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गणेश मोड की चौकी प्रभारी के ऊपर सचिव ने लगाए गंभीर आरोप सचिन ने बताया चौकी प्रभारी और मर्यादा अभद्र भाषा का प्रयोग किया है दरअसल पूरा मामला बलरामपुर जिले के गणेश मोड चौकी क्षेत्र का है जहां एक सचिव ने चौकी पर भारी को ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए सपा को ज्ञापन शॉप कर कार्रवाई की मांग की है यदि कार्रवाई नहीं हुआ तो धरने पर बैठने की बात कही
Ali Khan
गणेश मोड की चौकी प्रभारी के ऊपर सचिव ने लगाए गंभीर आरोप सचिन ने बताया चौकी प्रभारी और मर्यादा अभद्र भाषा का प्रयोग किया है दरअसल पूरा मामला बलरामपुर जिले के गणेश मोड चौकी क्षेत्र का है जहां एक सचिव ने चौकी पर भारी को ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए सपा को ज्ञापन शॉप कर कार्रवाई की मांग की है यदि कार्रवाई नहीं हुआ तो धरने पर बैठने की बात कही
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- सरकार द्वारा वाहनों पर ओवरलोडिंग (क्षमता से अधिक वजन) पर पाबंदी मुख्य रूप से सड़क सुरक्षा, बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाई जाती है। ओवरलोड गाड़ियां दुर्घटनाओं का मुख्य कारण हैं, जो प्रतिवर्ष हजारों लोगों की जान लेती हैं और पुलों व सड़कों को समय से पहले खराब कर देती हैं। ओवरलोड पर पाबंदी के प्रमुख कारण: सड़क सुरक्षा (Road Safety): अत्यधिक वजन होने के कारण वाहनों का संतुलन बिगड़ जाता है और ब्रेक सही से काम नहीं करते, जिससे दुर्घटना (Accident) की संभावना बहुत बढ़ जाती है। सड़क और पुलों की सुरक्षा (Infrastructure Damage): ओवरलोड वाहनों से सड़कें, पुल और पुलिया समय से पहले टूट जाती हैं, जिससे भारी राजस्व की क्षति होती है। प्रदूषण में वृद्धि (Environmental Impact): ज्यादा वजन ढोने के कारण इंजन पर दबाव पड़ता है, जिससे ईंधन ज्यादा जलता है और वायु प्रदूषण (Air Pollution) बढ़ता है। कानूनी प्रावधान (Legal Action): मोटर वाहन अधिनियम 1988 (धारा 113) के तहत ओवरलोडिंग अपराध है, जिसके तहत भारी जुर्माना (न्यूनतम ₹2000 या अधिक) और परमिट रद्द करने का प्रावधान है। ट्रैफिक जाम: खराब सड़कों के कारण अक्सर जाम लगता है, जिससे आम जनता को परेशानी होती है।1
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- .लोकतंत्र में चुनाव विकास के वादे लेकर आता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में एक गांव ऐसा भी है जहाँ आज भी 'विकास कच्ची सड़क की शक्ल नहीं देख पाया है। हम बात कर रहे हैं बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत इदरीकला के जगह का नाम नावापारा है जहाँ ग्रामीण अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और सिस्टम की बेरुखी से तंग आकर आज भारी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे हैं। बीओ01.....बलरामपुर कलेक्ट्रेट में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे ये लोग नावापारा के ग्रामीण हैं। इनका आरोप है कि बरसात के दिनों में इनका संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। स्थिति इतनी ख़राब है कि किसी की तबीयत खराब होने पर उसे अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं, बल्कि खाट' का सहारा लेना पड़ता है। अपनों की गांव मे किसी की मैयत' हो जाने पर भी शव को ले जाना किसी जंग जीतने जैसा होता है बरसात में संपर्क पूरी तरह बंद होजाता बारिश शुरू होते ही सड़क की जगह सिर्फ कीचड़ बचता है।इलाज का अभाव एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, मरीजों को खाट पर ढोना मजबूरी खेतों की मेढ़ का सहारा मुख्य रास्ता बंद होने पर ग्रामीण खेतों की मेढ़ से जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर।नेताओं की वादाखिलाफी चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे, लेकिन जीत के बाद सब 'ठंडे बस्ते चुनाव के समय नेता हाथ जोड़कर आते हैं, रोड बनाने का वादा करते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई शक्ल तक नहीं दिखाता। गर्मी में तो जैसे-तैसे निकल जाते हैं, पर बरसात में हम कैद हो जाते हैं। हमने आज कलेक्टर साहब को ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि सड़क के साथ-साथ पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार की भी जांच हो। बाइट1
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- किन्नरों का बधाई मांगने का एरिया (इलाका) पारंपरिक गुरु-चेला प्रथा और आपसी सहमति से निर्धारित होता है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह एक निश्चित क्षेत्र होता है, जहाँ का 'गुरु' (प्रमुख) अपने शिष्यों को बधाई मांगने के लिए बांटता है। इसमें कोई बाहरी या दूसरा समूह हस्तक्षेप नहीं करता। एरिया निर्धारण के मुख्य बिंदु: गुरु का अधिकार: क्षेत्र का बंटवारा उस इलाके के गुरु (या डेरे के मुखिया) द्वारा किया जाता है। परंपरा: यह व्यवस्था पुरानी परंपराओं पर आधारित है और इसे बदलना आम तौर पर मनाही है। विवाद और नियम: कई जगहों पर, मनमानी वसूली को रोकने के लिए ग्राम पंचायत या मोहल्ला कमेटी के साथ मिलकर 2100-5100 रुपये तक की बधाई (लाग) राशि भी तय की जाती है, ताकि आपसी विवाद न हो। बधाई के मौके: वे आमतौर पर शादी, बच्चे के जन्म और गृह प्रवेश जैसे मंगल अवसरों पर बधाई मांगने जाते हैं।1