जनपद फ़िरोज़ाबाद के टूंडला स्थित सुभाष चौराहे पर नगर पालिका द्वारा संचालित एक कूलिंग सेंटर में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। सेंटर में ताला बंद होने की वजह से अंदर रखा सारा सामान जलकर राख हो गया और आग बुझाने या बचाव कार्य में भी देरी हुई। इस घटना के दौरान कोई भी जिम्मेदार अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुँच सका। यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से स्थापित यह कूलिंग सेंटर नगर पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण स्वयं ही हादसे का केंद्र बन गया। घटना ने सुरक्षा इंतजामों के सभी खोखले दावों को उजागर कर दिया, क्योंकि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए इस सेंटर में न तो फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही इसकी नियमित जांच की जाती थी। बंद कमरे से आग की लपटें और धुआँ निकलता देख मौके पर अफरा-तफरी मच गई, और वहाँ जुटी भीड़ ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। इस हादसे ने प्रशासनिक दावों की असलियत सामने ला दी है। टूंडला नगर पालिका की घोर अनदेखी के चलते हुए इस अग्निकांड से यद्यपि एक बड़ा हादसा टल गया, फिर भी आसपास मौजूद लोग दहशत में आ गए। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनपद फ़िरोज़ाबाद के टूंडला स्थित सुभाष चौराहे पर नगर पालिका द्वारा संचालित एक कूलिंग सेंटर में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। सेंटर में ताला बंद होने की वजह से अंदर रखा सारा सामान जलकर राख हो गया और आग बुझाने या बचाव कार्य में भी देरी हुई। इस घटना के दौरान कोई भी जिम्मेदार अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुँच सका। यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से स्थापित यह कूलिंग सेंटर नगर पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण स्वयं ही हादसे का केंद्र बन गया। घटना ने सुरक्षा इंतजामों के सभी खोखले दावों को उजागर कर दिया, क्योंकि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए इस सेंटर में न तो फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही इसकी नियमित जांच की जाती थी। बंद कमरे से आग की लपटें और धुआँ निकलता देख मौके पर अफरा-तफरी मच गई, और वहाँ जुटी भीड़ ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। इस हादसे ने प्रशासनिक दावों की असलियत सामने ला दी है। टूंडला नगर पालिका की घोर अनदेखी के चलते हुए इस अग्निकांड से यद्यपि एक बड़ा हादसा टल गया, फिर भी आसपास मौजूद लोग दहशत में आ गए। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- आज फिरोजाबाद में दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें एक युवक को चोटें आई हैं। इस दौरान किसी ने भी बचाव करने का प्रयास नहीं किया।1
- आगरा के थाना नाई की मंडी पुलिस ने जुए के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच जुआरियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपियों के कब्जे से 60 हजार रुपये नकद और 52 ताश के पत्ते बरामद किए हैं। एसीपी कोतवाली वीरेंद्र कुमार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि मदन नाई की मंडी रास्ते पर कुछ लोग ताश के पत्तों पर हार-जीत की बाजी लगाकर जुआ खेल रहे हैं। इस सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर घेराबंदी की और छापा मारकर पांचों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में कमल सिंह, सुरेंद्र उर्फ गोलू, सुरेंद्र बाबू, निशांत और अभिषेक धाकड़ शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।1
- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को बारह साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन जनता को कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मिली है। गहलोत ने कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर राजनीति करके भले ही सफल हो गई हो, लेकिन उसे आम जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने जोधपुर में पीने के पानी के गंभीर संकट पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना के माध्यम से वर्षों की मेहनत से पानी पहुंचाने का काम किया था, और तीसरे चरण के लिए लगभग चौदह सौ करोड़ रुपए राज्य बजट से स्वीकृत किए थे ताकि जोधपुर और आसपास के गांवों में पानी की समस्या न रहे। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार इस परियोजना की निगरानी में पूरी तरह विफल रही है। गहलोत ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में जोधपुर में मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, अस्पताल भवन और कई विकास कार्य हुए थे, जिनमें प्रतापनगर, मंडोर अस्पताल और चौपासनी हाउस की शानदार इमारतें शामिल हैं, जिन्हें देखकर आज भी बाहर से आने वाले लोग आश्चर्यचकित होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार इन संस्थानों की देखरेख भी ठीक से नहीं कर पा रही है। गहलोत ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि चिरंजीवी योजना केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है। उन्होंने दावा किया कि निजी अस्पताल मरीजों से पैसे वसूल रहे हैं और सरकार मरीजों को राहत देने में असफल साबित हुई है, जिससे गरीब और आम आदमी को इलाज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राजस्थान में हर वर्ग के सरकार से असंतुष्ट होने की बात कही और पंचायत तथा नगर निगम चुनावों को लेकर भी सरकार को घेरा, आरोप लगाया कि सरकार संविधान की पालना नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उच्च न्यायालय भी सरकार को फटकार लगा चुका है, फिर भी चुनावों में टालमटोल की जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने देश में लोकतंत्र और चुनाव आयोग को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और हालात चिंताजनक होते जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप यदि लोकतंत्र कमजोर हुआ तो आम आदमी का सम्मान भी खतरे में पड़ जाएगा। गहलोत ने जोधपुर एयरपोर्ट विस्तार और कई बड़ी परियोजनाओं का जिक्र किया जो उनके कार्यकाल में शुरू हुई थीं, और आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार नई योजनाएं लाने के बजाय पुराने कार्यों का श्रेय लेने में लगी हुई है। ओएमआरएस और पेपर लीक मामलों पर बोलते हुए, उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई उनके कार्यकाल में ही शुरू हुई थी, जबकि वर्तमान सरकार केवल प्रचार करने में लगी हुई है और जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा है। अंत में, गहलोत ने कहा कि राजस्थान में हालात बेहद गंभीर हैं और सरकार जनता की समस्याओं को लेकर संवेदनशील नहीं है।1
- जनपद फ़िरोज़ाबाद के टूंडला स्थित सुभाष चौराहे पर नगर पालिका द्वारा संचालित एक कूलिंग सेंटर में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। सेंटर में ताला बंद होने की वजह से अंदर रखा सारा सामान जलकर राख हो गया और आग बुझाने या बचाव कार्य में भी देरी हुई। इस घटना के दौरान कोई भी जिम्मेदार अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुँच सका। यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से स्थापित यह कूलिंग सेंटर नगर पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण स्वयं ही हादसे का केंद्र बन गया। घटना ने सुरक्षा इंतजामों के सभी खोखले दावों को उजागर कर दिया, क्योंकि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए इस सेंटर में न तो फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम थे और न ही इसकी नियमित जांच की जाती थी। बंद कमरे से आग की लपटें और धुआँ निकलता देख मौके पर अफरा-तफरी मच गई, और वहाँ जुटी भीड़ ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। इस हादसे ने प्रशासनिक दावों की असलियत सामने ला दी है। टूंडला नगर पालिका की घोर अनदेखी के चलते हुए इस अग्निकांड से यद्यपि एक बड़ा हादसा टल गया, फिर भी आसपास मौजूद लोग दहशत में आ गए। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।1
- अपर पुलिस महानिदेशक एसके भगत ने फिरोजाबाद पहुँचकर कानून-व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी और एसएसपी के साथ मिलकर शहर में पैदल मार्च भी किया।1
- उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में ईद उल अजहा पर्व के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखाई दिया। नवागत एडीजी सुरेंद्र कुमार भगत, जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आदित्य लांगे और एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद ने जिले में एक फ्लैग मार्च का नेतृत्व किया। इस दौरान, अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का गहन जायजा लिया और पुलिस बल को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। अधिकारियों ने आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए ईद उल अजहा पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की। इसके साथ ही, एडीजी एस के भगत ने सभी देशवासियों को ईद उल अजहा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।1
- जयपुर और चौमूं में ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अचानक जोधपुर में धावा बोल दिया, जहां 50 करोड़ रुपये मूल्य का संदिग्ध मूंगफली बीज और कच्चा माल सील कर दिया गया। इस कार्रवाई के दौरान गुजरात जा रहे एक दस चक्का ट्रक को भी जब्त किया गया, जिसमें घटिया मूंगफली बीज भरा जा रहा था। मंत्री की बिना पूर्व सूचना के बीज निर्माण इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज पर की गई इस कार्रवाई से पूरे शहर के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। कृषि विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ शातिर अवैध बीज कारोबारी खुले बाजार से कम दाम पर साधारण खाने वाली वाणिज्यिक मूंगफली खरीदते हैं। बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, ग्रेडिंग या रासायनिक उपचार के, वे इस मूंगफली को चमकीली थैलियों और ब्रांडेड बोतलों में पैक करके किसानों को महंगे और उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज के रूप में बेचकर करोड़ों का अवैध मुनाफा कमा रहे थे। मंत्री मीणा ने जब एक कोल्ड स्टोरेज और संबंधित फैक्ट्रियों पर छापा मारा, तो अधिकारियों ने इस 'काले कारोबार' की 'लाइव तस्वीरें' देखकर 'दंग' रह गए। पहली फैक्ट्री में दस्तावेजों, लाइसेंस और स्टॉक के मिलान में भारी विसंगतियां पाई गईं और करीब 50 करोड़ रुपये का अवैध रूप से डंप किया गया संदिग्ध मूंगफली बीज और कच्चा माल तत्काल सील करने का आदेश दिया गया। वहीं, दूसरी फैक्ट्री में मंत्री के आने की भनक लगते ही मुख्य संचालक और मालिक परिसर खुला छोड़कर फरार हो गया, जिसके बाद मंत्री ने पूरी फैक्ट्री को सील करने और साक्ष्यों की छेड़छाड़ रोकने के लिए पुलिस सुरक्षा तैनात करने का निर्देश दिया। कार्रवाई के बाद मीडिया और किसानों से बात करते हुए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने स्पष्ट किया कि राजस्थान की भजनलाल सरकार किसानों की मेहनत की कमाई पर डाका डालने वाले ऐसे माफियाओं को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शेगी। उन्होंने 'मिलावटखोर और नकली बीज माफिया' को 'समाज के सबसे बड़े दुश्मन' बताते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणित और वैज्ञानिक रूप से जाँचे गए बीज उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब्त किए गए 50 करोड़ के पूरे स्टॉक के सैंपल तुरंत सरकारी लैबोरेट्री में जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, और लैब रिपोर्ट में मिलावट या गैर-प्रमाणित होने की पुष्टि होते ही इन दोनों फैक्ट्रियों के मालिकों और उनके पूरे नेटवर्क के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर सीधे जेल भेजा जाएगा।1
- पतलूम के अंदर 431 करोड़ छेद, जनता के टैक्स का पैसा कर दिया दान एक दो नहीं 431 करोड़ नगर निगम आगरा बना “कर्णवीर”, फटी निकली खुद की पतलून! आगरा में नगर निगम आगरा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर की बदहाल व्यवस्था और प्रदूषण की समस्याओं से जूझ रही जनता के बीच अब टोरेंट पावर के 431 करोड़ रुपये के बकाया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि नगर निगम ने टोरेंट पावर पर मेहरबानी दिखाते हुए करोड़ों का कर्ज माफ कर दिया, जबकि शहर की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। स्मार्ट सिटी के बड़े-बड़े दावों के बीच शहरवासियों को साफ हवा, स्वच्छ वातावरण और बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि वाटर वर्क्स छत्ता ज़ोन के पीछे स्थित कूड़ेदान में भीषण आग लगने से पूरा क्षेत्र जहरीले धुएं की चपेट में आ गया। लगातार उठ रहा धुआं वातावरण को दूषित कर रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। आगरा नगर निगम अपनी व्यवस्थाएं सुधारने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है, लेकिन निजी कंपनियों पर मेहरबानी दिखाने में पीछे नहीं है। शहर की टूटी सड़कें, गंदगी, जलभराव और प्रदूषण जैसी समस्याओं से परेशान जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर “स्मार्ट सिटी” का सपना कब जमीन पर दिखाई देगा? वीडियो में देखिए स्मार्ट सिटी आगरा का यह अलौकिक नज़ारा, जहां दावों की चमक के पीछे बदहाल व्यवस्थाओं की कड़वी सच्चाई साफ नजर आ रही है।1