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इंदौर के दूधिया पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है, जहाँ स्थानीय निवासियों ने विभाग पर खुले बिजली तारों से सीधे कनेक्शन देने का आरोप लगाया है। निवासियों का कहना है कि यह विद्युत सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत उपभोक्ताओं को केवल सुरक्षित और मानक व्यवस्था के माध्यम से ही विद्युत आपूर्ति प्रदान की जानी चाहिए। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी एक आंगनवाड़ी केंद्र के सामने बिजली से संबंधित हादसा हो चुका था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विभाग ने कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए। लोगों के मन में यह आशंका बढ़ गई है कि भविष्य में किसी भी जनहानि की स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा। विशेषज्ञों का मत है कि खुले तारों से कनेक्शन देने से दुर्घटनाओं, करंट लगने और बिजली चोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जबकि विद्युत वितरण कंपनियों को कनेक्शन जारी करने से पहले मानक इंसुलेटेड केबल का उपयोग, सुरक्षित पोल और विद्युत लाइन व्यवस्था, मीटर तथा सर्विस लाइन की निर्धारित मानकों के अनुसार स्थापना, विद्युत सुरक्षा नियमों का पालन और उपभोक्ता व आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है। इस मामले में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं: क्या खुले तारों से कनेक्शन देना विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है? क्या बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं? यदि अस्थायी कनेक्शन से कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या ऐसी व्यवस्था बिजली चोरी को बढ़ावा नहीं देती, और बिजली चोरी व लाइन लॉस का आर्थिक बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ता है? स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, चेतावनी दी है कि बिजली जैसी अत्यंत संवेदनशील सेवा में लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

1 hr ago
user_राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
Newspaper publisher Indore, Madhya Pradesh•
1 hr ago

इंदौर के दूधिया पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है, जहाँ स्थानीय निवासियों ने विभाग पर खुले बिजली तारों से सीधे कनेक्शन देने का आरोप लगाया है। निवासियों का कहना है कि यह विद्युत सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत उपभोक्ताओं को केवल सुरक्षित और मानक व्यवस्था के माध्यम से ही विद्युत आपूर्ति प्रदान की जानी चाहिए। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी एक आंगनवाड़ी केंद्र के सामने बिजली से संबंधित हादसा हो चुका था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विभाग ने कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए। लोगों के मन में यह आशंका बढ़ गई है कि भविष्य में किसी भी जनहानि की स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा। विशेषज्ञों का मत है कि खुले तारों से कनेक्शन देने से दुर्घटनाओं, करंट लगने और बिजली चोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जबकि विद्युत वितरण कंपनियों को कनेक्शन जारी करने से पहले मानक इंसुलेटेड केबल का उपयोग, सुरक्षित पोल और विद्युत लाइन व्यवस्था, मीटर तथा सर्विस लाइन की निर्धारित मानकों के अनुसार स्थापना, विद्युत सुरक्षा नियमों का पालन और उपभोक्ता व आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है। इस मामले में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं: क्या खुले तारों से कनेक्शन देना विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है? क्या बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं? यदि अस्थायी कनेक्शन से कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या ऐसी व्यवस्था बिजली चोरी को बढ़ावा नहीं देती, और बिजली चोरी व लाइन लॉस का आर्थिक बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ता है? स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, चेतावनी दी है कि बिजली जैसी अत्यंत संवेदनशील सेवा में लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

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  • इंदौर के शिशु कुंज स्कूल की कैंटीन में एक्सपायरी डेट के नमकीन और मसाले पाए गए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा की टीम ने स्कूल पहुंचकर मामले की जांच की। जांच के दौरान टीम ने कैंटीन से कई सैंपल लिए। यह घटना तब सामने आई है जब योग दिवस के दिन इसी स्कूल में दिए गए भोजन से कई बच्चे बीमार हो गए थे।
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    इंदौर के शिशु कुंज स्कूल की कैंटीन में एक्सपायरी डेट के नमकीन और मसाले पाए गए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा की टीम ने स्कूल पहुंचकर मामले की जांच की।

जांच के दौरान टीम ने कैंटीन से कई सैंपल लिए। यह घटना तब सामने आई है जब योग दिवस के दिन इसी स्कूल में दिए गए भोजन से कई बच्चे बीमार हो गए थे।
    user_Aarti Raikwar
    Aarti Raikwar
    Media Consultant मल्हारगंज, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    25 min ago
  • इंदौर के दूधिया पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विभाग ने खुले बिजली तारों से सीधे कनेक्शन दिए हैं, जो विद्युत सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक व्यवस्था के तहत ही विद्युत आपूर्ति मिलनी चाहिए, लेकिन विभाग द्वारा इन मानकों की अनदेखी की जा रही है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी आंगनवाड़ी केंद्र के सामने बिजली से संबंधित एक हादसा हुआ था। इस घटना को एक साल से अधिक बीत जाने के बाद भी विभाग ने कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए हैं, जिससे लोगों में भविष्य में किसी जनहानि की आशंका बढ़ गई है। वे पूछ रहे हैं कि यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि खुले तारों से दिए गए कनेक्शन दुर्घटनाओं, करंट लगने और बिजली चोरी जैसी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं। इस मामले में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं, जैसे कि क्या खुले तारों से कनेक्शन देना विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है? बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कनेक्शन कैसे जारी किए जा सकते हैं? यदि विभाग द्वारा दिए गए अस्थायी कनेक्शन से कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या ऐसी व्यवस्था बिजली चोरी को बढ़ावा नहीं देती और बिजली चोरी व लाइन लॉस का आर्थिक बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ता है? इसके अतिरिक्त, पिछले हादसे के बाद भी सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए, यह भी एक बड़ा प्रश्न है। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली जैसी संवेदनशील सेवा में लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
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    इंदौर के दूधिया पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विभाग ने खुले बिजली तारों से सीधे कनेक्शन दिए हैं, जो विद्युत सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक व्यवस्था के तहत ही विद्युत आपूर्ति मिलनी चाहिए, लेकिन विभाग द्वारा इन मानकों की अनदेखी की जा रही है।

क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी आंगनवाड़ी केंद्र के सामने बिजली से संबंधित एक हादसा हुआ था। इस घटना को एक साल से अधिक बीत जाने के बाद भी विभाग ने कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए हैं, जिससे लोगों में भविष्य में किसी जनहानि की आशंका बढ़ गई है। वे पूछ रहे हैं कि यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि खुले तारों से दिए गए कनेक्शन दुर्घटनाओं, करंट लगने और बिजली चोरी जैसी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं।

इस मामले में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं, जैसे कि क्या खुले तारों से कनेक्शन देना विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है? बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कनेक्शन कैसे जारी किए जा सकते हैं? यदि विभाग द्वारा दिए गए अस्थायी कनेक्शन से कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या ऐसी व्यवस्था बिजली चोरी को बढ़ावा नहीं देती और बिजली चोरी व लाइन लॉस का आर्थिक बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ता है? इसके अतिरिक्त, पिछले हादसे के बाद भी सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए, यह भी एक बड़ा प्रश्न है।

स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली जैसी संवेदनशील सेवा में लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
    user_राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    Newspaper publisher Indore, Madhya Pradesh•
    1 hr ago
  • इंदौर के महूनाका चौराहे पर कुछ लड़कों द्वारा रील बनाए जाने का मामला सामने आया है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इंदौर को भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन इसकी ट्रैफिक व्यवस्था को लाख कोशिशों के बाद भी सुधारा नहीं जा सका है। महूनाका चौराहा, जो पाँच रास्तों का एक व्यस्त जंक्शन है और शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहों में से एक है, वहाँ लड़कों द्वारा ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाकर रील बनाना पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया है। शहर में ईस्ट और वेस्ट दो ट्रैफिक पुलिस स्टेशन, सैकड़ों पुलिस जवान, टीआई, एसीपी और पुलिस कमिश्नर जैसे अधिकारियों का लंबा-चौड़ा महकमा होने के बावजूद, पुलिस खुद को लाचार महसूस कर रही है। आरोप है कि जब पुलिसकर्मी इन लड़कों के खिलाफ कार्रवाई करने जाते हैं, तो कुछ नेताओं के पट्ठे उनसे उलझ जाते हैं और उनके ट्रांसफर या बर्खास्तगी की धमकी देते हैं। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है कि आखिर ऐसी परिस्थितियों में ट्रैफिक व्यवस्था कैसे सुधरेगी। यह सवाल उठाया गया है कि रील बनाने वाले लड़के पुलिस को क्या संदेश देना चाहते हैं, और पुलिस विभाग की इस लाचारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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    इंदौर के महूनाका चौराहे पर कुछ लड़कों द्वारा रील बनाए जाने का मामला सामने आया है, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इंदौर को भारत का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन इसकी ट्रैफिक व्यवस्था को लाख कोशिशों के बाद भी सुधारा नहीं जा सका है।

महूनाका चौराहा, जो पाँच रास्तों का एक व्यस्त जंक्शन है और शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहों में से एक है, वहाँ लड़कों द्वारा ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाकर रील बनाना पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया है। शहर में ईस्ट और वेस्ट दो ट्रैफिक पुलिस स्टेशन, सैकड़ों पुलिस जवान, टीआई, एसीपी और पुलिस कमिश्नर जैसे अधिकारियों का लंबा-चौड़ा महकमा होने के बावजूद, पुलिस खुद को लाचार महसूस कर रही है। आरोप है कि जब पुलिसकर्मी इन लड़कों के खिलाफ कार्रवाई करने जाते हैं, तो कुछ नेताओं के पट्ठे उनसे उलझ जाते हैं और उनके ट्रांसफर या बर्खास्तगी की धमकी देते हैं।

इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है कि आखिर ऐसी परिस्थितियों में ट्रैफिक व्यवस्था कैसे सुधरेगी। यह सवाल उठाया गया है कि रील बनाने वाले लड़के पुलिस को क्या संदेश देना चाहते हैं, और पुलिस विभाग की इस लाचारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
    user_Naseem Khan
    Naseem Khan
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, भारतीय बुद्ध समाज और वामसेफ के तत्वावधान में देशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जनगणना में जाति आधारित गणना और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जाति आधारित जनगणना न किए जाने का कड़ा विरोध जताना है। इसी क्रम में, आज 22 जून को पूरे देश में राष्ट्रीयव्यापी रैली और प्रदर्शन का आयोजन किया गया। यह आंदोलन राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल के निर्देशानुसार 31 राज्यों के 625 जिलों में संचालित हो रहा है। इसी के अंतर्गत, इंदौर में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश महामंत्री महेश यादव, भारतीय बुद्ध समाज की महिला शक्ति प्रमिला डोंगरे, और वामसेफ की कोषाध्यक्ष नीता के नेतृत्व में राजवाड़ा जनता चौक से कलेक्टर कार्यालय तक एक मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय पर राष्ट्रपति महोदय के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा।
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    राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, भारतीय बुद्ध समाज और वामसेफ के तत्वावधान में देशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जनगणना में जाति आधारित गणना और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जाति आधारित जनगणना न किए जाने का कड़ा विरोध जताना है। इसी क्रम में, आज 22 जून को पूरे देश में राष्ट्रीयव्यापी रैली और प्रदर्शन का आयोजन किया गया।

यह आंदोलन राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल के निर्देशानुसार 31 राज्यों के 625 जिलों में संचालित हो रहा है। इसी के अंतर्गत, इंदौर में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश महामंत्री महेश यादव, भारतीय बुद्ध समाज की महिला शक्ति प्रमिला डोंगरे, और वामसेफ की कोषाध्यक्ष नीता के नेतृत्व में राजवाड़ा जनता चौक से कलेक्टर कार्यालय तक एक मार्च निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय पर राष्ट्रपति महोदय के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा।
    user_सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
    सुनील कुशवाहा प्रदेश चीफ एडिटर इंडिया न्यूज़7
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र स्थित एमआर 4 रोड पर हुई कैंटीन संचालक विशाल उर्फ नानू वर्मा हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस मामले में पुलिस ने वारदात को अंजाम देने वाले एक नाबालिग और उसके साथी सुमित पिता शिवलाल अहिरवार, दोनों निवासी भगतसिंह नगर, को गिरफ्तार कर लिया है। एडिशनल डीसीपी के अनुसार, 19 जून की रात को विशाल उर्फ नानू पर दो लोगों ने चाकुओं से हमला किया था, जिसमें विशाल ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि मृतक विशाल के साथ उनका लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन की पार्किंग के ठेके को लेकर विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन जब यह विवाद बढ़ा, तो सुमित ने विशाल उर्फ नानू को पकड़ लिया और नाबालिग ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले, जिनमें दो आरोपी विशाल पर हमला करते हुए कैद हो गए थे। फुटेज के आधार पर गठित टीमों ने चंद घंटों के भीतर ही नाबालिग और उसके साथी सुमित को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी आरोपियों से बरामद कर लिया है।
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    इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र स्थित एमआर 4 रोड पर हुई कैंटीन संचालक विशाल उर्फ नानू वर्मा हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस मामले में पुलिस ने वारदात को अंजाम देने वाले एक नाबालिग और उसके साथी सुमित पिता शिवलाल अहिरवार, दोनों निवासी भगतसिंह नगर, को गिरफ्तार कर लिया है। एडिशनल डीसीपी के अनुसार, 19 जून की रात को विशाल उर्फ नानू पर दो लोगों ने चाकुओं से हमला किया था, जिसमें विशाल ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि मृतक विशाल के साथ उनका लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन की पार्किंग के ठेके को लेकर विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन जब यह विवाद बढ़ा, तो सुमित ने विशाल उर्फ नानू को पकड़ लिया और नाबालिग ने उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले, जिनमें दो आरोपी विशाल पर हमला करते हुए कैद हो गए थे। फुटेज के आधार पर गठित टीमों ने चंद घंटों के भीतर ही नाबालिग और उसके साथी सुमित को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी आरोपियों से बरामद कर लिया है।
    user_एस. एस. न्यूज सर्विस
    एस. एस. न्यूज सर्विस
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • इंदौर जिला कोर्ट में अभिभाषक संघ के चुनाव का आरंभ हो चुका है, जिसके तहत उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र जमा करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, इंदौर के एक बहुत चर्चित और हसमुख अभिभाषक रोहित दातरे ने भी अपने साथियों के साथ निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पहुंचकर अपना नामांकन जमा कराया है। वे अपने करियर का तीसरा चुनाव लड़ने जा रहे हैं और इस बार सचिव पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इससे पहले, रोहित दातरे ने सह सचिव पद पर अभिभाषक संघ का चुनाव लड़ा था और उसमें विजयी रहे थे। उनका पहला चुनाव कार्यकारिणी सदस्यों के लिए था, जिसमें उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत हासिल कर अपना नाम दर्ज कराया था। इस बार भी उन्हें इंदौर जिला कोर्ट के लगभग सभी वकीलों का भारी समर्थन मिल रहा है, और अधिकतर वकीलों ने उन्हें अपना मत देने का निश्चय कर लिया है। उनके सरल और हसमुख स्वभाव के कारण हर कोई उनका सम्मान करता है; जूनियर हो या सीनियर, सभी वकील उनसे मिलनसारिता से बात करते हैं और उनका हर टेबल पर परिचय है। कई सीनियर वकीलों ने तो उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी संपर्कों को साधना भी शुरू कर दिया है, और उम्मीद है कि इस बार भी वे यह चुनाव जीत सकते हैं।
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    इंदौर जिला कोर्ट में अभिभाषक संघ के चुनाव का आरंभ हो चुका है, जिसके तहत उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र जमा करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, इंदौर के एक बहुत चर्चित और हसमुख अभिभाषक रोहित दातरे ने भी अपने साथियों के साथ निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पहुंचकर अपना नामांकन जमा कराया है। वे अपने करियर का तीसरा चुनाव लड़ने जा रहे हैं और इस बार सचिव पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

इससे पहले, रोहित दातरे ने सह सचिव पद पर अभिभाषक संघ का चुनाव लड़ा था और उसमें विजयी रहे थे। उनका पहला चुनाव कार्यकारिणी सदस्यों के लिए था, जिसमें उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत हासिल कर अपना नाम दर्ज कराया था। इस बार भी उन्हें इंदौर जिला कोर्ट के लगभग सभी वकीलों का भारी समर्थन मिल रहा है, और अधिकतर वकीलों ने उन्हें अपना मत देने का निश्चय कर लिया है। उनके सरल और हसमुख स्वभाव के कारण हर कोई उनका सम्मान करता है; जूनियर हो या सीनियर, सभी वकील उनसे मिलनसारिता से बात करते हैं और उनका हर टेबल पर परिचय है। कई सीनियर वकीलों ने तो उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी संपर्कों को साधना भी शुरू कर दिया है, और उम्मीद है कि इस बार भी वे यह चुनाव जीत सकते हैं।
    user_Amin sisgar
    Amin sisgar
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • इंदौर के दूधिया पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है, जहाँ स्थानीय निवासियों ने विभाग पर खुले बिजली तारों से सीधे कनेक्शन देने का आरोप लगाया है। निवासियों का कहना है कि यह विद्युत सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत उपभोक्ताओं को केवल सुरक्षित और मानक व्यवस्था के माध्यम से ही विद्युत आपूर्ति प्रदान की जानी चाहिए। क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी एक आंगनवाड़ी केंद्र के सामने बिजली से संबंधित हादसा हो चुका था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विभाग ने कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए। लोगों के मन में यह आशंका बढ़ गई है कि भविष्य में किसी भी जनहानि की स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा। विशेषज्ञों का मत है कि खुले तारों से कनेक्शन देने से दुर्घटनाओं, करंट लगने और बिजली चोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जबकि विद्युत वितरण कंपनियों को कनेक्शन जारी करने से पहले मानक इंसुलेटेड केबल का उपयोग, सुरक्षित पोल और विद्युत लाइन व्यवस्था, मीटर तथा सर्विस लाइन की निर्धारित मानकों के अनुसार स्थापना, विद्युत सुरक्षा नियमों का पालन और उपभोक्ता व आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है। इस मामले में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं: क्या खुले तारों से कनेक्शन देना विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है? क्या बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं? यदि अस्थायी कनेक्शन से कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या ऐसी व्यवस्था बिजली चोरी को बढ़ावा नहीं देती, और बिजली चोरी व लाइन लॉस का आर्थिक बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ता है? स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, चेतावनी दी है कि बिजली जैसी अत्यंत संवेदनशील सेवा में लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
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    इंदौर के दूधिया पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है, जहाँ स्थानीय निवासियों ने विभाग पर खुले बिजली तारों से सीधे कनेक्शन देने का आरोप लगाया है। निवासियों का कहना है कि यह विद्युत सुरक्षा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत उपभोक्ताओं को केवल सुरक्षित और मानक व्यवस्था के माध्यम से ही विद्युत आपूर्ति प्रदान की जानी चाहिए।

क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष भी एक आंगनवाड़ी केंद्र के सामने बिजली से संबंधित हादसा हो चुका था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विभाग ने कोई स्थायी सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए। लोगों के मन में यह आशंका बढ़ गई है कि भविष्य में किसी भी जनहानि की स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा। विशेषज्ञों का मत है कि खुले तारों से कनेक्शन देने से दुर्घटनाओं, करंट लगने और बिजली चोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जबकि विद्युत वितरण कंपनियों को कनेक्शन जारी करने से पहले मानक इंसुलेटेड केबल का उपयोग, सुरक्षित पोल और विद्युत लाइन व्यवस्था, मीटर तथा सर्विस लाइन की निर्धारित मानकों के अनुसार स्थापना, विद्युत सुरक्षा नियमों का पालन और उपभोक्ता व आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है।

इस मामले में कई बड़े सवाल उठ रहे हैं: क्या खुले तारों से कनेक्शन देना विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है? क्या बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं? यदि अस्थायी कनेक्शन से कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या ऐसी व्यवस्था बिजली चोरी को बढ़ावा नहीं देती, और बिजली चोरी व लाइन लॉस का आर्थिक बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर क्यों पड़ता है? स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, चेतावनी दी है कि बिजली जैसी अत्यंत संवेदनशील सेवा में लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
    user_राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    Newspaper publisher Indore, Madhya Pradesh•
    1 hr ago
  • लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 14 छात्रों की मौत की खबर सामने आई है। इस दर्दनाक घटना के दौरान, छात्रों को जान बचाने के लिए बिजली के तार पकड़कर नीचे कूदने पर मजबूर होना पड़ा। बताया जा रहा है कि ऐसे बड़े हादसे सुरक्षा मानकों की कमी के कारण लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
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    लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 14 छात्रों की मौत की खबर सामने आई है। इस दर्दनाक घटना के दौरान, छात्रों को जान बचाने के लिए बिजली के तार पकड़कर नीचे कूदने पर मजबूर होना पड़ा। बताया जा रहा है कि ऐसे बड़े हादसे सुरक्षा मानकों की कमी के कारण लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
    user_Dharmendra kher
    Dharmendra kher
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
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