishra
    पत्रकार अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से मिलता है जीवन का सच्चा मार्ग: स्वामी ओमानंद जी महाराज अमेठी। संग्रामपुर क्षेत्र के ग्रामसभा सहजीपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस कथा व्यास पूज्य स्वामी ओमानंद जी महाराज ने विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।मुख्य यजमान श्रीमती गीता तिवारी एवं बालकृष्ण तिवारी हैं, कथा के दौरान स्वामी ओमानंद जी महाराज ने बताया कि मनुष्य जब किसी यात्रा की शुरुआत करता है तो कई बार उसे शुभ-अशुभ संकेत मिलते हैं। इन संकेतों के पीछे भी जीवन के गहरे आध्यात्मिक संदेश छिपे होते हैं। उन्होंने कहा कि संसार स्वयं एक यात्रा है, जिसमें मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक अनेक अनुभवों और परिस्थितियों से गुजरता है। महाराज जी ने शुकदेव जी महाराज का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शुकदेव जी की दृष्टि में समस्त संसार भगवान का ही स्वरूप था। उनके मन में स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं था, वे हर प्राणी में केवल परमात्मा का ही दर्शन करते थे। यही सच्चे ज्ञान और वैराग्य की अवस्था होती है। कथा के दौरान व्यास जी और नारद जी का प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने कहा कि जब व्यास जी के मन में अशांति उत्पन्न हुई, तब नारद जी ने उन्हें भक्ति और भगवान की कथा का महत्व बताया। भगवान की कथा ही वह माध्यम है, जिससे मनुष्य के मन, बुद्धि और चित्त को शांति प्राप्त होती है। स्वामी ओमानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में दो प्रकार की बीमारियां होती हैं—एक शारीरिक और दूसरी मानसिक। शारीरिक रोग का उपचार डॉक्टर कर सकते हैं, लेकिन मानसिक शांति और संतोष केवल भक्ति, सत्संग और भगवान की कथा से ही मिल सकता है। जब मन, बुद्धि और चित्त एक हो जाते हैं, तभी मनुष्य को सच्चा सुख और शांति प्राप्त होती है।कथा के दौरान महाराज जी ने नारद जी के जीवन की एक मार्मिक घटना का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि एक समय संध्या के समय नारद जी की माता गाय का दूध निकालने के लिए गई थीं। उसी दौरान एक सर्प ने उन्हें डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद नारद जी का मन पूरी तरह संसार से विरक्त हो गया और वे भगवान की भक्ति में लग गए।महाराज जी ने कहा कि भगवान की कथा और भक्ति ही मनुष्य के मन को शांति प्रदान करती है और जीवन को सफल बनाती है। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान का स्मरण किया। इस अवसर पर श्यामकृष्ण, राधेकृष्ण, त्रियुगी तिवारी, कल्लू पांडेय, शैलेंद्र तिवारी, सुधांश, कुलदीप, संदीप, शुभम, सचिन शुक्ला, आदित्य मिश्र, अभिनव सौरभ, अनूप, अनिल तिवारी ,अजय यादव,शंकर यादव,सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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    भक्ति, ज्ञान और वैराग्य से मिलता है जीवन का सच्चा मार्ग: स्वामी ओमानंद जी महाराज
अमेठी। संग्रामपुर क्षेत्र के ग्रामसभा सहजीपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस कथा व्यास पूज्य स्वामी ओमानंद जी महाराज ने विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।मुख्य यजमान श्रीमती गीता तिवारी एवं बालकृष्ण तिवारी हैं, 
कथा के दौरान स्वामी ओमानंद जी महाराज ने बताया कि मनुष्य जब किसी यात्रा की शुरुआत करता है तो कई बार उसे शुभ-अशुभ संकेत मिलते हैं। इन संकेतों के पीछे भी जीवन के गहरे आध्यात्मिक संदेश छिपे होते हैं। उन्होंने कहा कि संसार स्वयं एक यात्रा है, जिसमें मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक अनेक अनुभवों और परिस्थितियों से गुजरता है।
महाराज जी ने शुकदेव जी महाराज का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शुकदेव जी की दृष्टि में समस्त संसार भगवान का ही स्वरूप था। उनके मन में स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं था, वे हर प्राणी में केवल परमात्मा का ही दर्शन करते थे। यही सच्चे ज्ञान और वैराग्य की अवस्था होती है।
कथा के दौरान व्यास जी और नारद जी का प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने कहा कि जब व्यास जी के मन में अशांति उत्पन्न हुई, तब नारद जी ने उन्हें भक्ति और भगवान की कथा का महत्व बताया। भगवान की कथा ही वह माध्यम है, जिससे मनुष्य के मन, बुद्धि और चित्त को शांति प्राप्त होती है।
स्वामी ओमानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में दो प्रकार की बीमारियां होती हैं—एक शारीरिक और दूसरी मानसिक। शारीरिक रोग का उपचार डॉक्टर कर सकते हैं, लेकिन मानसिक शांति और संतोष केवल भक्ति, सत्संग और भगवान की कथा से ही मिल सकता है। जब मन, बुद्धि और चित्त एक हो जाते हैं, तभी मनुष्य को सच्चा सुख और शांति प्राप्त होती है।कथा के दौरान महाराज जी ने नारद जी के जीवन की एक मार्मिक घटना का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि एक समय संध्या के समय नारद जी की माता गाय का दूध निकालने के लिए गई थीं। उसी दौरान एक सर्प ने उन्हें डस लिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद नारद जी का मन पूरी तरह संसार से विरक्त हो गया और वे भगवान की भक्ति में लग गए।महाराज जी ने कहा कि भगवान की कथा और भक्ति ही मनुष्य के मन को शांति प्रदान करती है और जीवन को सफल बनाती है। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान का स्मरण किया।
इस अवसर पर श्यामकृष्ण, राधेकृष्ण, त्रियुगी तिवारी, कल्लू पांडेय, शैलेंद्र तिवारी, सुधांश, कुलदीप, संदीप, शुभम, सचिन शुक्ला, आदित्य मिश्र, अभिनव सौरभ, अनूप, अनिल तिवारी ,अजय यादव,शंकर यादव,सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
    user_Pawan Kumar Tiwari
    Pawan Kumar Tiwari
    Local News Reporter अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • खबर चित्रकूट की है जहां है मास्टर शिक्षिका द्वारा स्कूली बच्चों से मसाज कराने का मामला सामने आया है हेड मास्टर शिक्षिका द्वारा बच्चों को बॉडी मसाज के लिए कहा गया जिसमें छात्रों द्वारा बोला गया कि उसे मसाज करना नहीं आता तो फिर मास्टर द्वारा पैरों से चलने के लिए कहा गया जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है
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    खबर चित्रकूट की है जहां है मास्टर शिक्षिका द्वारा स्कूली बच्चों से मसाज कराने का मामला सामने आया है हेड मास्टर शिक्षिका द्वारा बच्चों को बॉडी मसाज के लिए कहा गया जिसमें छात्रों द्वारा बोला गया कि उसे मसाज करना नहीं आता तो फिर मास्टर द्वारा पैरों से चलने के लिए कहा गया जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है
    user_SHIV MOHAN MISHRA
    SHIV MOHAN MISHRA
    अमेठी, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • Post by Rakesh Rawat
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    Post by Rakesh Rawat
    user_Rakesh Rawat
    Rakesh Rawat
    गौरीगंज, अमेठी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • "समाजवादी पार्टी में आने वाले सभी साथियों का बहुत बहुत धन्यवाद और आभार प्रकट करना चाहता हूं।" •⁠ ⁠माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
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    "समाजवादी पार्टी में आने वाले सभी साथियों का बहुत बहुत धन्यवाद और आभार प्रकट करना चाहता हूं।"
•⁠  ⁠माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
    user_Omprakash प्रजापति
    Omprakash प्रजापति
    Voice of people प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • पंडित जी ने जो बताया वो बड़े बड़े नहीं करते हैं। केवल दूसरों को उपदेश देकर खुद ठगी करने वाला सबसे बड़ा पापी है। पंडित जी ने जो कहा, आंखें खुल गई...
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    पंडित जी ने जो बताया वो बड़े बड़े नहीं करते हैं। केवल दूसरों को उपदेश देकर खुद ठगी करने वाला सबसे बड़ा पापी है। पंडित जी ने जो कहा, आंखें खुल गई...
    user_Dharm Raj
    Dharm Raj
    Farmer Amethi, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
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