भारत के तीन प्रमुख संत जिन्होंने वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। भारत के तीन प्रमुख संत जिन्होंने वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। नमबर एक, संत दादा गुरू, इन्होंने तीन साल से अन्न का एक दाना तक नहीं खाया है और एक साल से पानी का भी त्याग कर रखा है। नमबर दो, सत्य नारायन बाबा, इन महाराज जी ने करीब 24 सालों से भोजन का त्याग कर रखा है। कहा जाता है, इन्होंने अपनी जीब काट कर महादेव को चढ़ा दी थी। नमबर तीन, पूज्य दिनेश फलाहारी जी महाराज, पिछले कई वर्षों से अन्न त्याग और चपल त्याग के संकल्प पर अडिग, भीशन गर्मी हो या कडाके की सर्दी, न भोजन ग्रहन, न पादुका धारन, ये तप केवल त्याग नहीं, एक संकल्प है, जब तक श्री कृष्ण जन्मभूमि से ईदगाह मस्जिद नहीं हठती , तब तक ये तप निरंतर जारी रहेगा. एहि वह संत है जो श्री कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में मुक्ख याचिका करता है. त्याग ही तप है और तप ही धर्म है. यह संदेश हमें ऐसे महान संतों से सीखने को मिलता है।
भारत के तीन प्रमुख संत जिन्होंने वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। भारत के तीन प्रमुख संत जिन्होंने वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। नमबर एक, संत दादा गुरू, इन्होंने तीन साल से अन्न का एक दाना तक नहीं खाया है और एक साल से पानी का भी त्याग कर रखा है। नमबर दो, सत्य नारायन बाबा, इन महाराज जी ने करीब 24 सालों से भोजन का त्याग कर रखा है। कहा जाता है, इन्होंने अपनी जीब काट कर महादेव को चढ़ा दी थी। नमबर तीन, पूज्य दिनेश फलाहारी जी महाराज, पिछले कई वर्षों से अन्न त्याग और चपल त्याग के संकल्प पर अडिग, भीशन गर्मी हो या कडाके की सर्दी, न भोजन ग्रहन, न पादुका धारन, ये तप केवल त्याग नहीं, एक संकल्प है, जब तक श्री कृष्ण जन्मभूमि से ईदगाह मस्जिद नहीं हठती , तब तक ये तप निरंतर जारी रहेगा. एहि वह संत है जो श्री कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में मुक्ख याचिका करता है. त्याग ही तप है और तप ही धर्म है. यह संदेश हमें ऐसे महान संतों से सीखने को मिलता है।
- Post by Kishanveer Rajput1
- भारतवर्ष की प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं को निर्विघ्न संपन्न करवाने में श्री लाडली सेवा समिति की प्रमुख भूमिका1
- Post by KamalJeet Yadav1
- Post by S k तेज रफ्तार न्यूज़ भारत1
- पलवल फरीदाबाद की मेयर श्रीमती प्रवीण बत्रा ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत भाजपा सरकार लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण बिल को पेश किया, लेकिन विपक्ष में इसके खिलाफ वोट कर महिलाओं के हक का अपमान किया। उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जा सकता था लेकिन विपक्ष की साजिश के चलते वह दिन इतिहास का एक काला दिवस बन गया है। उन्होंने कहा कि संसद में जो हुआ वह सिर्फ एक विधेयक की हार नहीं थी बल्कि भारत की 70 करोड़ महिलाओं के सपनों पर सीधा प्रहार था। यह वह क्षण था जब देश ने साफ देखा कि कौन महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ खड़ा है और कौन उनके रास्ते में बाधा बनकर खड़ा है। उन्होंने कहा कि संसद में जब नारी शक्ति के सम्मान में विधेयक गिरा ,कांग्रेस सहित तमाम इंडी दलों के सदस्यों ने जिस तरह जश्न मनाया वह अशोभनीय था यह देश की नारी शक्ति का अपमान है। प्रियंका वाड्रा ने बिल का गिरना संविधान की जीत है बताया था क्या नारी शक्ति का अपमान ही कांग्रेस,सपा,डीएमके और तृणमूल के लिए जीत है। कांग्रेस और उसके सहयोगियों का इतिहास महिलाओं के साथ छल और देरी का रहा है, 60 वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद उन्होंने महिलाओं को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया,लेकिन उन्हें वास्तविक राजनीतिक अधिकार देने की कभी गंभीर कोशिश नहीं की।1
- Raghav Chadha exit… ये सिर्फ political move नहीं, legal calculation भी थी, आखिर आम आदमी पार्टी में ऐसा क्या हुआ ?1
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- Post by Pro hindustan tv1
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