मंदिर में चंदे पर ‘परमिशन’ का सवाल, जामा मस्जिद में बच्ची के लिए उमड़ा सहयोग—आखिर मदद के लिए भी धर्म और दरवाजे क्यों? मंदिर में चंदे पर ‘परमिशन’ का सवाल, जामा मस्जिद में बच्ची के लिए उमड़ा सहयोग—आखिर मदद के लिए भी धर्म और दरवाजे क्यों? नई दिल्ली। एक मासूम बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक मदद जुटाने से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि बच्ची की मदद के लिए मंदिर के सामने चंदा जुटाने पहुंचे व्यक्ति को मंदिर के पुजारी ने रोक दिया और कथित तौर पर कहा कि “डीएम से परमिशन लेकर आओ।” इसके बाद उस व्यक्ति को वहां से जाने के लिए कहा गया। दूसरी ओर, इसी बच्ची के इलाज के लिए दिल्ली की जामा मस्जिद के बाहर लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील किए जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बच्ची Spinal Muscular Atrophy (SMA) Type-1 से पीड़ित बताई जा रही है और उसके परिवार की ओर से इलाज पर कई करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई है। अभियान से लगभग ₹6.33 करोड़ जुटने की रिपोर्ट सामने आई है, हालांकि इस रकम का पूरा हिस्सा सिर्फ जामा मस्जिद परिसर से जुटा, ऐसा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है। यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब सामने एक बच्चे की जिंदगी बचाने की जरूरत हो, तो मदद करने वाले हाथों के सामने सबसे पहले परमिशन की दीवार क्यों खड़ी होती है? मंदिर प्रशासन से सवाल अगर वीडियो में दिखाई गई घटना और बातचीत सही है, तो मंदिर प्रशासन से पूछा जाना चाहिए कि क्या किसी बीमार बच्चे के इलाज के लिए सार्वजनिक रूप से सहयोग मांगने के लिए वास्तव में पूर्व अनुमति जरूरी थी? अगर अनुमति जरूरी थी तो उसका स्पष्ट नियम क्या है और क्या यही नियम हर धार्मिक स्थल पर समान रूप से लागू होता है? प्रशासन से सवाल डीएम से अनुमति लेने की बात कही गई है तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि चैरिटी और मेडिकल फंडरेजिंग के लिए लागू नियम क्या हैं? क्या जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए कोई सरल और पारदर्शी व्यवस्था मौजूद है, ताकि मदद मांगने वाले व्यक्ति को एक धार्मिक स्थल से दूसरे स्थान तक भटकना न पड़े? सरकार से बड़ा सवाल यह मामला सिर्फ मंदिर या मस्जिद का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे के परिवार को करोड़ों रुपये के इलाज के लिए जनता के सामने हाथ फैलाने पड़ते हैं। अगर इलाज की कीमत करोड़ों में है, तो सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था, दुर्लभ बीमारियों के लिए सरकारी सहायता और महंगे उपचार तक गरीब परिवारों की पहुंच पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। और इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है—बच्चे की पहचान उसका धर्म नहीं, उसकी बीमारी होनी चाहिए। जामा मस्जिद में सामने आई मदद की मुहिम ने यह दिखाया कि धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर लोग किसी जरूरतमंद की मदद के लिए आगे आ सकते हैं। लेकिन साथ ही यह घटना सरकार और प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल भी रखती है—क्या किसी बच्चे की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ आम लोगों की चंदा मुहिम पर छोड़ दी जाएगी, या ऐसी परिस्थितियों में राज्य की कोई प्रभावी व्यवस्था भी सामने आएगी? आखिर सवाल मंदिर बनाम मस्जिद का नहीं है। सवाल यह है कि जब जिंदगी बचाने की बात हो, तो इंसानियत के रास्ते में इतनी औपचारिकताएं क्यों?
मंदिर में चंदे पर ‘परमिशन’ का सवाल, जामा मस्जिद में बच्ची के लिए उमड़ा सहयोग—आखिर मदद के लिए भी धर्म और दरवाजे क्यों? मंदिर में चंदे पर ‘परमिशन’ का सवाल, जामा मस्जिद में बच्ची के लिए उमड़ा सहयोग—आखिर मदद के लिए भी धर्म और दरवाजे क्यों? नई दिल्ली। एक मासूम बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक मदद जुटाने से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि बच्ची की मदद के लिए मंदिर के सामने चंदा जुटाने पहुंचे व्यक्ति को मंदिर के पुजारी ने रोक दिया और कथित तौर पर कहा कि “डीएम से परमिशन लेकर आओ।” इसके बाद उस व्यक्ति को वहां से जाने के लिए कहा गया। दूसरी ओर, इसी बच्ची के इलाज के लिए दिल्ली की जामा मस्जिद के बाहर लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील किए जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बच्ची Spinal Muscular Atrophy (SMA) Type-1 से पीड़ित बताई जा रही है और उसके परिवार की ओर से इलाज पर कई करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई है। अभियान से लगभग ₹6.33 करोड़ जुटने की रिपोर्ट सामने आई है, हालांकि इस रकम का पूरा हिस्सा सिर्फ जामा मस्जिद परिसर से जुटा, ऐसा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है। यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब सामने एक बच्चे की जिंदगी बचाने की जरूरत हो, तो मदद करने वाले हाथों के सामने सबसे पहले परमिशन की दीवार क्यों खड़ी होती है? मंदिर प्रशासन से सवाल अगर वीडियो में दिखाई गई घटना और बातचीत सही है, तो मंदिर प्रशासन से पूछा जाना चाहिए कि क्या किसी बीमार बच्चे के इलाज के लिए सार्वजनिक रूप से सहयोग मांगने के लिए वास्तव में पूर्व अनुमति जरूरी थी? अगर अनुमति जरूरी थी तो उसका स्पष्ट नियम क्या है और क्या यही नियम हर धार्मिक स्थल पर समान रूप से लागू होता है? प्रशासन से सवाल डीएम से अनुमति लेने की बात कही गई है तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि चैरिटी और मेडिकल फंडरेजिंग के लिए लागू नियम क्या हैं? क्या जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए कोई सरल और पारदर्शी व्यवस्था मौजूद है, ताकि मदद मांगने वाले व्यक्ति को एक धार्मिक स्थल से दूसरे स्थान तक भटकना न पड़े? सरकार से बड़ा सवाल यह मामला सिर्फ मंदिर या मस्जिद का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे के परिवार को करोड़ों रुपये के इलाज के लिए जनता के सामने हाथ फैलाने पड़ते हैं। अगर इलाज की कीमत करोड़ों में है, तो सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था, दुर्लभ बीमारियों के लिए सरकारी सहायता और महंगे उपचार तक गरीब परिवारों की पहुंच पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। और इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है—बच्चे की पहचान उसका धर्म नहीं, उसकी बीमारी होनी चाहिए। जामा मस्जिद में सामने आई मदद की मुहिम ने यह दिखाया कि धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर लोग किसी जरूरतमंद की मदद के लिए आगे आ सकते हैं। लेकिन साथ ही यह घटना सरकार और प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल भी रखती है—क्या किसी बच्चे की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ आम लोगों की चंदा मुहिम पर छोड़ दी जाएगी, या ऐसी परिस्थितियों में राज्य की कोई प्रभावी व्यवस्था भी सामने आएगी? आखिर सवाल मंदिर बनाम मस्जिद का नहीं है। सवाल यह है कि जब जिंदगी बचाने की बात हो, तो इंसानियत के रास्ते में इतनी औपचारिकताएं क्यों?
- ‼️उन्नाव में एनकाउंटर का एक्शन! हत्या के प्रयास का आरोपी शहबान पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार, पैर में लगी गोली तमंचा और कारतूस बरामद‼️ उन्नाव में पुलिस मुठभेड़! हत्या के प्रयास के आरोपी शहबान को एसओजी, सर्विलांस और कोतवाली सदर पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी। कब्जे से 315 बोर का तमंचा, खोखा और जिंदा कारतूस बरामद हुए। स्वागत जिंदगी से श्याम जी गुप्ता की विशेष रिपोर्ट।1
- *उन्नाव: हत्या के प्रयास का आरोपी पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार, पैर में लगी गोली* उन्नाव। कोतवाली सदर क्षेत्र के सिकंदरपुर सरोसी में 25 सितंबर की रात नरेश जायसवाल पर चाकू से हमला कर घायल करने के मामले में पुलिस ने आरोपी शहबान पुत्र रहमान को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 26 सितंबर की रात नादाखेड़ा गांव में एसओजी, सर्विलांस और कोतवाली सदर पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी की घेराबंदी की। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में आरोपी के दाहिने पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 315 बोर का अवैध तमंचा, एक खोखा कारतूस और एक जिंदा कारतूस बरामद करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में कोतवाली सदर में मु0अ0सं0 608/26, धारा 109/333 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज है। चाकू से हमले में घायल नरेश जायसवाल को जिला अस्पताल से बेहतर उपचार के लिए कानपुर के हैलेट अस्पताल रेफर किया गया था, जहां उसकी स्थिति सामान्य बताई गई है। पुलिस ने आरोपी का पूर्व आपराधिक इतिहास भी बताया है। इसके तहत गंगाघाट थाने में वर्ष 2021 में चोरी से संबंधित मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई है। पुलिस के अनुसार मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।1
- बाढ़ में खान सर की राहत से लेकर दिल्ली के वायरल वीडियो तक—इंसानियत पर बड़ा सवाल, मदद के नाम पर धर्म की दीवार क्यों? बाढ़ में खान सर की राहत से लेकर दिल्ली के वायरल वीडियो तक—इंसानियत पर बड़ा सवाल, मदद के नाम पर धर्म की दीवार क्यों? पटना/दिल्ली: बिहार की बाढ़ ने लाखों लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। ऐसे वक्त में शिक्षक और सोशल मीडिया पर चर्चित खान सर राहत सामग्री लेकर खुद प्रभावित इलाकों तक पहुंचते दिखाई दिए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने करीब 100 गाड़ियों के काफिले के साथ राशन, पानी और जरूरी सामान बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाने का अभियान चलाया। इसी बीच दिल्ली से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक बच्ची के इलाज के लिए मंदिर के सामने चंदा जुटाने पहुंचे व्यक्ति को वहां से हटा दिया गया। इसके बाद वायरल दावे के मुताबिक, पास की मस्जिद के सामने लोगों ने बच्ची की मदद के लिए बड़ी रकम जुटाई। हालांकि, वीडियो में दिखाई जा रही घटना और लगभग 6 करोड़ रुपये जुटने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। लेकिन इन घटनाओं ने एक बड़ा सामाजिक सवाल जरूर खड़ा किया है—जब किसी बच्चे की जिंदगी का सवाल हो, तब मदद करने वाले की पहचान धर्म से क्यों तय होनी चाहिए? मंदिर हो या मस्जिद, गुरुद्वारा हो या चर्च—जरूरतमंद इंसान के लिए दरवाजा खुलना ही समाज की असली ताकत होनी चाहिए। अगर किसी धार्मिक स्थल पर किसी जरूरतमंद के लिए मदद मांगने से रोका गया है, तो सवाल केवल उस व्यक्ति का नहीं, बल्कि व्यवस्था और समाज की संवेदनशीलता का भी है। वहीं दूसरी तरफ, बाढ़ जैसी आपदा में किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा राहत पहुंचाना यह याद दिलाता है कि संकट की घड़ी में इंसानियत किसी धर्म की मोहताज नहीं होती। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन को भी स्पष्ट करना चाहिए कि वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना की वास्तविकता क्या है, बच्ची की मदद के लिए वास्तव में कितनी राशि जुटाई गई और चंदा इकट्ठा करने को लेकर क्या नियम लागू होते हैं। सवाल यह नहीं होना चाहिए कि मदद करने वाला हिंदू है या मुस्लिम। सवाल यह होना चाहिए कि मुसीबत में फंसे इंसान के साथ कौन खड़ा हुआ। क्योंकि देश धर्म की दीवारों से नहीं, इंसानियत, संवेदना और एक-दूसरे के साथ खड़े होने की भावना से मजबूत होता है।2
- बैंकों में कामकाज पर सवाल, ‘लंच टाइम’ और ‘सर्वर डाउन’ पर कटाक्ष! बैंकिंग सेवाओं को लेकर परेशानियां चर्चा में हैं। आरोप है कि सोमवार से शनिवार तक बैंक खुले होने के बावजूद कई जगह लंच टाइम, सर्वर डाउन या कारण बताकर ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है। रविवार को बैंकिंग कार्य को लेकर सवाल उठ रहा है कि सामान्य दिनों में बहाने हैं, तो रविवार को कामकाज कैसे होगा? मीम में ‘देख रहा है विनोद’ और ‘ये सारे मिलकर हमको पागल बना रहे हैं’ जैसे संवादों के जरिए नाराजगी को हास्य में दिखाया गया है। स्रोत: सोशल मीडिया पत्रकार: रोहित कुमार उन्नावी / INF न्यूज़ रिमूवल अपील: फोटो/वीडियो हटवाना चाहते हैं, तो DM करें। #banking #ruralbanking #banknews #india #viralnews1
- कानपुर नगर में कई वर्षों का रिकॉर्ड टूटा 30 घंटे से ज्यादा लगातार बारिश होने से कई गांव कई शहर डूबने की कगार में है 3 घंटे में बारिश होने का अलर्ट जारी शेरू ऐप अनूप मिश्रा कानपुर नगर में कई वर्षों का रिकॉर्ड टूटा 30 घंटे से ज्यादा लगातार बारिश होने से कई गांव कई शहर डूबने की कगार में है 3 घंटे में बारिश होने का अलर्ट जारी शेरू ऐप अनूप मिश्रा1
- Post by सुनील कुमार गौड1
- भारी बारिश के बीच दिल्ली में भाजपा सरकार के खिलाफ EVM हटाओ, और मुख्य चुनाव आयुक्त हटाओ का नारा बुलंद करते, युवा Gen-Z,1
- ‼️गणपति बप्पा की विदाई में उमड़ा आस्था का सैलाब! ढोल-नगाड़ों और जयकारों से गूंजा देश‼️ गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से गूंज उठा देश! ढोल-नगाड़ों की थाप, गुलाल और पुष्पवर्षा के बीच भक्तों ने दी बप्पा को भावुक विदाई। हर तरफ गूंजा—अगले बरस तू जल्दी आ नम आंखों से भक्तों ने सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। स्वागत जिंदगी से श्याम जी गुप्ता की विशेष रिपोर्ट।1