उत्तर प्रदेश शासन के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग-6 लखनऊ के आदेश के अनुपालन में, हरदोई के संडीला में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया गया। यह राज्यव्यापी अभियान 05 से 21 जून 2026 तक चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, शनिवार को नगर पालिका परिषद संडीला ने नगर क्षेत्र के विभिन्न बाजारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सब्जी मंडियों में सघन चेकिंग की। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी अनिरुद्ध कुमार के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उन्नाव के सहायक पर्यावरण अभियंता महेंद्र सिंह, वरिष्ठ पर्यावरण सहायक अमर बाजपेई, नायब तहसीलदार संडीला राम कृष्ण श्रीवास्तव, राजस्व निरीक्षक विवेक कुमार पाल और सफाई एवं खाद्य निरीक्षक राज मंगल सिंह अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। संयुक्त टीम ने दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच करते हुए 25 किलो 914 ग्राम पॉलीथिन, प्लास्टिक ग्लास और अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री जब्त की। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों से 82 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूला गया। नगर पालिका प्रशासन ने व्यापारियों और आम नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने तथा प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करने की अपील की है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस अभियान के बाद स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों के बीच कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन छोटे दुकानदारों और मध्यम वर्ग के व्यापारियों पर तो लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन प्लास्टिक उत्पादन करने वाली बड़ी फैक्ट्रियों पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई देती। कई लोगों का तर्क है कि यदि सरकार वास्तव में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है, तो सबसे पहले पॉलीथिन, प्लास्टिक ग्लास और अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, बाजार में बिकने वाले नमकीन, बिस्कुट, चॉकलेट, दूध और अन्य उत्पादों की प्लास्टिक पैकेजिंग पर भी सख्त नियम लागू किए जाने की मांग की गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि यदि प्लास्टिक उत्पादन के मुख्य स्रोतों पर रोक लगे, तो यह सामग्री छोटे दुकानदारों तक पहुंचेगी ही नहीं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई में केवल अंतिम स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त है या उत्पादन स्तर पर भी समान रूप से सख्ती जरूरी है।
उत्तर प्रदेश शासन के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग-6 लखनऊ के आदेश के अनुपालन में, हरदोई के संडीला में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया गया। यह राज्यव्यापी अभियान 05 से 21 जून 2026 तक चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, शनिवार को नगर पालिका परिषद संडीला ने नगर क्षेत्र के विभिन्न बाजारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सब्जी मंडियों में सघन चेकिंग की। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी अनिरुद्ध कुमार के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उन्नाव के सहायक पर्यावरण अभियंता महेंद्र सिंह, वरिष्ठ पर्यावरण सहायक अमर बाजपेई, नायब तहसीलदार संडीला राम कृष्ण श्रीवास्तव, राजस्व निरीक्षक विवेक कुमार पाल और सफाई एवं खाद्य निरीक्षक राज मंगल सिंह अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। संयुक्त टीम
ने दुकानों और प्रतिष्ठानों की जांच करते हुए 25 किलो 914 ग्राम पॉलीथिन, प्लास्टिक ग्लास और अन्य सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री जब्त की। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों से 82 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूला गया। नगर पालिका प्रशासन ने व्यापारियों और आम नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने तथा प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करने की अपील की है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस अभियान के बाद स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों के बीच कार्रवाई के तरीके को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन छोटे दुकानदारों और मध्यम वर्ग के व्यापारियों पर तो लगातार कार्रवाई कर रहा है, लेकिन प्लास्टिक उत्पादन करने
वाली बड़ी फैक्ट्रियों पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई देती। कई लोगों का तर्क है कि यदि सरकार वास्तव में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है, तो सबसे पहले पॉलीथिन, प्लास्टिक ग्लास और अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, बाजार में बिकने वाले नमकीन, बिस्कुट, चॉकलेट, दूध और अन्य उत्पादों की प्लास्टिक पैकेजिंग पर भी सख्त नियम लागू किए जाने की मांग की गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि यदि प्लास्टिक उत्पादन के मुख्य स्रोतों पर रोक लगे, तो यह सामग्री छोटे दुकानदारों तक पहुंचेगी ही नहीं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई में केवल अंतिम स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त है या उत्पादन स्तर पर भी समान रूप से सख्ती जरूरी है।
- अघोषित बिजली कटौती के विरोध में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। भारतीय किसान मजदूर यूनियन सर्व समाज के बैनर तले जखवा पावर हाउस पर चल रहा धरना दूसरे दिन भी जारी रहा, जिसे ग्रामीण व्यवस्था के खिलाफ किसानों की एकजुट लड़ाई के रूप में फिल्म "लगान" की तरह देखा जा रहा है। यह धरना 20 जून की रात 8 बजे से शुरू हुआ था और लगातार जारी है। संगठन के जिला अध्यक्ष सुनील तिवारी, कार्यवाहक जिला अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह और भरावन ब्लॉक अध्यक्ष शिवलाल मौर्य के नेतृत्व में किसान अघोषित बिजली कटौती की समस्या के समाधान की मांग पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन को अन्य किसान संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है, और इसे किसानों की मूलभूत समस्याओं को बड़े जनआंदोलन का रूप लेने वाली फिल्म "पिपली लाइव" की स्थिति से भी जोड़ा जा रहा है। धरना स्थल पर भारतीय किसान यूनियन आदर्शवादी के प्रदेश अध्यक्ष गुलाब तिवारी और भारतीय किसान यूनियन धरतीपुत्र के पदाधिकारी वसीम अहमद ने पहुंचकर समर्थन व्यक्त किया। रविवार को धरने में यह निर्णय लिया गया कि यदि विद्युत विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर समस्या का समाधान नहीं करते और ठोस आश्वासन नहीं देते, तो 22 जून को दोपहर 2 बजे भटपुर घाट, ब्लॉक भरावन में जल सत्याग्रह किया जाएगा। पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जल सत्याग्रह के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी विद्युत विभाग और जिला प्रशासन की होगी। उन्होंने दोहराया कि जब तक किसानों और आम जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। धरने में सतीश तिवारी, रामनरेश तिवारी, पवन सिंह, विपिन तिवारी, कैलाश, शगुन, हर्ष तिवारी, मायाराम, चंद्रभाल, अटल शुक्ला, मलिक शुक्ला, लल्लन एवं जगदीश सहित कई किसान मौजूद रहे।1
- सीतापुर जिले के मछरेहटा थाना क्षेत्र में एक युवक की संदिग्ध मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हुसैनगंज निवासी मुन्नीलाल की मौत के बाद उनके परिजनों ने पुलिस पर बर्बरता, थर्ड डिग्री और रिश्वतखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है, जबकि परिजन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। परिजनों के अनुसार, पुलिस मुन्नीलाल को चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए मछरेहटा थाने ले गई थी। उनका आरोप है कि थाने में युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और उसे छोड़ने के एवज में पैसे भी लिए गए। परिवार का कहना है कि जब मुन्नीलाल घर लौटा तो उसकी हालत बेहद खराब थी; उसके शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे और वह दर्द से कराह रहा था। कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। मृतक के परिजनों का आरोप है कि पुलिस की कथित पिटाई ही उसकी मौत का कारण बनी है। इस घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग न्याय की मांग को लेकर एकत्र हो गए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग करने लगे। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है और मौत के वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत और पूछताछ के तरीकों को लेकर बहस छेड़ दी है, और क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कानून के रक्षकों द्वारा कानून की खुलेआम अवहेलना का मामला होगा। फिलहाल, पूरे मामले पर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की नजर बनी हुई है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व जांच के निष्कर्षों के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मुन्नीलाल की मौत स्वाभाविक थी या इसके पीछे किसी प्रकार की प्रताड़ना जिम्मेदार थी। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।1
- जनपद उन्नाव के हसनगंज तहसील क्षेत्र में अजगैन पुलिस की बदमाशों से भिड़ंत हो गई। जानकारी के अनुसार, ये बदमाश एक ट्रक चालक से लूट की घटना में शामिल थे। इस भिड़ंत के साथ ही उन्नाव जनपद पुलिस का 'लंगड़ा अभियान ऑपरेशन' लगातार जारी है।4
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बांगरमऊ विकासखंड स्थित कुंडा ग्राम में ‘स्वस्थ भारत मिशन’ के नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब विकास की तेज रफ्तार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे माहौल देखने को मिल रहे हैं जहाँ मिशन के मानकों का पालन नहीं हो रहा है।1
- क्षेत्र में स्वस्थ भारत मिशन के दावों के विपरीत, हर तरफ गंदगी का अंबार देखा जा रहा है। यहाँ पर स्वस्थ भारत मिशन की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जहाँ नालियों में कीड़े बज बजाते हुए स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं, जो मिशन के उद्देश्यों की अनदेखी को दर्शाता है।1