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वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में 12 जून 2026 को एक नया इतिहास रचा गया, जब टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क आधिकारिक तौर पर दुनिया के पहले 'ट्रिलियनेअर' (खरबपति) बन गए। यह अभूतपूर्व उपलब्धि उनकी अंतरिक्ष अनुसंधान कंपनी 'स्पेसएक्स' के ऐतिहासिक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के कारण हासिल हुई। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते ही स्पेसएक्स का मूल्यांकन 2 लाख करोड़ डॉलर के पार चला गया। इस घटना के परिणामस्वरूप, मस्क की कुल व्यक्तिगत संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 91 लाख करोड़ रुपये से अधिक) हो गई है, जिससे उन्होंने वैश्विक अमीरों की सूची में एक नया सर्वोच्च शिखर प्राप्त किया है। इस प्रकार, दुनिया को अपना पहला खरबपति मिला, और एलन मस्क ने आधिकारिक तौर पर यह ऐतिहासिक दर्जा हासिल किया।

6 days ago
user_Santossh Javare
Santossh Javare
India•
6 days ago

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में 12 जून 2026 को एक नया इतिहास रचा गया, जब टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क आधिकारिक तौर पर दुनिया के पहले 'ट्रिलियनेअर' (खरबपति) बन गए। यह अभूतपूर्व उपलब्धि उनकी अंतरिक्ष अनुसंधान कंपनी 'स्पेसएक्स' के ऐतिहासिक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के कारण हासिल हुई। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते ही स्पेसएक्स का मूल्यांकन 2 लाख करोड़ डॉलर के पार चला गया। इस घटना के परिणामस्वरूप, मस्क की कुल व्यक्तिगत संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 91 लाख करोड़ रुपये से अधिक) हो गई है, जिससे उन्होंने वैश्विक अमीरों की सूची में एक नया सर्वोच्च शिखर प्राप्त किया है। इस प्रकार, दुनिया को अपना पहला खरबपति मिला, और एलन मस्क ने आधिकारिक तौर पर यह ऐतिहासिक दर्जा हासिल किया।

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  • वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए। सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है। यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
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    वाराणसी की एक ऐतिहासिक मस्जिद को लेकर उठे विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सिर्फ ज़मीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भी प्रश्न उठा रहे हैं कि क्या इतिहास को नज़रअंदाज़ करके कोई फैसला किया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब यह दावा किया गया कि एक प्राचीन मस्जिद रेलवे की ज़मीन पर बनी हुई है या उसने रेलवे की भूमि पर कब्ज़ा कर रखा है। इस पर जनता पूछ रही है कि यदि यह मस्जिद वास्तव में सात-आठ सौ वर्ष पुरानी है, तो वह भारतीय रेलवे की ज़मीन पर कैसे कब्ज़ा कर सकती है, जबकि भारतीय रेलवे का इतिहास स्वयं लगभग डेढ़ से पौने दो सौ वर्ष पुराना है। यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर भावनाओं से नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेज़ों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

सवाल यह है कि क्या कोई इमारत अपने अस्तित्व के कई सौ वर्ष बाद बने किसी संस्थान की ज़मीन पर कब्ज़ा कर सकती है? यह भी स्पष्ट किया गया है कि चाहे ज़मीन किसी सरकारी संस्था की हो या किसी धार्मिक स्थल की, कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि वास्तव में ज़मीन रेलवे की है तो उसके प्रमाण जनता के सामने रखे जाएँ, और यदि ऐतिहासिक रिकॉर्ड मस्जिद के पक्ष में हैं तो उन्हें भी ईमानदारी के साथ स्वीकार किया जाए। दुर्भाग्य से, देश में ऐसे मामलों को अक्सर तथ्यों की अपेक्षा राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर अधिक उछाला जाता है।

यह देश संविधान से चलेगा, शोर-शराबे से नहीं। चाहे ऐतिहासिक विरासत हो, धार्मिक स्थल हो या सरकारी संस्थान, हर मामले का फैसला अदालतों, कानूनी दस्तावेज़ों और प्रमाणिक रिकॉर्ड के आधार पर होना चाहिए। किसी भी समुदाय की भावनाओं से खेलना या इतिहास को अपनी सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करना देश के हित में नहीं है। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार, रेलवे प्रशासन और संबंधित संस्थाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ सभी तथ्य जनता के सामने रखें। लोकतंत्र की मांग है कि न्याय की सर्वोच्चता हो, न कि शक्ति और प्रभाव की। यदि सच्चाई किसी एक पक्ष के साथ है, तो उसे छिपाने के बजाय सामने लाया जाए, ताकि अफवाहों, शंकाओं और निराधार आरोपों का हमेशा के लिए अंत हो सके।
    user_Zafar Rabbani
    Zafar Rabbani
    पोठिया, किशनगंज, बिहार•
    3 hrs ago
  • कटिहार रेल मंडल के तहत कटिहार–कुमेदपुर एवं कटिहार–मुकुरिया रेल दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत कटिहार–कुरेठा और कटिहार–सोनैली के बीच नवनिर्मित ब्रॉड गेज रेल लाइन का वैधानिक निरीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। पूर्वोत्तर सीमांत परिमंडल (कोलकाता) के रेल संरक्षा आयुक्त सुमित सिंघल ने इस रेलखंड का तीन दिनों तक गहन निरीक्षण करने के साथ-साथ 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड ट्रायल का परीक्षण भी किया। निरीक्षण एवं परीक्षण में सफलता मिलने के बाद, उन्होंने इस रेलखंड पर ट्रेनों के 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से परिचालन की अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है। कटिहार रेल मंडल के डीआरएम किरेंद्र नरह ने इस परियोजना के संबंध में बताया कि लगभग 948 करोड़ रुपये की लागत से 64 किलोमीटर लंबी यह परियोजना तैयार हुई है, जिसमें कुल 16 रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इस मौके पर सीनियर डीसीएम सह पीआरओ अनूप कुमार सिंह सहित कई अन्य रेल अधिकारी भी उपस्थित थे। रेल दोहरीकरण कार्य के दौरान नॉन-इंटरलॉकिंग के कारण दो दर्जन से अधिक ट्रेनों को रद्द किया गया था, उनके समय में परिवर्तन किया गया था, अथवा उनके मार्ग बदले गए थे। अब फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के उपरांत रेल परिचालन के पूरी तरह सामान्य होने की आशा है। डीआरएम ने कहा कि दोहरी रेल लाइन शुरू होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों पर से दबाव कम होगा, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा, और सीमांचल के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत एवं सुगम बनेगी।
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    कटिहार रेल मंडल के तहत कटिहार–कुमेदपुर एवं कटिहार–मुकुरिया रेल दोहरीकरण परियोजना के अंतर्गत कटिहार–कुरेठा और कटिहार–सोनैली के बीच नवनिर्मित ब्रॉड गेज रेल लाइन का वैधानिक निरीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। पूर्वोत्तर सीमांत परिमंडल (कोलकाता) के रेल संरक्षा आयुक्त सुमित सिंघल ने इस रेलखंड का तीन दिनों तक गहन निरीक्षण करने के साथ-साथ 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड ट्रायल का परीक्षण भी किया। निरीक्षण एवं परीक्षण में सफलता मिलने के बाद, उन्होंने इस रेलखंड पर ट्रेनों के 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से परिचालन की अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है।

कटिहार रेल मंडल के डीआरएम किरेंद्र नरह ने इस परियोजना के संबंध में बताया कि लगभग 948 करोड़ रुपये की लागत से 64 किलोमीटर लंबी यह परियोजना तैयार हुई है, जिसमें कुल 16 रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इस मौके पर सीनियर डीसीएम सह पीआरओ अनूप कुमार सिंह सहित कई अन्य रेल अधिकारी भी उपस्थित थे।

रेल दोहरीकरण कार्य के दौरान नॉन-इंटरलॉकिंग के कारण दो दर्जन से अधिक ट्रेनों को रद्द किया गया था, उनके समय में परिवर्तन किया गया था, अथवा उनके मार्ग बदले गए थे। अब फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के उपरांत रेल परिचालन के पूरी तरह सामान्य होने की आशा है। डीआरएम ने कहा कि दोहरी रेल लाइन शुरू होने से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों पर से दबाव कम होगा, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा, और सीमांचल के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत एवं सुगम बनेगी।
    user_जयप्रकाश भगत
    जयप्रकाश भगत
    आज़मनगर, कटिहार, बिहार•
    5 hrs ago
  • पाकुड़ जिला अदालत ने मंतोष कुमार सिंह की निर्मम हत्या और अपहरण के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने इस मामले में राजन साह और मिलन कुमार साह नामक दो दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या की भयावह क्रूरता को देखते हुए एक विशेष आदेश भी दिया है। इसके तहत, दोनों दोषियों को उनकी सभी सजाएं एक के बाद एक, अलग-अलग भुगतनी होंगी, जिसे प्रभावी रूप से दोहरी उम्रकैद माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है। यह घटना मार्च 2024 में हुई थी, जब मंतोष को पत्थर से कुचलकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था।
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    पाकुड़ जिला अदालत ने मंतोष कुमार सिंह की निर्मम हत्या और अपहरण के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने इस मामले में राजन साह और मिलन कुमार साह नामक दो दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

न्यायालय ने हत्या की भयावह क्रूरता को देखते हुए एक विशेष आदेश भी दिया है। इसके तहत, दोनों दोषियों को उनकी सभी सजाएं एक के बाद एक, अलग-अलग भुगतनी होंगी, जिसे प्रभावी रूप से दोहरी उम्रकैद माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक दोषी पर एक-एक लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है।

यह घटना मार्च 2024 में हुई थी, जब मंतोष को पत्थर से कुचलकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था।
    user_Himanshi Singh
    Himanshi Singh
    पाकुड़, पाकुड़, झारखंड•
    8 hrs ago
  • शनिवार को टेढ़ागाछ अंचल कार्यालय में एक जनता दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें भूमि, रास्ता और राजस्व से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। अंचल अधिकारी शशि कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस दरबार में कई मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया, जबकि जांच और आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण कुछ मामलों को लंबित रखा गया। इस दौरान नए आवेदन भी प्राप्त हुए। अधिकारियों ने लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर विशेष जोर दिया। अपनी समस्याओं को लेकर विभिन्न पंचायतों से ग्रामीण इस जनता दरबार में पहुँचे।
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    शनिवार को टेढ़ागाछ अंचल कार्यालय में एक जनता दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें भूमि, रास्ता और राजस्व से संबंधित मामलों की सुनवाई की गई। अंचल अधिकारी शशि कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस दरबार में कई मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया, जबकि जांच और आवश्यक दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण कुछ मामलों को लंबित रखा गया। इस दौरान नए आवेदन भी प्राप्त हुए। अधिकारियों ने लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर विशेष जोर दिया। अपनी समस्याओं को लेकर विभिन्न पंचायतों से ग्रामीण इस जनता दरबार में पहुँचे।
    user_Md Abu Farhan
    Md Abu Farhan
    Kishanganj, Bihar•
    12 hrs ago
  • कटिहार रेल मंडल के अंतर्गत कटिहार–कुरेठा और कटिहार–सोनैली के बीच नई दोहरी रेल लाइन के निर्माण को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) द्वारा हरी झंडी दे दी गई है।
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    कटिहार रेल मंडल के अंतर्गत कटिहार–कुरेठा और कटिहार–सोनैली के बीच नई दोहरी रेल लाइन के निर्माण को कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) द्वारा हरी झंडी दे दी गई है।
    user_लोकल 18 न्यूज़ कटिहार
    लोकल 18 न्यूज़ कटिहार
    Court reporter कटिहार, कटिहार, बिहार•
    2 hrs ago
  • बारसोई-कुमेदपुर रेलखंड के खुरियाल रेलवे स्टेशन पर एक गंभीर रूप से बीमार यात्री की इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। स्टेशन परिसर में बीमार पड़े एक व्यक्ति पर ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान कृष्ण कुमार साह की नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने मानवीयता दिखाते हुए उसे आजमनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की व्यवस्था की। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी जान चली गई। आरपीएफ इंस्पेक्टर शंकर कुमार दास ने बताया कि मृतक के पास से मिले आधार कार्ड के अनुसार, उसकी पहचान कृष्ण शाह (41 वर्ष) के रूप में हुई है, जो सुदर्शन शाह के पुत्र और दक्षिण त्रिपुरा के बिलोनिया स्थित सुकांता नगर के निवासी थे। खुरियाल पंचायत के सरपंच मोहतमिम आलम ने जानकारी दी कि मृतक को पिछले दो-तीन दिनों से स्टेशन पर बीमार हालत में देखा जा रहा था। फिलहाल, आरपीएफ और जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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    बारसोई-कुमेदपुर रेलखंड के खुरियाल रेलवे स्टेशन पर एक गंभीर रूप से बीमार यात्री की इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। स्टेशन परिसर में बीमार पड़े एक व्यक्ति पर ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान कृष्ण कुमार साह की नजर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने मानवीयता दिखाते हुए उसे आजमनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की व्यवस्था की। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी जान चली गई।

आरपीएफ इंस्पेक्टर शंकर कुमार दास ने बताया कि मृतक के पास से मिले आधार कार्ड के अनुसार, उसकी पहचान कृष्ण शाह (41 वर्ष) के रूप में हुई है, जो सुदर्शन शाह के पुत्र और दक्षिण त्रिपुरा के बिलोनिया स्थित सुकांता नगर के निवासी थे। खुरियाल पंचायत के सरपंच मोहतमिम आलम ने जानकारी दी कि मृतक को पिछले दो-तीन दिनों से स्टेशन पर बीमार हालत में देखा जा रहा था।

फिलहाल, आरपीएफ और जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
    user_जयप्रकाश भगत
    जयप्रकाश भगत
    आज़मनगर, कटिहार, बिहार•
    6 hrs ago
  • आरा में एक कथित फेक एनकाउंटर की घटना पर भारी बवाल छिड़ गया है। इस घटना में भरत तिवारी का कथित तौर पर फेक एनकाउंटर हुआ है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। इस मामले पर आरा के सांसद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सम्राट चौधरी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'गलत किया'। इस पूरे प्रकरण के बाद, लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
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    आरा में एक कथित फेक एनकाउंटर की घटना पर भारी बवाल छिड़ गया है। इस घटना में भरत तिवारी का कथित तौर पर फेक एनकाउंटर हुआ है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। इस मामले पर आरा के सांसद ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सम्राट चौधरी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'गलत किया'। इस पूरे प्रकरण के बाद, लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
    user_Md Mursaleen
    Md Mursaleen
    दिघलबैंक, किशनगंज, बिहार•
    6 hrs ago
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