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बकरीद (ईद-उल-अधा) के अवसर पर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बंगाल सहित कई राज्यों में प्रशासन ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज़ पढ़ने तथा खुले में कुर्बानी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।

2 hrs ago
user_Rekha Panchal
Rekha Panchal
Delhi Cantonment, New Delhi•
2 hrs ago

बकरीद (ईद-उल-अधा) के अवसर पर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बंगाल सहित कई राज्यों में प्रशासन ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज़ पढ़ने तथा खुले में कुर्बानी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।

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  • आज सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी के दाम ₹4750 तक धड़ाम से गिरे, जबकि सोने की कीमत भी ₹1135 कम हुई है। इस अचानक और भारी गिरावट ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह किसी बड़े 'भूचाल' का संकेत है।
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    आज सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी के दाम ₹4750 तक धड़ाम से गिरे, जबकि सोने की कीमत भी ₹1135 कम हुई है। इस अचानक और भारी गिरावट ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह किसी बड़े 'भूचाल' का संकेत है।
    user_Stock market updates
    Stock market updates
    दिल्ली छावनी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
  • भारतीय फिल्म और टेलीविजन उद्योग में कर्मचारियों, कलाकारों और तकनीशियनों के संगठन फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज़ (एफ़डब्ल्यूआईसीई) ने अभिनेता रणवीर सिंह पर बैन लगा दिया है। संगठन ने सोमवार को घोषणा की कि उसके चार लाख से अधिक सदस्य अब रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करेंगे। यह फैसला फिल्म "डॉन 3" से रणवीर सिंह के आखिरी समय में बाहर होने के बाद लिया गया है। फेडरेशन के अनुसार, यह फिल्म पिछले तीन साल से बन रही थी। फिल्म निर्माता-निर्देशक फ़रहान अख़्तर और उनके पार्टनर रितेश सिद्धवानी ने रणवीर सिंह के खिलाफ इंडियन फिल्म एंड टेलीविज़न डायरेक्टर्स एसोसिएशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद इस मामले को फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज़ को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया। निर्माताओं का दावा है कि "डॉन 3" के प्री-प्रोडक्शन चरण में अब तक 45 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। यह लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म होने वाली थी, जिसमें रणवीर सिंह को नए चेहरे के तौर पर लिया गया था, हालांकि फिल्म की शूटिंग अभी शुरू नहीं हुई थी। इस पूरे विवाद पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए, रणवीर सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देना या किसी तरह की अटकलों को बढ़ावा देना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका ध्यान अपने काम और अपनी आगे की प्रतिबद्धताओं पर केंद्रित है।
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    भारतीय फिल्म और टेलीविजन उद्योग में कर्मचारियों, कलाकारों और तकनीशियनों के संगठन फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज़ (एफ़डब्ल्यूआईसीई) ने अभिनेता रणवीर सिंह पर बैन लगा दिया है। संगठन ने सोमवार को घोषणा की कि उसके चार लाख से अधिक सदस्य अब रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करेंगे। यह फैसला फिल्म "डॉन 3" से रणवीर सिंह के आखिरी समय में बाहर होने के बाद लिया गया है।

फेडरेशन के अनुसार, यह फिल्म पिछले तीन साल से बन रही थी। फिल्म निर्माता-निर्देशक फ़रहान अख़्तर और उनके पार्टनर रितेश सिद्धवानी ने रणवीर सिंह के खिलाफ इंडियन फिल्म एंड टेलीविज़न डायरेक्टर्स एसोसिएशन में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद इस मामले को फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज़ को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया। निर्माताओं का दावा है कि "डॉन 3" के प्री-प्रोडक्शन चरण में अब तक 45 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। यह लोकप्रिय फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म होने वाली थी, जिसमें रणवीर सिंह को नए चेहरे के तौर पर लिया गया था, हालांकि फिल्म की शूटिंग अभी शुरू नहीं हुई थी।

इस पूरे विवाद पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए, रणवीर सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देना या किसी तरह की अटकलों को बढ़ावा देना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका ध्यान अपने काम और अपनी आगे की प्रतिबद्धताओं पर केंद्रित है।
    user_Bollywood News
    Bollywood News
    Vasant Vihar, New Delhi•
    1 hr ago
  • बकरीद (ईद-उल-अधा) के अवसर पर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बंगाल सहित कई राज्यों में प्रशासन ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज़ पढ़ने तथा खुले में कुर्बानी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।
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    बकरीद (ईद-उल-अधा) के अवसर पर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बंगाल सहित कई राज्यों में प्रशासन ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज़ पढ़ने तथा खुले में कुर्बानी देने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    2 hrs ago
  • कुछ पुलिसकर्मियों के गलत व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें यह पूछा गया है कि ऐसे कर्मियों को सरकार निलंबित क्यों नहीं करती। आरोप है कि सरकार ऐसे लोगों को लोगों की मदद करने के बजाय उनके साथ गलत व्यवहार करने के लिए वेतन देती है। इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि ऐसे पुलिसकर्मियों के कारण ही अच्छे पुलिस अधिकारियों की प्रतिष्ठा खराब होती है।
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    कुछ पुलिसकर्मियों के गलत व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें यह पूछा गया है कि ऐसे कर्मियों को सरकार निलंबित क्यों नहीं करती। आरोप है कि सरकार ऐसे लोगों को लोगों की मदद करने के बजाय उनके साथ गलत व्यवहार करने के लिए वेतन देती है। इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा गया है कि ऐसे पुलिसकर्मियों के कारण ही अच्छे पुलिस अधिकारियों की प्रतिष्ठा खराब होती है।
    user_Pooja mahwer
    Pooja mahwer
    Video Creator Delhi Cantonment, New Delhi•
    3 hrs ago
  • मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पूर्व अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है, जिसके संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की इस टिप्पणी पर संज्ञान लिया है कि 'तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर' है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि इस मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, साथ ही अदालत ने मध्यप्रदेश सरकार के उस फैसले की सराहना की जिसमें जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। कोर्ट ने सभी पक्षों के हित में अब किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने पर बल दिया। यह मामला तब प्रकाश में आया जब 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष का कहना था कि ट्विशा नशे की लत से परेशान थीं। मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र किया जिनसे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठे थे, खास तौर पर उसमें 'संस्थागत पक्षपात' और 'जांच में विसंगतियों' की बात कही गई थी। अदालत ने आरोपियों के परिवार की पृष्ठभूमि को देखते हुए यह आशंका जताई कि जांच प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं और उनकी सास गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज रह चुकी हैं। अदालत ने कहा कि इसी वजह से यह नैरेटिव बना कि न्यायपालिका निष्पक्ष जांच नहीं होने दे रही है, जिसके चलते इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की गई। मुख्य न्यायाधीश ने राज्य की जांच एजेंसियों के कामकाज पर कोई संदेह न व्यक्त करते हुए भी कहा कि जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उसमें स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना आवश्यक हो जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जांच बिना किसी दबाव के निष्पक्षता से हो। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि परिवारों को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए और जांच एजेंसियों को अपना काम करने का मौका दिया जाना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों को भी निर्देश दिया कि वे मीडिया में बयान देने के बजाय अपनी बात जांच एजेंसी के सामने ही रखें।
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    मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पूर्व अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है, जिसके संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की इस टिप्पणी पर संज्ञान लिया है कि 'तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर' है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि इस मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, साथ ही अदालत ने मध्यप्रदेश सरकार के उस फैसले की सराहना की जिसमें जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है। कोर्ट ने सभी पक्षों के हित में अब किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने पर बल दिया।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। ट्विशा के परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष का कहना था कि ट्विशा नशे की लत से परेशान थीं। मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र किया जिनसे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठे थे, खास तौर पर उसमें 'संस्थागत पक्षपात' और 'जांच में विसंगतियों' की बात कही गई थी। अदालत ने आरोपियों के परिवार की पृष्ठभूमि को देखते हुए यह आशंका जताई कि जांच प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं और उनकी सास गिरिबाला सिंह पूर्व जिला जज रह चुकी हैं। अदालत ने कहा कि इसी वजह से यह नैरेटिव बना कि न्यायपालिका निष्पक्ष जांच नहीं होने दे रही है, जिसके चलते इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की गई। मुख्य न्यायाधीश ने राज्य की जांच एजेंसियों के कामकाज पर कोई संदेह न व्यक्त करते हुए भी कहा कि जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उसमें स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना आवश्यक हो जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जांच बिना किसी दबाव के निष्पक्षता से हो।

सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि परिवारों को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए और जांच एजेंसियों को अपना काम करने का मौका दिया जाना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों को भी निर्देश दिया कि वे मीडिया में बयान देने के बजाय अपनी बात जांच एजेंसी के सामने ही रखें।
    user_Sunita Jain
    Sunita Jain
    Karol Bagh, Central Delhi•
    6 hrs ago
  • annu nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon
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    annu nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon Jay Bhim nimon
    user_Annu Jay bhim
    Annu Jay bhim
    दिल्ली छावनी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    6 hrs ago
  • गोदी मीडिया ने एक नया 'ज्ञान' प्रस्तुत किया है, जिसमें दावा किया गया है कि ₹7 के इजाफे से कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ता। यह बात इस तरह से पेश की जा रही है जैसे इसे सतही तौर पर देखने पर यह वृद्धि बहुत मामूली लगती हो।
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    गोदी मीडिया ने एक नया 'ज्ञान' प्रस्तुत किया है, जिसमें दावा किया गया है कि ₹7 के इजाफे से कोई बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ता। यह बात इस तरह से पेश की जा रही है जैसे इसे सतही तौर पर देखने पर यह वृद्धि बहुत मामूली लगती हो।
    user_Bhupendra mishra
    Bhupendra mishra
    Lawyer चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    7 hrs ago
  • सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने समाज में व्याप्त कथित बुराइयों और इंसानियत के खत्म होने पर गहरा रोष व्यक्त किया है। पोस्ट में कड़े सवाल उठाए गए हैं कि आखिर कोई व्यक्ति इतनी हद तक कैसे गिर सकता है कि कुछ भी करने को तैयार हो जाए, और क्यों लोग ऐसे कृत्यों पर चुप रहते हैं। यह भी पूछा गया है कि यह सिलसिला कब तक जारी रहेगा और क्या वास्तव में अब किसी में भी इंसानियत का नामोनिशान बचा है या नहीं।
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    सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति ने समाज में व्याप्त कथित बुराइयों और इंसानियत के खत्म होने पर गहरा रोष व्यक्त किया है। पोस्ट में कड़े सवाल उठाए गए हैं कि आखिर कोई व्यक्ति इतनी हद तक कैसे गिर सकता है कि कुछ भी करने को तैयार हो जाए, और क्यों लोग ऐसे कृत्यों पर चुप रहते हैं। यह भी पूछा गया है कि यह सिलसिला कब तक जारी रहेगा और क्या वास्तव में अब किसी में भी इंसानियत का नामोनिशान बचा है या नहीं।
    user_Pooja mahwer
    Pooja mahwer
    Video Creator Delhi Cantonment, New Delhi•
    3 hrs ago
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