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देवास जिले के उदयनगर क्षेत्र के ग्राम नरसिंहपुरा में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ माँ की ममता लालच के आगे हार गई और लालच की जीत हुई। जानकारी के अनुसार, तेंदूपत्ता की राशि ही पारिवारिक रिश्तों की मौत की मुख्य वजह बन गई है।
Sajid Pathan
देवास जिले के उदयनगर क्षेत्र के ग्राम नरसिंहपुरा में एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ माँ की ममता लालच के आगे हार गई और लालच की जीत हुई। जानकारी के अनुसार, तेंदूपत्ता की राशि ही पारिवारिक रिश्तों की मौत की मुख्य वजह बन गई है।
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- अमन सामाजिक म्यूजिकल मंच इंदौर संभाग के अध्यक्ष, एक जाने-माने एंकर और बड़वानी जिले के सर्वाधिक अवार्ड प्राप्त कलाकार शौकत अली मंसूरी को इंदौर में एक ही दिन में तीन सम्मानों से नवाजा गया। उन्हें हिंदुस्तान के मशहूर फनकार असलम साबरी कव्वाल द्वारा एक संगीत निशा में सम्मानित किया गया। असलम साबरी साहब के द्वारा ही विश्व संगीत दिवस के मौके पर दूध गार्डन में शॉल भेंट कर उन्हें सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, फादर्स डे के अवसर पर भी शौकत अली मंसूरी को श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया गया। शौकत अली मंसूरी इंदौर संभाग में इंदौर, देवास, उज्जैन सहित कई बड़े शहरों में बड़े-बड़े संगीत के कार्यक्रम करते हैं और जुलाई में देवास में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करने वाले हैं। उन्होंने अपने सभी चाहने वालों और संगीत परिवार का हृदय से आभार व्यक्त किया है।2
- यह जानकारी भारत के मध्य प्रदेश के एक नजारे को दर्शाती है।1
- शाजापुर जिले के सलसलाई नगर में पाँच दिनों से चल रहा श्री विष्णु महायज्ञ और बाबा रामदेव प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव सोमवार को धूमधाम से संपन्न हो गया। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन नगर में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। अनुष्ठान के समापन अवसर पर, यज्ञआचार्य निखिल शर्मा के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महायज्ञ की पूर्णाहूति दी गई। आचार्य द्वारा विधि-विधान से बाबा रामदेव की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न करवाई गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान उपस्थित भक्तों ने 'बाबा रामदेव की जय' के जयकारे लगाए। यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद मुख्य मंदिर परिसर में बाबा रामदेव की भव्य महाआरती की गई। आरती के पश्चात आयोजित 'महाभंडारे' में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन समिति ने बड़ी संख्या में आए भक्तों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए थे, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। पाँच दिवसीय इस धार्मिक आयोजन के कारण पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेव के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन समिति के सदस्यों ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए इस समारोह को क्षेत्र में शांति और सद्भाव का प्रतीक बताया।1
- पुलिस ने इंदौर से एक 19 वर्षीय लॉ छात्र को गिरफ्तार किया है, जो NEET परीक्षा के फर्जी पेपर बेचने का दावा कर रहा था। आरोपी पर ऑनलाइन माध्यम से छात्रों से ठगी करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाकर यह दावा करता था कि उसके पास NEET परीक्षा का लीक पेपर है। वह अभ्यर्थियों से 50 से 200 रुपये तक की ऑनलाइन फीस लेता था और फिर उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स से तैयार किए गए प्रश्नपत्र PDF के रूप में भेज देता था। जाँच में सामने आया है कि आरोपी के पास वास्तव में कोई असली प्रश्नपत्र नहीं था, लेकिन उसने इस तरीके से लगभग 20 से 35 छात्रों को फर्जी पेपर बेचकर धोखा दिया। पुलिस राजस्थान के कोटा से मिली सूचना के आधार पर इस आरोपी तक पहुँची। फिलहाल, इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य संभावित सहयोगियों की जाँच जारी है। इस गिरफ्तारी से NEET परीक्षा से पहले फर्जी पेपर बेचने के एक बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है।1
- इंदौर के शिशु कुंज स्कूल की कैंटीन में एक्सपायरी डेट के नमकीन और मसाले पाए गए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा की टीम ने स्कूल पहुंचकर मामले की जांच की। जांच के दौरान टीम ने कैंटीन से कई सैंपल लिए। यह घटना तब सामने आई है जब योग दिवस के दिन इसी स्कूल में दिए गए भोजन से कई बच्चे बीमार हो गए थे।1
- इंदौर के दूधिया पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विभाग ने खुले बिजली तारों से सीधे कनेक्शन दिए हैं, जो विद्युत सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक व्यवस्था के तहत ही विद्युत आपूर्ति मिलनी चाहिए, लेकिन विभाग द्वारा इन मानकों की अनदेखी की जा रही है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी आंगनवाड़ी केंद्र के सामने बिजली से संबंधित एक हादसा हुआ था। इस घटना को एक साल से अधिक बीत जाने के बाद भी विभाग ने कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए हैं, जिससे लोगों में भविष्य में किसी जनहानि की आशंका बढ़ गई है। वे पूछ रहे हैं कि यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि खुले तारों से दिए गए कनेक्शन दुर्घटनाओं, करंट लगने और बिजली चोरी जैसी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं। इस मामले में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं, जैसे कि क्या खुले तारों से कनेक्शन देना विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है? बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कनेक्शन कैसे जारी किए जा सकते हैं? यदि विभाग द्वारा दिए गए अस्थायी कनेक्शन से कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या ऐसी व्यवस्था बिजली चोरी को बढ़ावा नहीं देती और बिजली चोरी व लाइन लॉस का आर्थिक बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ता है? इसके अतिरिक्त, पिछले हादसे के बाद भी सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए, यह भी एक बड़ा प्रश्न है। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली जैसी संवेदनशील सेवा में लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।1
- इस बार मानसून की धीमी रफ्तार के कारण कई इलाकों में बारिश के आगमन में लगभग 10 दिन की देरी होने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, बीच में मानसून की प्रगति लगभग दो सप्ताह तक रुकी रही, जिससे यह देरी हुई। हालांकि, अब मानसून के फिर से सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। आने वाले कुछ दिनों में मध्य भारत सहित कई अन्य क्षेत्रों में भी मानसून के आगे बढ़ने और बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।1
- इंदौर के दूधिया पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है, जहाँ स्थानीय निवासियों ने विभाग पर खुले बिजली तारों से सीधे कनेक्शन देने का आरोप लगाया है। निवासियों का कहना है कि यह विद्युत सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत उपभोक्ताओं को केवल सुरक्षित और मानक व्यवस्था के माध्यम से ही विद्युत आपूर्ति प्रदान की जानी चाहिए। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी एक आंगनवाड़ी केंद्र के सामने बिजली से संबंधित हादसा हो चुका था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विभाग ने कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए। लोगों के मन में यह आशंका बढ़ गई है कि भविष्य में किसी भी जनहानि की स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा। विशेषज्ञों का मत है कि खुले तारों से कनेक्शन देने से दुर्घटनाओं, करंट लगने और बिजली चोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जबकि विद्युत वितरण कंपनियों को कनेक्शन जारी करने से पहले मानक इंसुलेटेड केबल का उपयोग, सुरक्षित पोल और विद्युत लाइन व्यवस्था, मीटर तथा सर्विस लाइन की निर्धारित मानकों के अनुसार स्थापना, विद्युत सुरक्षा नियमों का पालन और उपभोक्ता व आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है। इस मामले में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं: क्या खुले तारों से कनेक्शन देना विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है? क्या बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं? यदि अस्थायी कनेक्शन से कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या ऐसी व्यवस्था बिजली चोरी को बढ़ावा नहीं देती, और बिजली चोरी व लाइन लॉस का आर्थिक बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ता है? स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, चेतावनी दी है कि बिजली जैसी अत्यंत संवेदनशील सेवा में लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।1
- इंदौर के महूनाका चौराहे पर कुछ लड़कों द्वारा रील बनाए जाने का मामला सामने आया है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इंदौर को भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन इसकी ट्रैफिक व्यवस्था को लाख कोशिशों के बाद भी सुधारा नहीं जा सका है। महूनाका चौराहा, जो पाँच रास्तों का एक व्यस्त जंक्शन है और शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहों में से एक है, वहाँ लड़कों द्वारा ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाकर रील बनाना पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया है। शहर में ईस्ट और वेस्ट दो ट्रैफिक पुलिस स्टेशन, सैकड़ों पुलिस जवान, टीआई, एसीपी और पुलिस कमिश्नर जैसे अधिकारियों का लंबा-चौड़ा महकमा होने के बावजूद, पुलिस खुद को लाचार महसूस कर रही है। आरोप है कि जब पुलिसकर्मी इन लड़कों के खिलाफ कार्रवाई करने जाते हैं, तो कुछ नेताओं के पट्ठे उनसे उलझ जाते हैं और उनके ट्रांसफर या बर्खास्तगी की धमकी देते हैं। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है कि आखिर ऐसी परिस्थितियों में ट्रैफिक व्यवस्था कैसे सुधरेगी। यह सवाल उठाया गया है कि रील बनाने वाले लड़के पुलिस को क्या संदेश देना चाहते हैं, और पुलिस विभाग की इस लाचारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।1