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12 hrs ago
user_Adv Ashoksingh Ahirwar
Adv Ashoksingh Ahirwar
Lawyer गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
12 hrs ago

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • Post by Adv Ashoksingh Ahirwar
    1
    Post by Adv Ashoksingh Ahirwar
    user_Adv Ashoksingh Ahirwar
    Adv Ashoksingh Ahirwar
    Lawyer गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • ब्रेकिंग न्यूज़- मधुसूदनगढ़ में जाम मधुसूदनगढ़ में पिछले कई सालों से जाम की स्थिति बनी हुई है इसके दो मुख्य कारण है कृषि उपज मंडी और मधुसूदनगढ़ में मुख्य रोड पर बड़ी-बड़ी कंपलेक्स कृषि उपज मंडी का किसान का माल डायरेक्ट व्यापारी के गोदाम या बेयर हाउस पर तोला जाता है जो की सही नहीं है किसान अपनी ट्रैक्टर ट्रालियों को पहले कृषि उपज मंडी लाता है इसके बाद फिर डायरेक्ट वेयरहाउस पर जाता है जिस रास्ते में मुख सड़क पर जाम लगता है हजारों ट्रैक्टर ट्राली भोपाल रोड गुना रोड सुठालिया रोड और लटेरी रोड के वेयरहाउसों पर या गोदाम पर लाइन से खड़ी हो जाती है इस समय स्कूल का समय होता है और राहगीरों का आना जाना अब आप सोच सकते हैं कि जाम कितना लगता है और जो कंपलेक्स बनाई गई है उन कंपलेक्स में पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई है जिन कंपलेक्सों की दुकान के ग्राहकों के जो गाड़ियां होती हैं वह मुख्य रोड पर खड़ी होती है अब आप सोच सकते हैं कि मधुसूदनगढ़ में कितना जाम लग सकता है एक तो कंपलेक्सों की गाड़ियां खड़ी होना दूसरा कृषि उपज मंडी की ट्रैक्टर ट्रालियों का आना जाना इसी बीच स्कूल के बच्चों के की गाड़ियां राहगीरों का आना जाना रास्ते पर भी कुछ दुकानदारों का अतिक्रमण के व रास्ते पर भी गाड़ी खड़ी कर देना और जाम लगा देना अब नगर परिषद की लापरवाही क्योंकि ना ही इनको नोटिस जारी किया गया और ना ही कृषि उपज मंडी द्वारा कोई कदम उठाए जा रहा है तो मधुसूदनगढ़ में जाम तो लगना जाहिद है अब देखना है कि मधुसूदनगढ़ का जाम के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है या फिर इसी प्रकार से ट्रैक्टर ट्रालियों का जाम फिर वही मोटरसाइकिल निकालने की दिक्कत या आम नागरिक को पैदल चलने की परेशानी या अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने की देरी या लाने ले जाने की परेशानी इससे निजात मधुसूदनगढ़ पता है या फिर और भी जाम की विकट स्थिति होना है क्योंकि सोमवार की छुट्टी खत्म तो सोमवार को हॉट बाजार भी लगेगा और सोमवार को किसान की ट्रैक्टर ट्रालियों का जाम भी लगेगा अब यह विकट संकट से मधुसूदनगढ़ कैसे उबरेगा यह तो प्रशासन ही जाने क्या मधुसुदनगढ़ से जाम की स्थिति को सुधारा जा सकता है अगर सुधर सुधारा जा सकता है तो अपने कमेंट कर कर बताएं
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    ब्रेकिंग न्यूज़- मधुसूदनगढ़ में जाम मधुसूदनगढ़ में पिछले कई सालों से जाम की स्थिति बनी हुई है इसके दो मुख्य कारण है कृषि उपज मंडी और मधुसूदनगढ़ में मुख्य रोड पर बड़ी-बड़ी कंपलेक्स कृषि उपज मंडी का किसान का माल डायरेक्ट व्यापारी के गोदाम या बेयर हाउस पर तोला जाता है जो की सही नहीं है किसान अपनी ट्रैक्टर ट्रालियों को पहले कृषि उपज मंडी लाता है इसके बाद फिर डायरेक्ट वेयरहाउस पर जाता है जिस रास्ते में मुख सड़क पर जाम लगता है हजारों ट्रैक्टर ट्राली भोपाल रोड गुना रोड सुठालिया रोड और लटेरी रोड के वेयरहाउसों पर या गोदाम पर लाइन से खड़ी हो जाती है इस समय स्कूल का समय होता है और राहगीरों का आना जाना अब आप सोच सकते हैं कि जाम कितना लगता है और जो कंपलेक्स बनाई गई है उन कंपलेक्स में पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गई है जिन कंपलेक्सों की दुकान के ग्राहकों के जो गाड़ियां होती हैं वह मुख्य रोड पर खड़ी होती है अब आप सोच सकते हैं कि मधुसूदनगढ़ में कितना जाम लग सकता है एक तो कंपलेक्सों की गाड़ियां खड़ी होना दूसरा कृषि उपज मंडी की ट्रैक्टर ट्रालियों का आना जाना इसी बीच स्कूल के बच्चों के की गाड़ियां राहगीरों का आना जाना रास्ते पर भी कुछ दुकानदारों का अतिक्रमण के व रास्ते पर भी गाड़ी खड़ी कर देना और जाम लगा देना अब नगर परिषद की लापरवाही क्योंकि ना ही इनको नोटिस जारी किया गया और ना ही कृषि उपज मंडी द्वारा कोई कदम उठाए जा रहा है तो मधुसूदनगढ़ में जाम तो लगना जाहिद है अब देखना है कि मधुसूदनगढ़ का जाम के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है या फिर इसी प्रकार से ट्रैक्टर ट्रालियों का जाम फिर वही मोटरसाइकिल निकालने की दिक्कत या आम नागरिक को पैदल चलने की परेशानी या अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने की देरी या लाने ले जाने की परेशानी इससे निजात मधुसूदनगढ़ पता है या फिर और भी जाम की विकट स्थिति होना है क्योंकि सोमवार की छुट्टी खत्म तो सोमवार को हॉट बाजार भी लगेगा और सोमवार को किसान की ट्रैक्टर ट्रालियों का जाम भी लगेगा अब यह विकट संकट से मधुसूदनगढ़ कैसे उबरेगा यह तो प्रशासन ही जाने क्या मधुसुदनगढ़ से जाम की स्थिति को सुधारा जा सकता है अगर सुधर सुधारा जा सकता है तो अपने कमेंट कर कर बताएं
    user_Mukesh Namdev
    Mukesh Namdev
    Journalist Guna, Madhya Pradesh•
    11 hrs ago
  • अहिरवार समाज संघ की एक नई पहल यूट्यूब चैनल के माध्यम से देवेंद्र सर युटुब सब्सक्राइब करके गणित की 9वीं 10वीं 11वीं 12वी छात्र-छात्र निशुल्क पढ़ाई कर सकते हैं
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    अहिरवार समाज संघ की एक नई पहल यूट्यूब चैनल के माध्यम से देवेंद्र सर युटुब सब्सक्राइब करके गणित की 9वीं 10वीं 11वीं 12वी छात्र-छात्र निशुल्क पढ़ाई कर सकते हैं
    user_रवि मोहने पार्षद
    रवि मोहने पार्षद
    Youth Social Services Organisation Shadhora, Ashoknagar•
    17 hrs ago
  • Jai Shri Ram
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    Jai Shri Ram
    user_Chironji Lal Raikwar All DTH direction
    Chironji Lal Raikwar All DTH direction
    Mechanic Ashoknagar, Madhya Pradesh•
    9 hrs ago
  • पिछले कई वर्षों से हमारे गांव शंकर कॉलोनी में सड़क के कार्य नहीं किया जा रहा है हमारे ग्रामीण वासियों को उसे सड़क से वाहन चलाने में बहुत ही ज्यादा परेशानियां और दिक्कतें होती है यह सड़क नेशनल हाईवे 51 से हमारे गांव की ओर आती है जिसकी मिनिमम सीमा 1 किलोमीटर है कई सालों से हमारी सरकार लोगों ने इस मामले पर शिकायत दर्ज किया लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस पर कोई भी एक्शन नहीं लिया है ना इस सड़क को सुधारने का कार्य किया है हमारे गांव के लोग कई सालों से इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा करना हैं इस सड़क के द्वारा हमारे गांव की कई वाहन नष्ट होते जा रहे हैं और कई वाहन खराब होते जा रहे हैं यहां तक की कोई गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को या पीड़ित व्यक्ति को अथवा गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत है पैदा हो रही है इसलिए मेरी सड़क विभाग विभाग से निवेदन है कि इस कार्य को जल्दी से जल्दी प्रारंभ करने की कृपा करें हमारा संपूर्ण ग्राम शंकर कॉलोनी आप लोगों का सदा आभारी रहेगा मैं दीपक गुजरावत शंकर कॉलोनी निवासी l
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    पिछले कई वर्षों से हमारे गांव शंकर कॉलोनी में सड़क के कार्य नहीं किया जा रहा है हमारे ग्रामीण वासियों को उसे सड़क से वाहन चलाने में बहुत ही ज्यादा परेशानियां और दिक्कतें होती है यह सड़क नेशनल हाईवे 51 से हमारे गांव की ओर आती है जिसकी मिनिमम सीमा 1 किलोमीटर है कई सालों से हमारी सरकार लोगों ने इस मामले पर शिकायत दर्ज किया लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस पर कोई भी एक्शन नहीं लिया है ना इस सड़क को सुधारने का कार्य किया है हमारे गांव के लोग कई सालों से इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा करना हैं इस सड़क के द्वारा हमारे गांव की कई वाहन नष्ट होते जा रहे हैं और कई वाहन खराब होते जा रहे हैं यहां तक की कोई गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को या पीड़ित व्यक्ति को अथवा गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत है पैदा हो रही है इसलिए मेरी सड़क विभाग विभाग से निवेदन है कि इस कार्य को जल्दी से जल्दी प्रारंभ करने की कृपा करें हमारा संपूर्ण ग्राम शंकर कॉलोनी आप लोगों का सदा आभारी रहेगा मैं दीपक गुजरावत शंकर कॉलोनी निवासी l
    user_दीपक गुजरावत
    दीपक गुजरावत
    Journalist छबड़ा, बारां, राजस्थान•
    19 hrs ago
  • हमारी गांव की सड़क हादसाग्रस्त होता रहता है कृपया करके हमारी सड़क का निर्माण करवाया जाए
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    हमारी गांव की सड़क हादसाग्रस्त होता रहता है कृपया करके हमारी सड़क का निर्माण करवाया जाए
    user_Manoj Kumar
    Manoj Kumar
    छबड़ा, बारां, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • हरनावदाशाहजी. हाड़ौती के खेतों में इन दिनों कुदरत का एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। 'काले सोने' के नाम से मशहूर अफीम की फसल अब अपने पूरे यौवन पर आने लगी है। सर्दी की ओस और हल्की सुनहरी धूप के बीच अफीम के खेतों में खिल रहे सफेद मनमोहक फूल हर किसी का मन मोह रहे हैं। लेकिन इन फूलों की खूबसूरती के पीछे किसान की कड़ी मेहनत और रात-भर का पहरा भी छुपा है। श्वेत फूलों की चादर और खुशहाली की उम्मीद- अफीम की फसल पर आए फूल इस बात का संकेत हैं कि अब फसल परिपक्वता की ओर बढ़ रही है। कुछ ही दिनों में इन फूलों की पंखुड़ियां गिर जाएंगी और हरे डोडे (फल) निकल आएंगे, जिनसे 'काला सोना' यानी अफीम का दूध निकाला जाएगा। काश्तकारों के लिए यह केवल एक फसल नहीं, बल्कि साल भर की वह उम्मीद है जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति तय होती है। परिंदा भी पर न मार सके, इसलिए 'चौकसी' सख्त- फसल के यौवन पर आते ही किसानों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। इसकी सुरक्षा के लिए काश्तकारों ने खेतों पर डेरा डालकर दिन-रात का पहरा शुरू कर दिया है। क्योंकि नीलगाय, आवारा पशु और खास तौर पर 'तोतों' (जो डोडों को काटकर ले जाते हैं) से फसल को बचाने के लिए किसानों ने खेतों पर ही झोपड़ियां बनाकर पडाव डाल दिए हैं। नेट का सुरक्षा कवच: कई प्रगतिशील किसानों ने पूरी फसल को ऊपर से जाली (नेट) से ढंक दिया है ताकि पक्षी फसल को नुकसान न पहुंचा सकें। कुछ इलाकों में तो किसान टॉर्च और लाठी लेकर रात-रात भर गश्त कर रहे हैं ताकि कीमती फसल सुरक्षित रहे। मौसम की मेहरबानी पर टिकी निगाहें- अफीम की खेती बेहद संवेदनशील होती है। किसानों का कहना है कि इस समय मौसम का साफ रहना बहुत जरूरी है। यदि अचानक बादल छाते हैं या बेमौसम बारिश होती है, तो डोडे में दूध की मात्रा कम हो सकती है और घटिया (अफीम की क्वालिटी) पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, खिली हुई धूप को देखकर किसानों के चेहरे पर संतोष की लकीरें दिखाई दे रही हैं। विभाग की भी रहती है पैनी नजर नारकोटिक्स विभाग के कड़े नियमों के बीच हो रही इस खेती की एक-एक इंच जमीन और एक-एक ग्राम अफीम का हिसाब सरकार के पास होता है। यही कारण है कि किसान इसे अपनी संतान की तरह पालते हैं ताकि तौल के समय विभाग के मानकों पर उनकी फसल खरी उतरे और उनका लाइसेंस बरकरार रहे। "अफीम की खेती हमारे लिए किसी तपस्या से कम नहीं है। फूल आने के बाद से जब तक अफीम घर न आ जाए, हमें चैन की नींद नहीं आती।"
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    हरनावदाशाहजी. हाड़ौती के खेतों में इन दिनों कुदरत का एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। 'काले सोने' के नाम से मशहूर अफीम की फसल अब अपने पूरे यौवन पर आने लगी है। सर्दी की ओस और हल्की सुनहरी धूप के बीच अफीम के खेतों में खिल रहे सफेद मनमोहक फूल हर किसी का मन मोह रहे हैं। लेकिन इन फूलों की खूबसूरती के पीछे किसान की कड़ी मेहनत और रात-भर का पहरा भी छुपा है।
श्वेत फूलों की चादर और खुशहाली की उम्मीद-
अफीम की फसल पर आए फूल इस बात का संकेत हैं कि अब फसल परिपक्वता की ओर बढ़ रही है। कुछ ही दिनों में इन फूलों की पंखुड़ियां गिर जाएंगी और हरे डोडे (फल) निकल आएंगे, जिनसे 'काला सोना' यानी अफीम का दूध निकाला जाएगा। काश्तकारों के लिए यह केवल एक फसल नहीं, बल्कि साल भर की वह उम्मीद है जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति तय होती है।
परिंदा भी पर न मार सके, इसलिए 'चौकसी' सख्त-
फसल के यौवन पर आते ही किसानों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। इसकी सुरक्षा के लिए काश्तकारों ने खेतों पर डेरा डालकर दिन-रात का पहरा शुरू कर दिया है।
क्योंकि नीलगाय, आवारा पशु और खास तौर पर 'तोतों' (जो डोडों को काटकर ले जाते हैं) से फसल को बचाने के लिए किसानों ने खेतों पर ही झोपड़ियां बनाकर पडाव डाल दिए हैं।
नेट का सुरक्षा कवच: कई प्रगतिशील किसानों ने पूरी फसल को ऊपर से जाली (नेट) से ढंक दिया है ताकि पक्षी फसल को नुकसान न पहुंचा सकें।
कुछ इलाकों में तो किसान टॉर्च और लाठी लेकर रात-रात भर गश्त कर रहे हैं ताकि कीमती फसल सुरक्षित रहे।
मौसम की मेहरबानी पर टिकी निगाहें-
अफीम की खेती बेहद संवेदनशील होती है। किसानों का कहना है कि इस समय मौसम का साफ रहना बहुत जरूरी है। यदि अचानक बादल छाते हैं या बेमौसम बारिश होती है, तो डोडे में दूध की मात्रा कम हो सकती है और घटिया (अफीम की क्वालिटी) पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, खिली हुई धूप को देखकर किसानों के चेहरे पर संतोष की लकीरें दिखाई दे रही हैं।
विभाग की भी रहती है पैनी नजर
नारकोटिक्स विभाग के कड़े नियमों के बीच हो रही इस खेती की एक-एक इंच जमीन और एक-एक ग्राम अफीम का हिसाब सरकार के पास होता है। यही कारण है कि किसान इसे अपनी संतान की तरह पालते हैं ताकि तौल के समय विभाग के मानकों पर उनकी फसल खरी उतरे और उनका लाइसेंस बरकरार रहे।
"अफीम की खेती हमारे लिए किसी तपस्या से कम नहीं है। फूल आने के बाद से जब तक अफीम घर न आ जाए, हमें चैन की नींद नहीं आती।"
    user_Pramod jain
    Pramod jain
    Journalist छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • Post by Adv Ashoksingh Ahirwar
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    Post by Adv Ashoksingh Ahirwar
    user_Adv Ashoksingh Ahirwar
    Adv Ashoksingh Ahirwar
    Lawyer गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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