जालौन तहसील क्षेत्र के ग्राम लौना के ग्रामीणों और खिलाड़ियों ने उपजिलाधिकारी जालौन को एक प्रार्थना पत्र देकर प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने राजस्व अभिलेखों में 'खलिहान' के रूप में दर्ज गाटा संख्या 791 की तत्काल पैमाइश कराकर उसकी सीमाएं स्पष्ट करने और भूमि की साफ-सफाई कराने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि वर्तमान में खाली पड़ी है, जिस पर अत्यधिक मात्रा में कांस-खास की घास और घनी झाड़ियां उग आई हैं, जिससे यह पूरी तरह अनुपयोगी हो गई है। उनकी शिकायत है कि बिना मशीनों के इसकी सफाई संभव नहीं है। गांव में खेल के मैदान के लिए कोई अन्य पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण, गाटा संख्या 791 को बच्चों और युवाओं के खेलकूद के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना जा रहा है। ग्रामीणों ने जनहित और खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनकी विशेष मांग है कि गाटा संख्या 791 की पैमाइश कर उसकी सीमाएं निर्धारित की जाएं, और मशीनों के माध्यम से भूमि की साफ-सफाई कराकर उसे खेल मैदान के रूप में विकसित करने योग्य बनाया जाए, ताकि गांव के बच्चे और युवा नियमित रूप से खेलकूद का अभ्यास कर सकें। इस दौरान उपेन्द्र सेंगर, अभिषेक सेंगर, दीपराज, विकास, प्रद्युम्न सेंगर सहित कई अन्य ग्रामवासी और खिलाड़ी मौजूद रहे।
जालौन तहसील क्षेत्र के ग्राम लौना के ग्रामीणों और खिलाड़ियों ने उपजिलाधिकारी जालौन को एक प्रार्थना पत्र देकर प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने राजस्व अभिलेखों में 'खलिहान' के रूप में दर्ज गाटा संख्या 791 की तत्काल पैमाइश कराकर उसकी सीमाएं स्पष्ट करने और भूमि की साफ-सफाई कराने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि वर्तमान में खाली पड़ी है, जिस पर अत्यधिक मात्रा में कांस-खास की घास और घनी झाड़ियां उग आई हैं, जिससे यह पूरी तरह अनुपयोगी हो गई है। उनकी शिकायत है कि बिना मशीनों के इसकी सफाई संभव नहीं है। गांव में खेल के मैदान के लिए कोई अन्य पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण, गाटा संख्या 791 को बच्चों और युवाओं के खेलकूद के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना जा रहा है। ग्रामीणों ने जनहित और खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उनकी विशेष मांग है कि गाटा संख्या 791 की पैमाइश कर उसकी सीमाएं निर्धारित की जाएं, और मशीनों के माध्यम से भूमि की साफ-सफाई कराकर उसे खेल मैदान के रूप में विकसित करने योग्य बनाया जाए, ताकि गांव के बच्चे और युवा नियमित रूप से खेलकूद का अभ्यास कर सकें। इस दौरान उपेन्द्र सेंगर, अभिषेक सेंगर, दीपराज, विकास, प्रद्युम्न सेंगर सहित कई अन्य ग्रामवासी और खिलाड़ी मौजूद रहे।
- जालौन के उपजिलाधिकारी श्री रिंकू सिंह राही ने शुक्रवार को केंद्रीय आवासीय वृद्धा आश्रम पहुंचकर वहां रह रहे वृद्ध महिलाओं एवं पुरुषों के साथ आत्मीय समय व्यतीत किया। इस दौरान उन्होंने बुजुर्गों का कुशलक्षेम जाना और उनके साथ तालियां बजाते हुए भजन भी सुने। आश्रम पहुंचने पर सभी वृद्धजनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया। बातचीत के क्रम में, श्री राही ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने पर जोर दिया। उन्होंने केंद्र एवं प्रदेश सरकार के "एक वृक्ष माँ के नाम" अभियान का उल्लेख कर सभी को पौधारोपण के लिए प्रेरित किया। एसडीएम के इस आह्वान पर, आश्रम की वृद्ध महिलाओं ने अपने-अपने गमलों में पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर, बुजुर्गों ने श्री रिंकू सिंह राही के सरल, संवेदनशील और सेवाभावी व्यवहार की सराहना की, यह कहते हुए कि अधिकारियों का जनता के प्रति ऐसा ही मानवीय दृष्टिकोण होना चाहिए। वृद्ध महिलाओं एवं पुरुषों ने उपजिलाधिकारी को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। कार्यक्रम के अंत में, सभी वृद्धजनों ने एसडीएम का आभार व्यक्त किया तथा पर्यावरण संरक्षण और सेवा के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प भी लिया।4
- जालौन में शासन के निर्देशानुसार संचालित होने वाले 'दस्तक अभियान' की विस्तृत जानकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जालौन की टीम द्वारा संपूर्ण समाधान दिवस में प्रशासनिक अधिकारियों और आमजन को दी गई। यह विशेष अभियान 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य संक्रामक एवं मौसमी बीमारियों पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाना है। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. के.डी. गुप्ता और चिकित्सा अधिकारी डॉ. सहन बिहारी गुप्ता ने अभियान के उद्देश्यों, कार्ययोजना और जनहित में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संयुक्त टीमें घर-घर जाकर बुखार, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टीबी, कुपोषण तथा अन्य गंभीर बीमारियों के संभावित मरीजों की पहचान करेंगी और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराएंगी। साथ ही, लोगों को स्वच्छता अपनाने, जलभराव रोकने, साफ पेयजल का उपयोग करने, मच्छरों से बचाव तथा बच्चों के नियमित टीकाकरण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि अभियान का लक्ष्य बीमारियों की समय रहते पहचान कर उनके प्रसार को रोकना और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। उन्होंने संपूर्ण समाधान दिवस में मौजूद सभी अधिकारियों एवं फरियादियों से जनसहभागिता के माध्यम से इस अभियान को सफल बनाने की अपील की। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी जालौन रिंकू सिंह राही, तहसीलदार जालौन, नायब तहसीलदार जालौन, मंडी सचिव अंकित गुप्ता, उप निरीक्षक निसार अहमद, विद्युत विभाग के उपखंड अधिकारी सूरज सोनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 23वीं किस्त जारी की है। इस पहल के तहत, देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि पीएम-किसान योजना का उद्देश्य पात्र किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करके उनकी आय बढ़ाना और खेती-किसानी को सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत, किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। 23वीं किस्त के जारी होने से करोड़ों किसान परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिससे उन्हें कृषि कार्यों के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। किसानों ने केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि समय पर मिलने वाली यह आर्थिक सहायता खेती-किसानी के खर्चों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक नया विवाद सामने आया है। ग्राम खकसीस निवासी शिवपाल सिंह ने पुलिस अधीक्षक जालौन को एक प्रार्थना पत्र देकर अपनी पत्नी से मुलाकात, विवाह संबंधी साक्ष्यों के सत्यापन और सुरक्षा की मांग की है। शिवपाल सिंह ने न्याय की गुहार लगाई है। शिवपाल सिंह का दावा है कि उनका विवाह वर्ष 2016 में हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न हुआ था, लेकिन बाद में ऐसी परिस्थितियाँ बनीं कि उनकी पत्नी उनसे अलग हो गईं। उन्होंने इस अलगाव के पीछे बाहरी हस्तक्षेप और दबाव की भूमिका का आरोप लगाया है। प्रार्थना पत्र में यह भी बताया गया है कि हाल ही में एक अन्य व्यक्ति ने स्वयं को उनकी पत्नी का पति बताते हुए उन्हें कथित रूप से धमकाया, जिससे यह पूरा मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। शिवपाल सिंह ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और विवाह से जुड़े सभी दस्तावेजों एवं तथ्यों का सत्यापन कराने का अनुरोध किया है। उनकी प्राथमिक मांग केवल यह जानने की है कि उनकी पत्नी वर्तमान में अपनी स्वतंत्र इच्छा से किस परिस्थिति में रह रही हैं। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष वातावरण में मुलाकात कराने का भी आग्रह किया है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, और लोग पुलिस प्रशासन की कार्रवाई तथा जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। यह उल्लेखनीय है कि समाचार में उल्लिखित सभी आरोप शिवपाल सिंह के प्रार्थना पत्र में किए गए दावों पर आधारित हैं, और इनकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही संभव हो पाएगी।1
- जालौन की कालपी तहसील सभागार में शनिवार दोपहर 2 बजे आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना। इस दौरान कुल 145 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 28 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों की टीमें गठित कर जल्द से जल्द कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इस मौके पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे।4
- जालौन जनपद में 5650 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती का सफल आरम्भ हो गया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने पत्रकारों से विशेष भेंट वार्ता के दौरान यह जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में 50-50 हेक्टेयर के कुल 114 क्लस्टर बनाए गए हैं, जहाँ महिला किसानों की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इस पहल के तहत 10,601 किसानों को चिन्हित किया गया है, और 2,52,000 किसानों को ग्राम पंचायत, विकासखंड तथा जिला स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र के मॉडल प्रक्षेत्र एवं वैज्ञानिकों के माध्यम से प्रशिक्षित कर जागरूक किया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा तरीका है जिसमें जीवांश का उपयोग करके पोषक तत्व, सिंचाई, कीट-रोग एवं खरपतवार प्रबंधन किया जाता है, जिससे उत्पादन प्राप्त होता है। इसका मुख्य आधार देसी गोवंश है, जिसके गोबर और गोमूत्र से कई प्रकार के मिश्रण तैयार किए जाते हैं। इन मिश्रणों से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और कीट व रोगों की रोकथाम होती है। इसे 'ऑन फॉर्म प्रिपरेशन और प्रैक्टिस' भी कहते हैं, और इसमें सिंथेटिक रसायनों का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता। हालांकि, उन्होंने प्राकृतिक खेती की कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया, जैसे रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती में संक्रमण के शुरुआती वर्षों में उत्पादन में गिरावट आना, क्योंकि मिट्टी को अपनी प्राकृतिक उर्वरता वापस लाने में समय लगता है। साथ ही, तकनीकी ज्ञान और जागरूकता की कमी तथा जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसे प्राकृतिक तरीकों के सटीक उपयोग के लिए प्रशिक्षण व मार्गदर्शन का अभाव भी प्रमुख चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जनपद में 10,601 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए चिन्हित कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। प्राकृतिक खेती में मुख्य रूप से गाय के गोबर आधारित इनपुट जैसे जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत और दस परणी स्वयं तैयार किए जाते हैं। जीवामृत से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की वृद्धि होती है, बीजामृत नई जड़ों को फंगस और मिट्टी जनित बीमारियों से बचाता है, घन जीवामृत मिट्टी में लंबे समय तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखता है, और दस परणी फसलों को कीट व रोगों से बचाता है। जिलाधिकारी ने प्राकृतिक खेती के कई लाभों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जीवांश और कार्बन में वृद्धि, रसायन मुक्त खेती, किसानों के आर्थिक स्तर में सुधार, आत्मनिर्भरता, कम लागत में अधिक आय और रसायनों की खरीद की आवश्यकता न होना शामिल है। यह 'जीरो बजट' की खेती है। जिले में प्राकृतिक खेती में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए, ग्राम मल्हनपुरा की महिला किसान सोमवती को जिले की प्राकृतिक खेती का 'रोल मॉडल' बनाया गया है।1
- राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के पदाधिकारियों ने उरई में जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर भारत तिवारी की मृत्यु के मामले में उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच की मांग की है। संगठन ने ज्ञापन में कहा कि जांच पूरी होने तक घटना में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। ज्ञापन में मांग की गई है कि यदि जांच में फर्जी मुठभेड़ अथवा अवैध बल प्रयोग सिद्ध होता है, तो दोषी अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 (हत्या), धारा 109 (हत्या का प्रयास), धारा 61 (आपराधिक षड्यंत्र), धारा 191 (साक्ष्य नष्ट करना) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की निगरानी में जांच कराए जाने तथा मुठभेड़ की वीडियो रिकॉर्डिंग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई गई। संगठन ने पीड़ित परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी और परिवार एवं गवाहों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की है। यदि भारत तिवारी बाढ़ एवं कटान पीड़ितों की समस्याओं को लेकर संघर्षरत थे, तो उनके द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों का तत्काल समाधान करने की बात भी ज्ञापन में कही गई। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस सुधार आयोग के गठन तथा प्रत्येक मुठभेड़ की अनिवार्य न्यायिक जांच सुनिश्चित किए जाने की भी मांग की गई है। राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने सरकार से इस प्रकरण को अत्यंत गंभीर मानते हुए त्वरित न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में सुनवाई कराकर दोषियों को कठोरतम दंड दिलाने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में ऋतिक दुबे, राजकुमार, रामसेवक, सुनील गुप्ता, सनी दुबे एडवोकेट (जिला अध्यक्ष) सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।3
- जालौन के उपजिलाधिकारी श्री रिंकू सिंह राही ने शुक्रवार को केंद्रीय आवासीय वृद्धा आश्रम का दौरा किया। उन्होंने वहाँ रह रहीं वृद्ध महिलाओं और पुरुषों के साथ आत्मीय समय व्यतीत किया, उनकी कुशलक्षेम जानी और उनके साथ तालियां बजाते हुए भजन भी सुने। एसडीएम के आश्रम पहुँचने पर सभी वृद्धजनों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया। बातचीत के दौरान, श्री राही ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने केंद्र एवं प्रदेश सरकार के "एक वृक्ष माँ के नाम" अभियान का उल्लेख करते हुए पौधारोपण के महत्व पर जोर दिया। एसडीएम के इस आह्वान पर, आश्रम में रह रही वृद्ध महिलाओं ने अपने-अपने गमलों में पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर, बुजुर्गों ने श्री रिंकू सिंह राही के सरल, संवेदनशील और सेवाभावी व्यवहार की सराहना की, यह कहते हुए कि अधिकारियों का जनता के प्रति ऐसा ही मानवीय दृष्टिकोण होना चाहिए। वृद्ध महिलाओं और पुरुषों ने उपजिलाधिकारी को उनके उज्ज्वल भविष्य और उत्तम स्वास्थ्य के लिए आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम के अंत में, सभी वृद्धजनों ने एसडीएम का आभार व्यक्त किया और पर्यावरण संरक्षण तथा सेवा के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।1
- उत्तर प्रदेश में विकास, शिक्षा, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी-ललितपुर क्षेत्र को विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी है, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र के आधारभूत ढांचे और रोजगार के अवसरों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं, धार्मिक नगरी अयोध्या में वैक्स म्यूजियम का लोकार्पण किया गया है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा तथा प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने अहम पहल करते हुए पीएमश्री स्कूलों के विद्यार्थियों को निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को विद्यालय पहुंचने में सुविधा मिलेगी और शिक्षा तक उनकी पहुंच और अधिक सुलभ होगी। इसके अलावा, प्रदेश के गांवों में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इन उद्योगों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि विकास, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।1