कानपुर में ‘ब्लैक हॉक QRT’ की तैनाती, दंगा नियंत्रण के लिए नई रणनीति कानपुर। शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने एक विशेष कमांडो यूनिट ‘ब्लैक हॉक QRT’ का गठन किया है। इस यूनिट में शामिल करीब 60 प्रशिक्षित जवानों को आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस कर संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। औद्योगिक शहर कानपुर में छोटी घटनाओं के बड़े रूप लेने की आशंका को देखते हुए इस क्विक रिस्पॉन्स टीम को तैयार किया गया है। यह यूनिट किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम होगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष दस्ते को दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और छापामार कार्रवाई की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। कमांडो को अत्याधुनिक बॉडी प्रोटेक्टर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे पथराव और हमलों के दौरान सुरक्षित रह सकें। यूनिट को मौके पर त्वरित निर्णय लेने की छूट भी दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर टीम लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल कर सकती है, हालांकि सभी कार्रवाई “न्यूनतम बल” के सिद्धांत के तहत ही की जाएगी। अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि इस यूनिट का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना की सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में करना है। उन्होंने कहा कि यह टीम स्थानीय स्तर पर पीएसी की तरह कार्य करेगी, लेकिन अधिक आधुनिक और फुर्तीली होगी। फिलहाल यूनिट को ट्रायल मोड में रखा गया है और शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस के साथ रूट मार्च कराया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस पहल से न केवल अपराधियों में खौफ पैदा होगा, बल्कि आम जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ेगा।
कानपुर में ‘ब्लैक हॉक QRT’ की तैनाती, दंगा नियंत्रण के लिए नई रणनीति कानपुर। शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने एक विशेष कमांडो यूनिट ‘ब्लैक हॉक QRT’ का गठन किया है। इस यूनिट में शामिल करीब 60 प्रशिक्षित जवानों को आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस कर संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। औद्योगिक शहर कानपुर में छोटी घटनाओं के बड़े रूप लेने की आशंका को देखते हुए इस क्विक रिस्पॉन्स टीम को तैयार किया गया है। यह यूनिट किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम होगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष दस्ते को दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और छापामार कार्रवाई की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। कमांडो को अत्याधुनिक बॉडी प्रोटेक्टर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे पथराव और हमलों के दौरान सुरक्षित रह सकें। यूनिट को मौके पर त्वरित निर्णय लेने की छूट भी दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर टीम लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल कर सकती है, हालांकि सभी कार्रवाई “न्यूनतम बल” के सिद्धांत के तहत ही की जाएगी। अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि इस यूनिट का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना की सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में करना है। उन्होंने कहा कि यह टीम स्थानीय स्तर पर पीएसी की तरह कार्य करेगी, लेकिन अधिक आधुनिक और फुर्तीली होगी। फिलहाल यूनिट को ट्रायल मोड में रखा गया है और शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस के साथ रूट मार्च कराया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस पहल से न केवल अपराधियों में खौफ पैदा होगा, बल्कि आम जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ेगा।
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- कानपुर। शहर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए पुलिस कमिश्नरेट ने एक विशेष कमांडो यूनिट ‘ब्लैक हॉक QRT’ का गठन किया है। इस यूनिट में शामिल करीब 60 प्रशिक्षित जवानों को आधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस कर संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। औद्योगिक शहर कानपुर में छोटी घटनाओं के बड़े रूप लेने की आशंका को देखते हुए इस क्विक रिस्पॉन्स टीम को तैयार किया गया है। यह यूनिट किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम होगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष दस्ते को दंगा नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और छापामार कार्रवाई की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। कमांडो को अत्याधुनिक बॉडी प्रोटेक्टर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे पथराव और हमलों के दौरान सुरक्षित रह सकें। यूनिट को मौके पर त्वरित निर्णय लेने की छूट भी दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर टीम लाठीचार्ज, आंसू गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल कर सकती है, हालांकि सभी कार्रवाई “न्यूनतम बल” के सिद्धांत के तहत ही की जाएगी। अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि इस यूनिट का उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना की सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में करना है। उन्होंने कहा कि यह टीम स्थानीय स्तर पर पीएसी की तरह कार्य करेगी, लेकिन अधिक आधुनिक और फुर्तीली होगी। फिलहाल यूनिट को ट्रायल मोड में रखा गया है और शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस के साथ रूट मार्च कराया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि इस पहल से न केवल अपराधियों में खौफ पैदा होगा, बल्कि आम जनता के बीच सुरक्षा का भरोसा भी बढ़ेगा।1
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