मीरजापुर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में मिड डे मील बनाने वाली महिला रसोइयों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर करीब डेढ़ बजे, जिले के विभिन्न विकास खंडों से आईं सैकड़ों महिला रसोइयों ने सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए नारेबाजी की। उनकी मुख्य मांगों में प्रतिमाह 10 हजार रुपये मानदेय और इसका समय पर भुगतान सुनिश्चित करना शामिल था। प्रदर्शनकारी रसोइयों ने बताया कि उन्हें वर्तमान में मात्र दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में परिवार का भरण-पोषण करने के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मानदेय का भुगतान समय पर नहीं होता, जिससे कई महीनों तक भुगतान लंबित रहता है और उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। महिला रसोइयों ने अपनी जिम्मेदारी के दायरे से बाहर के कामों का भी जिक्र किया; उनके अनुसार, उनसे भोजन बनाने के बाद बर्तन धुलवाए जाते हैं, विद्यालय परिसर में झाड़ू लगवाई जाती है, और कई स्थानों पर शौचालय की सफाई भी कराई जाती है। इन अतिरिक्त कार्यों से इनकार करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी भी दी जाती है। महिला रसोइयों ने कहा कि वे प्रतिदिन लगभग आठ घंटे काम करती हैं, लेकिन इसके बदले मिलने वाला दो हजार रुपये का मानदेय उनके श्रम के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सरकार से श्रमिकों के समान सम्मानजनक पारिश्रमिक और बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान, महिलाओं ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा और शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक करेंगी।
मीरजापुर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में मिड डे मील बनाने वाली महिला रसोइयों ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर करीब डेढ़ बजे, जिले के विभिन्न विकास खंडों से आईं सैकड़ों महिला रसोइयों ने सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए नारेबाजी की। उनकी मुख्य मांगों में प्रतिमाह 10 हजार रुपये मानदेय और इसका समय पर भुगतान सुनिश्चित करना शामिल था। प्रदर्शनकारी रसोइयों ने बताया कि उन्हें वर्तमान में मात्र दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो बढ़ती महंगाई के
दौर में परिवार का भरण-पोषण करने के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मानदेय का भुगतान समय पर नहीं होता, जिससे कई महीनों तक भुगतान लंबित रहता है और उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। महिला रसोइयों ने अपनी जिम्मेदारी के दायरे से बाहर के कामों का भी जिक्र किया; उनके अनुसार, उनसे भोजन बनाने के बाद बर्तन धुलवाए जाते हैं, विद्यालय परिसर में झाड़ू लगवाई जाती है, और कई स्थानों पर शौचालय की सफाई भी कराई जाती है। इन अतिरिक्त कार्यों से इनकार करने पर उन्हें नौकरी से
निकालने की धमकी भी दी जाती है। महिला रसोइयों ने कहा कि वे प्रतिदिन लगभग आठ घंटे काम करती हैं, लेकिन इसके बदले मिलने वाला दो हजार रुपये का मानदेय उनके श्रम के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सरकार से श्रमिकों के समान सम्मानजनक पारिश्रमिक और बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान, महिलाओं ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा और शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक करेंगी।
- Amit UpadhyayMirzapur, Uttar Pradesh😢1 hr ago
- मुंबई के वडाला हाईवे पर भारी बारिश के चलते एक पुराना पेड़ गिर गया। गनीमत रही कि इस घटना से एक बड़ा हादसा टल गया, जिससे किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।1
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- उपभोक्ता कोटेदारों की मनमानी से बुरी तरह परेशान हैं। पूरी मात्रा में अपना राशन प्राप्त करने की उम्मीद में, वे अपनी उचित दर की दुकानें बदलने का निर्णय ले रहे हैं।1
- विकास के नाम पर भविष्य की नीलामी किए जाने को लेकर गहरा सवाल उठाया गया है। इस संदर्भ में चिंता जताई गई है कि क्या आने वाले समय में लोगों को अपनी साँसें भी बोतलों में खरीदनी पड़ेंगी।1
- मिर्ज़ापुर में मिड डे मील योजना की रसोइयाँ अपने मानदेय में वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आईं। इस प्रदर्शन के दौरान उन्होंने प्रशासन को एक कड़ी चेतावनी भी दी है।1
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- भदोही जिले में बेटी स्नेहा ने अपने सौतेले पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर ये आरोप क्या हैं।1
- जनपद मीरजापुर के प्रतिष्ठित बाबू लाल जायसवाल इंटर कॉलेज (बीएलजे इंटर कॉलेज) का प्रशासनिक कार्यालय पूरी तरह से जर्जर अवस्था में पहुँच गया है। भवन की छत और दीवारें इतनी क्षतिग्रस्त हो गई हैं कि कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है, जिससे प्रतिदिन कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों और अभिलेख जमा करने आने वाले छात्र-छात्राओं की जान जोखिम में है। इस गंभीर स्थिति के लिए कॉलेज के प्रधान लिपिक ने कार्यवाहक प्रधानाचार्या पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कार्यालय की जर्जर हालत के बारे में कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रधान लिपिक के अनुसार, कार्यवाहक प्रधानाचार्या स्वयं अपने कक्ष में उपस्थित नहीं रहती हैं, जिसके कारण उन्हें कार्यालय की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं हो पा रही है। प्रधान लिपिक ने एक लिखित पत्र के माध्यम से चेतावनी भी दी है कि यदि जर्जर भवन गिरने से कोई जनहानि होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी कार्यवाहक प्रधानाचार्या की होगी। नगर के गणमान्य नागरिकों ने जिला प्रशासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग से तत्काल इस जर्जर भवन का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने आगाह किया है कि समय रहते उचित कदम न उठाए जाने पर कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है।1