जालौन के भदेख़ दिवरा गांव की बदहाल तस्वीर, विकास कार्यों को तरस रहे ग्रामीण जालौन जनपद के कुठौंद ब्लॉक अंतर्गत आने वाला ग्राम भदेख़ दिवरा इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। गांव में मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव देखने को मिल रहा है। न तो यहां पक्की सड़कों की समुचित व्यवस्था है और न ही पेयजल की पर्याप्त सुविधा। चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की मुख्य सड़कें कच्ची और जर्जर हालत में हैं। बरसात या हल्की नमी के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं। आए दिन कोई न कोई ट्रैक्टर या अन्य वाहन कीचड़ में फंस जाता है, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है और कृषि कार्य प्रभावित होता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। पेयजल व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। गांव में स्वच्छ पानी की उपलब्धता सीमित है, जिससे लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। वहीं नालियों की समुचित सफाई न होने के कारण जगह-जगह गंदा पानी जमा रहता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न ही ग्राम प्रधान द्वारा विकास कार्यों को लेकर कोई गंभीर पहल की गई और न ही नए ब्लॉक प्रमुख द्वारा गांव में कोई विशेष योजना लागू कराई गई है। परिणामस्वरूप गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में पक्की सड़क, समुचित जल निकासी व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और नियमित सफाई की व्यवस्था तत्काल कराई जाए, ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर कब भदेख़ दिवरा गांव की यह दुर्दशा सुधरेगी और कब यहां के लोगों को विकास का वास्तविक लाभ मिल पाएगा। फिलहाल ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याओं पर ध्यान देंगे और जल्द ही ठोस कार्रवाई की जाएगी। जालौन के भदेख़ दिवरा गांव की बदहाल तस्वीर, विकास कार्यों को तरस रहे ग्रामीण जालौन जनपद के कुठौंद ब्लॉक अंतर्गत आने वाला ग्राम भदेख़ दिवरा इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। गांव में मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव देखने को मिल रहा है। न तो यहां पक्की सड़कों की समुचित व्यवस्था है और न ही पेयजल की पर्याप्त सुविधा। चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की मुख्य सड़कें कच्ची और जर्जर हालत में हैं। बरसात या हल्की नमी के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं। आए दिन कोई न कोई ट्रैक्टर या अन्य वाहन कीचड़ में फंस जाता है, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है और कृषि कार्य प्रभावित होता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। पेयजल व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। गांव में स्वच्छ पानी की उपलब्धता सीमित है, जिससे लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। वहीं नालियों की समुचित सफाई न होने के कारण जगह-जगह गंदा पानी जमा रहता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न ही ग्राम प्रधान द्वारा विकास कार्यों को लेकर कोई गंभीर पहल की गई और न ही नए ब्लॉक प्रमुख द्वारा गांव में कोई विशेष योजना लागू कराई गई है। परिणामस्वरूप गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में पक्की सड़क, समुचित जल निकासी व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और नियमित सफाई की व्यवस्था तत्काल कराई जाए, ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर कब भदेख़ दिवरा गांव की यह दुर्दशा सुधरेगी और कब यहां के लोगों को विकास का वास्तविक लाभ मिल पाएगा। फिलहाल ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याओं पर ध्यान देंगे और जल्द ही ठोस कार्रवाई की जाएगी।
जालौन के भदेख़ दिवरा गांव की बदहाल तस्वीर, विकास कार्यों को तरस रहे ग्रामीण जालौन जनपद के कुठौंद ब्लॉक अंतर्गत आने वाला ग्राम भदेख़ दिवरा इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। गांव में मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव देखने को मिल रहा है। न तो यहां पक्की सड़कों की समुचित व्यवस्था है और न ही पेयजल की पर्याप्त सुविधा। चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की मुख्य सड़कें कच्ची और जर्जर हालत में हैं। बरसात या हल्की नमी के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं। आए दिन कोई न कोई ट्रैक्टर या अन्य वाहन कीचड़ में फंस जाता है, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है और कृषि कार्य प्रभावित होता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। पेयजल व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। गांव में स्वच्छ पानी की उपलब्धता सीमित है, जिससे लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। वहीं नालियों की समुचित सफाई न होने के कारण जगह-जगह गंदा पानी जमा रहता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न ही ग्राम प्रधान द्वारा विकास कार्यों को लेकर कोई गंभीर पहल की गई और न ही नए ब्लॉक प्रमुख द्वारा गांव में कोई विशेष योजना लागू कराई गई है। परिणामस्वरूप गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में पक्की सड़क, समुचित जल निकासी व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और नियमित सफाई की व्यवस्था तत्काल कराई जाए, ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर कब भदेख़ दिवरा गांव की यह दुर्दशा सुधरेगी और कब यहां के लोगों को विकास का वास्तविक लाभ मिल पाएगा। फिलहाल ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याओं पर ध्यान देंगे और जल्द ही ठोस कार्रवाई की जाएगी। जालौन के भदेख़ दिवरा गांव की बदहाल तस्वीर, विकास कार्यों को तरस रहे ग्रामीण जालौन जनपद के कुठौंद ब्लॉक अंतर्गत आने वाला ग्राम भदेख़ दिवरा इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। गांव में मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव देखने को मिल रहा है। न तो यहां पक्की सड़कों की समुचित व्यवस्था है और न ही पेयजल की पर्याप्त सुविधा। चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की मुख्य सड़कें कच्ची और जर्जर हालत में हैं। बरसात या हल्की नमी के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं। आए दिन कोई न कोई ट्रैक्टर या अन्य वाहन कीचड़ में फंस जाता है, जिससे किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है और कृषि कार्य प्रभावित होता है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। पेयजल व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। गांव में स्वच्छ पानी की उपलब्धता सीमित है, जिससे लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। वहीं नालियों की समुचित सफाई न होने के कारण जगह-जगह गंदा पानी जमा रहता है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न ही ग्राम प्रधान द्वारा विकास कार्यों को लेकर कोई गंभीर पहल की गई और न ही नए ब्लॉक प्रमुख द्वारा गांव में कोई विशेष योजना लागू कराई गई है। परिणामस्वरूप गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में पक्की सड़क, समुचित जल निकासी व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और नियमित सफाई की व्यवस्था तत्काल कराई जाए, ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर कब भदेख़ दिवरा गांव की यह दुर्दशा सुधरेगी और कब यहां के लोगों को विकास का वास्तविक लाभ मिल पाएगा। फिलहाल ग्रामीण उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याओं पर ध्यान देंगे और जल्द ही ठोस कार्रवाई की जाएगी।
- खास और कई सवाल खड़े करती खबर है जालौन जिले में हो रहे अवैध मिट्टी खनन से जुड़ी हुई दरअसल आज़ जालौन जिले में तीन अलग-अलग स्थानों पर हुई दुर्घटनाओं में तीन लोगों की जान चली गई है1
- मुंबई में काम दिलाने के बहाने युवक लापता, पिता ने पुलिस अधीक्षक से लगाई गुहार जनपद जालौन के ग्राम बरसेसी निवासी रमेश पुत्र श्री रघुवीर ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर अपने पुत्र के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित ने बताया कि उसका पुत्र सुनील (34) को गांव के ही निवासी सगीर पुत्र शब्बीर ने मुंबई में काम दिलाने के बहाने बुलाया था। प्रार्थना पत्र के अनुसार सगीर ने सुनील को मुंबई के अरोली नाका, चंद्रपाड़ा शंकर नगर क्षेत्र स्थित एक आइस फैक्ट्री में काम कराने की बात कही थी। बताया गया कि किराए के लिए करीब 2800 रुपये भी फोन के माध्यम से भेजे गए थे। इसके बाद 18 जनवरी 2026 को सुनील उक्त व्यक्ति के बुलावे पर मुंबई चला गया और 6 फरवरी 2026 तक वहां काम करता रहा। परिजनों का आरोप है कि 6 फरवरी को सुनील ने फोन पर बताया कि उसे ईसराज पुत्र मुंशी मंसूरी नाम के व्यक्ति ने मारपीट कर बंधक बना लिया है। इसके बाद जब परिजनों ने सगीर से संपर्क किया तो उसने बताया कि उनका लड़का कहीं भाग गया है और अब उसका कोई पता नहीं है। परिजनों का कहना है कि सुनील का मोबाइल फोन भी सगीर के पास ही है, जिससे उन्हें अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है। पीड़ित पिता ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले में रिपोर्ट दर्ज कर उनके पुत्र की तलाश कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।1
- जालौन के लोगों ने सड़क पर शव रख कर जाम लगाया और खनन माफियाओं पर कार्यवाही करने की मांग की है क्योंकि ट्रैक्टर चालक की मिट्टी खनन में लगे ट्रैक्टर से मौत हो गई। इसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और सड़क पर जाम लगा दिया। साथ ही उन पर हत्या करने का आरोप लगाया है।।।1
- राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में मेगा विधिक सहायता शिविर का भव्य आयोजन1
- Post by Sugirv Kushwha1
- औरैया में पुलिस अधीक्षक अभिषेक भारती की कार्रवाई से पुलिस विभाग में मचा हड़कंप युवक द्वारा रील बनाने में बड़ी कार्रवाई ।थानाध्यक्ष एरवाकटरा जीतमल लाइन हाजिर ।चौकी इंचार्ज उमरैन किशन वीर निलंबित।सिपाही चालक विपिन यादव भी निलंबित।विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू।औरैया पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में अनुशासन और दक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और कार्य में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए।2
- भदेख़ दिवारा कुठोंद ब्लॉक नरकमय जीवन1
- खास और कई सवाल उठाती खबर है यह दरअसल आज़ जालौन जिले के जालौन कोतवाली क्षेत्र के ग्राम प्रतापपुरा में मिट्टी खनन परिवहन कर रहा ट्रैक्टर ट्राली सहित पलट गया जिसमें एक युवक की मौत हो गई है2
- संपूर्ण समाधान दिवस में तालाब पर अवैध कब्जे की शिकायत, 2022 से न्याय की गुहार लगा रहे केशव भारती जनपद जालौन की तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जनसमस्याओं की सुनवाई की गई। इसी दौरान ग्राम पंचायत गायर निवासी केशव भारती ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत की। केशव भारती ने बताया कि ग्राम पंचायत गायर में कुछ दबंगों द्वारा तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर वह वर्ष 2022 से लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है। उन्होंने बताया कि कई बार जनसुनवाई दिवस और संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई गई, यहां तक कि डाक के माध्यम से योगी आदित्यनाथ को भी प्रार्थना पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित केशव भारती ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर तालाब की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।1