जालौन जनपद में 5650 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती का सफल आरम्भ हो गया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने पत्रकारों से विशेष भेंट वार्ता के दौरान यह जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में 50-50 हेक्टेयर के कुल 114 क्लस्टर बनाए गए हैं, जहाँ महिला किसानों की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इस पहल के तहत 10,601 किसानों को चिन्हित किया गया है, और 2,52,000 किसानों को ग्राम पंचायत, विकासखंड तथा जिला स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र के मॉडल प्रक्षेत्र एवं वैज्ञानिकों के माध्यम से प्रशिक्षित कर जागरूक किया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा तरीका है जिसमें जीवांश का उपयोग करके पोषक तत्व, सिंचाई, कीट-रोग एवं खरपतवार प्रबंधन किया जाता है, जिससे उत्पादन प्राप्त होता है। इसका मुख्य आधार देसी गोवंश है, जिसके गोबर और गोमूत्र से कई प्रकार के मिश्रण तैयार किए जाते हैं। इन मिश्रणों से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और कीट व रोगों की रोकथाम होती है। इसे 'ऑन फॉर्म प्रिपरेशन और प्रैक्टिस' भी कहते हैं, और इसमें सिंथेटिक रसायनों का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता। हालांकि, उन्होंने प्राकृतिक खेती की कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया, जैसे रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती में संक्रमण के शुरुआती वर्षों में उत्पादन में गिरावट आना, क्योंकि मिट्टी को अपनी प्राकृतिक उर्वरता वापस लाने में समय लगता है। साथ ही, तकनीकी ज्ञान और जागरूकता की कमी तथा जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसे प्राकृतिक तरीकों के सटीक उपयोग के लिए प्रशिक्षण व मार्गदर्शन का अभाव भी प्रमुख चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जनपद में 10,601 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए चिन्हित कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। प्राकृतिक खेती में मुख्य रूप से गाय के गोबर आधारित इनपुट जैसे जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत और दस परणी स्वयं तैयार किए जाते हैं। जीवामृत से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की वृद्धि होती है, बीजामृत नई जड़ों को फंगस और मिट्टी जनित बीमारियों से बचाता है, घन जीवामृत मिट्टी में लंबे समय तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखता है, और दस परणी फसलों को कीट व रोगों से बचाता है। जिलाधिकारी ने प्राकृतिक खेती के कई लाभों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जीवांश और कार्बन में वृद्धि, रसायन मुक्त खेती, किसानों के आर्थिक स्तर में सुधार, आत्मनिर्भरता, कम लागत में अधिक आय और रसायनों की खरीद की आवश्यकता न होना शामिल है। यह 'जीरो बजट' की खेती है। जिले में प्राकृतिक खेती में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए, ग्राम मल्हनपुरा की महिला किसान सोमवती को जिले की प्राकृतिक खेती का 'रोल मॉडल' बनाया गया है।
जालौन जनपद में 5650 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती का सफल आरम्भ हो गया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने पत्रकारों से विशेष भेंट वार्ता के दौरान यह जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में 50-50 हेक्टेयर के कुल 114 क्लस्टर बनाए गए हैं, जहाँ महिला किसानों की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इस पहल के तहत 10,601 किसानों को चिन्हित किया गया है, और 2,52,000 किसानों को ग्राम पंचायत, विकासखंड तथा जिला स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र के मॉडल प्रक्षेत्र एवं वैज्ञानिकों के माध्यम से प्रशिक्षित कर जागरूक किया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा तरीका है जिसमें जीवांश का उपयोग करके पोषक तत्व, सिंचाई, कीट-रोग एवं खरपतवार प्रबंधन किया जाता है, जिससे उत्पादन प्राप्त होता है। इसका मुख्य आधार देसी गोवंश है, जिसके गोबर और गोमूत्र से कई प्रकार के मिश्रण तैयार किए जाते हैं। इन मिश्रणों से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और कीट व रोगों की रोकथाम होती है। इसे 'ऑन फॉर्म प्रिपरेशन और प्रैक्टिस' भी कहते हैं, और इसमें सिंथेटिक रसायनों का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता। हालांकि, उन्होंने प्राकृतिक खेती की कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया, जैसे रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती में संक्रमण के शुरुआती वर्षों में उत्पादन में गिरावट आना, क्योंकि मिट्टी को अपनी प्राकृतिक उर्वरता वापस लाने में समय लगता है। साथ ही, तकनीकी ज्ञान और जागरूकता की कमी तथा जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसे प्राकृतिक तरीकों के सटीक उपयोग के लिए प्रशिक्षण व मार्गदर्शन का अभाव भी प्रमुख चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जनपद में 10,601 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए चिन्हित कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। प्राकृतिक खेती में मुख्य रूप से गाय के गोबर आधारित इनपुट जैसे जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत और दस परणी स्वयं तैयार किए जाते हैं। जीवामृत से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की वृद्धि होती है, बीजामृत नई जड़ों को फंगस और मिट्टी जनित बीमारियों से बचाता है, घन जीवामृत मिट्टी में लंबे समय तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखता है, और दस परणी फसलों को कीट व रोगों से बचाता है। जिलाधिकारी ने प्राकृतिक खेती के कई लाभों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जीवांश और कार्बन में वृद्धि, रसायन मुक्त खेती, किसानों के आर्थिक स्तर में सुधार, आत्मनिर्भरता, कम लागत में अधिक आय और रसायनों की खरीद की आवश्यकता न होना शामिल है। यह 'जीरो बजट' की खेती है। जिले में प्राकृतिक खेती में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए, ग्राम मल्हनपुरा की महिला किसान सोमवती को जिले की प्राकृतिक खेती का 'रोल मॉडल' बनाया गया है।
- प्रभु श्रीराम के मंदिर से जुड़े ज़मीन सौदों में गंभीर घोटाले का आरोप लगाया गया है, जिसमें 'ED पार्टी' और चंपत राय पर करोड़ों की लूट करने का दावा किया गया है। आरोपों के अनुसार, 2 करोड़ रुपये की ज़मीन को 18.5 करोड़ रुपये में, 3 करोड़ रुपये की ज़मीन को 24 करोड़ रुपये में, और 9 करोड़ रुपये की ज़मीन को 55 करोड़ रुपये में बेचा गया। इन सभी लेनदेन को 'प्रभु श्रीराम के नाम पर' किए गए घोटाले बताया गया है, जो मंदिर से संबंधित धन की कथित लूट को उजागर करते हैं।1
- माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 23वीं किस्त जारी की है। इस पहल के तहत, देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की किसानों के कल्याण और कृषि क्षेत्र के विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि पीएम-किसान योजना का उद्देश्य पात्र किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करके उनकी आय बढ़ाना और खेती-किसानी को सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत, किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। 23वीं किस्त के जारी होने से करोड़ों किसान परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिससे उन्हें कृषि कार्यों के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। किसानों ने केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि समय पर मिलने वाली यह आर्थिक सहायता खेती-किसानी के खर्चों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।1
- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक नया विवाद सामने आया है। ग्राम खकसीस निवासी शिवपाल सिंह ने पुलिस अधीक्षक जालौन को एक प्रार्थना पत्र देकर अपनी पत्नी से मुलाकात, विवाह संबंधी साक्ष्यों के सत्यापन और सुरक्षा की मांग की है। शिवपाल सिंह ने न्याय की गुहार लगाई है। शिवपाल सिंह का दावा है कि उनका विवाह वर्ष 2016 में हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न हुआ था, लेकिन बाद में ऐसी परिस्थितियाँ बनीं कि उनकी पत्नी उनसे अलग हो गईं। उन्होंने इस अलगाव के पीछे बाहरी हस्तक्षेप और दबाव की भूमिका का आरोप लगाया है। प्रार्थना पत्र में यह भी बताया गया है कि हाल ही में एक अन्य व्यक्ति ने स्वयं को उनकी पत्नी का पति बताते हुए उन्हें कथित रूप से धमकाया, जिससे यह पूरा मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। शिवपाल सिंह ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और विवाह से जुड़े सभी दस्तावेजों एवं तथ्यों का सत्यापन कराने का अनुरोध किया है। उनकी प्राथमिक मांग केवल यह जानने की है कि उनकी पत्नी वर्तमान में अपनी स्वतंत्र इच्छा से किस परिस्थिति में रह रही हैं। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष वातावरण में मुलाकात कराने का भी आग्रह किया है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, और लोग पुलिस प्रशासन की कार्रवाई तथा जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। यह उल्लेखनीय है कि समाचार में उल्लिखित सभी आरोप शिवपाल सिंह के प्रार्थना पत्र में किए गए दावों पर आधारित हैं, और इनकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच पूरी होने के बाद ही संभव हो पाएगी।1
- जालौन की कालपी तहसील सभागार में शनिवार दोपहर 2 बजे आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना। इस दौरान कुल 145 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 28 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों की टीमें गठित कर जल्द से जल्द कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इस मौके पर विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे।4
- जालौन जनपद में 5650 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती का सफल आरम्भ हो गया है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने पत्रकारों से विशेष भेंट वार्ता के दौरान यह जानकारी दी, जिसमें बताया गया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में 50-50 हेक्टेयर के कुल 114 क्लस्टर बनाए गए हैं, जहाँ महिला किसानों की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक है। इस पहल के तहत 10,601 किसानों को चिन्हित किया गया है, और 2,52,000 किसानों को ग्राम पंचायत, विकासखंड तथा जिला स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र के मॉडल प्रक्षेत्र एवं वैज्ञानिकों के माध्यम से प्रशिक्षित कर जागरूक किया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती एक ऐसा तरीका है जिसमें जीवांश का उपयोग करके पोषक तत्व, सिंचाई, कीट-रोग एवं खरपतवार प्रबंधन किया जाता है, जिससे उत्पादन प्राप्त होता है। इसका मुख्य आधार देसी गोवंश है, जिसके गोबर और गोमूत्र से कई प्रकार के मिश्रण तैयार किए जाते हैं। इन मिश्रणों से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और कीट व रोगों की रोकथाम होती है। इसे 'ऑन फॉर्म प्रिपरेशन और प्रैक्टिस' भी कहते हैं, और इसमें सिंथेटिक रसायनों का प्रयोग बिल्कुल नहीं होता। हालांकि, उन्होंने प्राकृतिक खेती की कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया, जैसे रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती में संक्रमण के शुरुआती वर्षों में उत्पादन में गिरावट आना, क्योंकि मिट्टी को अपनी प्राकृतिक उर्वरता वापस लाने में समय लगता है। साथ ही, तकनीकी ज्ञान और जागरूकता की कमी तथा जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसे प्राकृतिक तरीकों के सटीक उपयोग के लिए प्रशिक्षण व मार्गदर्शन का अभाव भी प्रमुख चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जनपद में 10,601 किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए चिन्हित कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। प्राकृतिक खेती में मुख्य रूप से गाय के गोबर आधारित इनपुट जैसे जीवामृत, बीजामृत, घन जीवामृत और दस परणी स्वयं तैयार किए जाते हैं। जीवामृत से मिट्टी में सूक्ष्म जीवों और केंचुओं की वृद्धि होती है, बीजामृत नई जड़ों को फंगस और मिट्टी जनित बीमारियों से बचाता है, घन जीवामृत मिट्टी में लंबे समय तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखता है, और दस परणी फसलों को कीट व रोगों से बचाता है। जिलाधिकारी ने प्राकृतिक खेती के कई लाभों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जीवांश और कार्बन में वृद्धि, रसायन मुक्त खेती, किसानों के आर्थिक स्तर में सुधार, आत्मनिर्भरता, कम लागत में अधिक आय और रसायनों की खरीद की आवश्यकता न होना शामिल है। यह 'जीरो बजट' की खेती है। जिले में प्राकृतिक खेती में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए, ग्राम मल्हनपुरा की महिला किसान सोमवती को जिले की प्राकृतिक खेती का 'रोल मॉडल' बनाया गया है।1
- कानपुर देहात में 'बोतल बाबा' के नाम से मशहूर हरिधाम सरकार आश्रम के संचालक हरिओम यादव को एक महिला की शिकायत पर छेड़छाड़ और दुष्कर्म के प्रयास के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि बाबा ने उसे काली शक्तियों का साया होने की बात कहकर आश्रम बुलाया और पूजा-पाठ के बहाने अश्लील हरकतें शुरू कर दीं, जिसमें दुष्कर्म का प्रयास भी शामिल था। महिला के शोर मचाने पर जब उसके परिजन वहां पहुंचे, तो वह किसी तरह आश्रम से बाहर निकल सकी। हरिओम यादव, जो कानपुर देहात के देवराहट थाना क्षेत्र स्थित हरिधाम सरकार आश्रम का संचालक है, 'बोतल बाबा' के नाम से अपनी पहचान रखता है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित इस आश्रम में हरिओम यादव बोतल के पानी में फूंक मारकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को ठीक करने का दावा करता है और उसके समागमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। औरैया के फफूंद थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली पीड़िता महिला के अनुसार, उसके ससुर और दो देवरों ने 6 जून को पूजा-पाठ करवाने के लिए बाबा को घर बुलाया था। महिला की शिकायत पर पुलिस ने पाँच नामजद व्यक्तियों और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। आरोपी बाबा को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया गया।1
- जालौन तहसील क्षेत्र के ग्राम लौना के ग्रामीणों और खिलाड़ियों ने उपजिलाधिकारी जालौन को एक प्रार्थना पत्र दिया है। इसमें उन्होंने राजस्व अभिलेखों में खलिहान के रूप में दर्ज गाटा संख्या 791 की पैमाइश करवाकर उसकी सीमाएं स्पष्ट करने और भूमि की साफ-सफाई कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि वर्तमान में खाली पड़ी है और इस पर अत्यधिक मात्रा में कांस-खास की घास व घनी झाड़ियां उग आई हैं। इसके चलते भूमि पूरी तरह अनुपयोगी हो गई है, जिसकी सफाई बिना मशीनों के संभव नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में खेल मैदान के लिए कोई अन्य पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है, जिससे गाटा संख्या 791 ही बच्चों और युवाओं के खेलकूद के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। ग्रामीणों ने मांग की है कि गाटा संख्या 791 की पैमाइश करवाकर उसकी सीमाएं निर्धारित की जाएं। इसके बाद मशीनों के माध्यम से भूमि की साफ-सफाई कराकर उसे खेल मैदान के रूप में विकसित करने योग्य बनाया जाए, ताकि गांव के बच्चे और युवा नियमित रूप से खेलकूद का अभ्यास कर सकें। उन्होंने जनहित और खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से इस मामले में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। इस दौरान उपेन्द्र सेंगर, अभिषेक सेंगर, दीपराज, विकास, प्रद्युम्न सेंगर सहित अन्य ग्रामवासी और खिलाड़ी उपस्थित रहे।1
- उत्तर प्रदेश में विकास, शिक्षा, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी-ललितपुर क्षेत्र को विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात दी है, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र के आधारभूत ढांचे और रोजगार के अवसरों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। वहीं, धार्मिक नगरी अयोध्या में वैक्स म्यूजियम का लोकार्पण किया गया है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा तथा प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने अहम पहल करते हुए पीएमश्री स्कूलों के विद्यार्थियों को निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को विद्यालय पहुंचने में सुविधा मिलेगी और शिक्षा तक उनकी पहुंच और अधिक सुलभ होगी। इसके अलावा, प्रदेश के गांवों में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इन उद्योगों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि विकास, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।1