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कोटा जिले के रामगंजमंडी में बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े एक वारदात को अंजाम दिया। यह घटना रामगंजमंडी के बाजार नंबर 4 स्थित मालगोदाम चौराहे पर हुई, जहाँ बाइक पर सवार तीन बदमाश एक युवती के गले से सोने की चेन झपटकर फरार हो गए। यह घटना रामगंजमंडी में बदमाशों के बढ़ते हौसलों को दिखाती है।

1 hr ago
user_Ahmed Siraj Farooqi
Ahmed Siraj Farooqi
रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
1 hr ago

कोटा जिले के रामगंजमंडी में बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े एक वारदात को अंजाम दिया। यह घटना रामगंजमंडी के बाजार नंबर 4 स्थित मालगोदाम चौराहे पर हुई, जहाँ बाइक पर सवार तीन बदमाश एक युवती के गले से सोने की चेन झपटकर फरार हो गए। यह घटना रामगंजमंडी में बदमाशों के बढ़ते हौसलों को दिखाती है।

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  • कोटा जिले के रामगंजमंडी में बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े एक वारदात को अंजाम दिया। यह घटना रामगंजमंडी के बाजार नंबर 4 स्थित मालगोदाम चौराहे पर हुई, जहाँ बाइक पर सवार तीन बदमाश एक युवती के गले से सोने की चेन झपटकर फरार हो गए। यह घटना रामगंजमंडी में बदमाशों के बढ़ते हौसलों को दिखाती है।
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    कोटा जिले के रामगंजमंडी में बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े एक वारदात को अंजाम दिया। यह घटना रामगंजमंडी के बाजार नंबर 4 स्थित मालगोदाम चौराहे पर हुई, जहाँ बाइक पर सवार तीन बदमाश एक युवती के गले से सोने की चेन झपटकर फरार हो गए। यह घटना रामगंजमंडी में बदमाशों के बढ़ते हौसलों को दिखाती है।
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    1 hr ago
  • कोटा में स्थित घटोत्कच सर्किल अपनी रात्रि की मनमोहक छटा के लिए प्रसिद्ध है। इसकी छवि रात के समय इतनी अजब और निराली होती है कि जो भी व्यक्ति यहाँ आता है, वह इस स्थान का दीवाना होकर जाता है।
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    कोटा में स्थित घटोत्कच सर्किल अपनी रात्रि की मनमोहक छटा के लिए प्रसिद्ध है। इसकी छवि रात के समय इतनी अजब और निराली होती है कि जो भी व्यक्ति यहाँ आता है, वह इस स्थान का दीवाना होकर जाता है।
    user_Jitendra Kumar
    Jitendra Kumar
    Local News Reporter लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • कोटा के राजकीय पशु चिकित्सालय, मोखापाड़ा में भर्ती घायल और मृत पशुओं को आवारा कुत्तों द्वारा नोचे जाने के गंभीर मामले में समाजसेवी हिम्मत सिंह ने कैथूनीपोल थाने में अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। यह कार्रवाई गौसेवकों द्वारा अस्पताल परिसर में कुत्तों को घायल पशुओं का मांस नोचते देखने के बाद की गई। हिम्मत सिंह के अनुसार, यह घटना 8 जून की सुबह सामने आई, जब गौसेवकों ने अस्पताल परिसर में इस भयावह दृश्य को देखा। शिकायत करने पर अस्पताल के कर्मचारियों ने इसे रोज की घटना बताते हुए स्टाफ की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद हिम्मत सिंह खुद अस्पताल पहुंचे, अपनी नाराजगी व्यक्त की और कैथूनीपोल थानाधिकारी अमरेश सिंह को एक परिवाद सौंपकर तत्काल मुकदमा दर्ज करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। इस दौरान, हिम्मत सिंह ने अस्पतालों और गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ-साथ 24 घंटे चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे साधु-संतों, गौसेवकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करेंगे। मुकदमा दर्ज कराने के समय प्रमुख रूप से अमर धामोंनिया, नरेंद्र गुर्जर, पीयूष खंडेलवाल, संजीव शर्मा, शुभम गुप्ता, गोलू जैन, करन शर्मा, अमित कुमार सहित कई अन्य सामाजिक सदस्य मौजूद रहे।
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    कोटा के राजकीय पशु चिकित्सालय, मोखापाड़ा में भर्ती घायल और मृत पशुओं को आवारा कुत्तों द्वारा नोचे जाने के गंभीर मामले में समाजसेवी हिम्मत सिंह ने कैथूनीपोल थाने में अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। यह कार्रवाई गौसेवकों द्वारा अस्पताल परिसर में कुत्तों को घायल पशुओं का मांस नोचते देखने के बाद की गई।

हिम्मत सिंह के अनुसार, यह घटना 8 जून की सुबह सामने आई, जब गौसेवकों ने अस्पताल परिसर में इस भयावह दृश्य को देखा। शिकायत करने पर अस्पताल के कर्मचारियों ने इसे रोज की घटना बताते हुए स्टाफ की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद हिम्मत सिंह खुद अस्पताल पहुंचे, अपनी नाराजगी व्यक्त की और कैथूनीपोल थानाधिकारी अमरेश सिंह को एक परिवाद सौंपकर तत्काल मुकदमा दर्ज करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

इस दौरान, हिम्मत सिंह ने अस्पतालों और गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ-साथ 24 घंटे चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे साधु-संतों, गौसेवकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करेंगे।

मुकदमा दर्ज कराने के समय प्रमुख रूप से अमर धामोंनिया, नरेंद्र गुर्जर, पीयूष खंडेलवाल, संजीव शर्मा, शुभम गुप्ता, गोलू जैन, करन शर्मा, अमित कुमार सहित कई अन्य सामाजिक सदस्य मौजूद रहे।
    user_Kishan Lal jangid
    Kishan Lal jangid
    Real Estate Developer Ladpura, Kota•
    5 hrs ago
  • सनातन धर्म में कर्णभेदन संस्कार को सोलह प्रमुख संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधान माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, ये संस्कार केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और जीवन की शुभ दिशा निर्धारित करने के लिए भी किए जाते हैं। बालक और बालिका दोनों के लिए कर्णभेदन को एक आवश्यक संस्कार बताया गया है, जो किसी भी तरह से केवल आभूषण धारण करने तक सीमित नहीं है। इस संस्कार के माध्यम से बालक-बालिका रोगों से सुरक्षित रहते हैं और उनमें शुभ संस्कारों को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। शास्त्रों में कन्या के लिए पहले बायां कान और फिर दायां कान छेदने का निर्देश दिया गया है। जिस प्रकार खेत में बीज बोने से पहले भूमि को तैयार किया जाता है, उसी प्रकार जीवन में शुभ संस्कारों के बीज बोने के लिए बाल्यावस्था में ही इन संस्कारों का पालन किया जाता है। कन्या के कानों का कर्णभेदन शुभ विचारों, अच्छे संस्कारों और मंगलमय जीवन की कामना का प्रतीक है। कर्णभेदन संस्कार के लिए शुभ समय निर्धारित किया गया है: जन्म के 6वें, 7वें या 8वें महीने में, अथवा 1वें, 3वें, 5वें या 7वें वर्ष में। इसके लिए अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती जैसे नक्षत्र शुभ माने गए हैं। शुभ तिथियों में द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी एवं त्रयोदशी शामिल हैं, जबकि सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को इस संस्कार के लिए शुभ वार बताया गया है। भाग्येश गौतम, कोटा, राजस्थान से इस बात पर जोर देते हैं कि जब जन्म, नामकरण, अन्नप्राशन और विवाह जैसे संस्कार महत्वपूर्ण हैं, तो कर्णभेदन संस्कार को केवल फैशन मानकर उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जिस घर में बेटी के संस्कारों का सम्मान होता है, वहाँ लक्ष्मी और सौभाग्य दोनों का वास होता है, क्योंकि संस्कारों से ही संस्कृति जीवित रहती है और संस्कृति से ही समाज का निर्माण होता है।
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    सनातन धर्म में कर्णभेदन संस्कार को सोलह प्रमुख संस्कारों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधान माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, ये संस्कार केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और जीवन की शुभ दिशा निर्धारित करने के लिए भी किए जाते हैं। बालक और बालिका दोनों के लिए कर्णभेदन को एक आवश्यक संस्कार बताया गया है, जो किसी भी तरह से केवल आभूषण धारण करने तक सीमित नहीं है।

इस संस्कार के माध्यम से बालक-बालिका रोगों से सुरक्षित रहते हैं और उनमें शुभ संस्कारों को ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। शास्त्रों में कन्या के लिए पहले बायां कान और फिर दायां कान छेदने का निर्देश दिया गया है। जिस प्रकार खेत में बीज बोने से पहले भूमि को तैयार किया जाता है, उसी प्रकार जीवन में शुभ संस्कारों के बीज बोने के लिए बाल्यावस्था में ही इन संस्कारों का पालन किया जाता है। कन्या के कानों का कर्णभेदन शुभ विचारों, अच्छे संस्कारों और मंगलमय जीवन की कामना का प्रतीक है।

कर्णभेदन संस्कार के लिए शुभ समय निर्धारित किया गया है: जन्म के 6वें, 7वें या 8वें महीने में, अथवा 1वें, 3वें, 5वें या 7वें वर्ष में। इसके लिए अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती जैसे नक्षत्र शुभ माने गए हैं। शुभ तिथियों में द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी एवं त्रयोदशी शामिल हैं, जबकि सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को इस संस्कार के लिए शुभ वार बताया गया है।

भाग्येश गौतम, कोटा, राजस्थान से इस बात पर जोर देते हैं कि जब जन्म, नामकरण, अन्नप्राशन और विवाह जैसे संस्कार महत्वपूर्ण हैं, तो कर्णभेदन संस्कार को केवल फैशन मानकर उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जिस घर में बेटी के संस्कारों का सम्मान होता है, वहाँ लक्ष्मी और सौभाग्य दोनों का वास होता है, क्योंकि संस्कारों से ही संस्कृति जीवित रहती है और संस्कृति से ही समाज का निर्माण होता है।
    user_Vastuvid Bhagyesh
    Vastuvid Bhagyesh
    Vastu consultant लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • कोटा शहर के रेलवे स्टेशन के पटरी पार क्षेत्र में सोमवार सुबह सड़क पर एक मगरमच्छ दौड़ता हुआ दिखाई देने से लोगों में दहशत फैल गई। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों और राहगीरों ने जब मगरमच्छ को सड़क पर घूमते देखा, तो अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को दी। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में शहर के कई इलाकों में मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते देखे गए हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित रेस्क्यू कर नदी में छोड़ दिया।
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    कोटा शहर के रेलवे स्टेशन के पटरी पार क्षेत्र में सोमवार सुबह सड़क पर एक मगरमच्छ दौड़ता हुआ दिखाई देने से लोगों में दहशत फैल गई। मॉर्निंग वॉक पर निकले लोगों और राहगीरों ने जब मगरमच्छ को सड़क पर घूमते देखा, तो अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को दी। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में शहर के कई इलाकों में मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते देखे गए हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित रेस्क्यू कर नदी में छोड़ दिया।
    user_VKH NEWS
    VKH NEWS
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर कोटा स्थित प्रथम पीठ मथुराधीश मंदिर में धार्मिक श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। मंदिर परिसर में आज विशेष रूप से महाराज एवं अलौकिक झांकियों का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर प्रथम पीठ मिलन बाबा गोसाईं के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक एवं दिव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंदिर को आकर्षक पुष्प सज्जा एवं विद्युत रोशनी से सजाया गया, जिससे संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। पुरुषोत्तम मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संतों एवं विद्वानों ने बताया कि यह माह भगवान विष्णु को समर्पित है तथा इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष पुण्य प्राप्त होता है। कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, आरती एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। मंदिर प्रशासन ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के दौरान प्रतिदिन विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
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    पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर कोटा स्थित प्रथम पीठ मथुराधीश मंदिर में धार्मिक श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। मंदिर परिसर में आज विशेष रूप से महाराज एवं अलौकिक झांकियों का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया।

इस अवसर पर प्रथम पीठ मिलन बाबा गोसाईं के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक एवं दिव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंदिर को आकर्षक पुष्प सज्जा एवं विद्युत रोशनी से सजाया गया, जिससे संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा।

भक्तों ने भगवान के दर्शन कर सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। पुरुषोत्तम मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संतों एवं विद्वानों ने बताया कि यह माह भगवान विष्णु को समर्पित है तथा इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, आरती एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। मंदिर प्रशासन ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के दौरान प्रतिदिन विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
    user_Sadbhavna sandesh news
    Sadbhavna sandesh news
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • Post by Mahendar.merotha
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    Post by Mahendar.merotha
    user_Mahendar.merotha
    Mahendar.merotha
    Voice of people लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    6 hrs ago
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