बीना रिफाइनरी के आसपास पांच किलोमीटर क्षेत्र में लागू नो डेवलपमेंट जोन (NDZ) को हटाने की मांग अब ज़ोर पकड़ने लगी है। सर्वदलीय नो डेवलपमेंट जोन हटाओ समिति ने एक प्रेसवार्ता में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक ओर जहां ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने की भी अनुमति नहीं दी जाती, वहीं दूसरी ओर बड़ी निर्माण कंपनियों को खुलेआम निर्माण कार्य करने की खुली छूट दी जा रही है। समिति ने इस स्थिति को ग्रामीणों के साथ अन्याय करार देते हुए एक बड़े जनआंदोलन की चेतावनी दी है। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, रिफाइनरी की स्थापना के बाद से लागू हुए इस प्रतिबंध के कारण 52 गांवों के लगभग एक लाख लोग पिछले 17 वर्षों से लगातार प्रभावित हैं। ग्रामीणों को मकान निर्माण, विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और अन्य विकास कार्यों को पूरा करने में लगातार भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि पड़ोसी विदिशा जिले में इस तरह का कोई प्रतिबंध लागू नहीं है, जबकि सागर जिले के ग्रामीण निरंतर इस समस्या से जूझ रहे हैं। प्रेसवार्ता में नेताओं ने कंपनियों को निर्माण की अनुमति देने और ग्रामीणों पर प्रतिबंध लगाने को दोहरा मापदंड बताया, जिससे क्षेत्र की जनता में भारी नाराजगी है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो गांव-गांव में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और आर-पार का आंदोलन शुरू किया जाएगा। फिलहाल, नो डेवलपमेंट जोन का यह मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है, और अब यह देखना होगा कि प्रशासन और सरकार ग्रामीणों की इन मांगों पर क्या फैसला लेते हैं।
बीना रिफाइनरी के आसपास पांच किलोमीटर क्षेत्र में लागू नो डेवलपमेंट जोन (NDZ) को हटाने की मांग अब ज़ोर पकड़ने लगी है। सर्वदलीय नो डेवलपमेंट जोन हटाओ समिति ने एक प्रेसवार्ता में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक ओर जहां ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने की भी अनुमति नहीं दी जाती, वहीं दूसरी ओर बड़ी निर्माण कंपनियों को खुलेआम निर्माण कार्य करने की खुली छूट दी जा रही है। समिति ने इस स्थिति को ग्रामीणों के साथ अन्याय करार देते हुए एक बड़े जनआंदोलन की चेतावनी दी है। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, रिफाइनरी की स्थापना के बाद से लागू हुए इस प्रतिबंध के कारण 52 गांवों के लगभग एक लाख लोग पिछले 17 वर्षों से लगातार प्रभावित हैं। ग्रामीणों को मकान निर्माण, विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और अन्य विकास कार्यों को पूरा करने में लगातार भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि पड़ोसी विदिशा जिले में इस तरह का कोई प्रतिबंध लागू नहीं है, जबकि सागर जिले के ग्रामीण निरंतर इस समस्या से जूझ रहे हैं। प्रेसवार्ता में नेताओं ने कंपनियों को निर्माण की अनुमति देने और ग्रामीणों पर प्रतिबंध लगाने को दोहरा मापदंड बताया, जिससे क्षेत्र की जनता में भारी नाराजगी है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो गांव-गांव में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और आर-पार का आंदोलन शुरू किया जाएगा। फिलहाल, नो डेवलपमेंट जोन का यह मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है, और अब यह देखना होगा कि प्रशासन और सरकार ग्रामीणों की इन मांगों पर क्या फैसला लेते हैं।
- बीना में अधिवक्ता संघ के चुनावों के लिए शनिवार को सुबह 10:00 बजे से मतदान शुरू हो गया, जो शाम 4:00 बजे तक चलेगा। मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल जबलपुर के तहत हो रहे ये चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराए जा रहे हैं। इसमें कुल 269 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जो अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सह सचिव और पुस्तकालय अध्यक्ष के पदों के लिए वोट डाल रहे हैं। मतदान प्रक्रिया मुख्य चुनाव अधिकारी एड. राकेश मिश्रा, सहायक मुख्य चुनाव अधिकारी एड. धीरज सिंह लोधी और एड. नेहा मिश्रा की निगरानी में पूरी की जा रही है। अध्यक्ष पद के लिए त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा रहा है, जिसमें एड. सुरेंद्र सोनी, एड. अनिल शर्मा और एड. रामकुमार पुरोहित चुनाव मैदान में हैं। उपाध्यक्ष पद के लिए एड. प्रीति लखेरा, एड. कृष्णा केथोरिया, एड. सुरेंद्र चौधरी और एड. शैलेंद्र दुबे के बीच प्रतिस्पर्धा है। इसी तरह, सचिव पद पर एड. सुरेश यादव और एड. त्रिलोक सिंह राजपूत; सह सचिव पद पर एड. अभिषेक राजे और एड. अमित सेन; तथा पुस्तकालय अध्यक्ष पद पर एड. आरती राय और एड. पूनम खटीक के बीच वोटिंग हो रही है। इस बीच, कार्यकारिणी सदस्य पद पर एड. डी के जैन, एड. टी आर सुमन और एड. नारायण प्रसाद गौतम निर्विरोध चुने जा चुके हैं। महिला कार्यकारिणी में भी एड. लक्ष्मी सोनी और एड. शिखा विश्वकर्मा को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है। बीना की विधायक एडवोकेट निर्मला सप्रे ने भी मतदान केंद्र पहुंचकर अपना वोट डाला और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया। मतदान के दौरान ऐसे चेहरे भी देखने को मिले जो कभी वकालत के सिलसिले में अदालत नहीं आए, लेकिन आज संघ चुनाव में मतदान करने पहुंचे। शाम 4 बजे के बाद मतगणना की जाएगी और परिणामों की घोषणा की जाएगी।4
- एक उपयोगकर्ता ने अपनी नई पोस्ट साझा की है और अपने दोस्तों से इसे लाइक करने का अनुरोध किया है। उन्होंने इस नई पोस्ट को पसंद करने के लिए विशेष रूप से आग्रह किया है।1
- मध्य प्रदेश के विदिशा में एसबीआई गोल्ड लोन फर्जीवाड़े की सीबीआई जांच के दायरे में आए बैंककर्मी मनोज सोनी ने अपने खामखेड़ा स्थित फार्म हाउस में खुद को छर्रे वाली बंदूक से गोली मार ली। इस घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसमें एक छर्रा उनके दिल के ऊपर लगा और एक अन्य जगह पर। फार्म हाउस पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत उनके परिवार को सूचना दी, जिसके बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, और बाद में बेहतर इलाज के लिए भोपाल भेजा गया। बता दें कि सीबीआई द्वारा एसबीआई बैंक में हुए करोड़ों के गोल्ड लोन फर्जीवाड़े की जांच की जा रही है, और इसी जांच में मनोज सोनी भी शामिल हैं। दो दिन पहले ही सीबीआई ने बैंक लोन फर्जीवाड़े की जांच के दौरान मनोज सोनी के परिवार द्वारा संचालित एमपी ज्वैलर्स को सील किया था। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।4
- Sagar tu udsha rod and light pink color mein background photo Sagar tu udsha4
- उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर राज्य भर में मादक पदार्थों के खिलाफ विशेष अभियान 'ऑपरेशन दहन' चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, पुलिस अधीक्षक ललितपुर मोहम्मद मुश्ताक के मार्गदर्शन में जनपद के सभी थाना प्रभारियों को माल मुकदमाती (मादक पदार्थ) के निस्तारण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। आज इसी अभियान के तहत, थाना जाखलौन पुलिस ने एक गठित समिति की मौजूदगी में और माननीय न्यायालय से नियमानुसार अनुमति प्राप्त कर, थाना जाखलौन पर पंजीकृत कुल 53 अभियोगों से संबंधित मादक पदार्थों का निस्तारण किया। इस कार्रवाई में कुल 210 लीटर अवैध कच्ची शराब और 870 क्वार्टर देशी शराब नष्ट कराई गई। जाखलौन पुलिस द्वारा चलाए गए इस ‘ऑपरेशन दहन’ अभियान के तहत कुल 63,500 रुपये मूल्य के मादक पदार्थों का सफल निस्तारण किया गया है।1
- बीना विधायक निर्मला सप्रे के कथित दल-बदल मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को बड़ा झटका दिया है, उनकी याचिका खारिज कर दी गई है। हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुरक्षित रखे गए फैसले को सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है, इसलिए इस स्तर पर न्यायालय के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विधानसभा अध्यक्ष को किसी मामले में निर्णय लेने के लिए निर्देश जारी नहीं किए जा सकते। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता द्वारा कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे याचिका में कोई तात्कालिकता भी प्रतीत नहीं हुई। यह पूरा मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जब निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर बीना विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी, जिसमें उन्होंने भाजपा प्रत्याशी महेश राय को 6,155 वोटों से हराया था। इसके बाद, 5 मई 2024 को वह राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंच पर दिखाई दीं और 6 मई 2024 को उनके भाजपा में शामिल होने का दावा किया गया। इसी घटना को आधार बनाकर 5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। बाद में नवंबर 2024 में इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर 9 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने निर्मला सप्रे और विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी किया था। उमंग सिंघार का आरोप है कि कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित होने के बावजूद निर्मला सप्रे ने भाजपा सरकार का समर्थन किया और भाजपा की शपथ लेने के बाद भी विधानसभा सदस्यता बरकरार रखी, जो दल-बदल कानून का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद, अब इस पूरे विवाद पर अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर ही लिया जाएगा। इस बीच, बीना में कांग्रेस नेता प्रदीप राय ने प्रेस वार्ता कर हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए कहा है कि कांग्रेस इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी और अपनी न्यायिक लड़ाई जारी रखेगी।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दोस्तों को संबोधित करते हुए यह अपील की गई है कि यदि उन्हें रील्स पसंद आती हैं, तो वे उन्हें लाइक करें।1
- ललितपुर जिले के मड़ावरा थाना क्षेत्र में शनिवार दोपहर करीब 1 बजे बीच सड़क पर हुए एक पारिवारिक विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस घटनाक्रम में भाई और पिता द्वारा कथित तौर पर बेटी और दामाद के साथ मारपीट की गई। बताया जा रहा है कि आपसी कहासुनी के बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हुई, जिसकी घटना कैमरे में कैद हो गई। मारपीट की इस घटना के बाद, दोनों ही पक्षों ने मड़ावरा थाने में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।1