ढोकरी-चंदोकी से गंगा तक पहुंच रहा गंदा पानी, दुर्गंध से ग्रामीण बेहाल इफको प्लांट के आसपास से गुजरने वाले नाले को लेकर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की जांच और सफाई की मांग फूलपुर, प्रयागराज। ढोकरी-चंदोकी से होकर इफको प्लांट के आसपास से गुजरने वाला दूषित नाला इन दिनों ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बना हुआ है। नाले का गंदा पानी भरौटी, सौरा समेत आसपास के कई गांवों से होकर आगे बैरागिया नाला से होकर गंगा नदी की ओर जा रहा है। नाले में जगह-जगह गंदगी और कचरा जमा होने से आसपास के गांवों में दुर्गंध का वातावरण बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से नाले की समुचित सफाई नहीं होने के कारण समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नाले में बहकर आने वाले पानी का रंग और दुर्गंध सामान्य नालों के पानी से अलग दिखाई देती है। इसी वजह से ग्रामीणों को आशंका है कि पानी में किसी प्रकार के रासायनिक तत्व मिले हो सकते हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने की मांग उठाई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी अधिकृत जांच से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक नाले की सफाई न होने से स्थिति कई बार इतनी खराब हो जाती है कि इसमें मवेशी फंस जाते हैं। समय रहते उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका तो उनकी मौत तक हो जाती है। पशुओं के शव नाले में पड़े रहने से दुर्गंध और संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है तथा नाले का पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलने की आशंका बनी रहती है। इफको अधिकारियों ने आरोपों से किया इनकार मामले में इफको के उच्च अधिकारियों का कहना है कि इफको प्लांट से इस नाले में कोई पानी नहीं छोड़ा जाता है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित नाला आधिकारिक रूप से राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है और इसके संबंध में कार्रवाई उपजिलाधिकारी स्तर से की जानी है। जांच से साफ होगी पानी की असलियत ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नाले के पानी के नमूने लेकर उसकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाए। साथ ही ढोकरी, चंदोकी, इफको क्षेत्र, भरौटी और सौरा तक नाले का स्थलीय निरीक्षण कराकर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी गंगा नदी तक पहुंच रहा है तो इसकी गुणवत्ता की जांच पर्यावरण और जल संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद जरूरी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नाले की सफाई और पानी की जांच नहीं कराई गई तो वे प्रशासन के समक्ष मामले को प्रमुखता से उठाएंगे।
ढोकरी-चंदोकी से गंगा तक पहुंच रहा गंदा पानी, दुर्गंध से ग्रामीण बेहाल इफको प्लांट के आसपास से गुजरने वाले नाले को लेकर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की जांच और सफाई की मांग फूलपुर, प्रयागराज। ढोकरी-चंदोकी से होकर इफको प्लांट के आसपास से गुजरने वाला दूषित नाला इन दिनों ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बना हुआ है। नाले का गंदा पानी भरौटी, सौरा समेत आसपास के कई गांवों से होकर आगे बैरागिया नाला से होकर गंगा नदी की ओर जा रहा है। नाले में जगह-जगह गंदगी और कचरा जमा होने से आसपास के गांवों में दुर्गंध का वातावरण बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से नाले की समुचित सफाई नहीं होने के कारण समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नाले में बहकर आने वाले पानी का रंग और दुर्गंध सामान्य नालों के पानी से अलग दिखाई देती है। इसी वजह से ग्रामीणों को आशंका है कि पानी में किसी प्रकार के रासायनिक तत्व मिले हो सकते हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने की मांग उठाई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी अधिकृत जांच से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक नाले की सफाई न होने से स्थिति कई बार इतनी खराब हो जाती है कि इसमें मवेशी फंस जाते हैं। समय रहते उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका तो उनकी मौत तक हो जाती है। पशुओं के शव नाले में पड़े रहने से दुर्गंध और संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है तथा नाले का पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलने की आशंका बनी रहती है। इफको अधिकारियों ने आरोपों से किया इनकार मामले में इफको के उच्च अधिकारियों का कहना है कि इफको प्लांट से इस नाले में कोई पानी नहीं छोड़ा जाता है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित नाला आधिकारिक रूप से राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है और इसके संबंध में कार्रवाई उपजिलाधिकारी स्तर से की जानी है। जांच से साफ होगी पानी की असलियत ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नाले के पानी के नमूने लेकर उसकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाए। साथ ही ढोकरी, चंदोकी, इफको क्षेत्र, भरौटी और सौरा तक नाले का स्थलीय निरीक्षण कराकर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी गंगा नदी तक पहुंच रहा है तो इसकी गुणवत्ता की जांच पर्यावरण और जल संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद जरूरी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नाले की सफाई और पानी की जांच नहीं कराई गई तो वे प्रशासन के समक्ष मामले को प्रमुखता से उठाएंगे।
- ढोकरी-चंदोकी से गंगा तक पहुंच रहा गंदा पानी, दुर्गंध से ग्रामीण बेहाल इफको प्लांट के आसपास से गुजरने वाले नाले को लेकर उठे सवाल, ग्रामीणों ने की जांच और सफाई की मांग फूलपुर, प्रयागराज। ढोकरी-चंदोकी से होकर इफको प्लांट के आसपास से गुजरने वाला दूषित नाला इन दिनों ग्रामीणों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बना हुआ है। नाले का गंदा पानी भरौटी, सौरा समेत आसपास के कई गांवों से होकर आगे बैरागिया नाला से होकर गंगा नदी की ओर जा रहा है। नाले में जगह-जगह गंदगी और कचरा जमा होने से आसपास के गांवों में दुर्गंध का वातावरण बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से नाले की समुचित सफाई नहीं होने के कारण समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नाले में बहकर आने वाले पानी का रंग और दुर्गंध सामान्य नालों के पानी से अलग दिखाई देती है। इसी वजह से ग्रामीणों को आशंका है कि पानी में किसी प्रकार के रासायनिक तत्व मिले हो सकते हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने की मांग उठाई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी अधिकृत जांच से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक नाले की सफाई न होने से स्थिति कई बार इतनी खराब हो जाती है कि इसमें मवेशी फंस जाते हैं। समय रहते उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका तो उनकी मौत तक हो जाती है। पशुओं के शव नाले में पड़े रहने से दुर्गंध और संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है तथा नाले का पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलने की आशंका बनी रहती है। इफको अधिकारियों ने आरोपों से किया इनकार मामले में इफको के उच्च अधिकारियों का कहना है कि इफको प्लांट से इस नाले में कोई पानी नहीं छोड़ा जाता है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित नाला आधिकारिक रूप से राजस्व विभाग के अंतर्गत आता है और इसके संबंध में कार्रवाई उपजिलाधिकारी स्तर से की जानी है। जांच से साफ होगी पानी की असलियत ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नाले के पानी के नमूने लेकर उसकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाए। साथ ही ढोकरी, चंदोकी, इफको क्षेत्र, भरौटी और सौरा तक नाले का स्थलीय निरीक्षण कराकर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी गंगा नदी तक पहुंच रहा है तो इसकी गुणवत्ता की जांच पर्यावरण और जल संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद जरूरी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नाले की सफाई और पानी की जांच नहीं कराई गई तो वे प्रशासन के समक्ष मामले को प्रमुखता से उठाएंगे।1
- *महराजगंज — घरेलू विवाद के बाद महिला ने नहर में छलांग लगा दी, पास से गुज़र रहे 10वीं के दो छात्रों कृष्णा और सद्दाम ने नहर में कूद कर महिला को बचा लिया।*1
- बेटे को बचाने के लिए मौत से भिड़ गई मां मां घायल हुई, लेकिन उसका साहस हर किसी को भावुक कर गया प्रयागराज सिरोही (राजस्थान): आबूरोड शहर की शिवाजी कॉलोनी में मानवता और मातृत्व की मिसाल पेश करने वाली घटना सामने आई। तीन वर्षीय मासूम पर अचानक एक गाय ने हमला कर दिया। बच्चे की चीख सुनते ही उसकी मां बिना अपनी जान की परवाह किए गाय के सामने खड़ी हो गई। मां ने किसी तरह बच्चे को गाय के हमले से बचा लिया, लेकिन इस दौरान वह स्वयं घायल हो गई। घटना के बाद परिजन और आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। घायल महिला को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। मां का साहस, बेटे की जान बची।1
- आज का दिन देश के पत्रकारों के लिए अच्छा नहीं रहा है। बिहार के सहरसा में मिड डे मिल खाने से दर्जनों बच्चे बीमार हो गए। बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां पत्रकार रिपोर्टिंग करने पहुंचे तो डॉक्टरों ने उनके साथ मारपीट की। प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार को ऑपरेशन थियेटर में डाक्टरों ने बलभर पीटा।1
- Please मैं ऑलरेडी बहुत ज्यादा परेशान हूं प्लीज मुझे परेशान ना किया जाए मैं कुछ गलत नहीं किया है मुझे किसी विपक्ष के नेता ने नहीं भेजा था मैं बस सवाल करने गई थी जो कि मैं हमेशा करती आई हूं प्लीज यह सब मेरे साथ ना किया जाए कि यह प्रोपेगेंडा ना फैलाया जाए कि विपक्ष ने भेजा है मुझे मैं एक चीज बोलना चाहती हूं कि जब मैं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से सवाल पूछता हूं तो सब लोग कहां चले जाते हैं और आज जब मैं भाजपा में सवाल पूछ लिया तो मैं क्या गलत किया क्यों वह लोग इस तरीके की प्रोपेगेंडा वाली बातें करें मुझे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से कोई दिक्कत नहीं है मुझे दिक्कत उनके प्रवक्ताओं से मुझे उनके दिक्कत उनके समर्थकों से जो मुझे गलत अपशब्द बोल रहे हैं इस तरीके से परेशान ना किया जाए बहुत-बहुत शुक्रिया धन्यवाद जय हिंद जयभारत1
- मेजा के सिरसा में तालाब की पैमाईश के लिए आई #राजस्व टीम से ग्रामीणों ने किया दुर्व्यवहार, जिससे नाराज होकर लेखपाल संघ थाने में पहुंचा मुकदमा पंजीकृत के लिए इसी बीच किसी बात को लेकर मेजा थाने में पुलिस औरलेखपालों के बीच हुई नोंक झोंक2
- ओयो होटल में बैंक मैनेजर की मौत,पुलिस जाँच पड़ताल में जुटी प्रयागराज: फूलपुर थाना क्षेत्र के इफको चौकी अंतर्गत ओयो होटल सुदीप में बैंक मैनेजर महेंद्र कुमार भारतीय संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले। होटल के कमरे में अचेत अवस्था में मिलने के बाद उन्हें सीएचसी फूलपुर ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। आपको बता दे कि,सरायममरेज थाना क्षेत्र के लोहगजरी खानपुर डांडी गांव निवासी महेंद्र कुमार भारतीय पुत्र राधेश्याम प्रतापपुर स्थित साईं समर्पण बैंक की शाखा में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे।2
- रोस्टर के नाम पर दो-दो से तीन-तीन घंटे गुल हो रही बिजली, ग्रामीण परेशान महावीरन मेन पावर हाउस से कटौती का असर; किसानों की सिंचाई और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, अधिकारी बोले- रोस्टर के अनुसार हो रही आपूर्ति फूलपुर। विद्युत विभाग के मेन पावर हाउस महावीरन से होने वाली बिजली कटौती ने विद्युत उपखंड फूलपुर क्षेत्र के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि रोस्टर के नाम पर लगातार दो-दो से तीन-तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। कई बार बिजली आने के कुछ ही देर बाद दोबारा कटौती शुरू हो जाती है। इससे लोगों को यह समझना मुश्किल हो रहा है कि निर्धारित रोस्टर के तहत कितनी कटौती होनी है और कितनी अघोषित कटौती की जा रही है। सिंचाई के लिए रात में जागने को मजबूर किसान बिजली कटौती का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। मौजूदा समय में खेतों में सिंचाई की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान विद्युत मोटर और नलकूपों के सहारे खेतों की सिंचाई करते हैं। लेकिन दिन और रात में लंबे समय तक बिजली गायब रहने से सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में बिजली नहीं मिलने पर किसान रात में सिंचाई करने की तैयारी करते हैं, लेकिन उस समय भी आपूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसे में किसानों को बिजली आने का इंतजार करते हुए रात में कई घंटे जागना पड़ता है। समय पर सिंचाई नहीं होने से फसलों पर भी असर पड़ने की चिंता किसानों को सताने लगी है। बिजली कटौती से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। रात में पढ़ाई के समय बिजली चले जाने से बच्चों को परेशानी होती है। ग्रामीणों के मुताबिक गर्मी और उमस के बीच बिजली कटौती होने से घरों में बच्चों का पढ़ना मुश्किल हो जाता है। परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग से शिकायत करने पर रोस्टर का हवाला दिया जाता है। यदि रोस्टर के अनुसार कटौती हो रही है तो लोगों को इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए, ताकि किसान सिंचाई और विद्यार्थी अपनी पढ़ाई की व्यवस्था उसी हिसाब से कर सकें। शिकायत पर मिलता है रोस्टर का हवाला बिजली कटौती को लेकर जब उपखंड फूलपुर के विद्युत अधिकारियों से ग्रामीण संपर्क करते हैं तो उन्हें रोस्टर के अनुसार आपूर्ति किए जाने की बात बताई जाती है। अधिकारियों की ओर से व्यवस्था में सुधार का आश्वासन भी दिया जाता है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि समस्या लगातार बनी हुई है। ग्रामीण बलराम यादव का कहना है कि बिजली की कटौती का कोई निश्चित समय नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। किसान खेतों की सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार करते हैं, लेकिन आपूर्ति बाधित हो जाती है। वहीं ने शिवम पांडे ने बताया कि रात में बिजली कटने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। विभाग को रोस्टर के अनुसार बिजली देने के साथ-साथ अघोषित कटौती पर भी रोक लगानी चाहिए। ग्रामीणों ने की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के उच्चाधिकारियों से महावीरन मेन पावर हाउस से होने वाली बिजली आपूर्ति और कटौती व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि किसी तकनीकी समस्या या निर्धारित रोस्टर के कारण बिजली काटी जा रही है तो इसकी स्पष्ट जानकारी उपभोक्ताओं को दी जाए। साथ ही रोस्टर के अतिरिक्त होने वाली कटौती पर रोक लगाकर नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली कटौती की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे विभागीय अधिकारियों से सामूहिक रूप से शिकायत कर समस्या के स्थायी समाधान की मांग करेंगे।1