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जनपद जालौन पुलिस ने साइबर अपराध नियंत्रण और जनसेवा के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 210 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹35 लाख 70 हजार रुपये बताई जा रही है। इस विशेष अभियान के तहत खोए हुए मोबाइल लौटाकर जालौन पुलिस ने न केवल 210 परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई, बल्कि लोगों का दिल भी जीता और पुलिस के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत किया। यह सफलता साइबर क्राइम थाना जालौन और जनपद के विभिन्न थानों की एक संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण, सर्विलांस और लगातार प्रयासों के माध्यम से हासिल की। टीम ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों और अन्य जनपदों में सक्रिय होकर गुम हुए मोबाइल फोन का पता लगाया और उन्हें सफलतापूर्वक बरामद किया। इस उपलब्धि के बाद, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने पुलिस लाइन परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बरामद मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपे। लंबे समय से अपने फोन की तलाश कर रहे लोगों को जब उनके मोबाइल वापस मिले, तो उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी, और उन्होंने जालौन पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें दोबारा फोन मिलने की उम्मीद नहीं थी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गुमशुदा मोबाइलों की बरामदगी में साइबर क्राइम थाना की टीम ने आधुनिक तकनीक और साइबर ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आम जनता की समस्याओं का समाधान और उनकी संपत्ति की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि उनके साथ कोई ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड या डिजिटल अपराध होता है, तो वे तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, और किसी भी आपात स्थिति में 112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। जालौन पुलिस की इस कार्यवाही को जनपद में साइबर अपराध नियंत्रण और जनहित में की गई एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। एक ओर जहां ₹35.70 लाख मूल्य के मोबाइल फोन बरामद कर लोगों को उनकी खोई हुई संपत्ति वापस दिलाई गई, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी दिया गया कि पुलिस तकनीक के इस दौर में आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। जनपद भर में इस सराहनीय कार्य की चर्चा हो रही है, और मोबाइल स्वामियों के चेहरों पर लौटी मुस्कान पुलिस की मेहनत की सबसे बड़ी पहचान बन गई है।

1 day ago
user_Samir mansuri
Samir mansuri
Local News Reporter जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
1 day ago

जनपद जालौन पुलिस ने साइबर अपराध नियंत्रण और जनसेवा के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 210 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹35 लाख 70 हजार रुपये बताई जा रही है। इस विशेष अभियान के तहत खोए हुए मोबाइल लौटाकर जालौन पुलिस ने न केवल 210 परिवारों के चेहरों पर मुस्कान लौटाई, बल्कि लोगों का दिल भी जीता और पुलिस के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत किया। यह सफलता साइबर क्राइम थाना जालौन और जनपद के विभिन्न थानों की एक संयुक्त टीम ने तकनीकी विश्लेषण, सर्विलांस और लगातार प्रयासों के माध्यम से

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हासिल की। टीम ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों और अन्य जनपदों में सक्रिय होकर गुम हुए मोबाइल फोन का पता लगाया और उन्हें सफलतापूर्वक बरामद किया। इस उपलब्धि के बाद, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने पुलिस लाइन परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बरामद मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपे। लंबे समय से अपने फोन की तलाश कर रहे लोगों को जब उनके मोबाइल वापस मिले, तो उनके चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी, और उन्होंने जालौन पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें दोबारा फोन मिलने की उम्मीद नहीं थी। पुलिस अधीक्षक ने बताया

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कि गुमशुदा मोबाइलों की बरामदगी में साइबर क्राइम थाना की टीम ने आधुनिक तकनीक और साइबर ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आम जनता की समस्याओं का समाधान और उनकी संपत्ति की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि उनके साथ कोई ऑनलाइन ठगी, साइबर फ्रॉड या डिजिटल अपराध होता है, तो वे तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, और किसी भी आपात स्थिति में 112 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। जालौन पुलिस की इस कार्यवाही को जनपद

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में साइबर अपराध नियंत्रण और जनहित में की गई एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। एक ओर जहां ₹35.70 लाख मूल्य के मोबाइल फोन बरामद कर लोगों को उनकी खोई हुई संपत्ति वापस दिलाई गई, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी दिया गया कि पुलिस तकनीक के इस दौर में आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। जनपद भर में इस सराहनीय कार्य की चर्चा हो रही है, और मोबाइल स्वामियों के चेहरों पर लौटी मुस्कान पुलिस की मेहनत की सबसे बड़ी पहचान बन गई है।

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  • जालौन जिले के कुठोंद थाना क्षेत्र में जच्चा और बच्चा दोनों की मौत के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने जांच बैठा दी है। यह कार्रवाई शुरू एप्प पर प्रकाशित खबर के असर के रूप रूप में सामने आई है, जिसकी खबर रंग लाई और प्रशासन ने संज्ञान लिया।
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    जालौन जिले के कुठोंद थाना क्षेत्र में जच्चा और बच्चा दोनों की मौत के मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने जांच बैठा दी है। यह कार्रवाई शुरू एप्प पर प्रकाशित खबर के असर के रूप रूप में सामने आई है, जिसकी खबर रंग लाई और प्रशासन ने संज्ञान लिया।
    user_Deves Swarnkar  द न्यूज जालौन
    Deves Swarnkar द न्यूज जालौन
    जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    12 min ago
  • इंसानियत ग्रुप ने एक मानवीय पहल करते हुए सहारनपुर में फँसे दिव्यांग नीलू विश्वकर्मा को उनके गृह जनपद जालौन तक सुरक्षित पहुँचाया। एक हाथ और एक पैर गँवा चुके नीलू पिछले चार महीनों से अपने घर नहीं लौट पा रहे थे। ग्रुप के प्रयासों से उन्हें सहारनपुर से झांसी और फिर उरई होते हुए उनके गाँव तक सकुशल पहुँचाया गया। इंसानियत ग्रुप के संस्थापक सुमित प्रताप सिंह ने बताया कि रविवार शाम लगभग पाँच बजे नीलू की वृद्ध माँ और आटा क्षेत्र के संधी गाँव निवासी ओमजी ने सहायता के लिए अपील की थी, जिसके बाद समूह के सदस्यों ने तुरंत समन्वय स्थापित कर उनकी यात्रा की व्यवस्था शुरू कर दी। यात्रा को लेकर नीलू विश्वकर्मा शुरुआत में भयभीत और भावुक हो गए थे, लेकिन टीम के सदस्यों ने वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें पूर्ण सुरक्षा का भरोसा दिलाया। रात्रि लगभग एक बजे से ही ग्रुप के सदस्य सेवा कार्य में जुट गए, जिसमें बालकृष्ण दीक्षित अपने परिवार सहित पूरी रात सक्रिय रहे, जबकि डॉ. पुष्पेंद्र गुर्जर और रजत ने भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। नीलू विश्वकर्मा को झांसी रेलवे स्टेशन पर रिसीव करके उरई के लिए रवाना किया गया, जहाँ से उनके गाँव तक पहुँचाने की आगे की व्यवस्था की गई। सुमित प्रताप सिंह ने बताया कि जो काम पिछले चार महीनों में संभव नहीं हो पाया था, उसे इंसानियत ग्रुप ने लगभग 10 घंटे में पूरा कर दिखाया। उन्होंने इस अभियान में सहयोग करने वाले सभी साथियों का आभार व्यक्त किया। नीलू विश्वकर्मा के घर पहुँचने पर उनकी 80 वर्षीय माँ की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। स्थानीय लोगों ने इंसानियत ग्रुप की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं, और समूह माँ-बेटे का मिलन कराने में सहारा बना।
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    इंसानियत ग्रुप ने एक मानवीय पहल करते हुए सहारनपुर में फँसे दिव्यांग नीलू विश्वकर्मा को उनके गृह जनपद जालौन तक सुरक्षित पहुँचाया। एक हाथ और एक पैर गँवा चुके नीलू पिछले चार महीनों से अपने घर नहीं लौट पा रहे थे। ग्रुप के प्रयासों से उन्हें सहारनपुर से झांसी और फिर उरई होते हुए उनके गाँव तक सकुशल पहुँचाया गया। इंसानियत ग्रुप के संस्थापक सुमित प्रताप सिंह ने बताया कि रविवार शाम लगभग पाँच बजे नीलू की वृद्ध माँ और आटा क्षेत्र के संधी गाँव निवासी ओमजी ने सहायता के लिए अपील की थी, जिसके बाद समूह के सदस्यों ने तुरंत समन्वय स्थापित कर उनकी यात्रा की व्यवस्था शुरू कर दी।

यात्रा को लेकर नीलू विश्वकर्मा शुरुआत में भयभीत और भावुक हो गए थे, लेकिन टीम के सदस्यों ने वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें पूर्ण सुरक्षा का भरोसा दिलाया। रात्रि लगभग एक बजे से ही ग्रुप के सदस्य सेवा कार्य में जुट गए, जिसमें बालकृष्ण दीक्षित अपने परिवार सहित पूरी रात सक्रिय रहे, जबकि डॉ. पुष्पेंद्र गुर्जर और रजत ने भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। नीलू विश्वकर्मा को झांसी रेलवे स्टेशन पर रिसीव करके उरई के लिए रवाना किया गया, जहाँ से उनके गाँव तक पहुँचाने की आगे की व्यवस्था की गई।

सुमित प्रताप सिंह ने बताया कि जो काम पिछले चार महीनों में संभव नहीं हो पाया था, उसे इंसानियत ग्रुप ने लगभग 10 घंटे में पूरा कर दिखाया। उन्होंने इस अभियान में सहयोग करने वाले सभी साथियों का आभार व्यक्त किया। नीलू विश्वकर्मा के घर पहुँचने पर उनकी 80 वर्षीय माँ की आँखों से खुशी के आँसू छलक पड़े। स्थानीय लोगों ने इंसानियत ग्रुप की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं, और समूह माँ-बेटे का मिलन कराने में सहारा बना।
    user_प्रदीप महतवानी
    प्रदीप महतवानी
    Local News Reporter Jalaun, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • सोमवार को जालौन तहसील परिसर में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक क्षण देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि जनता का विश्वास और सम्मान किसी भी अधिकारी की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। करीब 35 किलोमीटर दूर से आई एक 14 वर्षीय बालिका काव्या ने अपने पसंदीदा जॉइंट मजिस्ट्रेट और उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही से भेंट की। वह किसी शिकायत या व्यक्तिगत कार्य के लिए नहीं, बल्कि उन्हें स्वयं अपने हाथों से बनाया हुआ उनका सुंदर स्केच उपहार में देने पहुंची थी। यह पल वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यादगार बन गया, जब नन्ही काव्या ने एसडीएम को यह चित्र भेंट किया और उसकी कला, मेहनत तथा सम्मान की भावना ने सभी का दिल जीत लिया। जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही अपनी सरल कार्यशैली, जनता से सीधे संवाद, जनसुनवाई और समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जाने जाते हैं, जिसके कारण उन्होंने जालौन में अपनी तैनाती के दौरान आम लोगों के बीच एक विशेष पहचान बनाई है। यही वजह है कि अब बच्चे भी उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानने लगे हैं। काव्या ने बताया कि वह एसडीएम रिंकू सिंह राही के कार्यों और जनता के प्रति उनकी सकारात्मक सोच से बहुत प्रभावित है, और इसी प्रेरणा से उसने उनका स्केच बनाकर स्वयं उन्हें भेंट करने का निर्णय लिया। एसडीएम रिंकू सिंह राही ने भी बच्ची का स्नेहपूर्ण स्वागत किया, उसकी प्रतिभा की सराहना की और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उसे निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। यह घटना मात्र एक स्केच भेंट करने से कहीं अधिक थी; यह प्रशासन और जनता के बीच मजबूत होते विश्वास, सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक है। नन्ही काव्या का यह लगाव दर्शाता है कि जब कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करता है, तो वह केवल सरकारी दायरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के दिलों में भी अपनी जगह बना लेता है। यह संदेश देता है कि अधिकारी बहुत होते हैं, लेकिन जनता का असली अफसर वही बनता है, जिसे लोग सम्मान के साथ याद करें और बच्चे अपना आदर्श मानें।
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    सोमवार को जालौन तहसील परिसर में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक क्षण देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि जनता का विश्वास और सम्मान किसी भी अधिकारी की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। करीब 35 किलोमीटर दूर से आई एक 14 वर्षीय बालिका काव्या ने अपने पसंदीदा जॉइंट मजिस्ट्रेट और उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही से भेंट की। वह किसी शिकायत या व्यक्तिगत कार्य के लिए नहीं, बल्कि उन्हें स्वयं अपने हाथों से बनाया हुआ उनका सुंदर स्केच उपहार में देने पहुंची थी। यह पल वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यादगार बन गया, जब नन्ही काव्या ने एसडीएम को यह चित्र भेंट किया और उसकी कला, मेहनत तथा सम्मान की भावना ने सभी का दिल जीत लिया।

जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही अपनी सरल कार्यशैली, जनता से सीधे संवाद, जनसुनवाई और समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जाने जाते हैं, जिसके कारण उन्होंने जालौन में अपनी तैनाती के दौरान आम लोगों के बीच एक विशेष पहचान बनाई है। यही वजह है कि अब बच्चे भी उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानने लगे हैं। काव्या ने बताया कि वह एसडीएम रिंकू सिंह राही के कार्यों और जनता के प्रति उनकी सकारात्मक सोच से बहुत प्रभावित है, और इसी प्रेरणा से उसने उनका स्केच बनाकर स्वयं उन्हें भेंट करने का निर्णय लिया। एसडीएम रिंकू सिंह राही ने भी बच्ची का स्नेहपूर्ण स्वागत किया, उसकी प्रतिभा की सराहना की और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उसे निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

यह घटना मात्र एक स्केच भेंट करने से कहीं अधिक थी; यह प्रशासन और जनता के बीच मजबूत होते विश्वास, सम्मान और आत्मीयता का प्रतीक है। नन्ही काव्या का यह लगाव दर्शाता है कि जब कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करता है, तो वह केवल सरकारी दायरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के दिलों में भी अपनी जगह बना लेता है। यह संदेश देता है कि अधिकारी बहुत होते हैं, लेकिन जनता का असली अफसर वही बनता है, जिसे लोग सम्मान के साथ याद करें और बच्चे अपना आदर्श मानें।
    user_Kishan kumar
    Kishan kumar
    Local News Reporter जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • जालौन जनपद में जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही की कार्यशैली एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर एक 14 वर्षीय बच्ची अपने छोटे भाई के साथ लगभग 35 किलोमीटर दूर से तहसील जालौन पहुंची और उन्हें अपने हाथों से बनाया गया उनका स्केच भेंट किया। यह भावुक और प्रेरणादायक दृश्य तहसील जालौन में देखने को मिला, जिसकी जनपद में खूब सराहना हो रही है। बच्ची ने बताया कि वह जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही के कार्यों और जनता के प्रति उनके व्यवहार से बहुत प्रभावित है, जिसके चलते ही वह अपने भाई के साथ उनसे मिलने आई थी। बातचीत के दौरान बच्ची ने यह भी बताया कि उसका सपना आगे चलकर एक सफल आर्टिस्ट बनने का है। उसने स्पष्ट किया कि वह ऐसे अधिकारियों से प्रेरणा लेती है जो समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हैं। तहसील परिसर में बड़ी संख्या में अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे फरियादियों की उपस्थिति भी इस बात का प्रमाण थी कि जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही जनता की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से निस्तारण कर रहे हैं। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली की सराहना केवल बुजुर्ग और आमजन ही नहीं, बल्कि बच्चे भी कर रहे हैं।
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    जालौन जनपद में जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही की कार्यशैली एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर एक 14 वर्षीय बच्ची अपने छोटे भाई के साथ लगभग 35 किलोमीटर दूर से तहसील जालौन पहुंची और उन्हें अपने हाथों से बनाया गया उनका स्केच भेंट किया। यह भावुक और प्रेरणादायक दृश्य तहसील जालौन में देखने को मिला, जिसकी जनपद में खूब सराहना हो रही है।

बच्ची ने बताया कि वह जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही के कार्यों और जनता के प्रति उनके व्यवहार से बहुत प्रभावित है, जिसके चलते ही वह अपने भाई के साथ उनसे मिलने आई थी। बातचीत के दौरान बच्ची ने यह भी बताया कि उसका सपना आगे चलकर एक सफल आर्टिस्ट बनने का है। उसने स्पष्ट किया कि वह ऐसे अधिकारियों से प्रेरणा लेती है जो समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करते हैं।

तहसील परिसर में बड़ी संख्या में अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे फरियादियों की उपस्थिति भी इस बात का प्रमाण थी कि जॉइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही जनता की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से निस्तारण कर रहे हैं। यही कारण है कि उनकी कार्यशैली की सराहना केवल बुजुर्ग और आमजन ही नहीं, बल्कि बच्चे भी कर रहे हैं।
    user_Sanjay kumar Pattakar
    Sanjay kumar Pattakar
    Local News Reporter जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • इंसानियत ग्रुप ने एक अविश्वसनीय कार्य को संभव कर दिखाया है, जो चार महीनों से नहीं हो पाया था उसे मात्र 10 घंटे में पूरा कर दिखाया है। रात्रि 1 बजे अपनी नींद और काम छोड़कर समूह के सदस्य एक ऐसे दिव्यांग व्यक्ति की मदद में जुट गए हैं, जिसके लिए उसकी 80 वर्षीय माँ बेसब्री से राह देख रही थी। यह भावनात्मक और सराहनीय कार्य कई लोगों को रुला गया है। चार महीने से, नीलू नामक यह दिव्यांग व्यक्ति, जिसका एक पैर और एक हाथ नहीं है, जिला जालौन स्थित अपने घर वापस लौटना चाहता था, पर कोई मददगार न होने के कारण ऐसा नहीं कर पा रहा था। कल शाम 5 बजे, उसकी माँ और आटा संधी गाँव के ओम जी ने इंसानियत ग्रुप से मदद माँगी। ग्रुप ने 24 घंटे भी पूरे होने से पहले ही यह मदद पूरी कर दी है। बालकृष्ण दीक्षित जी अपने परिवार सहित पूरी रात्रि डटे रहे, और डॉ. पुष्पेंद्र गुर्जर जी तथा रजत भाई का भी विशेष सहयोग रहा, जिसके कारण नीलू उधर से झाँसी आ पा रहे हैं। नीलू आज दोपहर 12 बजे झाँसी में विश्वकर्मा जी के साथ पहुँचेंगे। झाँसी के मददगार भाइयों से निवेदन किया गया है कि वे समय पर पहुँचकर नीलू को ट्रेन से उतारें और उरई तक पहुँचाने का कार्य करें, क्योंकि वह अकेले न तो ट्रेन से उतर सकते हैं और न ही बैठ सकते हैं। यह कार्य हम सभी को मिलकर पूरा करना है।
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    इंसानियत ग्रुप ने एक अविश्वसनीय कार्य को संभव कर दिखाया है, जो चार महीनों से नहीं हो पाया था उसे मात्र 10 घंटे में पूरा कर दिखाया है। रात्रि 1 बजे अपनी नींद और काम छोड़कर समूह के सदस्य एक ऐसे दिव्यांग व्यक्ति की मदद में जुट गए हैं, जिसके लिए उसकी 80 वर्षीय माँ बेसब्री से राह देख रही थी। यह भावनात्मक और सराहनीय कार्य कई लोगों को रुला गया है।

चार महीने से, नीलू नामक यह दिव्यांग व्यक्ति, जिसका एक पैर और एक हाथ नहीं है, जिला जालौन स्थित अपने घर वापस लौटना चाहता था, पर कोई मददगार न होने के कारण ऐसा नहीं कर पा रहा था। कल शाम 5 बजे, उसकी माँ और आटा संधी गाँव के ओम जी ने इंसानियत ग्रुप से मदद माँगी। ग्रुप ने 24 घंटे भी पूरे होने से पहले ही यह मदद पूरी कर दी है।

बालकृष्ण दीक्षित जी अपने परिवार सहित पूरी रात्रि डटे रहे, और डॉ. पुष्पेंद्र गुर्जर जी तथा रजत भाई का भी विशेष सहयोग रहा, जिसके कारण नीलू उधर से झाँसी आ पा रहे हैं। नीलू आज दोपहर 12 बजे झाँसी में विश्वकर्मा जी के साथ पहुँचेंगे। झाँसी के मददगार भाइयों से निवेदन किया गया है कि वे समय पर पहुँचकर नीलू को ट्रेन से उतारें और उरई तक पहुँचाने का कार्य करें, क्योंकि वह अकेले न तो ट्रेन से उतर सकते हैं और न ही बैठ सकते हैं। यह कार्य हम सभी को मिलकर पूरा करना है।
    user_Bheem rajawat 9628800458
    Bheem rajawat 9628800458
    पत्रकार जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • जालौन तहसील परिसर में सोमवार को एक भावुक और प्रेरणादायक क्षण देखने को मिला, जब 14 वर्षीय काव्या अपने पसंदीदा जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम रिंकू सिंह राही से मिलने लगभग 35 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंची। काव्या किसी शिकायत या व्यक्तिगत कार्य से नहीं, बल्कि अपने हाथों से बनाया गया एसडीएम का एक सुंदर स्केच भेंट करने आई थी। तहसील परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में जब उसने अपना बनाया हुआ चित्र एसडीएम को सौंपा, तो वहां उपस्थित सभी लोग उसकी प्रतिभा और सम्मान की भावना से प्रभावित हुए। जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए पहचाने जाने वाले एसडीएम रिंकू सिंह राही ने भी बच्ची का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने काव्या की कला और मेहनत की सराहना करते हुए उसे उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं तथा निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। काव्या ने बताया कि वह एसडीएम रिंकू सिंह राही के कार्यों और जनता के प्रति उनकी संवेदनशील कार्यशैली से प्रभावित है, और इसी प्रेरणा से उसने उनका स्केच तैयार किया तथा स्वयं आकर उन्हें भेंट करने का निर्णय लिया। यह अवसर केवल एक स्केच भेंट करने का नहीं था, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच बने विश्वास, सम्मान और आत्मीयता का भी प्रतीक बन गया। इस नन्ही बालिका का स्नेह यह दर्शाता है कि जब कोई अधिकारी अपनी कार्यशैली से लोगों के दिलों में जगह बना लेता है, तो सम्मान और प्रेम स्वतः ही उसके हिस्से में आ जाता है; अधिकारी अनेक होते हैं, लेकिन जनता के दिलों पर राज करने वाले विरले ही होते हैं।
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    जालौन तहसील परिसर में सोमवार को एक भावुक और प्रेरणादायक क्षण देखने को मिला, जब 14 वर्षीय काव्या अपने पसंदीदा जॉइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम रिंकू सिंह राही से मिलने लगभग 35 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंची। काव्या किसी शिकायत या व्यक्तिगत कार्य से नहीं, बल्कि अपने हाथों से बनाया गया एसडीएम का एक सुंदर स्केच भेंट करने आई थी।

तहसील परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में जब उसने अपना बनाया हुआ चित्र एसडीएम को सौंपा, तो वहां उपस्थित सभी लोग उसकी प्रतिभा और सम्मान की भावना से प्रभावित हुए। जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए पहचाने जाने वाले एसडीएम रिंकू सिंह राही ने भी बच्ची का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने काव्या की कला और मेहनत की सराहना करते हुए उसे उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं तथा निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। काव्या ने बताया कि वह एसडीएम रिंकू सिंह राही के कार्यों और जनता के प्रति उनकी संवेदनशील कार्यशैली से प्रभावित है, और इसी प्रेरणा से उसने उनका स्केच तैयार किया तथा स्वयं आकर उन्हें भेंट करने का निर्णय लिया।

यह अवसर केवल एक स्केच भेंट करने का नहीं था, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच बने विश्वास, सम्मान और आत्मीयता का भी प्रतीक बन गया। इस नन्ही बालिका का स्नेह यह दर्शाता है कि जब कोई अधिकारी अपनी कार्यशैली से लोगों के दिलों में जगह बना लेता है, तो सम्मान और प्रेम स्वतः ही उसके हिस्से में आ जाता है; अधिकारी अनेक होते हैं, लेकिन जनता के दिलों पर राज करने वाले विरले ही होते हैं।
    user_अखिलेश सोनी
    अखिलेश सोनी
    Court reporter जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    16 hrs ago
  • जालौन के कोतवाली क्षेत्र में चोरों के हौसले बुलंद दिख रहे हैं, जहाँ एक ही रात में दो अलग-अलग गांवों में चोरी की बड़ी वारदातों से ग्रामीणों में दहशत और सनसनी फैल गई है। इन घटनाओं ने पुलिस की रात्रि गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात बदमाशों ने बंद और रिहायशी घरों को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के जेवरात और नकदी चुरा ली है, जिसके बाद ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। छिरिया चौकी क्षेत्र के सहाव गांव में बाबूराम पुत्र ब्रंची के बंद घर में रात के समय चोरों ने धावा बोल दिया। पीड़ित परिवार के अनुसार, चोर लगभग 5 तोला सोने के आभूषण और ₹65 हजार नकद लेकर फरार हो गए, जिनकी कुल कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई जा रही है। सुबह घटना की जानकारी होने पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना पाकर छिरिया चौकी प्रभारी आलोक पाल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर मामले की जाँच में जुटी हुई है। इसी रात कोतवाली क्षेत्र के औरेखी गांव में भी चोरों ने प्रताप कुशवाहा के घर को निशाना बनाया। देर रात घर में घुसे बदमाशों ने सोने-चांदी के जेवरात, ₹50 हजार नकद और अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया। पीड़ित परिवार के मुताबिक, चोरी गए सामान की कीमत करीब 3 लाख रुपये है। सुबह चोरी का पता चलते ही गांव में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुँची पुलिस ने मौका मुआयना किया और जाँच शुरू कर दी है, साथ ही आसपास के लोगों से पूछताछ कर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। एक ही रात में हुई इन दो बड़ी चोरियों से ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रात्रि गश्त बढ़ाई जानी चाहिए और जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोनों मामलों की गंभीरता से जाँच की जा रही है और जल्द ही चोरी की घटनाओं का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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    जालौन के कोतवाली क्षेत्र में चोरों के हौसले बुलंद दिख रहे हैं, जहाँ एक ही रात में दो अलग-अलग गांवों में चोरी की बड़ी वारदातों से ग्रामीणों में दहशत और सनसनी फैल गई है। इन घटनाओं ने पुलिस की रात्रि गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात बदमाशों ने बंद और रिहायशी घरों को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये के जेवरात और नकदी चुरा ली है, जिसके बाद ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।

छिरिया चौकी क्षेत्र के सहाव गांव में बाबूराम पुत्र ब्रंची के बंद घर में रात के समय चोरों ने धावा बोल दिया। पीड़ित परिवार के अनुसार, चोर लगभग 5 तोला सोने के आभूषण और ₹65 हजार नकद लेकर फरार हो गए, जिनकी कुल कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई जा रही है। सुबह घटना की जानकारी होने पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना पाकर छिरिया चौकी प्रभारी आलोक पाल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर मामले की जाँच में जुटी हुई है।

इसी रात कोतवाली क्षेत्र के औरेखी गांव में भी चोरों ने प्रताप कुशवाहा के घर को निशाना बनाया। देर रात घर में घुसे बदमाशों ने सोने-चांदी के जेवरात, ₹50 हजार नकद और अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया। पीड़ित परिवार के मुताबिक, चोरी गए सामान की कीमत करीब 3 लाख रुपये है। सुबह चोरी का पता चलते ही गांव में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुँची पुलिस ने मौका मुआयना किया और जाँच शुरू कर दी है, साथ ही आसपास के लोगों से पूछताछ कर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।

एक ही रात में हुई इन दो बड़ी चोरियों से ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए रात्रि गश्त बढ़ाई जानी चाहिए और जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोनों मामलों की गंभीरता से जाँच की जा रही है और जल्द ही चोरी की घटनाओं का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
    user_Chhatrapal singh
    Chhatrapal singh
    Local News Reporter जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    17 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठ गए हैं, जहाँ कुठोंद थाना क्षेत्र के एक अस्पताल में इलाज के दौरान आज फिर एक जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दो दिन पहले ही एक अन्य अस्पताल में हुई जच्चा-बच्चा की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था। इस खबर ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर कर दिया है और उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है। लगातार हो रही इन मौतों से क्षेत्र में चिंता का माहौल है।
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    उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठ गए हैं, जहाँ कुठोंद थाना क्षेत्र के एक अस्पताल में इलाज के दौरान आज फिर एक जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दो दिन पहले ही एक अन्य अस्पताल में हुई जच्चा-बच्चा की मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था।

इस खबर ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर कर दिया है और उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है। लगातार हो रही इन मौतों से क्षेत्र में चिंता का माहौल है।
    user_Deves Swarnkar  द न्यूज जालौन
    Deves Swarnkar द न्यूज जालौन
    जालौन, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
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