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नालंदा में हाई-टेक सुविधा की शुरुआत: ‘श्री बालाजी मोटर्स’ का ग्रैंड ओपनिंग नालंदा में हाई-टेक सुविधा की शुरुआत: ‘श्री बालाजी मोटर्स’ का ग्रैंड ओपनिंग
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नालंदा में हाई-टेक सुविधा की शुरुआत: ‘श्री बालाजी मोटर्स’ का ग्रैंड ओपनिंग नालंदा में हाई-टेक सुविधा की शुरुआत: ‘श्री बालाजी मोटर्स’ का ग्रैंड ओपनिंग
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- प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित टैगोर टाउन के कमला मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों की मेहनत, धैर्य और इंसानियत की मिसाल उस समय देखने को मिली, जब एक अत्यंत गंभीर स्थिति में आए मरीज को डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और अथक प्रयासों से मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया। क्या था पूरा मामला? मिली जानकारी के अनुसार, मरीज (जो कि एक गरीब परिवार से था) को काफी गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। स्थिति इतनी नाजुक थी कि परिवार को बचने की उम्मीद कम ही नजर आ रही थी। लेकिन डॉ. सुनील विश्वकर्मा (जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन) और उनकी मेडिकल टीम ने न केवल मरीज का उचित उपचार किया, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए परिवार को ढांढस भी बंधाया। अस्पताल की मुख्य विशेषताएं: अत्याधुनिक तकनीक: अस्पताल कैंसर, हार्ट और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के लिए हाईटेक मशीनों से लैस है। एक ही छत के नीचे इलाज: यहाँ दूरबीन विधि (Laparoscopic) से जटिल सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। किफायती दर: डॉ. सुनील विश्वकर्मा के अनुसार, अस्पताल का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को भी विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवा प्रदान करना है। "मरीज की सेवा ही हमारा प्राथमिक धर्म है। जब कोई मरीज स्वस्थ होकर घर लौटता है, तो वही एक डॉक्टर के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है।" — डॉ. सुनील विश्वकर्मा, प्रबंध निदेशक इलाके में चर्चा का विषय इस सफल उपचार के बाद स्थानीय लोगों में अस्पताल और वहां के स्टाफ के प्रति काफी सम्मान बढ़ा है। लोगों का कहना है कि जहां आज चिकित्सा एक व्यवसाय बनती जा रही है, वहीं कमला मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल जैसे संस्थान इंसानियत की लौ जलाए हुए हैं।1
- भाजपा विधायक डॉ सुनील कुमार ने दावा किया कि बिहार शरीफ में कब्रिस्तान के नाम पर 83 डेसिमल सरकारी भूमि घेर लिए जाने से रांची रोड बाधित हो गई है। बिहार विधानसभा के सोमवार के सत्र में मंदिरों और मठों की घेराबंदी को लेकर सत्ता पक्ष के भीतर ही तीखी बहस देखने को मिली। डॉ. सुनील कुमार ने सरकार से सीधे सवाल करते हुए नीति में समानता की मांग उठाई। भाजपा विधायक ने कहा कि जब राज्य में कब्रिस्तानों की घेराबंदी कराई जा सकती है, तो मठ-मंदिरों की चहारदीवारी निर्माण में बाधा क्यों है। उन्होंने पूछा कि बिना धार्मिक न्यास परिषद में निबंधन के मठ-मंदिरों की घेराबंदी सरकारी स्तर पर क्यों नहीं कराई जा सकती। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना से मठ-मंदिरों की चहारदीवारी निर्माण की मांग भी रखी। इस पर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि जो मठ-मंदिर धार्मिक न्यास बोर्ड में निबंधित नहीं हैं, उनकी घेराबंदी सरकारी स्तर पर संभव नहीं है। बहस के दौरान डॉ. सुनील कुमार ने यह भी दावा किया कि बिहारशरीफ में कब्रिस्तान के नाम पर 83 डेसिमल सरकारी भूमि घेर लिए जाने से रांची रोड बाधित हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर कब्रिस्तान की घेराबंदी के नाम पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हुआ है, जिसकी जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए। विधायक ने सदन में कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, इसलिए धार्मिक स्थलों के मामले में भी सरकार की नीति समानता, पारदर्शिता और न्याय के सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि सभी समुदायों के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए एक समान और स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि सामाजिक सौहार्द और विधि-व्यवस्था दोनों मजबूत हो सकें।1