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झारखंड के एक गाँव के बीचों-बीच स्थित तालाब से पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में स्थानीय लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। गाँव में जलजमाव की इस गंभीर समस्या को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब स्थानीय मुखिया ने भी अपनी सफाई पेश की है।
Hafij Naseem ansari
झारखंड के एक गाँव के बीचों-बीच स्थित तालाब से पानी की निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में स्थानीय लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है। गाँव में जलजमाव की इस गंभीर समस्या को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब स्थानीय मुखिया ने भी अपनी सफाई पेश की है।
More news from Jamālpur and nearby areas
- जंतर-मंतर पर चंद्रशेखर आज़ाद की एंट्री हुई है। इस दौरान वहाँ उनके द्वारा दिया गया भाषण लोगों के बीच काफ़ी चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- सात निश्चय मुख्यमंत्री योजना के अंतर्गत बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी ने रिमोट द्वारा 211 डिग्री कॉलेजों का उद्घाटन किया है। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग मंत्री के तत्वावधान में भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड में भी एक डिग्री कॉलेज का उद्घाटन किया गया। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी द्वारा यह उद्घाटन 15 जुलाई 26 को संपन्न किया गया।1
- बिहार के बांका जिले में चांदन प्रखंड के कोरिया पंचायत अंतर्गत घोंघा डाबर के ग्रामीण उपेन्द्र यादव ने बेलहर विधानसभा के माननीय विधायक श्री मनोज यादव जी को आवेदन भेजकर घोंघा डाबर ग्रामीण सड़क की मरम्मत या निर्माण कराने की मांग की है। 14 जुलाई 2026 को लिखे इस आवेदन के माध्यम से क्षेत्र के लोगों ने इस मुख्य ग्रामीण सड़क की बदहाली की ओर विधायक का ध्यान आकर्षित कराया है। आवेदन के अनुसार, घोंघा डाबर गांव की मुख्य सड़क अत्यंत जर्जर और कीचड़युक्त हो चुकी है। बरसात के मौसम में सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने के कारण पैदल चलना, बाइक और अन्य वाहनों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। इस जर्जर मार्ग से प्रतिदिन ग्रामीण, किसान, छात्र-छात्राएं और मरीज गुजरते हैं, जिससे लगातार दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीण ने विधायक से सड़क का जल्द निरीक्षण कराकर पक्की सड़क का निर्माण कराने की विनम्र अपील की है और साथ में सड़क की तस्वीर व जीपीएस विवरण भी संलग्न किया है।1
- बिहार के भागलपुर में ऐतिहासिक विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की दिशा में 15 जुलाई 2026 को एक बड़ा और ठोस कदम उठाया गया। शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए औपचारिक रूप से 200 एकड़ से अधिक (प्रशासनिक तौर पर 220 एकड़) भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। कभी दुनिया भर में बौद्ध शिक्षा के मुख्य केंद्र रहे इस क्षेत्र की प्राचीन और गौरवशाली विरासत को पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ यह निर्णय लिया गया है। इस भूमि हस्तांतरण को महज कागजी प्रक्रिया न मानकर एक बड़े सकारात्मक बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर न केवल विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए भूमि का आवंटन किया गया, बल्कि पूरे बिहार में 211 नए डिग्री कॉलेजों के शुभारंभ की महत्वपूर्ण जानकारी भी साझा की गई। इतनी बड़ी संख्या में नए डिग्री कॉलेज खुलने से राज्य के उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो उच्च शिक्षा के लिए अपने गृह जिले से दूर जाने को मजबूर थे। इससे स्थानीय स्तर पर ज्ञान का एक नया वातावरण विकसित होगा और साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पाल वंश के शासनकाल में शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहे लगभग 4000 वर्ष पुराने विक्रमशिला विश्वविद्यालय के इस आधुनिक स्वरूप में पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक विषयों के अध्ययन की व्यवस्था होगी। इस नए परिसर में आधुनिक पुस्तकालय, शोध केंद्र और हॉस्टल जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने की योजना है। कार्यक्रम के दौरान संबोधन में जोर दिया गया कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में काम कर रही हैं। प्रशासन ने आने वाले एक साल के भीतर इस नए परिसर के निर्माण कार्य में तेजी लाने का आश्वासन दिया है।1
- बिहार के भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड अंतर्गत काशिल (सालपुर पंचायत) की धरती पर मुख्यमंत्री ने राज्य के 211 नवस्थापित राजकीय डिग्री कॉलेजों का लोकार्पण किया है। इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाना है, ताकि छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा हासिल करने के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख न करना पड़े। इन नए डिग्री कॉलेजों के शुरू होने से लाखों छात्र-छात्राओं को अपने ही क्षेत्र में स्नातक स्तर की पढ़ाई करने का सुनहरा अवसर मिलेगा, जिससे न केवल उच्च शिक्षा का विस्तार होगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को एक नई दिशा भी मिलेगी। इस ऐतिहासिक समारोह में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस पूरे कदम को बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।1
- बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में आगामी 30 जुलाई से शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिला प्रशासन की ओर से मेले को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके विपरीत सुल्तानगंज मुख्य चौक की सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। इस बदहाली को देखकर स्थानीय लोग प्रशासन की व्यापक तैयारियों के दावों पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत में अब मात्र 15 दिन का समय ही शेष बचा हुआ है। दरअसल, अजगैबीनाथ उत्तरवाहिनी गंगा घाट से भारी संख्या में कांवड़िया श्रद्धालु जल भरकर इसी मुख्य चौक के रास्ते से कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते हैं। सड़क पर बने इन गड्ढों के कारण आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी स्थिति को लेकर पूर्व सुल्तानगंज सभापति और वर्तमान वार्ड पार्षद दयावती देवी सहित स्थानीय लोगों ने मेले की प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं।4
- सोशल मीडिया पर सोनम वांगचुक का एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। इस संदेश के माध्यम से आगामी 20 जुलाई को संसद मार्च करने का आह्वान किया गया है।1
- बिहार के भागलपुर जिले में पारिवारिक विवाद के बीच एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना के बाद मृतक की पत्नी ने अपने सास-ससुर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार प्रताड़ना और मानसिक तनाव के कारण उनके पति की मौत हुई है। पत्नी का आरोप है कि परिवार के भीतर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसकी वजह से यह दुखद घटना सामने आई है। दूसरी तरफ, मृतक के पिता ने बहू के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि बेटे और बहू के बीच अक्सर आपसी विवाद होता रहता था, जिससे घर में तनाव का माहौल रहता था और इस घटना से उनका कोई संबंध नहीं है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।1
- बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जस्टिस माधव जामदार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। इस मामले में तीखा आक्रोश जताते हुए सवाल खड़ा किया गया है कि क्या सरकार देश के लोगों को गुलाम बना रही है। भारतीय लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आज़ादी (फ्रीडम ऑफ स्पीच) और विरोध करने के अधिकार (राइट टू प्रोटेस्ट) को लेकर खड़े हुए इस गंभीर विवाद में अमित शाह, भाजपा, मुंबई पुलिस और सैयद अहमद चौधरी के रवैये को लेकर भी तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं।1