सिंगरौली के जिला मुख्यालय बैढ़न स्थित विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट में चल रहे एक संवेदनशील आपराधिक मामले में युवा अधिवक्ता अनंतराम वैश्य की धारदार पैरवी ने सबको चौंका दिया। विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 32/2024 में, अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और एफएसएल-डीएनए जैसी वैज्ञानिक रिपोर्टों के बावजूद आरोपी सूरज पाल को सभी संगीन आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया गया। यह फैसला 30 मई 2026 को आया, जिसमें कोर्ट ने अनंतराम वैश्य की कानूनी समझ और जिरह को न्यायसंगत माना। यह पूरा मामला महिला थाना सिंगरौली में दर्ज अपराध क्रमांक 03/2024 से संबंधित था, जिसमें आरोपी सूरज पाल पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376(2)(N) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5L/6 के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने एक नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर लंबे समय तक दुष्कर्म किया। अपने आरोप को सिद्ध करने के लिए, अभियोजन ने स्कूल रिकॉर्ड, एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी पेश किए थे। इस मुश्किल केस में, युवा अधिवक्ता श्री अनंतराम वैश्य ने आरोपी की पैरवी संभाली और एक अनूठी रणनीति अपनाई। उन्होंने कोई रक्षा साक्षी पेश नहीं किया, बल्कि केवल अभियोजन के गवाहों और दस्तावेजों में मौजूद विरोधाभासों को अपना हथियार बनाया। वैश्य ने तीन प्रमुख कानूनी मोर्चों पर इस जंग को जीता: पहला, उम्र निर्धारण पर सवाल उठाते हुए। अभियोजन ने पीड़िता को नाबालिग साबित करने के लिए स्कूल रजिस्टर और जन्म प्रमाण पत्र पेश किए थे, लेकिन क्रॉस-एग्जामिनेशन में पीड़िता के पिता ने नेहरू अस्पताल का एक दूसरा दस्तावेज दिया, जिसमें जन्मतिथि अलग थी। कोर्ट ने माना कि घटना के समय पीड़िता "उम्र के संदेहास्पद मोड़" पर थी, जिससे पॉक्सो एक्ट की धाराएं बेअसर हो गईं। दूसरा, प्रेम-संबंध और सहमति साबित करके। जिरह के दौरान पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि उसका आरोपी से लंबे समय से प्रेम-संबंध था और वे दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन परिवार राजी नहीं था। इस पर कोर्ट को यह समझाया गया कि यह "शादी के झूठे वादे" का मामला नहीं था, बल्कि पारिवारिक असहमति का विषय था और संबंध आपसी सहमति से बने थे। तीसरा, वैज्ञानिक साक्ष्य को कमजोर साबित करके। एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों और स्लाइड्स पर कोई मानव शुक्राणु या वीर्य के निशान नहीं मिले। डीएनए रिपोर्ट की अनिश्चितता को भी बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने मजबूती से रखा, जिससे अभियोजन का वैज्ञानिक तर्क बिखर गया। विशेष न्यायाधीश श्रीमती कंचन गुप्ता की अदालत ने इन सभी तर्कों पर विचार करते हुए माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ "संदेह से परे" अपराध साबित करने में विफल रहा है। नतीजतन, कोर्ट ने आरोपी सूरज पाल को तत्काल जेल से रिहा करने और उसके सभी जमानत मुचलकों से मुक्त करने का आदेश दिया। इस जीत के बाद, सिंगरौली बार में अधिवक्ता अनंतराम वैश्य की खूब सराहना हो रही है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उनकी प्रोफेशनल कुशलता की तारीफ करते हुए कहा कि कम उम्र में बिना हड़बड़ाहट के गवाहों के बयानों से सच निकालना और स्थापित वैज्ञानिक रिपोर्ट का कानूनी काट ढूंढना उनकी क्षमता को दर्शाता है। इस फैसले को सिंगरौली जिला न्यायालय के इतिहास में युवा वकीलों की बेहतरीन पैरवी में से एक माना जा रहा है।
सिंगरौली के जिला मुख्यालय बैढ़न स्थित विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट में चल रहे एक संवेदनशील आपराधिक मामले में युवा अधिवक्ता अनंतराम वैश्य की धारदार पैरवी ने सबको चौंका दिया। विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 32/2024 में, अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और एफएसएल-डीएनए जैसी वैज्ञानिक रिपोर्टों के बावजूद आरोपी सूरज पाल को सभी संगीन आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया गया। यह फैसला 30 मई 2026 को आया, जिसमें कोर्ट ने अनंतराम वैश्य की कानूनी समझ और जिरह को न्यायसंगत माना। यह पूरा मामला महिला थाना सिंगरौली में दर्ज अपराध क्रमांक 03/2024 से संबंधित था, जिसमें आरोपी सूरज पाल पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 376(2)(N) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5L/6 के तहत आरोप लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी ने एक नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर लंबे समय तक दुष्कर्म किया। अपने आरोप को सिद्ध करने के लिए, अभियोजन ने स्कूल रिकॉर्ड, एफएसएल और डीएनए रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी पेश किए थे। इस मुश्किल केस में, युवा अधिवक्ता श्री अनंतराम वैश्य ने आरोपी की पैरवी संभाली और एक अनूठी रणनीति अपनाई। उन्होंने कोई रक्षा साक्षी पेश नहीं किया, बल्कि केवल अभियोजन के गवाहों और दस्तावेजों में मौजूद विरोधाभासों को अपना हथियार बनाया। वैश्य ने तीन प्रमुख कानूनी मोर्चों पर इस जंग को जीता: पहला, उम्र निर्धारण पर सवाल उठाते हुए। अभियोजन ने पीड़िता को नाबालिग साबित करने के लिए स्कूल रजिस्टर और जन्म प्रमाण पत्र पेश किए थे, लेकिन क्रॉस-एग्जामिनेशन में पीड़िता के पिता ने नेहरू अस्पताल का एक दूसरा दस्तावेज दिया, जिसमें जन्मतिथि अलग थी। कोर्ट ने माना कि घटना के समय पीड़िता "उम्र के संदेहास्पद मोड़" पर थी, जिससे पॉक्सो एक्ट की धाराएं बेअसर हो गईं। दूसरा, प्रेम-संबंध और सहमति साबित करके। जिरह के दौरान पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि उसका आरोपी से लंबे समय से प्रेम-संबंध था और वे दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन परिवार राजी नहीं था। इस पर कोर्ट को यह समझाया गया कि यह "शादी के झूठे वादे" का मामला नहीं था, बल्कि पारिवारिक असहमति का विषय था और संबंध आपसी सहमति से बने थे। तीसरा, वैज्ञानिक साक्ष्य को कमजोर साबित करके। एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों और स्लाइड्स पर कोई मानव शुक्राणु या वीर्य के निशान नहीं मिले। डीएनए रिपोर्ट की अनिश्चितता को भी बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने मजबूती से रखा, जिससे अभियोजन का वैज्ञानिक तर्क बिखर गया। विशेष न्यायाधीश श्रीमती कंचन गुप्ता की अदालत ने इन सभी तर्कों पर विचार करते हुए माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ "संदेह से परे" अपराध साबित करने में विफल रहा है। नतीजतन, कोर्ट ने आरोपी सूरज पाल को तत्काल जेल से रिहा करने और उसके सभी जमानत मुचलकों से मुक्त करने का आदेश दिया। इस जीत के बाद, सिंगरौली बार में अधिवक्ता अनंतराम वैश्य की खूब सराहना हो रही है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उनकी प्रोफेशनल कुशलता की तारीफ करते हुए कहा कि कम उम्र में बिना हड़बड़ाहट के गवाहों के बयानों से सच निकालना और स्थापित वैज्ञानिक रिपोर्ट का कानूनी काट ढूंढना उनकी क्षमता को दर्शाता है। इस फैसले को सिंगरौली जिला न्यायालय के इतिहास में युवा वकीलों की बेहतरीन पैरवी में से एक माना जा रहा है।
- सोनभद्र जिले के दुद्धि विकासखंड अंतर्गत केवाल ग्राम पंचायत में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से कराए गए सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग चार महीने पहले बनी यह सड़क अब जगह-जगह से टूटकर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। यह मार्ग दर्जनों गाँवों को जोड़ने वाला एक प्रमुख रास्ता है, जहाँ प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हैं। नई सड़क होने के कारण वाहन चालक और राहगीर अक्सर सामान्य गति से गुजरते हैं, लेकिन अचानक बने इन गड्ढों में गिरकर आए दिन कई लोग घायल हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोग गिरकर हाथ, पैर और घुटनों में चोटिल हो रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। केवाल निवासी विजय कुमार भारती सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण में ठेकेदार और संबंधित विभाग की ओर से घोर लापरवाही बरती गई है। उनका कहना है कि इसी अनदेखी और घटिया गुणवत्ता के कारण सड़क मात्र चार महीने के भीतर ही इतनी खराब हो गई है। इस स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी विभाग और संबंधित अधिकारियों से तत्काल सड़क की गुणवत्ता की गहन जाँच कराने और जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कर आम जनता को राहत प्रदान करने की मांग की है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में अपने तेल के कुएं नहीं हैं, जिसके कारण आयात पर निर्भरता को कम करना अत्यंत आवश्यक है।1
- धुरकी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत टाटीदीरी स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल में बकरीद पर्व के अवसर पर एक मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आपसी भाईचारे, प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना था। विद्यालय के निर्देशक डॉ. यासिन अंसारी ने उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए बकरीद को त्याग, समर्पण, इंसानियत और कुर्बानी का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार दूसरों की खुशियों में शामिल होने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज में प्रेम व सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। डॉ. अंसारी ने यह भी रेखांकित किया कि सभी धर्म मानवता और भाईचारे का संदेश देते हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक संजय कुमार साह ने अपने संबोधन में कहा कि बकरीद का पर्व समाज में एकता और सद्भाव को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने जोर दिया कि विद्यालय केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि संस्कार और सामाजिक मूल्यों का भी केंद्र होता है, और ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में पारस्परिक सम्मान, सहयोग तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। प्रधानाध्यापक ने सभी को बकरीद की शुभकामनाएं देते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील की। विद्यालय परिवार के सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि त्योहार लोगों को जोड़ने का कार्य करते हैं, और सभी को मिल-जुलकर रहने, एक-दूसरे की सहायता करने तथा समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। इस सौहार्दपूर्ण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को बकरीद की मुबारकबाद दी और मिलन समारोह संपन्न हुआ। इस मौके पर मुखिया सगुनी राम, शिक्षक दिनेश कुमार, मनी भारती, रोहित कुमार, रुपांजली कुमारी, अर्पना कुमारी, कुर्बान अंसारी, राजेन्द्र प्रसाद यादव, लक्ष्मण साव, लेयकत अंसारी, शमशेर अंसारी, विजय साव, राधेश्याम पासवान, पंकज गुप्ता, जानकी सिंह, श्रवन राम, प्रदीप राम, उमेश राम समेत काफी संख्या में लोग मौजूद थे।1
- सोनभद्र के चोपन थाना क्षेत्र की एलसी कॉलोनी में एक बंद कमरे से सीमेंट कंपनी के 40 वर्षीय कर्मचारी मिथिलेश कुमार का शव बरामद किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब कमरे से तेज़ दुर्गंध आने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना दी। जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची और कमरे का दरवाज़ा तोड़कर शव को बाहर निकाला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस द्वारा इस मामले की गहन जांच जारी है।1
- सोनभद्र के रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के धर्मदासपुर गांव में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब शीतला माता मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में मिली। अराजक तत्वों ने प्रतिमा को तोड़कर नाले में फेंक दिया और मंदिर के शिखर, घंटे तथा धार्मिक ध्वज को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। जानकारी के अनुसार, गांव के समीप स्थित दुर्गा माता मंदिर में चल रहे यज्ञ कार्यक्रम के बाद शनिवार सुबह जब श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में पूजा के लिए पहुँचे तो मंदिर की बदहाली देखकर स्तब्ध रह गए। हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में थी, जबकि मंदिर के घंटे और झंडे पास के खेत में पड़े मिले। इस घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तत्काल मंदिर परिसर में जमा हो गए। पुलिस प्रशासन भी तुरंत मौके पर पहुँचा और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने घटना के संबंध में चार लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ भी प्रारंभ कर दी है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अराजक तत्वों ने देर रात करीब 12 बजे के बाद लाठी-डंडों का प्रयोग कर हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की। सूचना मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँचे। विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा कार्यकर्ता धर्मेंद्र पाण्डेय ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं से घटना की जाँच कर रही है, और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मामले का खुलासा कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।4
- दुद्धी प्रेस क्लब में आयोजित हिंदी पत्रकारिता दिवस समारोह के दौरान अभय कुमार शर्मा जी ने वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की आवाज की नकल कर सुनाई।1
- सोनभद्र के दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के मझौली गाँव में रविवार सुबह लगभग 8 बजे एक दंपती को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटने का मामला सामने आया है। मझौली निवासी राकेश पाल और उनकी पत्नी रेखा देवी (35) को गाँव के लोगों की सूचना पर पहुँची 108 एम्बुलेंस से सीएचसी दुद्धी भेजा गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। मारपीट में दंपती को काफी चोटें आई हैं। घटना के संबंध में राकेश पाल ने दुद्धी कोतवाली में तहरीर दी है। तहरीर में बताया गया है कि उनका बेटा संदीप पाल अपने घर के पीछे आम के पेड़ के नीचे बैठा था, तभी गाँव निवासी एक पड़ोसी ने बेवजह गाली-गलौज करते हुए धमकी दी कि अगर वह आम के पेड़ के पास आया तो उसे जान से मार देंगे। जब संदीप की माता रेखा देवी बीच-बचाव करने आईं, तो पड़ोसी ने उन्हें भी गालियाँ दीं और अपने छोटे भाई को बुला लिया। इसके बाद, दोनों भाइयों ने मिलकर रेखा देवी और राकेश पाल पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। राकेश पाल ने पुलिस से अनुरोध किया है कि आरोपी भाइयों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई कर मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने की मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।4