अमरोहा मे जमीन के लिए रिश्तों का कत्ल! वसीयत के फेर में बेटे ने रोका पिता का जनाजा, 4 घंटे तक नहीं होने दी मिट्टी अमरोहा मे जमीन के विवाद में बड़े बेटे ने पिता का दफीना रोक दिया। कब्रिस्तान जाकर कब्र खोद रहे लोगों को भगा दिया। जिससे तनाव बन गया तथा मृतक के पक्ष में गांव के लोग भी आ गए। विवाद बढ़ा तो पुलिस बुला ली गई। चार घंंटा तक पंचायत चली। जिसमें बड़े बेटे ने पिता द्वारा छोटे बेटे के नाम की गई चार बीघा जमीन का मुद्दा उठाया। पंचायत में मृतक की जमीन को तिहाई बांटने पर समझौता हुआ। उसके बाद दफीना किया गया। जमीन के लिए रिश्तों को दफन करने का यह मामला अमरोहा की डिडौली कोतवाली क्षेत्र के सलारपुर माफी गांव का है। यहां पर शफीक अहमद का परिवार रहता है। परिवार में पत्नी जाफरी, बड़ा बेटा आसिफ, छोटा बेटा राशिद और दो बेटियां हैं। शफीक अहमद पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे और उनकी देखभाल छोटा बेटा राशिद कर रहा था। इसी दौरान उन्होंने अपनी कुल साढ़े छह बीघा कृषि भूमि में से चार बीघा जमीन दो महीना पहले छोटे बेटे राशिद के नाम वसीयत कर दी थी। इस बात को लेकर दोनों भाइयों में विवाद चल रहा था। अब बीमारी बढ़ने पर 22 अप्रैल को राशिद ने अपने पिता को ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां शनिवार सुबह करीब तीन बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सुबह करीब आठ बजे राशिद पिता का शव गांव लेकर पहुंचा और कब्रिस्तान में दफन की तैयारी शुरू कर दी। गांव के लोग कब्रिस्तान में कब्र की खोदाई कर रहे थे।इसी बीच बड़ा बेटा आसिफ मौके पर पहुंचा और जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद खड़ा करते हुए कब्र खोदवाने का काम रुकवा दिया। जिससे गांव में हड़कंप मच गया। हालांकि गांव के लोगों ने आसिफ के इस कृत्य का विरोध किया। मृतक के घर लोगों की भीड़ जमा हो गई। बड़ा बेटा आसिफ पिता के नाम की जमीन से बराबर का हिस्सा मांगने की जिद पर अड़ गया। इस पर छोटे बेटे राशिद ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र बालियान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्राम प्रधान हरिसिंह, ग्रामीणों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में दोनों पक्षों को समझाया। चार घंटा चली पंचायत में तय हुआ कि कुल जमीन में से मां सहित दोनों बेटे के बीच तिहाई बंटवारा होगा। समझौते के बाद करीब चार घंटे बाद शफीक अहमद का दफीना शांतिपूर्वक कब्रिस्तान में कर दिया गया।
अमरोहा मे जमीन के लिए रिश्तों का कत्ल! वसीयत के फेर में बेटे ने रोका पिता का जनाजा, 4 घंटे तक नहीं होने दी मिट्टी अमरोहा मे जमीन के विवाद में बड़े बेटे ने पिता का दफीना रोक दिया। कब्रिस्तान जाकर कब्र खोद रहे लोगों को भगा दिया। जिससे तनाव बन गया तथा मृतक के पक्ष में गांव के लोग भी आ गए। विवाद बढ़ा तो पुलिस बुला ली गई। चार घंंटा तक पंचायत चली। जिसमें बड़े बेटे ने पिता द्वारा छोटे बेटे के नाम की गई चार बीघा जमीन का मुद्दा उठाया। पंचायत में मृतक की जमीन को तिहाई बांटने पर समझौता हुआ। उसके बाद दफीना किया गया। जमीन के लिए रिश्तों को दफन करने का यह मामला अमरोहा की डिडौली कोतवाली क्षेत्र के सलारपुर माफी गांव का है। यहां पर शफीक अहमद का परिवार रहता है। परिवार में पत्नी जाफरी, बड़ा बेटा आसिफ, छोटा बेटा राशिद और दो बेटियां हैं। शफीक अहमद पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे और उनकी देखभाल छोटा बेटा राशिद कर रहा था। इसी दौरान उन्होंने अपनी कुल साढ़े छह बीघा कृषि भूमि में से चार बीघा जमीन दो महीना पहले छोटे बेटे राशिद के नाम वसीयत कर दी थी। इस बात को लेकर दोनों भाइयों में विवाद चल रहा था। अब बीमारी बढ़ने पर 22 अप्रैल को राशिद ने अपने पिता को ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां शनिवार सुबह करीब तीन बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सुबह करीब आठ बजे राशिद पिता का शव गांव लेकर पहुंचा और कब्रिस्तान में दफन की तैयारी शुरू कर दी। गांव के लोग कब्रिस्तान में कब्र की खोदाई कर रहे थे।इसी बीच बड़ा बेटा आसिफ मौके पर पहुंचा और जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद खड़ा करते हुए कब्र खोदवाने का काम रुकवा दिया। जिससे गांव में हड़कंप मच गया। हालांकि गांव के लोगों ने आसिफ के इस कृत्य का विरोध किया। मृतक के घर लोगों की भीड़ जमा हो गई। बड़ा बेटा आसिफ पिता के नाम की जमीन से बराबर का हिस्सा मांगने की जिद पर अड़ गया। इस पर छोटे बेटे राशिद ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र बालियान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्राम प्रधान हरिसिंह, ग्रामीणों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में दोनों पक्षों को समझाया। चार घंटा चली पंचायत में तय हुआ कि कुल जमीन में से मां सहित दोनों बेटे के बीच तिहाई बंटवारा होगा। समझौते के बाद करीब चार घंटे बाद शफीक अहमद का दफीना शांतिपूर्वक कब्रिस्तान में कर दिया गया।
- Post by Jpn7 News1
- अमरोहा मे जमीन के विवाद में बड़े बेटे ने पिता का दफीना रोक दिया। कब्रिस्तान जाकर कब्र खोद रहे लोगों को भगा दिया। जिससे तनाव बन गया तथा मृतक के पक्ष में गांव के लोग भी आ गए। विवाद बढ़ा तो पुलिस बुला ली गई। चार घंंटा तक पंचायत चली। जिसमें बड़े बेटे ने पिता द्वारा छोटे बेटे के नाम की गई चार बीघा जमीन का मुद्दा उठाया। पंचायत में मृतक की जमीन को तिहाई बांटने पर समझौता हुआ। उसके बाद दफीना किया गया। जमीन के लिए रिश्तों को दफन करने का यह मामला अमरोहा की डिडौली कोतवाली क्षेत्र के सलारपुर माफी गांव का है। यहां पर शफीक अहमद का परिवार रहता है। परिवार में पत्नी जाफरी, बड़ा बेटा आसिफ, छोटा बेटा राशिद और दो बेटियां हैं। शफीक अहमद पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे और उनकी देखभाल छोटा बेटा राशिद कर रहा था। इसी दौरान उन्होंने अपनी कुल साढ़े छह बीघा कृषि भूमि में से चार बीघा जमीन दो महीना पहले छोटे बेटे राशिद के नाम वसीयत कर दी थी। इस बात को लेकर दोनों भाइयों में विवाद चल रहा था। अब बीमारी बढ़ने पर 22 अप्रैल को राशिद ने अपने पिता को ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां शनिवार सुबह करीब तीन बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। सुबह करीब आठ बजे राशिद पिता का शव गांव लेकर पहुंचा और कब्रिस्तान में दफन की तैयारी शुरू कर दी। गांव के लोग कब्रिस्तान में कब्र की खोदाई कर रहे थे।इसी बीच बड़ा बेटा आसिफ मौके पर पहुंचा और जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद खड़ा करते हुए कब्र खोदवाने का काम रुकवा दिया। जिससे गांव में हड़कंप मच गया। हालांकि गांव के लोगों ने आसिफ के इस कृत्य का विरोध किया। मृतक के घर लोगों की भीड़ जमा हो गई। बड़ा बेटा आसिफ पिता के नाम की जमीन से बराबर का हिस्सा मांगने की जिद पर अड़ गया। इस पर छोटे बेटे राशिद ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र बालियान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्राम प्रधान हरिसिंह, ग्रामीणों और रिश्तेदारों की मौजूदगी में दोनों पक्षों को समझाया। चार घंटा चली पंचायत में तय हुआ कि कुल जमीन में से मां सहित दोनों बेटे के बीच तिहाई बंटवारा होगा। समझौते के बाद करीब चार घंटे बाद शफीक अहमद का दफीना शांतिपूर्वक कब्रिस्तान में कर दिया गया।1
- सेकुलर हिंदुओं को बीते हुए भूतकाल में हिंदुस्तान की दुर्गति और हिंदुओं के साथ अत्याचार के विषय में कुछ समझना चाहिए मुट्ठी भर आबादी करोड़ों की संख्या पर भारी क्यों पड़ रही थी क्योंकि वह कायरों की भांति डरकर रहते थे जब हिंदुत्व की सरकार आई तो उन्हें स्वतंत्रता मिली वरना वह मुसलमान से डर कर रहते थे और उन्हें अपने छत्रपति शिवाजी महाराज महाराणा प्रताप पृथ्वीराज चौहान हरियाणा संग बप्पा रावल दर्शन भारतीय वीर योद्धाओं का इतिहास के विषय में पढ़ने को नहीं मिलता था पहले ही उनको इतिहास से गुमराह कर देते थे किंतु आज हिंदू बीजेपी सरकार में सुरक्षित है स्वतंत्र है और हिंदू खुलकर जी रहा है 🚩 हिंदू को जय श्री राम बोलने की शक्ति बीजेपी के कानून से मिली है वरना जिनके शासन में कानून बना था जिनके शासन में संविधान बना था उनके शासन में भारत देश के विभाजन भी हो गया था कश्मीर पंडितों से खाली भी हो गया था जब पाकिस्तान मुसलमान का अलग बना दिया तो भारत देश में बार-बार षड्यंत्र रच कर हिंदुत्व को समाप्त करने का विचार रखते थे बच्चे खुचे मुसलमान जो पाकिस्तान नहीं जा पाए वह भारत देश में रहकर दीमक की भांति देश को खोखला करने में जुटे हुए हैं वह स्कूलों में नहीं पढ़े वह विद्यालय में नहीं पड़े वह मदरसे में पढ़े हैं यहषड्यंत्र रचना सीखते हैं भारत देश की दुर्गति करना सिखते हैं भारत देश में आतंकवाद मचाना चाहते हैं जैसे यह स्वयं है वैसे अपने बच्चों को सिखाते हैं अपना भविष्य पंचरछाप बनकर बेकार तो किया किंतु बच्चों को भी भविष्य पंचरछाप बनाने के लिए बेकार कर दिया यदि यह अब्दुल हमीद अब्दुल कलाम जैसे पढ़ाई किए होते तो यह आज वैज्ञानिक इंजीनियर और अच्छे व्यापारी होते यूं आज पंचर छाप नहीं होते भीख नहीं मांगते🚩 कटमुल्लों ने कांग्रेस के विषय में सच नहीं जाना बीजेपी की बुराई वही चमचे करते हैं जिन्होंने भारत देश का विभाजन नहीं देखा जिन्होंने भारत देश के विभाजन के विषय में इतिहास नहीं पड़ा कि उसे समय किसके शासन में विभाजन हुआ किसके शासन में कश्मीरी पंडितों से खाली होगा किसके शासन में हिंदू मुस्लिम दंगे होते रहे जो आज बीजेपी को निशाना साधते हैं वह पिछले दिनों को याद कीजिए जिनके समय में दंगे हुआ करते थे व्यापारियों का धन सुरक्षित नहीं था बहन बेटे की रक्षा सुरक्षा नहीं थी व्यापारी आज सुरक्षित है धन सुरक्षित है बहन बेटी की रक्षा सुरक्षित है और तुम जैसे चमचों को क्या चाहिए फिर फिर वही देंगे वाली सरकार फिर वही विभाजन वाली सरकार फिर वही सरकार जो कहती है भारत के टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह फिर वही सरकार लगे आप जिन्होंने भारत के ही महान वीर योद्धाओं का इतिहास हमसे छुपा कर रखा बाहरी आक्रांताओं मुगलों का इतिहास उन्होंने भारतीय युवाओं के बच्चों को पढ़ाया अपने शासन में इतना गलत काम किया संविधान का दुरुपयोग किया कानून का दुरुपयोग किया शर्यत कानून लागू किया पाकिस्तान हिंदुस्तान विभाजन होने के पश्चात भी उन्होंने दीमको की आधी आबादी यही छोड़ दी ताकि आगे यह दीमक बनाकर आतंकवादी आतंकवाद मचाते रहे और जिसकी सरकार बने उसका विरोध होता रहे की जिसकी सरकार है उसकी सरकार में आतंकवाद क्यों हो रहा है जब उनकी सरकार में आतंकवाद होता था तब किसी ने प्रश्न नहीं किया क्योंकि प्रश्न करने वाले कोई है तो उसे कारागृह में बंदी बना लेते थे बीजेपी की सरकार में आज उन हिंदुओं को जय श्री राम बोलने से कोई नहीं रोक सकता हिंदुओं को भाजपा के सरकार में स्वतंत्रता मिली है जबकि देश को स्वतंत्रता 1947 में मिली थी किंतु मूल रूप से हिंदुओं को स्वतंत्रता मोदी के सरकार में मिली है हम कैसे कह रहे हैं कि हमने अपना समय में बुरा समय नहीं देखा हमारे बड़े-बड़े यही कहते हैं कि कांग्रेस ने अपने समय में बहुत कानून और संविधान का दुरुपयोग किया जो आज संविधान की पुस्तक उठाकर कहते हैं कि संविधान खतरे में है जब उनके शासन में संविधान खतरे में था तो यह क्या कर रहे थे यह काला धन कमाने की आड़ में गौ तस्करी करते थे बहन बेटी की इज्जत पर जिहादियों का हाथ लगे जिहादियों से पैसा वसूलते थे देश में सरिया लागू करने के लिए इनकम टैक्स लेते थे गुंडागर्दी का आधा योगदान सरकार को जाता था तो जब इतनी जीएसटी नहीं थी तो सरकार गुंडागर्दी से चलाई जाती थी व्यापारियों का धन छन छन कर सरकार को टैक्स के रूप में योगदान देना गुंडो को गुंडागर्दी करने के लिए कानून के हाथ उन जिहादियों की सेवा में लगा दिए जिन जिहादियों ने पाकिस्तान बनाने का समर्थन किया था जिन जिहादियों के पूर्वज मुगलों ने भारत देश को लूटने चाहा आज उनकी औलाद मुगलों का गुणगान नहीं करेगी तो फिर क्या करेगी यदि यह अब्दुल कलाम वीर अब्दुल हमीद जैसे भारत देश के पहचानो बनने का प्रयास करते तो न जाने यह कितनी उन्नति पर पहुंचते किंतु इन्हें तो पंचर छाप बनना है और इन्हें लोगों के आगे भीख के लिए हाथ फैलाने हैं1
- थाना अमरोहा देहात पुलिस एवं एसओजी व सर्विलांस टीम के सहयोग से गुमशुदा डाक्टर को 05 घण्टे में सकुशल बरामद कर परिजनो के सुपुर्द करने के सम्बन्ध में अपर पुलिस अधीक्षक अमरोहा द्वारा दी गयी जानकारी1
- नाला की सफाई नहीं होती बहुत गंदी बदबू आते हो और हमारी दुकान पर कस्टमर भी नहीं आते हैं बस बहुत ज्यादा बदबू आती है और कोई सफाई करने भी नहीं होता राजपूत कॉलोनी पंजाब नेशनल बैंक के पास l1
- Post by Kamal Singh Saini Advocate1
- **मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश:** भोजपुर क्षेत्र के ताजपुर रसूलपुर में सपा नेता महमूद और ई-कचरा कारोबारी तस्लीम के गुटों के बीच वर्चस्व की जंग ने खूनी रूप ले लिया। दोनों पक्षों के बीच हुई भीषण गैंगवार में गोलियां चलीं और लाठी-डंडों का प्रहार हुआ, जिसमें दोनों तरफ के कुल 5 लोग गोली लगने और मारपीट से गंभीर रूप से घायल हो गए। तस्लीम पर 20-25 हथियारबंद लोगों के साथ जानलेवा हमला करने और लूटपाट का आरोप है, जबकि सपा नेता के गुट ने पलटवार करते हुए बेवजह हमला, चेन छीनने और घेराबंदी का आरोप लगाया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी देहात कुँवर आकाश सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इलाके में तनाव को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और मौके से मिले साक्ष्यों की जांच में जुटी हुई है। एसपी देहात ने कहा कि दोनों पक्षों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा।2
- अमरोहा में जुआ खेलते जुआरियों का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल जंगल में खुलेआम जुआ खेलते हुए नजर आए वीडियो वायरल के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी पुलिस ने वीडियो के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की जुए को लेकर इलाके में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है हसनपुर कोतवाली के गांव हथियाखेड़ा का बताया जा रहा वीडियो1