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देश में नौकरी पाने की संभावनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जहाँ यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या अब नौकरी मिलना मात्र एक सपना बनकर रह गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, परीक्षा आयोजित करने के दोनों ही तरीके असुरक्षित हो चुके हैं। आरोप है कि NTA, ESB, और MPPSC जैसी किसी भी सरकारी संस्था पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये संस्थाएँ निजी कंपनियों के साथ मिलकर हर परीक्षा में धांधली करती आ रही हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए सुझाव दिया गया है कि देश और राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को भी UPSC की परीक्षा के पैटर्न पर ही आयोजित किया जाना चाहिए। यह खास रिपोर्ट मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर द्वारा प्रस्तुत की गई है।
Mangal Dev rathore
देश में नौकरी पाने की संभावनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जहाँ यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या अब नौकरी मिलना मात्र एक सपना बनकर रह गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, परीक्षा आयोजित करने के दोनों ही तरीके असुरक्षित हो चुके हैं। आरोप है कि NTA, ESB, और MPPSC जैसी किसी भी सरकारी संस्था पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये संस्थाएँ निजी कंपनियों के साथ मिलकर हर परीक्षा में धांधली करती आ रही हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए सुझाव दिया गया है कि देश और राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को भी UPSC की परीक्षा के पैटर्न पर ही आयोजित किया जाना चाहिए। यह खास रिपोर्ट मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर द्वारा प्रस्तुत की गई है।
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- देश में नौकरी पाने की संभावनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जहाँ यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या अब नौकरी मिलना मात्र एक सपना बनकर रह गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, परीक्षा आयोजित करने के दोनों ही तरीके असुरक्षित हो चुके हैं। आरोप है कि NTA, ESB, और MPPSC जैसी किसी भी सरकारी संस्था पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि ये संस्थाएँ निजी कंपनियों के साथ मिलकर हर परीक्षा में धांधली करती आ रही हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए सुझाव दिया गया है कि देश और राज्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को भी UPSC की परीक्षा के पैटर्न पर ही आयोजित किया जाना चाहिए। यह खास रिपोर्ट मध्य प्रदेश हेड ब्यूरो मंगल देव राठौर द्वारा प्रस्तुत की गई है।1
- उदयपुर में आयोजित UPSC परीक्षा के दौरान उस समय हड़कम्प मच गया, जब एक युवक फर्जी प्रवेश पत्र लेकर परीक्षा केंद्र पर पहुंचा। इस घटना के बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।1
- ग्रामीण इलाकों में लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं, जिसके चलते उन्हें अपनी प्यास बुझाने के लिए कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। हारून अहमद की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ये ग्रामीण तपते रास्तों पर नंगे पैर चलते हुए, उम्मीदों के सहारे, मीलों का सफर तय कर रहे हैं ताकि उन्हें पीने का पानी मिल सके।1
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- मध्य प्रदेश के नीमच जिले में अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) के स्पष्ट आदेश के बाद यातायात पुलिस ने इस संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके तहत, यदि कोई व्यक्ति ट्रैफिक नियमों को तोड़ता है, तो उसे आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा और उसकी जेब ढीली होगी।1
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- भारत में एक ऐसी स्थिति सामने आई है, जहाँ बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पानी लाने को मजबूर हैं। इस भयावह दृश्य की तुलना 12वीं सदी के भारत से की गई है, जो मौजूदा परिस्थितियों की गंभीर चुनौती को दर्शाता है।1
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