उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर 453 नेपाली नागरिकों को गिरोह के चंगुल से मुक्त कराया है। यह गिरोह नेपाल के नागरिकों को नौकरी, पढ़ाई और बेहतर कमाई का लालच देकर ठगी करता था, जिस पर नेपाल दूतावास ने भी उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है। पुलिस को कसया थाना क्षेत्र में नेपाल के नागरिकों को नौकरी और शिक्षा के नाम पर बुलाकर ठगी किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया और जांच शुरू की गई। कसया पुलिस, सर्विलांस सेल, स्वाट टीम और एसटीएफ गोरखपुर की संयुक्त छापेमारी में इस अंतर्राष्ट्रीय ठग गिरोह के 10 सदस्यों, जिनमें 8 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं, को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, 60 बॉन्ड पेपर, लैपटॉप, सोने-चांदी के आभूषण, भारतीय और नेपाली मुद्रा सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह नेपाल के गरीब और बेरोजगार युवाओं को नौकरी, पढ़ाई और नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए बड़ी कमाई का सपना दिखाता था, फिर उन्हें कुशीनगर बुलाकर फर्जी दस्तावेजों और अनुबंधों के माध्यम से उनका आर्थिक शोषण करता था। इस कार्रवाई के दौरान 453 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है। नेपाल दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर जानकारी दी कि फंसाए गए नेपाली नागरिकों को सुरक्षित नेपाल भेजा गया है और इस सराहनीय कार्रवाई के लिए यूपी सरकार और पुलिस का धन्यवाद किया। जांच एजेंसियां अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क की तलाश में जुटी हैं, जिसके लिए विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कुशीनगर पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई ने न केवल सैकड़ों लोगों को राहत दिलाई है, बल्कि सीमापार अपराध के एक बड़े नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच जारी है और कई और बड़े खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर 453 नेपाली नागरिकों को गिरोह के चंगुल से मुक्त कराया है। यह गिरोह नेपाल के नागरिकों को नौकरी, पढ़ाई और बेहतर कमाई का लालच देकर ठगी करता था, जिस पर नेपाल दूतावास ने भी उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है। पुलिस को कसया थाना क्षेत्र में नेपाल के नागरिकों को नौकरी और शिक्षा के नाम पर बुलाकर ठगी किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया और जांच शुरू की गई। कसया पुलिस, सर्विलांस सेल, स्वाट टीम और एसटीएफ गोरखपुर की संयुक्त छापेमारी में इस अंतर्राष्ट्रीय ठग गिरोह के 10 सदस्यों, जिनमें 8 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं, को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, 60 बॉन्ड पेपर, लैपटॉप, सोने-चांदी के आभूषण, भारतीय और नेपाली मुद्रा सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह नेपाल के गरीब और बेरोजगार युवाओं को नौकरी, पढ़ाई और नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए बड़ी कमाई का सपना दिखाता था, फिर उन्हें कुशीनगर बुलाकर फर्जी दस्तावेजों और अनुबंधों के माध्यम से उनका आर्थिक शोषण करता था। इस कार्रवाई के दौरान 453 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है। नेपाल दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर जानकारी दी कि फंसाए गए नेपाली नागरिकों को सुरक्षित नेपाल भेजा गया है और इस सराहनीय कार्रवाई के लिए यूपी सरकार और पुलिस का धन्यवाद किया। जांच एजेंसियां अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क की तलाश में जुटी हैं, जिसके लिए विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कुशीनगर पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई ने न केवल सैकड़ों लोगों को राहत दिलाई है, बल्कि सीमापार अपराध के एक बड़े नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच जारी है और कई और बड़े खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।
- कुशीनगर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए नेपाल के नागरिकों को पढ़ाई, नौकरी और बेहतर कमाई का झांसा देकर ठगी करने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 8 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं। पुलिस ने गिरोह के चंगुल से 453 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित मुक्त भी कराया है। कसया थाना क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नेपाली नागरिकों को नौकरी और पढ़ाई के नाम पर कुशीनगर बुलाकर उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया था। इस अभियान के तहत कसया पुलिस, सर्विलांस सेल, स्वाट टीम और एसटीएफ गोरखपुर की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर इन 10 सदस्यों को धर दबोचा। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, 60 बॉन्ड पेपर, एक लैपटॉप, सोने-चांदी जैसे आभूषण, भारतीय और नेपाली मुद्रा सहित बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह नेपाल के गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को नौकरी, पढ़ाई और नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए लाखों रुपये कमाने का सपना दिखाता था। इसके बाद उन्हें कुशीनगर बुलाकर फर्जी दस्तावेजों और बॉन्ड पेपर के सहारे ठगी का शिकार बनाया जाता था। ठगी से कमाए गए पैसों को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। पुलिस ने इस मामले में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है, साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके नेटवर्क की तलाश भी जारी है। नेपाल दूतावास ने भी एक्स पर एक पोस्ट जारी कर कुशीनगर में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगे गए 453 नेपाली नागरिकों को छुड़ाने और सुरक्षित नेपाल भेजने की जानकारी दी। नेपाल दूतावास ने इस कार्रवाई के लिए यूपी सरकार और यूपी पुलिस की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने भी इस सिंडिकेट के भंडाफोड़ की जानकारी दी है और फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है, जिससे कई अहम खुलासे होने की संभावना है।1
- Post by Raviteja Rajbhar1
- कुशीनगर के अहिरौली थाना क्षेत्र के बरडीहा गांव में शनिवार देर रात 22 वर्षीय संदीप यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसके बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों ने इसे हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। जानकारी के अनुसार, संदीप शनिवार रात करीब 11 बजे भोजन करने के बाद घर से लगभग 50 मीटर दूर मोबाइल टावर और पुल की ओर गया था। रात करीब एक बजे संदीप के ही फोन से उसके पड़ोसी और मित्र विशाल यादव को एक अज्ञात व्यक्ति ने कॉल कर सूचना दी कि संदीप गांव के बाहर पुल पर घायल अवस्था में पड़ा है, जिसके बाद फोन काट दिया गया। सूचना पाकर परिजन मौके पर पहुंचे, जहां संदीप पुल की रेलिंग के पास गंभीर रूप से घायल पड़ा था और उसका मोबाइल फोन उसके सीने पर रखा हुआ था। उसकी आंख, गाल, गले तथा पैरों की उंगलियों पर चोट के निशान मिले थे। गंभीर हालत में उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। संदीप के परिवार में पिता शिवधर यादव, माँ विमला देवी, भाभी रेनू देवी और तीन वर्षीय भतीजी मुस्कान हैं, जबकि उसकी बड़ी बहन नीलू की शादी हो चुकी है। दो वर्ष पहले उसके बड़े भाई राजेश यादव की कैंसर से मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद संदीप ही परिवार का मुख्य सहारा बन गया था। वह पहले अपने पिता के साथ पंजाब में रहता था, लेकिन भाई की मौत के बाद गांव लौट आया और पिछले एक महीने से गोरखपुर की एक फर्नीचर दुकान में कार्यरत था। स्थानीय लोगों के अनुसार, संदीप का गांव की ही एक अन्य जाति की महिला से प्रेम संबंध था, जिसकी जानकारी महिला के परिजनों को भी थी। उसके मोबाइल फोन में किसी अज्ञात नंबर से हुई चैटिंग की चर्चा भी सामने आई है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए परिजन घटना को प्रेम प्रसंग से जोड़कर हत्या की आशंका जता रहे हैं। फिलहाल अहिरौली पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा जांच के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। गांव में घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं, जबकि परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है।4
- कुशीनगर जिले में एक युवक की हत्या से सनसनी फैल गई है। अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के बरडीहा गांव में युवक की हत्या कर उसके शव को गांव के बाहर बने एक मोबाइल टावर के पास फेंक दिया गया था। मृतक की पहचान संदीप यादव के रूप में हुई है, जो पिछली रात लगभग 11 बजे अपने घर से निकला था। पुलिस को आशंका है कि यह हत्या प्रेम प्रसंग के चलते हुई है। पुलिस ने शव को तुरंत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और इस सनसनीखेज हत्या की जांच में जुट गई है। पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से कई महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं। अपने इकलौते बेटे संदीप यादव की हत्या से परिवार में गहरा मातम पसरा हुआ है।1
- अहिरौली में 22 वर्षीय संदीप यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है, जिससे यह मामला रहस्यमयी बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, संदीप रात करीब 11 बजे अपने घर से निकला था और बाद में उसे एक पुल पर घायल अवस्था में पाया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि उसने घटना से पहले अपने एक दोस्त को फोन किया था, और उनकी चैट में प्रेम-प्रसंग से जुड़ी बातें भी थीं। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है।1
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर 453 नेपाली नागरिकों को गिरोह के चंगुल से मुक्त कराया है। यह गिरोह नेपाल के नागरिकों को नौकरी, पढ़ाई और बेहतर कमाई का लालच देकर ठगी करता था, जिस पर नेपाल दूतावास ने भी उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है। पुलिस को कसया थाना क्षेत्र में नेपाल के नागरिकों को नौकरी और शिक्षा के नाम पर बुलाकर ठगी किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया और जांच शुरू की गई। कसया पुलिस, सर्विलांस सेल, स्वाट टीम और एसटीएफ गोरखपुर की संयुक्त छापेमारी में इस अंतर्राष्ट्रीय ठग गिरोह के 10 सदस्यों, जिनमें 8 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं, को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, 60 बॉन्ड पेपर, लैपटॉप, सोने-चांदी के आभूषण, भारतीय और नेपाली मुद्रा सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह नेपाल के गरीब और बेरोजगार युवाओं को नौकरी, पढ़ाई और नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए बड़ी कमाई का सपना दिखाता था, फिर उन्हें कुशीनगर बुलाकर फर्जी दस्तावेजों और अनुबंधों के माध्यम से उनका आर्थिक शोषण करता था। इस कार्रवाई के दौरान 453 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है। नेपाल दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर जानकारी दी कि फंसाए गए नेपाली नागरिकों को सुरक्षित नेपाल भेजा गया है और इस सराहनीय कार्रवाई के लिए यूपी सरकार और पुलिस का धन्यवाद किया। जांच एजेंसियां अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क की तलाश में जुटी हैं, जिसके लिए विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। कुशीनगर पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई ने न केवल सैकड़ों लोगों को राहत दिलाई है, बल्कि सीमापार अपराध के एक बड़े नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया है। पुलिस की जांच जारी है और कई और बड़े खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।1