पीलीभीत सहित आसपास के जिलों से आए बड़ी संख्या में किसानों ने गन्ना मूल्य के बकाया भुगतान को लेकर शनिवार को उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार के आवास का घेराव किया। किसानों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से बकाया भुगतान की मांग उठाई जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने बताया कि गन्ना किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और बच्चों की फीस जमा करने से लेकर इलाज व दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशान हैं। उन्होंने चीनी मिलों और सत्ता के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी वजह से किसानों का भुगतान अटका हुआ है। किसानों को उम्मीद थी कि पीलीभीत के विधायक को गन्ना मंत्री बनाए जाने से उनकी समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। किसानों ने जानकारी दी कि नवाबगंज चीनी मिल बंद पड़ी है और उस पर पिछले दो पेराई सत्रों 2023-24 तथा 2024-25 का लगभग 70 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, बरखेड़ा चीनी मिल पर भी किसानों का लगभग 135 करोड़ रुपये बकाया बताया गया है। किसानों ने मझोला चीनी मिल का मुद्दा भी उठाया, जिसे वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुनः शुरू कराने की घोषणा की थी, लेकिन वह आज तक चालू नहीं हो सकी है। धरने के दौरान गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार ने कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार से फोन पर बात की और मुख्यमंत्री से मिलवाने के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को भेजने का प्रस्ताव दिया। इस पर कुमुद गंगवार ने मंत्री के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि किसानों को केवल बैठक नहीं, बल्कि उनके बकाया भुगतान की समस्या का ठोस समाधान चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगे।
पीलीभीत सहित आसपास के जिलों से आए बड़ी संख्या में किसानों ने गन्ना मूल्य के बकाया भुगतान को लेकर शनिवार को उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार के आवास का घेराव किया। किसानों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से बकाया भुगतान की मांग उठाई जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने बताया कि गन्ना किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और बच्चों की फीस जमा करने से लेकर इलाज व दैनिक जरूरतों के लिए भी परेशान हैं। उन्होंने चीनी मिलों और सत्ता के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि इसी वजह से किसानों का भुगतान अटका हुआ है। किसानों को उम्मीद थी कि पीलीभीत के विधायक को गन्ना मंत्री बनाए जाने से उनकी समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। किसानों ने जानकारी दी कि नवाबगंज चीनी मिल बंद पड़ी है और उस पर पिछले दो पेराई सत्रों 2023-24 तथा 2024-25 का लगभग 70 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, बरखेड़ा चीनी मिल पर भी किसानों का लगभग 135 करोड़ रुपये बकाया बताया गया है। किसानों ने मझोला चीनी मिल का मुद्दा भी उठाया, जिसे वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुनः शुरू कराने की घोषणा की थी, लेकिन वह आज तक चालू नहीं हो सकी है। धरने के दौरान गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार ने कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार से फोन पर बात की और मुख्यमंत्री से मिलवाने के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को भेजने का प्रस्ताव दिया। इस पर कुमुद गंगवार ने मंत्री के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि किसानों को केवल बैठक नहीं, बल्कि उनके बकाया भुगतान की समस्या का ठोस समाधान चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगे।
- पीलीभीत के पूरनपुर में एक महिला ने अवैध कच्ची शराब के कारोबार का विरोध करने पर पुलिस पर उत्पीड़न और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं। दो दुधमुंहे बच्चों के साथ सम्पूर्ण समाधान दिवस पहुंची पीड़िता ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा, जिसमें उसने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस घटना के बाद क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम टांडा छत्रपति निवासी कीर्ति देवी पत्नी सूरज के अनुसार, उन्होंने गांव में हो रही अवैध कच्ची शराब की बिक्री की शिकायत पुलिस से की थी। इसके बाद शराब कारोबार से जुड़े लोगों ने उनसे रंजिश मान ली और पुलिस के साथ मिलीभगत कर उनके परिवार के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करा दी। कीर्ति देवी ने आरोप लगाया कि शुक्रवार रात करीब 2 बजे पुलिसकर्मी उनके दरवाजे पर पहुंचे, लेकिन मुख्य दरवाजे से आने के बजाय दीवार फांदकर घर में घुस आए। घर में घुसने के बाद पुलिसकर्मियों ने परिवार के लोगों के साथ अभद्र व्यवहार किया। विरोध करने पर उनके पति और अन्य परिजनों के साथ मारपीट की गई, जिससे मारपीट के दौरान डंडा लगने से कीर्ति देवी के सिर में गंभीर चोट आई और उनका सिर फट गया। उन्होंने बताया कि घटना के समय घर में मौजूद उनके दो छोटे बच्चे भयभीत होकर रोने लगे, और पूरे परिवार को बेवजह प्रताड़ित किया गया। पीड़िता ने सम्पूर्ण समाधान दिवस में दिए अपने प्रार्थना पत्र में मामले की उच्चस्तरीय जांच, मेडिकल परीक्षण और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक पुलिस विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। पुलिस का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करने की बात कही गई है।1
- शनिवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभीजीत दीपके के नेतृत्व में एक विशाल प्रदर्शन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में जुटे समर्थकों ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने “रोजगार दो या सत्ता छोड़ो” जैसे नारे लगाए, जिसके चलते जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में भारी जाम की स्थिति बन गई। इस हंगामे के कारण राजधानी में कई जगह यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त इंतजाम किए और बैरिकेडिंग भी की। प्रदर्शन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल होते रहे।1
- पीलीभीत जिले के गजरौला कला थाना क्षेत्र के जैतपुर गांव में पिछले दो दिनों से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बना एक आक्रामक लंगूरी बंदर आखिरकार वन विभाग की पकड़ में आ गया। इस बंदर के लगातार हमलों से गांव में दहशत का माहौल था और कई ग्रामीण घायल हो चुके थे, जिसके कारण लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे थे। बंदर के आतंक से पिछले दो दिनों में सात से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें से कुछ को गंभीर चोटें भी आईं। शनिवार को सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम गांव पहुंची, जहाँ बंदर ने उन्हें भी हमला करने की कोशिश की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, डीएफओ भारत कुमार के नेतृत्व में एक विशेष अभियान चलाया गया। टीम ने बंदर की गतिविधियों पर लगातार नज़र रखते हुए काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित रूप से पकड़ लिया। इस दौरान, हुकुमचंद मौर्य गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि रामबहादुर, आकाश, अजय, जागीर और जलालुद्दीन सहित अन्य ग्रामीण भी चोटिल हुए। सभी घायल ग्रामीणों का उपचार कराया गया है और उनकी स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है। आक्रामक बंदर के पकड़े जाने से जैतपुर गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। वन विभाग ने यह भी बताया है कि वह क्षेत्र में आगे भी निगरानी बनाए रखेगा ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।1
- बरेली पुलिस को मनौना धाम से डेढ़ वर्षीय बालक के अपहरण के मामले में बड़ी सफलता मिली है। थाना आंवला पुलिस ने अपहरण किए गए बालक को सकुशल बरामद कर लिया है। इस प्रकरण में, अपहरण गिरोह के तीन और शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिसके बाद कुल छह अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है। यह जानकारी पुलिस अधीक्षक बरेली, श्रीमती अंशिका वर्मा ने दी।1
- पीलीभीत में सैकड़ों किसानों ने मंत्री संजय गंगवार के आवास का घेराव किया। यह विरोध प्रदर्शन गन्ना भुगतान में देरी और बकाया राशि को लेकर किया गया, जहाँ किसानों ने मंत्री के आवास के बाहर जमकर नारेबाजी की और हंगामा काटा। प्रदर्शनकारी किसान हाथों में तख्ती और बैनर लेकर मंत्री के आवास, संजय रॉयल पार्क, के बाहर एकत्रित हुए थे। किसानों का आरोप है कि बजाज शुगर मिल पर ₹135 करोड़ और ओसवाल नवाबगंज पर ₹70 करोड़ का गन्ना भुगतान बकाया है, जिसका निराकरण अभी तक नहीं हुआ है।1
- आज एक बड़ी खबर के अनुसार, अभिजीत दीपके इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से बाहर निकले, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान सीजेपी को लोगों का भारी समर्थन मिला। एयरपोर्ट पर अपार जनसमर्थन के बाद, अभिजीत दीपके जंतर मंतर के लिए रवाना हो गए।1
- Post by Mr Salim1
- नई दिल्ली में जून की तपती गर्मी के बीच बेरोजगार युवाओं का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। "कॉकरोच" आंदोलन के बैनर तले एकत्रित हुए युवाओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने "अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है" और "रोजगार दो या सत्ता छोड़ो" जैसे तीखे नारों के साथ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत बर्खास्त करने की जोरदार मांग उठाई। युवाओं का स्पष्ट आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार हो रही देरी और देश में बढ़ती बेरोजगारी से छात्र तथा युवा समुदाय बेहद परेशान हैं। यह स्थिति उनके गुस्से का प्रमुख कारण बनी हुई है, जिसके चलते वे लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।1